Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ajay Singh v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/02/105581/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2023-09-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Order under Section 34, to—4 Present: Shri T. Venkatesh, Member Complaint No.: NCRI44/02/0558i/2023 Ajay Singh Versus M/s Rise Projects Pvt. Ltd. The complaint application has been instituted by the complainant against the opposite party, seeking possession together with interest for the delayed period. In brief, the complainant's statement is that they booked Unit No. 30l in the opposite party's project, Rise Resort Residences Phase. The total price of the unit was Rs. 58,70,000/-, against which the complainant paid Rs. 58,70,000/- to the opposite party from time to time in instalments. The complainant says the entire amount has been paid to the opposite party against the unit, but the opposite party has still not given possession. The OC/CC for the project has also not been obtained from the competent authority. For this reason the complainant has lodged this complaint against the opposite party under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act. The complainant has therefore requested that possession and interest for the delayed period be awarded. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of records, including the welcome letter, the allotment letter dated 02.40.2020, and receipts for the deposited amounts.
The opposite party has filed a counter-reply stating that the complainant booked Unit No. 30 in Tower-7 of the project, the total price of which was Rs. 55,97,500/-, and that the complainant paid it. A builder-buyer agreement was executed between the parties on 02.0.2020. Because the complainant did not pay the instalments on time, the opposite party levied Rs. 2,40,954/- as interest, which the complainant has not paid. As per the agreement, the opposite party was to give possession on 34.07.2022 with a grace period of six months. The opposite party has informed that it applied to the competent authority for the necessary NOC, and in the course of that application a fit-out possession letter was sent to the complainant on 28.0.202. On 09.44.2024 the opposite party sent the complainant a final demand letter along with the fit-out possession letter. The opposite party has also stated that because of environmental pollution the National Green Tribunal completely banned construction activity in Delhi NCR, which adversely affected the progress of the project. It has further stated that the Government of India, to stop the spread of the COVID-49 virus, adopted some of the strictest measures in the world and declared a nationwide lockdown from 24 March 2020, which was extended by various notifications. Because construction material was not available, construction activity remained completely obstructed, which delayed completion of the project. The opposite party has also said that physical possession of the unit, along with the necessary certificates and NOC, will be handed over by September 2023.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, to—4 उपस्थिति :- श्री टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCRI44/02/0558i/2023 अजय सिंह बनाम मैंसर्स राइज प्रोजेक्ट्स प्रा० लि० प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase में यूनिट संख्या- 30l बुक करायी गयी थी। यूनिट की कुल कीमत 58,70,000/— रुपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 58,70,000/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी को सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान यूनिट के सापेक्ष किया जा चुका है, परन्तु विपक्षी अभी कब्जा नहीं दिया गया है। परियोजना से सम्बंधित A /सी.सी भी सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की eeI-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में स्वागत पत्र, आवंटन पत्र दिनांक 02.40.2020, जमा धनराशि की रसीदें आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। a
| | द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना टॉवर-7 में यूनिट संख्या-30 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 55,97,500 /- रुपये का भुगतान किया गया था। उभयपक्षों पक्षों के मध्य दिनांक 02.0.2020 को बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष समय से भुगतान न किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा 2,40,954 /-रूपये धनराशि ब्याज के मद में अधिरोपित की गयी है, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। अनुबन्ध पत्र | अनुसार विपक्षी को दिनांक 34.07.2022 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि उनके द्वारा आवश्यक एन.ओ. सी के लिए सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है और आवेदन के कम में शिकायतकर्ता को दिनांक 28.0.202 को फिटआउट पोजेशन पत्र प्रेषित किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 09.44.2024 को फिटआउट पोजेशन पत्र के साथ अंतिम मांग पत्र भेजा गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली एन.सी.आर. में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था, जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 वायरस के प्रसार को रोकने के लिए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण सामग्री की उपलब्ध न होने के कारण निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। इसके अलावा, विपक्षी द्वारा कहा गया है कि सितम्बर, 2023 तक आवश्यक प्रमाण पत्रों और एन.ओ.सी. के साथ यूनिट का भौतिक कब्जा सौंप दिया जाएगा।
दूसरी ओर शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर पत्र दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.09.2020 में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 6,24750 /-रूपये का भुगतान 2 oe = गया था, जिसके कम में विपक्षी द्वारा दिनांक 02.40.2020 को स्वागत पत्र जारी किया गया। शिकायतकर्ता एवं विपक्षी के मध्य दिनांक 02.40.2020 को आवंटन पत्र का निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार विपक्षी को दिनांक 34.07.2022 एवं 6 माह की aque अवधि के साथ दिया जाना था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कोई भी अनुस्मारक एवं मांग पत्र नोटिस के माध्यम से जारी नहीं किया गया तथा दिनांक 20.4.2020 को ई-मेल के माध्यम से भुगतान में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में मांग पत्र जारी किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 09.44.2024 को अपनी यूनिट के सापेक्ष समस्त देय धनराशि का भुगतान किया गया। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- l क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी को सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान यूनिट के सापेक्ष किया जा चुका है, परन्तु विपक्षी अभी कब्जा नहीं दिया गया है। परियोजना से सम्बंधित ओ.सी /सी.सी भी सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि विपक्षी द्वारा कहा गया है कि सितम्बर, 2023 तक आवश्यक प्रमाण पत्रों और एन.ओ. सी. के साथ यूनिट का भौतिक कब्जा सौंप दिया जाएगा। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 02.40.2020 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ Geri के प्रस्तर-7.4 के Se = दिनांक 32.07.2022 तक कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। कि:- जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं० 6649-50/20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2022 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित
अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है| जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid oe ba his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vouo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Go के बीच॑ किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/ पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(ii) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wea 9.30) में निर्धारित है। sat wer को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(29)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 Paka किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। |
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट को अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर आदेश अपलोड किये जाने की तिथि से 45 दिनों में ओ.सी / सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 0t.08.2022 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 के बीच यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा Azali) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये।
यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। meal 5 टी० वेंकटेश (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण