Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ripu Madan Singh and Vinita Singh v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/01/87978/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2022-06-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench-3 Complaint No. | Party name NCR44 / 09 / 82608 / 2024 | Amit Banka NCR44 / 04 / 87974 / 2022 | Bhupendra Singh NCR44 / 04 / 87983 / 2022 | Rajeev Chauhan NCR44 / 04 / 87978 / 2022 | Ripu Madan NCR44 / 04 / 87978 / 2022 | Rajeev Chauhan NCR444 / 42 / 67204 / 2020 | Vineeta Jain Versus Patel Advance JV Address: S-406, Greater Kailash 2, New Delhi Presiding: Bhanu Pratap Singh (Member) Representation: Complainant: in person Respondent: Shri Mayank Kumar Pandey, Advocate Complaint: The complainants have filed these complaints against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to Patel Advance (JV). Therefore, all these complaints are listed together with the lead complaint NCR44/09/82608/2024 and are being disposed of by a single decision. Documentary evidence: On behalf of the complainants, the following documentary evidence has been filed: 4. Written statement 2. Demand letter dated 05.2.202[?] 3. Payment plan 4. Allotment letter 5. Receipts for the amounts deposited The respondent has filed the following documentary evidence: 4. Written statement (pratiwad patra) 2. Demand letter 3. Final demand letter dated 77/0[?]/2022 4. Additional written statement 5. Copy of evidence relating to force majeure 6. Copy of no-objection certificate Particulars submitted by the parties:
Row 1: Complaint NCR44/09/82608/202 | Amit Gor [?] | Allotment letter/agreement date: 02-04-2044 | Possession date (with period): 02-20-2043 | Unit: 04/205 | Amount paid: Rs. [?]/- Row 2: Complaint NCR444/04/8794/2022 | Bhupendra Singh | Allotment date: 28-42-2043 | Possession date: 28-40-207 | Unit: G4/204 | Amount paid: Rs. 379296 Row 3: Complaint NCR44/04/87983/2022 | Rajeev Chauhan | Allotment date: 26-05-2044 | Possession date: 26-03-2048 | Unit: G4/203 | Amount paid: Rs. [?] 77.92 630/- Row 4: Complaint NCR44/04/87978/2022 | Ripu Madan | Allotment date: 28-42-...-2043 | Possession date: 28-0-2047 | Unit: G4/205 | Amount paid: Rs. 80 3427768/- Row 5: Complaint NCR444/04/87978/2022 | Rajeev Chauhan | Allotment date: 30-06-2044 | Possession date: 30-04-2048 | Unit: G1/502 | Amount paid: Rs. 2445389/- Row 6: Complaint NCR44/2[?]/67204/2020 | Vineeta Jain | Allotment date: 27:00--.. -2044 | Possession date: 27-22-207 | Unit: 6-4/205 | Amount paid: Rs. 980027/- In brief, the complainants' case is that the said units were booked in the project NEOTOWN (Phase I), Gautam Buddh Nagar, operated by the respondent, and that for them the complainants paid to the respondent the amounts recorded in the above table. In their complaint applications the complainants have requested possession of the units and interest for the delayed period.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर सुनवाई पीठ-3 शिकायत संख्या पक्षकार नाम WRI 44 / 09 / 82608 / 2024 अमित बँका WARSI 44 / 04 / 87974 / 2022 भूपेन्द्र सिंह WRI 44 / 04 / 87983 / 2022 राजीव चौहान एनसीआर44 / 04 / 87978 / 2022 रिपु मदान WAIN 44 / 04 / 87978 / 2022 राजीव चौहान एनसीआर444 /42 / 67204 / 2020 विनीता जैन बनाम पटेल एडवांस जेवी पता- एस-406 ग्रेटर कैलाश 2, नई दिल्ली पीठासीन - भानु प्रताप सिंह, (सदस्य) प्रतिनिधित्य ;- परिवादी - स्वयं प्रतिवादी ;- श्री मयंक कुमार पांडे ,अधिवक्ता परिवाद :- परिवादीगण द्वारा यह शिकायतें प्रतिवादी के विरूद्ध योजित की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें पटेल अड्वान्स (जेवी) से सम्बंधित है। अतः vat सभी परिवादों को अग्रणी परिवाद wastenesa4/09 /s82608 / 2024के साथ सूचीबद्ध करते हुये एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। अभिलेखीय साक्ष्य:- Page १ ad की ओर से निम्नलिखित अभिलेखयी साक्ष्य प्रस्तुत किये Te किये गये है:- 4. लिखित अभिकथन 2- मांग पत्र दिनांक 05.2.202॥ 3- » भुगतान योजना 4. आवंटन पत्र 5. जमा की गयी धनराशि की रसीदे प्रतिवादी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये Ta किये गये है- 4. प्रतिवाद पत्र 2- मांग पत्र 3- अंतिम मांग पत्र दिनांक 77/0॥/2022 4- अतिरिक्त प्रतिवाद पत्र 5- फोर्स मजूरे से संबंधित साक्ष्य की प्रति 6- अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवरण:- शिकायत संख्या पक्षकार नाम | आवंटन पत्र / अनु बंध पत्र कब्जा दिये जाने की तिथि (माह पीरिएड यूनिट संख्या भुगतान की गयी धनराशि GO Page 2
