Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vinay Kumar Agarwal v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117355/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-08-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Order under Section-31 [emi—3t], Bench-2 (Formerly Bench-4) Presiding Officer: - Mr. T. Venkatesh, Member Sl. No. | Complaint No. | Complainants | Unit No. | Total Value | Deposited Amount 1. | पटारा44/0/6228/2024 | Pinki Gupta | 69, Corporate Suite | Rs. 22,7,508 /- | Rs. 2,83,84I/- 2. | NCR44/02/7355/2024 | Vinay Kumar Agarwal | D1/KG/234 | Rs. 3,65,000/- | Rs. 4,38,352 /- 3. | फटारा44/0776454/2024 | Shravan Rustagi and Mr. Suresh Chandra Rustagi | | Rs. 4,54,20/- | Rs. 42,63,309 /- 4. | NCR144/0/6492/2024 | Jeetu and Mr. Girish | 90, 9th floor | Rs. 8,55,00/- | Rs. 8,32,588 / - 5. | पटारा44/02/7452/2024 | Manoj Tiwari | 424, 4th Floor | Rs. 4,24,850 /- | Rs. 44,07,205 /- 6. | फटारा44/॥0/76500/2024 | Bimla | 932, 9th floor | Rs. 8,9,425 /- | Rs. 17,97,348 /- 7. | NCR44/02/7673/2024 | Praveen Kumar Jain | 527 | Rs. 8,21,575/- | Rs. 6,,672 /- 8. | पटारा44/077376/2023 | Sardar Singh Rathor and Smt. Suman Rathor | 904, 9th floor | Rs. 22,76,000 /-- | Rs. 22,50,566 /- Versus Granite Hill Properties Private Limited
The complaints in question have been instituted by complainant Pinki Gupta along with 07 other complainants against the respondent. The facts in all these complaints are similar and evidence is identical. All these complaints pertain to the same project THE DOWNTOWN. Therefore, the complaints in question are being disposed of by a single decision. Complaint No. NCR44/0/6228/2024 Pinki Gupta shall be the lead case. The present complaint petitions have been instituted by the complainants against the respondent seeking possession of the units in question and interest for the delayed period.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत emi—3t, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य क्रम सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या | कुल मूल्य | जमा धनराशि | | पटारा44/0/6228/2024 पिंकी गुप्ता 69, 22,7,508 /- | 2,83,84I/— Corporate Suite 2. | NCR44/02/7355/2024 | विनय कुमार अग्रवाल | DI/KG/234 | 3,65,000/— | 4,38,352 /- 3. फटारा44/0776454/2024 | श्रवण रुस्तगी एवं श्री | | 4,54,20/— | 42,63,309 /- सुरेश चन्द्र रुस्तगी 4. NCRI44/0/6492/2024 | जीतू एवं श्री गिरीश 90, 9th 8,55,00/— | 8,32,588 / - floor __| | * | पटारा44/02/7452/2024 मनोज तिवारी 424, 4th | 4,24,850 /- | 44,07,205 /- Floor 6. | फटारा44/॥0/76500/2024 बिमला 932, 9th | 8,9,425 /- | ॥7,97,348 /- floor 7. | NCR44/02/7673/2024 प्रवीण कुमार जैन 527 8,2I,575/— | 6,,672 /- |. | पटारा44/077376/2023 | सरदार सिंह राठोर एवं 904, 9th 22,76,000 /-- | 22,50,566 /- श्रीमती सुमन राठोर floor बनाम ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता पिंकी गुप्ता के साथ 07 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना THE DOWNTOWN से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCR44/0/6228/2024 पिंकी गुप्ता अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
Page 4 qu संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में दिनांक 25.04.2045 को यूनिट संख्या-69 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 22,77,508//- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 2,83,84./— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार उक्त यूनिट का कब्जा दिनांक 48.42.2020 तक प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में बुकिंग फॉर्म दिनांकित 25.04.2045, फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 05.09.2049, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-6&शा ७, GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 05.09.2049 के माध्यम से यूनिट dea-oi9 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन/अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 05.03.2025 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है तथा शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गयी वर्तमान शिकायत समय से पहले योजित की गयी है, जो खारित किये जाने योग्य है विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध की सहमत शर्तों के अनुसार दिनांक 29.42.2023 को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए मांग पत्र एवं कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध विवादों में रही और मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को | Page 2 Ge
उक्त भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं Gora गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका संख्या-4547 // 2048 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज़ Ss निष्पादित की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि” नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.2048 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.0.203 तक और दिनांक 29. 