Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepa Luthra v. Project Category-Un-Register PATEL ADVANCE JV
Complaint No. NCR144/01/69317/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench-3 Presiding: Bhanu Pratap Singh (Member) Representation For the complainant: Ms. Oraja, Advocate For the respondent: Ms. Sangeeta Mishra, Representative Complaint: Complainant Piyush Goyal, together with 02 other complainants, has filed suits against the respondent. The facts of these suits are the same and they rest on the same evidence. These suits relate to the respondent's project 'Neotown Phase-I'. They are therefore being disposed of by a single decision. Complaint NCRI44/02/70758/2024 of Piyush Goyal shall remain the lead case. Documentary evidence: The complainant has filed the following documentary evidence: 4. Allotment letter dated 40.06.2043 2. Payment details The respondent has filed the following documentary evidence: 4. Written statement (pratiwad-patra) 2. Letter dated 34.05.2044 sent by the Greater Noida Industrial Development Authority Particulars submitted by the parties: Serial 4: Complaint No. NCRI44/02/70758/2024 | Complainant: Piyush Vishnoi | Allotment letter date: 40-06-2043 | Possession term: 40+6 months / unit D-4 / 4705 (possession date: 0.04.207 [?]) | Amount paid: Rs. 47,45,084/- Serial 2: Complaint No. NCRI44/07/78454/202 | Complainant: Atul Dixit | Allotment letter date: 05-05-2046 | Possession term: 40+6 months / unit F-4 | Amount paid: Rs. 3,24,443/- (05-03-2020 [?] 902)
Serial 3: Complaint No. NCRI44/04/69347/2024 | Complainant: Deepa Luthra | Allotment letter date: 02-04-2044 | Possession term: 30+6 months / unit F-[?] | Amount paid: Rs. 28,29,290/- (02.04.204 [?] 502) In brief, the complainant's case is that the complainant booked unit number D-4/4705 in the project [?]4600705/[?] (Phase 4), Gautam Buddh Nagar, operated by the respondent, and paid Rs. 47,45,084/- to the respondent for it. The complainant has requested possession and interest for the delayed period. In the written statement filed by the respondent, it is stated that the project was delayed for various reasons, including that construction work was affected by the NGT order dated 08.::.20I6, and from 04.44.2048 to 26.42.2048, and that construction work again remained obstructed from 26.40.2049 to 06.42.2049. The respondent also states that during COVID-49, 485 days, namely from 25.03.2020 to 25.09.2020, construction work of the project remained closed. The respondent further says that it will complete construction work in the project and hand over possession of the complainant's unit by 34.03.2022. Because construction was stayed under the order passed by the Hon'ble Supreme Court, the respondent has requested that interest for the delayed period from 08.40.2040 to 26.4.20i5 not be granted.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर सुनवाई पीठ-3 fe परिवाद संख्या ae | का नाम सं. 4 WARSIR44 / 02 / 70758 / 2024 पीयुष faz 2 नीआर444 / 07 / 78454 / 202 अतुल दीक्षित 3 fla 744 /04 / 69347 / 2024 दीपा लुथरा बनाम पटेल एडवांस जेवी पता- एस-406 ग्रेटर कैलाश 2, नई दिल्ली. ................. प्रतिवादी पीठासीन : भानु प्रताप सिंह (सदस्य) प्रतिनिधित्व परिवादी की ओर से : सुश्री ओरजा, अधिवक्ता प्रतिवादी की ओर से : सुश्री संगीता मिश्रा, प्रतिनिधि परिवाद : परिवादी पीयूष गोयल के साथ 02 अन्य परिवादीगण द्वारा प्रतिवादी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन वादों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह वाद प्रतिवादी की परियोजना "Neotown Phase-I" से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय ,से इनका निस्तारण किया जा रहा el कक | वाद Wo एनसीआर।44 /02/70758 ,// 2024 पीयूष गोयल अग्रणी वाद रहेगा। ए8९ 4 अभिलेखीय साक्ष्य:- परिवादी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये गये है- 4. आवंटन पत्र दिनांक 40.06.2043 2. भुगतान विवरण प्रतिवादी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये गये