के साथ) एनसीआर।44 / 09 /82608 / 202 | अमित gor | 02-04 | 02-20- | 04/205% | रुण6क्षातक्ष /- 2044 2043 एनसीआर444 /04 /8794 / 2022 | sre fag | 28-42- | 28-40- | G4/204 | रु0 * 2043 207 379296 J- Terese 44 //04 /87983 /2022 | राजीव चौहान | 26-05- | 26-03- | G4/203 | BO 77.92 2044 2048 630 /- एनसीआर।44 / 04 / 87978 / 2022 | रिप मदान 28-42-... | 28-0- | G4/205 | 80 3427768 /- ° 2043 2047 एनसीआर444 / 04 / 87978 / 2022 | राजीव चौहान | 30-06- | 30-04- | GI/502 | BO 2445389 /- 2044 2048 Tastee 44 /2,/67204/ 2020 | विनीता जैन | 27:00--.. | 27-22- | ६-4/205 | BO 980027/- 2044 207 (क) (ख) संक्षेप में वादीगण का कहना है कि प्रतिवादी द्वारा संचालित परियोजना NEOTOWN (Phase l) गौतमबुद्धनगर में उक्त इकाई बुक कराई गयी थी जिसके एवज में वादीगण ने प्रतिवादी को उक्त तालिका मे अंकित धनराशि भुगतान की। वादीगण ने शिकायत प्रार्थना पत्र में इकाई का कब्जा, विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। ्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में यह अंकित किया गया है कि परिवादि द्वारा बुक की गई उक्त एकाई के संबंध मे क्रेता -संप्रवर्तक अनुबंध पत्र निष्पादित किया गया जिसके प्रस्तर-24 के अनुसार परिवादी को ईकाई का अधिपत्य 40 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ प्राप्त होना था जिसमे फोर्स मजूरे भी शर्त के साथ शामिल होगा। प्रतिवादी का यह भी कहना है की परियोजना का निर्माण कार्य ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 33.5.20॥ एवं 29.07.200 को जारी पत्र से लगाई गई रोक के कारण बाधित रहा जिसमे ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा रोक Page 3
लगते हुए यह तर्क दिए गए की प्रतिवादी को आवंटित जमीन के अधिकतम खसरों जिसका एक अनंततः भाग 27,430 sq.mtr भी विवादित रहा जिसके संबंध मे माननीय उच्चतम न्यायालय मे वाद विचाराधीन है,जिसके उपरांत दिनांक 26/7//2005 को ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पत्र प्रतिवादी को प्रेषित किया गया जिसमे परियोजना के निर्माण कार्य से रोक हटाते हुए निर्माण कार्य पुनः शुरू किए जाने को कहा गया एवं प्रतिवादी के - प्रत्यावेदन् सक्षम प्राधिकरण द्वारा शून्य काल की संस्तुति t048. वी बैठक की गई । प्रतिवादी का यह भी कहना की उनके द्वारा परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त किए जस चुके है और सक्षम प्राधिकरण को अभिभोग प्रमाण पत्र जारी किए जाने हेतु आवेदन किया जा चुका है एवं उसी के साथ परिवादी को मांग पत्र और अंतिम मांग भेजे जा चुके है एवं परियोजना का निर्माण कार्य दिसम्बर ,2022 तक पूर्ण कर लिया जाएगा प्रतिवादी का यह भी कहना है की परिवादी अपनी देय धनराशि का भुगतान कर दिसम्बर ,2022 तक ईकाई का आधिपल् प्राप्त कर सकते है | उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विरचित किये गये :- बिन्दु vert: क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित है ? fag संख्या 2: क्या परियोजना विलम्बित है ? बिन्दु संख्या 3: क्या वादी इकाई के कब्जा के समय विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं0० 4 प्रतितदी की ओर से प्रतिवादपत्र में उल्लिखित किया गया कि परियोजना का निर्माण कार्य ग्रेटर नोएडा विकास a Page 4
प्राधिकरण द्वारा दिनांक 37.05.200 एवं 29.07.20 को जारी पत्र से लगाई गई रोक के कारण बाधित रहा जिसमे ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा रोक लगते हुए यह तर्क दिए गए की प्रतिवादी को आवंटित जमीन का कुछ भाग 27,430 54.7४ विवादित है जिसके संबंध मे माननीय उच्चतम न्यायालय मे वाद विचाराधीन है, एवं नोट बंदी के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। प्रतिवादी की ओर से कथन के समर्थन मे साक्ष्य पत्रवाली पर प्रस्तुत किए जिससे विदित है की परियोजना ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा लगाई गई रोक के कारण विलंबित रही तथा परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था। विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या 2 पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से विदित हुआ कि वादीगण व. प्रतिवादी के मध्य उक्त तालिका में अंकित तिथि को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार इकाई का कब्जा वादीगण को उक्त तालिका में अंकित तिथि तक दिया जाना था परन्तु वादीगण को अभी तक इकाई का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिवादी द्वारा परियोजना विलम्ब होने के सम्बंध में एनजीटी व माननीय उच्चतम न्यायालय से सटे होने का संदर्भ दिया जिसके समर्थन में अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किया गया। प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में दिसम्बर ,2022 तक इकाई का कब्जा उपलब्ध कराये जाने का wea अंकित किया गया है जबकि वादीगण को उक्त तालिका के अनुसार 203 से 20॥7 के मध्य तक इकाई का कब्जा प्राप्त हो जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 2 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 3 : वादीगण के पक्ष में उक्त तालिका में अकित