40.2043 से 79.08.20i5 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या- नोएडा / वाणिज्य / 2020 // 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 79.08.20i5 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। var कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 74.08.203 से दिनांक 9.08.20i5 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु it दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, नोएडा विकास प्राधिकरण को प्रेषित पत्र की प्रति, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश Page 3 Ou |... दिनांक cnoaz0., नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश Rae | 02.02.2048, नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक हू की प्रति, रेरा कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.04.2024 की प्रति, रेरा प्राधिकरण की पीठ-4ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.2.2020 आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया हैं :- 4... कया शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 निस्तारण बिन्दु संख्या-4 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार vat यूनिट का कब्जा दिनांक 48.42.2020 तक प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-द७श#7, GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 05.09.2049 के माध्यम से यूनिट Wen-oi9 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 05.03.2025 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध की सहमत शर्तों के अनुसार दिनांक 29.42.2023 को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए मांग पत्र एवं कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के Page 4 Oe .
सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध विवादों में रही और मा. एन.जी.टी. द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को उक्त भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं चुकाया गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष रिट याचिका संख्या-4547 / 2048 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज़ डीड निष्पादित की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि” नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 9.04.20I8 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.20i8 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 74.08.20:3 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि तथा 29.0.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.40.20i3 तक और दिनांक 29.0.20i3 से 49.08.2075 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या- नोएडा / वाणिज्य / 2020 ,/ 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 9.08.20i5 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड--49 के कारण बाधित रहा है। Var कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 9.08.20i5 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध eq t6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत
A Page 5 yg रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 48 (॥) में प्राविधान है कि :- Section 8 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.
इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं गिलता है तो यह अपनी जमा धनराशि को ब्य[ज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट आवंटन,अनुबन्ध पत्र दिनांकित 05.09.2049 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-07 के प्रस्तर-26 में उल्लेख किया गया है कि आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 5 वर्ष एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा, ऐसे में उपरोक्तानुसार Page 6 शिकायतकर्ता दिनांक 04.03.2025 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ate. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.03.2025 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allotlee wishes lo withdraw from the project, without prejudice in this Page 7 behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि wed द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(29) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पद्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के wax 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (vents of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.26) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the ———EE>E>E>E—_—£{E{[{{_£_ i —_—L—L$[_LLL——EE ७ ७ ७ «७ 5७ ७७ ७5%
फिर te ie | Shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLRHH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी _॥०0.४+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या- सी; 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया 8 | ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय /पदट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ॥८7/2+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ] प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या--4740 ,// 8-3--48-65 विविध 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
#7.] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, Page 9 a= cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण की यूनिद्स को अनुबन्ध पत्र /आवंटन पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता (पिंकी गुप्ता) को दिनांक 04.03.2025 से ओ.सी./ सी.सी. wed होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में फ्लैट क्रेता अनुबन्ध /आवंटन पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। ?०286९१0
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बांद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया गया है तो वह रेरा आने (दिनांक 07.05.207) 4 पूर्व अनुबन्ध के अनुसार एवं रेरा आने के उपरांत MCLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से ब्याज देय होगा एवं अन्य शुल्क के मद में फ्लैट आवंटन / AAT के अनुसार ही धनराशि की मांग की जाएगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित Rr के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण er पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदनुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों। Tel सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 4