है- 4. प्रतिवाद-पत्र 2. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा प्रेषित पत्र दिनांक 34.05.2044 पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवरण:- परिवाद संख्या परिवादी का पत्र आवंटन | अधिपत्य दिये | यूनिट | भुगतान की गयी सं. नाम पत्र जाने की तिथि | संख्या | धनराशि रु0 4 | waRiienei44 / 02 / 70758 / 2024 | पीयुष विश्नोई | 40-06-2043 40+6 Month/ D-4 रु0 47,45,084 /— 0.04.207 4705 2 | vatiemes44 /07 /78454/202 | अतुल दीक्षित | 05-05-2046 40+6 Month/ F-4/ रु0 3,24,443/— 05-03-2020 902 3 | wrtieme4a /07 /6937 // 2024 | दीपा लुथरा 02-04-2044 30+6 Month F-/ रू0 28,29,290 /— 02.04.204 502 (क) (ख) संक्षेप में परिवादी का कहना है कि प्रतिवादी द्वारा संचालित परियोजना ॥४६०070५/॥ (Phase 4) गौतमबुद्धनगर में इकाई संख्या डी-4,/4705 बुक कराया जिसके एवज में परिवादी ने प्रतिवादी को Go 47,45,084 //- भुगतान किया था। परिवादी ने कब्जा तथा विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया है। प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में यह अंकित किया गया है कि परियोजना विभिन्न कारणों से विलम्बित रही जिसमें एनजीटी द्वारा Page 2
पारित आदेश दिनांक 08.::.20I6 एवं दिनांक 04.44.2048 से 26. 42.2048 तक परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा एवं पुनः दिनांक 26.40.2049 से 06.42.2049 तक निर्माण कार्य में बाधा बनी रही। प्रतिवादी का यह भी कथन है कि कोविड-49 के दौरान 485 दिन जो कि दिनांक 25.03.2020 से 25.09.2020 तक परियोजना के निर्माण कार्य बन्द रहे। प्रतिवादी का यह भी कहना है कि वह परिवादी को परियोजना में निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 34.03.2022 तक अधिपत्य प्रदान कर देंगे। प्रतिवादी द्वारा मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशानुसार निर्माण कार्य पर रोक होने के कारण दिनांक 08.40.2040 से 26.4.20i5 तक विलम्बित अवधि का ब्याज न दिये जाने अनुरोध किया है। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवाद पत्र में संलग्न प्रति दाखिल करते हुए यह भी कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 34.05.2044 को Ho सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए आवंटित भूमि पर यथास्थिति बनायी गयी जिस कारण परियोजना का निर्माण कार्य विलम्बित रहा एवं जिसके उपरान्त दिनांक 26.:4.20i5 को Ao सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थगन हटाया गया। अतः प्रतिवादी का यह कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है जिसे भविष्य में जल्द ही पूर्ण कर लिया जायेगा एवं प्रतिवादी की इकाई का अधिपत्य दिनांक 34.03.2022 तंक दे दिया जायेगा। SIT को BT व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विरचित किये गये :- बिन्दु teri: क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित है ? बिन्दु संख्या 2: क्या परियोजना विलम्बित है ? Page 3 \ /
बिन्दु संख्या 3: क्या परिवादी इकाई के अधिपत्य के समय विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं0 4 प्रतितदी की ओर से प्रतिवादपत्र में उल्लिखित किया गया कि एन.जी.टी के आदेश द्वारा भू-जल निकासी पर प्रतिबन्ध लगाना, नोट बंदी एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित RA आदेश के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। प्रतिवादी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,/ 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में अभिनिर्धारित किया गया है:-
7747, On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were legal impediments in the completion of projects within the period given in the flat-buyers agreement during the period from 2077-735, The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by this Court in 2073 in Savitri Devi v. State of U.P. (205) 7 SCC 27. There was no interim stay granted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was Page 4
no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 2077 to 2075 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers' agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि af 2044 से वर्ष 205 के मध्य निर्माण कार्य पर कोई we आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित किया गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2044 से वर्ष 205 के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। जहाँ तक किसानों का उग्र vet की बात है, वह निराधार है। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 2044 से वर्ष 2045 के बीच कोई फोर्स मैज्योर नहीं था। इसके अतिरिक्त इसी आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर t40 9 फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:-- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature.