तिथि को आवंटन पत्र निष्पादित किया गया जिसके अनुसार उक्त Page 5 अंकित तिथि तक परियोजना पूर्ण करके वादीगण को कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक वादीगण को इकाई का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार वादीगण विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमंल रियलटर्स संबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है "Section 78(7)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not काला to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः: wed निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के
प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sor के बीच किये गये अनुबंध के Page —__a Page 6 अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। इस सम्बंध में सिविल अपील eo 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "The period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी.»सी. सी अथवा कब्जा किये जाने की तिथि तक, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय »पटटा के . लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स Page 7
के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि: "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State _ Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी we 9.30) में eta है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+] प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
जैसा कि सभी जन मानस को ज्ञात है कि विश्व के सभी देशों में कोरोना वायरस महामारी का संक्रमण व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। ऐसी स्थिति में afas-t9 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु सम्पूर्ण देश में दिनांक 24.03.2020 को लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी, लॉकडाउन की परिस्थिति में सभी कार्यो पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिससे की सभी क्षेत्र प्रभावित हुए और इसमें रियल इस्टेट सेक्टर भी सम्मिलित —— ख ७ चचचचचचचचचचचचचचचचच् चल लत Page 8 है। न््यायहित में इसी को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 24.03.2020 से दिनांक..30.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा वादी को नहीं दिया जाएगा। एवं यदि ज़ीरो पीरीअड की समय सीमा आवंटन की तिथि से अधिपत्य दिए जाने की तिथि के अंतराल आती है तो उस समय सीमा को कब्जा दिए जाने की तिथि के उपरांत समायोजित करते हुए विलंबित अवधि की गणना की जाएगी | तदनुसार वाद बिन्दु संख्या 3 निर्णीत की जाती है। नैसर्गिक न्याय के Regi के अनुसार एवं प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को के नीर क्षीर विवेक पर आधारित परिशीलन एवं विश्लेषण से पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए वादी को इकाई का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश (क) प्रतिवादी वादीगण को आवंटित मूल इकाई का कब्जा ओ.सी / सी. (अथवा) चार अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ दिसम्बर ,2022 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें |
(ख) प्रतिवादी विलम्बित अवधि के सम्बंध में ब्याज का मूल्यांकन उक्त तालिका के अनुशार आधिपत्य दिए जाने की तिथि से 30.04206 तक हस्ताक्षारित अनुबंध /आवंटन पत्र में अंकित ब्याज दर से देय होगा तथा .दिनांक 04.05.2046 से ओ.सी /सी.सी अथवा अंतिम अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने या ऑफर ऑफ पोजेशन जो बाद में हो टी तिथि तक mg@iR+4% की दर से प्रमोटर द्वारा दण्ड Page 9 ब्याज / penal ॥/००» प्रतिवादी द्वारा वादीगण को भुगतान किया जाएगा- प्रतिवादी द्वारा ब्याज /दण्ड की इस धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित करते हुये अवशेष बची धनराशि प्रतिवादी द्वारा वादीगण को भुगतान की जाएगी एवं यदि ज़ीरो पीरीअड की समय सीमा आवंटन की तिथि से अधिपत्य दिए जाने की तिथि के मध्य आती है तो उस समय सीमा को कब्जा दिए जाने की तिथि के उपरांत समायोजित करते हुए विलंबित अवधि की गणना की जाएगी | (ग) (घ) वादीगण द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो वादीगण बकाया धनराशि प्रतिवादी को भुगतान करें। वादीगण द्वारा जो धनराशि विलम्ब से भुगतान की गयी है तो उस स्थिति में रेश अधिनियम की धारा 2(29)0) के अधीन प्रतिवादी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु वादीगण द्वारा ब्याज MCLR+I% की दर से अधिक देय नहीं होगा। कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुये लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुये दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09. 2020 ah वादी की ओर से समय से भुगतान न किये जाने के सम्बंध में एवं दिनांक 37.05.20 से 26..205 तक ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा निर्माण कार्य पर लगाई गई रोक की समय सीमा को ज़ीरो पीरीअड मानते हुए विलम्ब ब्याज \ गणना sad अवधि में नहीं की जाएगी। Page 0
इस आदेश का उल्लंघन ooo भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:- /अ ( भानु प्रताप सिंह ) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 2986 4