Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vipin Kumar Gupta and Ruchi Gupta v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117493/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-07-31
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Order under Section-34, Bench-2 (former Bench-1) Presiding Officer:- Mr. T. Venkatesh [?], Member Complaint Number:- NCRI44/02/7493/2024 Vipin Kumar Gupta and Ruchi Gupta versus Granite Hill Properties Private Limited The present complaint application has been instituted by the complainants against the respondent for getting possession of the unit in question and delayed period interest provided.
In brief, the statement of the complainants is that unit number 97/86/7742 was booked by them in the respondent's project THE DOWNTOWN on date 26.09.2044. The total value of the unit was Rs. 22,90,500/—, against which payment of Rs. 2,95,460 ,/- was made by them to the respondent from time to time on an installment basis. The complainants also state that according to paragraph-26 of the agreement executed between both parties, possession of the said unit was to be delivered by the respondent within 50 months and a grace period of 6 months from the date of execution of the agreement, but possession of the unit has not yet been delivered by the respondent nor has O.C./C.C. of the project been obtained from the competent development authority till date, whereas payment of 95 percent of the total sale value of the unit has been made by the complainants to the respondent according to the payment plan, due to which this complaint has been registered by the complainants against the respondent under Section-31 of the Real Estate Regulatory Authority Act for getting possession of the unit along with interest for the delayed period.
In support of their statement, photocopies of records including emails sent to the respondent, demand letter dated 23.04.2024 and reminder letter dated 49.04.2024 sent by the respondent, allotment/agreement letter dated 26.09.2074, amount of Rs. 2,95,460/— received from the complainants as admitted in the demand letter dated 23.04.2024 sent by the respondent, rejoinder, etc. have been filed on behalf of the complainants.
a भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारीः- श्री टी. dees, सदस्य शिकायत संख्या:- NCRI44/02/7493/2024 विपिन कुमार गुप्ता एवं रूचि गुप्ता बनाम ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्गगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में दिनांक 26.09.2044 को यूनिट संख्या- 97/८6/7742 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 22,90,500/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 2,95,460 ,/- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट का कब्जा अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 50 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा wre प्लान के अनुसार यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95 प्रतिशत धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की ast} अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में विपक्षी को किये गये ई-मेल, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र दिनांकित 23.04.2024 एवं अनुस्मारक पत्र दिनांकित 49.04.2024, आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित 26.09.2074, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र दिनांकित 23.04.2024 में स्वीकार की गयी शिकायतकर्ता Page से प्राप्त धनराशि 2,95,460/— रुपये, प्रत्युत्त आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के diae-KAPITAL GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 26.09.2044 के माध्यम से यूनिट संख्या-707/606//742 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 26.03.2020 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध की सहमत शर्तों के अनुसार दिनांक 28.:2.2023 को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए मांग पत्र एवं कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध विवादों में रही और मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को उक्त भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं चुकाया गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका den—4547 /20i8 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज डीड निष्पादित की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि" नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक t9.0:.20i8 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.203 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.20i3 से 28.40.203 तक और दिनांक 29.40.2043 से 49.08.2045 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने
Page 2 जि अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08. 2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या- नोएडा / वाणिज्य / 2020,/802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.20i5 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दबण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। Var कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.203 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु v6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, नोएडा विकास प्राधिकरण को प्रेषित पत्र की प्रति, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.20:8, नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.03.2020 की प्रति, रेरा कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.04.2024 की प्रति, रेरा प्राधिकरण की पीठ-4ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.42.2020 आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट का कब्जा अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 50 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है, जोकि रेरा अधिनियम की IRIH-4)(b) के अन्तर्गत वैधानिक कब्जे के लिए अनिवार्य है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में सहमत शर्तों के विपरीत अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जोकि रेरा अधिनियम की aR9(6) का उल्लंघन है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष विपक्षी द्वारा की जा रही अनुचित धनराशि की मांग को हटाये जाने एवं परियोजना के ओ.सी./सी.सी. सहित यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्रदान किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। —— EEE Page 3 | act साक्ष्यों उभयपक्ष के cpt को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया है :- | 4. कया शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 निस्तारण बिन्दु संख्या-4 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट का कब्जा अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 50 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया गया है, जोकि रेरा अधिनियम की धारा-(4)(9) के अन्तर्गत वैधानिक कब्जे के लिए अनिवार्य है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा re प्लान के अनुसार यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95 प्रतिशत धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि अनुबन्ध में सहमत शर्तों के विपरीत अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जोकि रेरा अधिनियम की at—9(6) का उल्लंघन है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष विपक्षी द्वारा की जा रही अनुचित धनराशि की मांग को हटाये जाने एवं परियोजना के ओ. सी. / सी.सी. सहित यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्रदान किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के efaX-KAPITAL GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 26.09.2044 के माध्यम से यूनिट PN-DIVKG/742 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 26.03.2020 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध की सहमत शर्तों के अनुसार दिनांक 28.42.2023 को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए मांग पत्र एवं कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध Page 4
विवादों में रही और मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को var भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं चुकाया गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका dem—4547 /20i8 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.204 को citar Ss निष्पादित की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि“ नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.208 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.20:8 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.20i5 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.40.203 तक और दिनांक 29.40.2043 से 49.08.2045 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या- नोएडा / वाणिज्य / 2020 ,/ 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड--49 के कारण बाधित रहा है। Var कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.203 से दिनांक 9.08.20i5 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु i6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का
Page 5 भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 48 (4) F प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की emet—i(4)(b) में स्पष्ट रूप से उललेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रोमोटर, शिकायतकर्ता ddl) को लिखित में यूनिट at कब्जा ऑफर करेंगे। Page 6 पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट आवंटन,/अनुबन्ध पत्र दिनांकित 26.09.2044 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-09 के प्रस्तर-26 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 5 वर्ष एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 25.03.2020 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 // 2048 “सुपरटेक fafies बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent ~ Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 25.03.2020 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.ललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 7
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(2४) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(7) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली Page 8 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी mMciR+i प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या- सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय //पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर #८772+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.0.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना Weat-740 /8--3--48-65 विविध,/ 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7, POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: #7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and A a कस ४-८८ पटा-८प-ाप पपननक्नपमस सार -पपक<वपा८ “८८: >८८-तप ८-८ ८८-०८ अल Page 9
the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड--49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को आवंटन, अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, We प्लान के अनुरूप संशोधित मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त करते हुए, ओ.सी./सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | विपक्षी, शिकायतकर्ता दिनांक 25.03.2020 से | ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर Page 0 E प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(४०)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ Wed की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
4... विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेज़ एग्रीमेन्ट फॉर सेल / अनुबन्ध के अनुरूप ही अधिरोपित करेंगे | 5. इस आदेश का उललघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 6. शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता "er पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 4