Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ashivani v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/01/68918/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2022-03-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, [?]-169, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddh Nagar-204308. Hearing Bench-04 (formerly Bench-04-A) Shri Sanjay R. Bhusareddy, Hon'ble Chairman Complaint No.: NCRI44/0I/6898/202] Ashwini Versus La Residentia Developers Pvt. Ltd. Decision and Order under Sections 38, 40(2) and 63 The complainant's complaint was presented for final arguments through video conferencing on 07-06-2024. On being called, the complainant appeared in person. The opposite party/builder was absent. The file was reserved for order on 07-06-2024 itself. The main objective of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2006 [as it appears] is to protect the interests of consumers in the real estate sector and to ensure the speedy disposal of disputes. To achieve this objective, the Authority has been given responsibilities and powers under the RERA Act. The functions of the Authority are mentioned in Section 34(8) of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 206 [as it appears]. Section 34(8) provides as follows: "34(g) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;" Section 38 of the RERA Act gives the Authority the power to impose penalty or interest, where the promoter has violated the obligations placed on it, under the Act and the rules and regulations made under it. Section 38 reads as follows:
"38. (1) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." Section 40 of the RERA Act reads as follows: "40. (7) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Authority, as the case may be, under this Act or the rules and regulations made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue.
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, va-t69, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04-ए) श्री संजय आर. भूसरेड्डी, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/0I/6898/202] अश्विनी बनाम ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-38, 40(2) एवं 63 प्रार्थी , शिकायतकर्ता का परिवाद अंतिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 07-06-2024 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर weit / शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी / बिल्डर अनुपस्थित। प्रकरण में पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 07-06-2024 को ही सुरक्षित की गयी। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2006 का मुख्य उद्देश्य यह है कि भू-सम्पदा सेक्टर में उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण किया जाए तथा विवादों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। इस उददेश्य की पूर्ति हेतु प्राधिकरण को रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दायित्व तथा शक्तियाँ प्रदान की गयी हैं। धारा-34(8), भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 में प्राधिकरण के कृत्यों का उल्लेख किया गया है। धारा-34(8) में निम्नलिखित प्राविधान हैः- "34(g) - to ensure compliance of its regulations or orders or directions made in exercise of its powers under this Act;" धारा-38, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 & प्राविधान के अनुसार प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्रोमोटर द्वारा उस पर डाली गयी बाध्यताओं का उल्लंघन किया जाता है, तो प्राधिकरण इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों एवं विनियमों के अधीन पैनालटी या ब्याज अधिरोपित कर सकता है। धारा-38, रेरा अधिनियम निम्नवत् है:-
"38. (I) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, in regard to any contravention of obligations cast upon the promoters, Page | of 8 E-Court the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure, (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that— (a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." रेरा अधिनियम की धारा-40 निम्नवत् है:- 40. (7) If a promoter or an allottee or a real estate agent, as the case may be, fails to pay any interest or penalty or compensation imposed on him, by the adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Authority, as the case may be, under this Act or the rules and regualtions made thereunder, it shall be recoverable from such promoter or allottee or real estate agent, in such manner as may be prescribed as an arrears of land revenue.
(2) If any adjudicating officer or the Regulatory Authority or the Appellate Tribunal, as the case may be, issues any order or directs any person to do any act, or refrain from doing any act, which it is empowered to do under this Act or the rules or regulations made thereunder, then in case of failure by any person to comply with such order or direction, the same shall be enforced, in such manner as may be prescribed. धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 में प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि यदि प्रोमोटर प्राधिकरण के आदेश का अनुपालन करने में असमर्थ रहता है, तो प्राधिकरण प्रोमोटर के विरूद्ध प्रोमोटर की भू-सम्पदा परियोजना की अनुमानित लागत का 05 प्रतिशत तक पैनाल्टी लगा सकता है। धारा-63 निम्नवत है:- Page 2 of 8 E-Court “63. If any promoter, who fails to comply with, or contravenes any of the orders or directions of the Authority, he shall be liable to a penalty for every day during which such default continues, which may cumulatively extend up to five per cent., of the estimated cost of the real estate project as determined by the Authority.”
