Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Namrata Srivastava v. Ats Dreamzone Private Limited
Complaint No. NCR144/01/89022/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench-02 Order under [MI]—34 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member; T. Venkatesh, Member Complaint No.: NCR44/0/89022/2022 Namrata Srivastava Versus A.T.S. Dreamzone Pvt. Ltd. The present complaint application has been instituted by the complainant against the opposite party seeking possession and interest for the delayed period. In brief, the complainant's case is that the complainant booked unit number 8-054 in the opposite party's project ATS BOUQUET, the total price of which was Rs. 82,04,064/-, and against it the complainant paid Rs. 62,48,344/- from time to time in instalments. The complainant states that the opposite party was to give possession of the unit by December 20I9, but an offer of possession was issued on 46.06.2024, which made no mention of interest for the delayed period. The opposite party has already applied to the competent authority for O.C./C.C., and an objection has also been recorded by the Authority on it. The opposite party has also not paid its liability to the Authority. The opposite party obtained O.C./C.C. on 46.06.2024. The complainant has therefore requested possession of the unit and interest for the delayed period. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of a notice dated 29.09.2024, an agreement dated 40.05.2048, an account statement, etc.
In the opposite party's reply dated 25.03.2022, it is stated that the complainant has not placed the correct facts before the Bench, and that by filing the complaint the complainant wishes to evade his responsibilities. The opposite party has already sent an offer of possession letter to the complainant. For the completion certificate, the opposite party had already applied to the competent authority on 24.42.2049. On the basis of these statements the opposite party has requested that the complaint be dismissed. In support of its statement, the opposite party has filed photocopies of the occupancy certificate dated 46.06.2024, the offer of possession dated 46.06.2024, an account statement, a T.D.S. [FAS] charge sheet [?], etc.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ--02 आदेश अन्तर्गत MI—-34 उपस्थिति:-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCR44/0/89022/2022 नम्नता श्रीवास्तव बनाम ए.टी.एस ड्रीमजोन प्रा. लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना ATS BOUQUET में यूनिट संख्या- 8-054 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 82,04,064/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 62,48,344/- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अंकित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिसम्बर 20I9 तक दिया जाना था, परन्तु दिनांक 46.06.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया, जिसमें विलम्बित अवधि के ब्याज के सम्बन्ध में कोई उल्लेख नहीं था। विपक्षी द्वारा ओ.सी. / सी.सी. हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है, जिस पर प्राधिकरण द्वारा आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। विपक्षी द्वारा प्राधिकरण को भी अपनी देयता का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 46.06.2024 को ओससी. /सी.सी. प्राप्त किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में नोटिस दिनांकित 29.09.2024, अनुबंध पत्र दिनांकित 40.05.2048, खाता विवरण आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी।
विपक्षी की ओर से जवाब दिनांकित 25.03.2022 में अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा पीठ के समक्ष सही तथ्य उपलब्ध नहीं कराये गये है। शिकायतकर्ता cer शिकायत दाखिल करते हुए अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाहते है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन पत्र प्रेषित किया जा चुका है-। विपक्षी द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु दिनांक 24.42.2049 को सक्षम प्राधिकरण Chu —— के समक्ष आवेदन किया जा चुका था। Gat कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा प्रश्नणत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांकित 46.06. 2024, ऑफर ऑफ पजेशन दिनांकित 46.06.2024, खाता विवरण, टी.डी.एस. FAS चार्ज पत्र आदि की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर प्रत्र॒ दिनांकित 47.05.2022 दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंध के प्रस्तर-7.4 के अनुसार दिनांक 34. 42.209 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था, जो कि war समयावधि में उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी का यह दायित्व है कि वह अनुबंध के अनुसार विलम्बित अवधि में 40 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर भुगतान किया जाना है। विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूर्ण नहीं किया गया, जिसके कारण शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देयता का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया गया है। विपक्षी द्वारा प्रेषित ऑफर ऑफ पजेशन पत्र दिनांकित 46.06.2024 वैध्य नहीं है एवं शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 22.06.2024 एवं अन्य तिथियों पर उक्त के सम्बन्ध में ई-मेल प्रेषित किया गया था, जिसका जवाब विपक्षी द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया और दिनांक 34.08.2024 को लीगल नोटिस प्रेषित किया गया था। वर्तमान समय में शिकायतकर्ता की यूनिट रहने के योग्य नहीं है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या शिकायतक़र्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
शिकायतकर्ता द्वारा अंकित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिसम्बर 20i9 तक दिया जाना था, परन्तु दिनांक 46.06.2020 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया, जिसमें विलम्बित अवधि के ब्याज के सम्बन्ध में कोई उल्लेख नहीं था। विपक्षी द्वारा ओसी./सी.सी. हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है, जिस पर प्राधिकरण द्वारा आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। विपक्षी द्वारा प्राधिकरण' को भी अपनी देयता का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 46.06.2024 को ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। Cy SS दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन पत्र प्रेषित किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु दिनांक 24.42.2049 को सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका था। Vat कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 40.05.2048 के पृष्ठ संख्या-07 के प्रस्तर-7. में प्राविधान दिये गये है, जिसके अनुसार दिनांक 34.42.209 तक कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 // 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी aaa माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 02.0:.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section l8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by — ae the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vouo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स ert sar धनराशि का उपभोग किया गया है। ह
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.29) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार बिन्दु Pee निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। Or = 5 आदेश
l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के फ्लैट को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.07.2022 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2020 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर १४८7२+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी | ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 के बीच यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Aa अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये।
5. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। , oe हक ८ 29-७5. 282s ८ बैंकटेशी “०2 gE Slo दीपक स्वरूप सक्सेना (सदस्य) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण