Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Anshuman Bhardwaj v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117475/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-12-10
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddha Nagar. Order under Section-34, Bench-2 (former Bench-1) Presiding Officer :- Mr. T. Venkatesh, Member Sl. No. | Complaint Number | Complainants | Unit Number | Total Value | Deposited Amount 1. | NCR44/02/7475/2024 | Anshuman Bharadwaj | DT/KG/2033 | 4,2,200/— | 4,8,546 /- 2. | NCR44/02/7487/2024 | Sahil Bajaj and Anshita Khanna | 07/667607 | 22,86,375 /- | 22,59,46 /- versus M/s Granite Hill Properties Pvt. Ltd. The complaints in question have been instituted against the respondent by complainant Anshuman Bharadwaj along with 01 other complainant. Facts of both these complaints are identical and evidence is similar. Both these complaints relate to the same project THE DOWNTOWN. Therefore, both complaints are being disposed of through a single judgment. Complaint Number- NCR 244/02/7475/2024 Anshuman Bharadwaj shall be the lead case. The present complaint applications have been instituted by the complainants against the respondent for getting possession of the units in question and delayed period interest provided.
In brief, the statement of the lead complainant is that unit number DT/KG/2033 was booked by him in the respondent's project THE DOWNTOWN on date 24.05.205. The total value of the unit was Rs. 4,2,200/-, against which payment of Rs. 4,8,546 ,/- was made by him to the respondent from time to time on an installment basis. The complainant also states that according to the agreement executed between both parties, possession of the said unit was to be made available by the respondent within 05 years and a grace period of 06 months, but possession of the said unit has not yet been made available by the respondent nor have all four necessary no-objection certificates and O.C. / C.C. related to the project been obtained till date, whereas despite payment of 95% of the total sale value of the unit having been made by him, improper amount is being demanded by the respondent, due to which this complaint has been registered by the complainant against the respondent under Section-31 of the Real Estate Regulatory Authority Act for getting possession of the unit along with interest for the delayed period.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्रम सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या | कुल मूल्य | जमा धनराशि l. NCR44/02/7475/2024 अंशुमान भारद्वाज DT/KG/2033 | 4,2,200/— | 4,8,546 /- 2. पटारा44/02/7487/2024 साहिल बजाज Va | 07/667607 | 22,86,375 /- | 22,59,46 /- अंशिता खन्ना बनाम मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्रा. लि. शिकायतकर्ता अंशुमान भारद्वाज के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें एक ही परियोजना THE DOWNTOWN से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से gerd शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- बटा२44/02/7475/2024 अंशुमान भारद्वाज अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगनत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में दिनांक 24.05.205 को यूनिट संख्या- DI/KG/2033 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 4,2,200/- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 4,8,546 ,/“- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा सिर यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र व ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जबकि उनके द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95% धनराशि का भुगतान किये जाने Page Pe eee बावजूद भी विपक्षी द्वारा अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 24.05.2045, पेमेन्ट प्लान, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, विपक्षी द्वारा प्रेषित ई-मेल दिनांक 09.0.2024, ई-मेल दिनांक 09.04.2024 का शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भेजा गया उत्तर दिनांक 22.04.2024, विपक्षी द्वारा प्रेषित अनुस्मारक पत्र 30.04.2024, इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र व कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांकित 27.04.2024, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि का खाता विवरण, प्रत्युत्त, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-ू&शा&ा, GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 24.05.2045 के माध्यम से यूनिट WI-DI/KG/2033 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 24.44.2020 तक शिकायतकर्ता को vad यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा अनुबन्ध दिनांकित 27.05.205 की सहमत शर्तों के अनुसार शिकायतकर्ता को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए दिनांक 27.04.2024 को मांग पत्र कम कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध विवादों में रही और मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई | विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को उक्त भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं चुकाया गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका Par 4547 /2048 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को cit Sts निष्पादित
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की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि” नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.208 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा var Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.20i8 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण ने माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.0.20:3 से दिनांक 49.08.20i5 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.40.2043 तक और दिनांक 29.40.2043 से 9.08.20i5 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या-नोएडा / वाणिज्य / 2020 / 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.20:3 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 9.08.20i5 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 20:7 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं wrfasi9 के कारण बाधित रहा है। उपरोक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 4.0820:3 से दिनांक 9.08.20i5 तक शून्य अवधि एवं माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु i6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-66 में 20" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.05.2045 के माध्यम से CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट संख्या-2033 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 24.44.2020 तक शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड फ़े अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। य द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया प प Page 3
है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 220.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा var यूनिट के सापेक्ष बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट के नियत एवं wi के अनुसार शिकायतकर्ता को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए दिनांक 29.42.2023 को मांग पत्र कम कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके उपरान्त ई-मेल दिनांक 30.04.2024 से भी अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया शिकायतकर्ता एक डिफॉल्टर है तथा उनके द्वारा सहमत भुगतान योजना के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 0.03.2025 के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे हेतु मांगा गया अनुतोष स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में की गयी चूक के कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 04.03.2025 के माध्यम से var यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उक्त यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. रेरा नियम, 20i8 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है। आवंटन अनुबन्ध दिनांक 28.04.204 b पृष्ठ संख्या-3 के प्रस्तर-59 के अनुसार आवंटियों द्वारा भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट की स्थिति में विपक्षी कंपनी, यूनिट की कुल कीमत का 5% धनराशि जब्त कर सकती है, जिस कारण विपक्षी, शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त करते हुए 5% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae", जिसकी सिविल अपील संख्या-7588 // 202 है, में स्पष्ट रूप से कहा कि ope मनी एक प्रारम्भिक भुगतान की धनराशि है, जोकि अनुबन्ध को निभाये जाने के लिए दी जाती है अर्थात अनुबन्ध के उल्लंघन पर विक्रेता अनुबन्ध के we के अनुसार अर्नेस्ट मनी अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी है, साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश “श्री हनुमान कॉटन faces एवं अन्य बनाम टाटा एयर क्राफ्ट लिमिटेड” (970 SCR) 27) FAL सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि यदि धनराशि के लेन-देन में क्रेता द्वारा डिफॉल्ट किया जाता है तो विक्रेता अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी होगा। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विभिन्न अनुस्मारकों के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार यूनिट के कुल मूल्य का i5% धनराशि जब्त कर, शेष धनराशि बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है।
Page 4 उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(9) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, लिखित बहस, इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए शिकायतकर्ता को प्रेषित मांग पत्र व कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांकित 27.0.2024, ई-मेल दिनांक 09.04.2024, अनुस्मारक पत्र 30.04.2024, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.2048, नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.03.2020, मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल” में पारित आदेश दिनांक 48.40.2042, रेरा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.08.2024 की प्रति, wr प्राधिकरण की पीठ-+ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 6.2.2020, रेरा प्राधिकरण की पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.04.2024, की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए
कहा गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में कॉमर्शियल /रिटेल यूनिट के लिए आवेदन किया गया था और उभयपक्षों के मध्य दिनांक 24.05.2045 को आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया गया और विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के नाम पर यूनिट WEN-DIV/KG/2033 आवंटित की गयी। आवंटन अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा aR के wre की कास्टिंग की तिथि से अथवा आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित होने की तिथि से 5 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के भीतर प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कूल बिक्री मूल्य 4,2,200/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा Tos के अतिरिक्त 4,8,546/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95% से अधिक है। शिकायतकर्ता द्वारा चयन किये गये कस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेन्ट प्लान के अनुसार अन्तिम अवशेष 5% देय धनराशि का भुगतान यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने के समय विपक्षी को किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये बिना ही अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग की जा रही है, जोकि रेरा अधिनियम, 20I6 का उल्लंघन है। : शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत डर हुए विपक्षी द्वारा की जा रही सभी अवैध मांगों को वापस लेने तथा अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि से mers प्रतिशत Page 5 वार्षिक ब्याज दर से विलम्ब एवं परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. सहित यूनिट का वैधानिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के cat को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता द्वारा We प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और कया विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2. क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या- 04 निस्तारण बिन्दु संख्या-04, इस आशय से विचरित किया गया है कि an शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र व ओ. सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जबकि उनके द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95% धनराशि का भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया
गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के <fax—-KG में 20" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.05.2045 के माध्यम से CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट संख्या-2033 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष am उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार 6 ५ 9५ माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 2.:4.2020 तक शिकायतकर्ता को उक्त १ कल) यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। o Page 6
शिकायतकर्ता द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 22.40.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा vat यूनिट के सापेक्ष बिल्डर बायर We के नियत एवं शतों के अनुसार शिकायतकर्ता को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए दिनांक 29.42.2023 को मांग पत्र कम कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके उपरान्त ई-मेल दिनांक 30.07.2024 से भी अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया। शिकायतकर्ता एक डिफॉल्टर है तथा उनके द्वारा सहमत भुगतान योजना के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 04.03.2025 के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे हेतु मांगा गया अनुतोष स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में की गयी चूक के कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 04.03.2025 के माध्यम से var यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उक्त यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. रेरा नियम, 208 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है। आवंटन अनुबन्ध दिनांक 28.04.2044 के पृष्ठ संख्या-43 के प्रस्तर-59 के अनुसार आवंटियों द्वारा भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट की स्थिति में विपक्षी कंपनी, यूनिट की कुल कीमत का 5% धनराशि जब्त कर सकती है, जिस कारण विपक्षी, शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त करते हुए 5% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae’, जिसकी सिविल अपील संख्या-7588 / 2042 है, में स्पष्ट रूप से कहा कि अर्नेस्ट मनी एक प्रारम्भिक भुगतान की धनराशि है, जोकि अनुबन्ध को निभाये जाने के लिए दी जाती है अर्थात अनुबन्ध के उल्लंघन पर विक्रेता अनुबन्ध के प्रस्तर के अनुसार अर्नेस्ट मनी अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी है, साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश “श्री हनुमान कॉटन faces एवं अन्य बनाम टाटा एयर क्राफ्ट लिमिटेड” (4970 SCR(3) I27) A मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि यदि धनराशि के लेन-देन में क्रेता द्वारा डिफॉल्ट किया जाता है तो विक्रेता अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी होगा। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विभिन्न 2300 :22/5577 0 के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिस कारण
५0 bard th Page 7 विपक्षी अनुबन्ध की शर्तों 4 अनुसार यूनिट के कुल मूल्य का 5% धनराशि जब्त कर, शेष धनराशि बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा 20i6 की धारा-2(9) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के अधिनियम, कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) 2048 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित उलल्लेखित है :- नियमावली, धारा-9.3 : "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +4% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:
Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Page 8 B Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of _ the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination."
आवंटन अनुबन्ध पत्र के नियम एवं शर्तों से यह we है कि शिकायतकर्ता द्वारा wed यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कंस्ट्रक्शन fies पेमेन्ट प्लान के अनुसार किया जाना था, जिसमें बुकिंग पर कुल बिक्री मूल्य का io प्रतिशत धनराशि, द्वितीय किश्त बुकिंग के 45 दिन के भीतर to प्रतिशत धनराशि, तृतीय किश्त खुदाई /राफ्ट रखे जाने के समय 40 प्रतिशत धनराशि, चतुर्थ किश्त बेसमेन्ट wa के समय io प्रतिशत धनराशि, पंचम किश्त द्वितीय फ्लोर eta के समय 4१0 प्रतिशत धनराशि, छठवीं किश्त सातवें फ्लोर ete के समय १0 प्रतिशत धनराशि, सातवीं किश्त बारहवें फ्लोर eta के समय ॥0 प्रतिशत धनराशि, आठवीं किश्त अठारहवें फ्लोर we के समय i0 प्रतिशत धनराशि, नौवीं किश्त तेईसवें फ्लोर wa के समय 0 प्रतिशत धनराशि, दसवीं किश्त अन्तिम फ्लोर स्लैब के समय 05 प्रतिशत धनराशि, ग्यारहवीं / अंतिम किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के समय 05 प्रतिशत धनराशि अदा की जानी थी। इसी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से विदित है कि प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 4,2:,200/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 48,546 ,//- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि लगभग 99 प्रतिशत से अधिक है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध /आवंटन पत्र दिनांकित 24.05.2045 के अनुसार विपक्षी द्वारा Page 9 a=
परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर आवंटन अनुबन्ध की तिथि से 05 वर्ष एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात दिनांक 20.44.2020 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की मांग पर धनराशि का भुगतान समयानुसार किया गया तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 04.03.2025 को प्रेषित किया गया था, जोकि अनुबन्धानुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की समयावधि के 05 वर्ष बाद प्रेषित किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट है कि उभयपक्षों के मध्य सहमत कंस्ट्रक्शन fies re प्लान के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 05% धनराशि का भुगतान, विपक्षी द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किये जाने के समय किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्ता को लिखित कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित नहीं किया गया है और शिकायतकर्ता द्वारा vad यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान agen fies ee प्लान के अनुसार समय-समय पर किया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्राप्त होने के समय विपक्षी को भुगतान की जाने वाली देय धनराशि 0i% से भी कम है।
वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक /अपूर्ण है। द्वितीय शिकायतकर्ता “साहिल बजाज एवं अंशिता खन्ना” के प्रकरण में भी TRAIT समान तथ्य होने के कारण उक्त निर्णय से ही प्रश्नगत शिकायत का निस्तारण किया जा रहा है। रेरा अधिनियम की oeis के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-02 निस्तारण बिन्दु संख्या-02, इस आशय से विचरित किया गया है कि an शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर an होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। nS ५3७ २३७२७७७५०००-३भ०पस<०ा5७५७७२७सभ-०ा२०भा>+०मर८८पमकस Page i0
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में कॉमर्शियल /Rea यूनिट के लिए आवेदन किया गया था और उभयपफक्षों के मध्य दिनांक 24.05.2045 को आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित किया गया और विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के नाम पर यूनिट PET-DT/KG/2033 आवंटित की गयी। आवंटन अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा टॉवर के राफ्ट की कास्टिंग की तिथि से अथवा आवंटन अनुबन्ध हस्ताक्षरित होने की तिथि से 5 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के भीतर प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कूल बिक्री मूल्य 4,2i,200/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा TDs के अतिरिक्त 4,8,546 ,“- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95% से अधिक है। शिकायतकर्ता द्वारा चयन किये गये कंस्ट्रक्शन लिंक्ड पेमेन्ट प्लान के अनुसार अन्तिम अवशेष 5% देय धनराशि का भुगतान यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने के समय विपक्षी को किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये बिना ही अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग की जा रही है, जोकि रेरा अधिनियम, 20i6 का उल्लंघन है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा की जा रही सभी अवैध मांगों को वापस लेने तथा अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि से .४27#+7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से विलम्ब ब्याज एवं परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. सहित यूनिट का वैधानिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर--८6 में 20" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.05.2045 के माध्यम से CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट संख्या-2033 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार 6 माह की aque अवधि सहित दिनांक 24.44.2020 तक शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। शिकायतकर्ता द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. हेतु सक्षम विकास ्ट्ो प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 22.40.2024 को आवेदन किया जा चुका है। उक्त यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. रेरा — | 2886 ] bu
2048 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है आवंटन अनुबन्ध दिनांक 28.04.20i4 के पृष्ठ संख्या-43 के प्रस्तर-59 के अनुसार आवंटियों द्वारा भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट की स्थिति में विपक्षी कंपनी, यूनिट की कुल कीमत का 5% धनराशि जब्त कर सकती है, जिस कारण विपक्षी, शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त करते हुए 5% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(9) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 8 (4) F प्राविधान है कि :- Section 8 (4) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप | कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग VY सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में TT Page 2 got है को. Woe = रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की eRI—I4(4)(b) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित 24.05.205 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-09 के प्रस्तर-26 में उल्लेख किया गया है कि विपक्षी द्वारा आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 20.44.2020 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 ,/ 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20!6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार atx. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। =| age 3 यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को j पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 24.44.2020 + कोविड-49 हेतु 6 माह (दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020) फोर्स मैज्योर की अवधि अर्थात दिनांक 24.05.2024 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। RW एक्ट की धारा 2(za) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause— Page 4
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +i% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी |॥८.२+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका 2) Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। पीठ-2 ud aan. thang!) 5 Page 7 | ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर .४८०७+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /8-3—78-65 विविध ,/ 46 के द्वारा मॉडल Whe के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर Si आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 Prema किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- Page 6 आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर््थापित करते हुए, आवंटन/अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, re प्लान के अनुरूप संशोधित मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त करते हुए, ओ.सी. /सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 24.05.2024 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+I प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(४७)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी .टाफऋ+ा प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेस आवंटन अनुबन्ध पत्र के अनुरूप ही अधिरोपित करेंगे। इस आदेश की एक प्रति सम्बन्धित पत्रावली पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित ard के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। Page 7 = 7. शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि Aare ° | द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। Ae ae वेंकटेश उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (सदस्य) Page 8