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि धारा-40, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2006 के sears के अन्तर्गत आता है, जो कि भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण से सम्बन्धित है तथा धारा-63, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 के अध्याय-8 के अन्तर्गत आता है, जोकि अपराध, शास्तियाँ और न्यायनिर्णयन से सम्बन्धित है। उपरोक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह अधिकार दिया गया है कि प्राधिकरण प्रोमोटर द्वारा आदेशों का अनुपालन न करने पर धारा-40 के अन्तर्गत अपने आदेशों का क्रियान्वयन कराए तथा धारा-63 के अन्तर्गत प्रोमोटर पर अर्थदण्ड लगाए। प्राधिकरण दोनों कार्यवाही एक साथ कर सकता है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेरा पोर्टल के माध्यम से आदेश क्रियान्वयन कराये जाने हेतु आवेदन किया गया, जिस पर प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी करते हुए दिनांक 45--06-2022 तक पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 3—-04-2022 का अनुपालन कर, अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी प्राधिकरण द्वारा कारण दर्शाओ नोटिस, दिनांक 24-06-2022 को जारी करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 40-07-2022 तक उक्त आदेश का अनुपालन कर, अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिये गये, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या दाखिल नहीं किया गया है।
प्राधिकरण द्वारा धारा-63 के अन्तर्गत नोटिस जारी की गयी, जिसके क्रम में पीठ द्वारा सुनवाई दिनांक 20-09-2022, दिनांक 28-44-2022, दिनांक 24-04-2023, दिनांक. 28-03-2023,. दिनांक. 04-05-2023, .. दिनांक. 05-06-2023, दिनांक 49-04-2024, दिनांक 05-04-2024 एवं दिनांक 07-06-2024 को की गयी। विपक्षी द्वारा अपनी लिखित अनुपालन आख्या, दिनांक 20-05-2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि परियोजना के फेज़-04 में कुल-48 टॉवर्स (टॉवर-4 से 48 तक) हैं, जिसमें t408 यूनिटस् हैं। var टॉवर्स में से 2 टॉवर्स का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है और अवशेष cad का ओ.सी. प्राप्त किये जाने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। जिन टॉवरों का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, उसमें यूनिटों का कब्जा दिया जा रहा है और वर्तमान में 4260 यूनिटों का कब्जा दिया जा चुका है। परियोजना के फेज़-02 में Ga- cial (टॉवर-49 से Page 3 of 8 E-Court
29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा अर्थात् दिनांक 33-42-2024 तक। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त कोर्ट रिसिवर की देखरेख में प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यूनिट का निर्माण कार्य पूर्ण कर जून, 2024 या उससे पूर्व कब्जा प्रदान कर दिया जायेगा। विपक्षी द्वारा प्रार्थी, शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु कई बार अनुरोध किया गया, परन्तु प्रार्थी द्वारा अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते By, me / शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में सचिव, रेरा द्वारा पारित आदेश, दिनांक 49-04-2023 की प्रति दाखिल की गयी है।
विपक्षी की उपरोक्त लिखित अनुपालन aren के विरूद्ध प्रार्थी/ शिकायतकर्ता द्वारा अपना लिखित जवाब, दिनांक 22-02--2024 एवं दिनांक 02-04--2024 दाखिल करते हुए, विपक्षी द्वारा अनुपालन आख्या में अंकित किये गये समस्त तथ्यों का खण्डन किया गया है और कहा गया कि पीठ द्वारा धारा-3 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 34-04-2022 के किसी भी प्रस्तर का विपक्षी द्वारा अभी तक कोई अनुपालन नहीं किया गया। प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा सबवेंशन स्कीम के अन्तर्गत प्रश्नगत यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.38,64,262 /— थी, जिसके सापेक्ष प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा कुल W.37,75,389 /— की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा पक्षकारों के मध्य फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट, दिनांक 29-04--2045 को निष्पादित कराया गया, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा 48 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा नहीं दिया गया है। पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 34-0:-2022 के अनुपालन में विपक्षी द्वारा एम.ओ.यू, दिनांक 09--06-2045 के अनुसार प्री-ई.एम.आई. का भुगतान न किये जाने की स्थिति में mel शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अप्रैल, 20i8 से दिनांक 06-03-2024 तक लगभग रू.42,70,035 /- की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 07--03-2024 को ऑफर ऑफ पोजेशन ua प्रेषित करते हुए, अंतिम धनराशि रू.6,88,873,/- एवं अन्य चार्जेज़ रू.25,000,//- का भुगतान उक्त पत्र जारी होने के 30 दिन के अन्दर करने हेतु कहा गया। अतः प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 34-04-2022 का पूर्ण रूप से अनुपालन कराये जाने का अनुरोध किया गया है।