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स V: वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का Page 5 लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या 2 wach पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से विदित हुआ कि परिवादी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 40. 06.2043 को उक्त इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 40 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात दिनांक 44.04.2047 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादपत्र में दिनांक 34.03. 2022 तक परिवादी को इकाई का अधिपत्य दिये जाने का तथ्य अंकित है जबकि परिवादी को दिनांक 44.04.207 तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त हो जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है। तदनुसार वाद बिन्दु संख्या 2 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 3 : परिवादी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 40.06. 2043 को vat इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 40 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात दिनांक 44.04.2047 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादपत्र में दिनांक 34.03.2022 तक परिवादी को इकाई का अधिपत्य दिये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। इस प्रकार परिवादी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है।
इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बाम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स asada प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मं याचिका में माननीय उच्च द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 6 "Section 76(4/(8) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा sat धनराशि का उपभोग किया गया है। इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,//2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"The period of Interest should close on April 20/6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para Page 7 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व अधिपत्य ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी./सी. सी अथवा अधिपत्य किये जाने की तिथि तक, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें | जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (ea ,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ii) ¥ wher के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:-
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Page 8 Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को टा॥२+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
सूच्य है कि भारत सरकार के कार्यालय-ज्ञाप संख्या: 0- 7024/230/20]8-Housing-UD/EFS-9056405, दिनांक 43 मई, 2020 के प्रस्तर-6 में कोविड-49 (Corona Virus Disease) को प्राकृतिक आपदा /महामारी मानते हुये इसे (Force Majeure) घोषित किया गया है। विदित है कि भू सम्पदा विनियामक प्राधिकरण की धारा-6 में (Force Majeure) को परिभाषित करते हुये प्राकृतिक आपदा को एक आधार माना गया है। इन परिस्थितियों में चूँकि सम्प्रवर्तक / विकासकर्ता अपनी परियोजनाओं को समय से पूर्ण करने में असमर्थ है। अतः दिनांक 25.03.2020 से 25.09.2020 तक के निर्माण Page 9 कार्य पूर्ण करने,/पंजीकरण अवधि को 6 माह बढाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत संप्रवर्तक / विकासकर्ता आवंटी से उक्त अवधि अर्थात 25.03.2020 से 25.09.2020 तक का कोई विलम्ब ब्याज नही प्राप्त करेगा और न ही आवंटियों को कोई ब्याज दिया जायेगा। TEAR वाद बिन्दु संख्या 3 निर्णीत की जाती है। विश्लेषण :- पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट है कि विचाराधीन इकाई के सम्बंध में परिवादी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 40.06.2043 को उक्त इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके प्रस्तर-2ए के अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 40 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात दिनांक 44.04.2047 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ।
प्रतिवादी की ओर से दिये गये प्रतिवादपत्र में दिनांक 34.03.2022 तक इकाई का अधिपत्य उपलब्ध कराये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। इस प्रकार कोविड-49 की द्वितीय लहर को दृष्टिगत रखते हुए 3 माह का अतिरिक्त समय देते हुये परिवादी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। नैसर्गिक न्याय के fier के अनुसार एवं प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को के नीर क्षीर विवेक पर आधारित परिशीलन एवं विश्लेषण से पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है परिवादी को इकाई का अधिपत्य व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश (क) प्रतिवादी परिवादी को आवंटित मूल इकाई का अधिपत्य ओ. सी/सी.सी के साथ दिनांक 30.06.2022 तक उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें | Page 0 (ख) प्रतिवादी विलम्बित अवधि के सम्बंध में ब्याज दिनांक 44.04.2047 से 30.04.20i6 तक अनुबंध /आवंटन पत्र में अंकित ब्याज दर देय होगा तत्पश्चात् दिनांक 0:.05.20i6 से ओ.सीसी.सी प्राप्त होने या ऑफर ऑफ पोजेशन जो बाद में हो की तिथि तक MCLR +% की दर से प्रमोटर द्वारा दण्ड ब्याज / penal interest परिवादी को भुगतान किया जाएगा। प्रतिवादी द्वारा ब्याज /दण्ड की इस धनराशि को अधिपत्य दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित करते हुये अवशेष बची धनराशि प्रतिवादी द्वारा परिवादी को भुगतान की जाएगी।
परिवादी द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो परिवादी बकाया धनराशि प्रतिवादी को भुगतान करें। परिवादी द्वारा जो धनराशि विलम्ब से भुगतान की गयी है तो उस स्थिति में रेश अधिनियम की धारा 2(Za)(ii) के अधीन प्रतिवादी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु परिवादी द्वारा ब्याज MCLRH% की दर से अधिक देय नहीं होगा। अन्य परिवादीगण के प्रकरण में आवंटन/अनुबन्ध के अनुरूप SRI गणना की जायेगी। कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुये लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुये दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09. 2020 तक परिवादी की ओर से समय से भुगतान न किये जाने तथा प्रतिवादी द्वारा परियोजना पूर्ण करने में किये गये विलम्ब के सम्बंध में विलम्ब ब्याज की गणना var अवधि में नहीं की जाएगी। Page 4 इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लंघन उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:- । deer” ( भानु प्रताप सिंह) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 2