Page 4 of 8 प्रार्थी द्वार अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र, दिनांक 07-03-2024 की प्रति, टैक्स Esa, समरी ऑफ ई.एम.आई. की प्रति आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। मैंने प्रार्थी/ शिकायतकर्ता के cat को विस्तार से सुना तथा अभिलेख पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का wee परिशीलन किया। प्रशनगत शिकायत के सम्बन्ध में पीठ द्वारा ues के अन्तर्गत दिनांक 34-04--2022 को निम्न आदेश पारित किये गये:- 7. विपक्षी को आवदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के फ्लैट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर (दिनांक ३7-098--2022 तक HA/AA सहित कब्जा देना छुनिश्वित करें और देय VERT शुल्क WT कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें/
2 विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 00--.07-2079 से ओसी,सी सी प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की (तिथि जो भी बाद में et तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+ WATT ब्याज अदा करना सुनिश्चित Fe] ब्याज की यह धनराशि BHT भुगतान की देय धनयाथि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टियत रखते हुए दिनांक 25-03-2020 से [दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब eg ब्याज की गणना नहीं की जायेगी/ साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि as area (Over Dues) & तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेश अधिनियम 2076 की धारा cay) के अनुसार यदि WT AT होने के बाद कोर्ड ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से ग्रोमोटर द्वारा लिया जाता & तो उसी दर से ब्याज ग्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा/ अतः विलम्बित अुयतान पर शिकायतकर्ता द्वार भी ॥#2#+7 ग्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय Bri) यदि इससे अधिक दर से aie धनराशि रेश लागू होने के ब्राद आवंटी से विलम्ब हेतु ली TH है तो विलग्ब्रित अवधि eg ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह उभय पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित VIANA दिनांकित 09--06--2075 के अनुसार ग्री-ई एमआई का भुगतान कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को करें तथा यदि & x Page 5 of 8 E-Court oe पूर्व में किसी किश्त का भुगतान नहीं किया यया & तो उस्तका समायोजन कब्जा ऑफर करते समय करना छुनिश्चित Fe...”
उपरोक्त आदेश से यह स्पष्ट है कि पीठ द्वारा विपक्षी को दिनांक 34--03--2022 तक प्रश्नगत यूनिट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देते हुए, रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा देय विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करने हेतु आदेशित किया गया था, जिस पर विपक्षी द्वारा अपनी लिखित अनुपालन आख्या, दिनांक 20--05-2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि परियोजना के फेज-02 में कुल-44 टॉवर्स (टॉवर-49 से 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड अर्थात् festa 34-72-2024 तक यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा।
विपक्षी द्वारा अपने कथन में यह भी कहा गया है कि मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त कोर्ट रिसिवर की देखरेख में प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यूनिट का निर्माण कार्य पूर्ण कर जून, 2024 या उससे पूर्व कब्जा प्रदान कर दिया जायेगा, fort oe weit / शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 34-04-2022 के अनुपालन में विपक्षी द्वारा एम.ओ-यू, दिनांक 09-06-2045 के अनुसार प्री-ई.एम.आई. का भुगतान न किये जाने की स्थिति में प्रार्थी,/ शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं अप्रैल, 2048 से दिनांक 06-03--2024 तक लगभग रू.42,70,035 //-- की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 07-03-2024 को ऑफर ऑफ पोजेशन पत्र प्रेषित करते हुए, अंतिम धनराशि रू.6,88,873 /- एवं अन्य चार्जेज़ रू.25,000//- का भुगतान Vat पत्र जारी होने के 30 दिन के अन्दर करने हेतु कहा गया। अतः प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों का उल्लेख करते हुए, पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 34--04--2022 का पूर्ण रूप से अनुपालन कराये जाने का अनुरोध किया गया है। चूंकि प्रार्थी,शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट संख्या: i403, टॉवर-28 से सम्बन्धित है, जिसके सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा कहा गया है कि परियोजना के फेज-02 में कुल-44 टॉवर्स (टॉवर-49 से 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा अर्थात् दिनांक 34-42--2024 तक।
इसके अतिरिक्त प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा पत्रावली पर उक्त परियोजना "La Residentia", जिसका पंजीकरण संख्या: UPRERAPRI9357 में सचिव, रेरा द्वारा अधिनियम की धारा-06 सपठित धारा-08, धारा-07 तथा उ.प्र. रेरा नियमावली के नियम--07 के अन्तर्गत पारित आदेश दिनांक 49-0:-2023 की प्रतिलिपि दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ संख्या: 04 पर निम्नवत् उल्लिखित है :- Page 6 of 8 E-Court “HIER ERT समस्त Gad अभिलेखों एवं writer को मौखिक अभिकथनों पर मा उच्चतम न्यायालय के निर्णय दिनांक 20-05-2022, PT अधिनियम तथा TH. रेश नियमावली के ग्राविधानों तथा प्राधिकरण स्तर पर परियोजनाओं के पंजीकरण (विस्तार हेतु निर्धारित व्यवस्थाओं के आलोक में were विचार किया गया तथा आवंटियों के हितों का संरक्षण छुनिश्चित करने एवं ty अधिनियम के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अधिनियम की ध्षार--06 सपठित I-08 तथा 37 एवं उम्र रेर नियमावली के नियम-67 में WaT शक्तियों का उपयोग करते हुए परियोजना का पंजीकरण निम्नवत विस्तारित करने का निर्णय लिया यया:- (=) प्राधिकरण द्वारा परियोजना का पंजीकरण विस्तार दिनांक 30-06-2025 तक सैद्धांतिक wT से अनुमन््य किया गया. WY यह अ्रतिबन्ध लगाया गया कि आरम्भ में परियोजना का विस्तार प्रमाण-पत्र मात्र 06 mE अर्थात दिनांक 30-06-2023 के लिए निर्गत किया जाएगा और परियोजना में निर्माण तथा विकास कार्य संतोषजनक होने पर अग्रतर पंजीकरण विस्तार प्रमाण पत्र 06-06 माह के Aaa पर जारी किए OE |...”
उपरोक्त आदेश के अनुसार प्रश्नगत परियोजना का पंजीकरण विस्तार, दिनांक 30-06-2025 तक सैद्धांतिक रूप से अनुमन््य किया गया है। दूसरी ओर से विपक्षी द्वारा अपनी लिखित अनुपालन aren में कहा गया है कि जून, 2024 + 06 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा अर्थात् दिनांक 33-42-2024 तक। अतः उपरोक्त समस्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा अभी तक पीठ द्वारा पारित आदेश, दिनांक 34-04-2022 का पूर्ण रूप से अनुपालन नहीं किया गया है। वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा दिनांक 34-42-2024 तक प्रश्नगत यूनिट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्धानुसार पूर्ण कर, यूनिट का भौतिक कब्जा दिये जाने की सूचना, आदेश, दिनांक 33-04-2022 के अनुसार अंतिम अकाउन्टस् Sea कर “रेरा पोर्टल” पर अपलोड नहीं की जाती है, तो दिनांक 34--42-2024 के बाद प्रार्थी / शिकायतकर्ता द्वारा रू40,//- के नॉन जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर नोटरी (Notarised) शपथ-पत्र के माध्यम से सचिव, Rr को विपक्षी द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध न कराने की जानकारी दी जायेगी, तदोपरान्त सचिव, रेरा पीठ द्वारा धारा-34 के अर्न्तगत पारित आदेश, दिनांक 34-0:-2022 H प्रस्तर-02 एवं प्रस्तर-04 के अनुसार विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज एवं प्री-ई.एम.आई. की धनराशि हेतु, वसूली प्रमाण-पत्र जारी करायें, जिसके उपरान्त यह पत्रावली भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के नियम-24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत यूनिट के भौतिक कब्जे की कार्यवाही हेतु, मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष संदर्भित की जाये। Page 7 of 8 E-Court
यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी /“ प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 33--04--2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक: 30--07-2024. Page 8 of 8