Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ashivani v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/01/68918/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2022-03-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Hearing Bench-04A Order under [?] Shri Rajeev Kumar, Hon'ble Chairman Complaint No.: (2)44/0/689] 8/202] Ashwini Versus La Residentia Developers [?] The complaint application has been instituted by the complainant against the opposite party, seeking offer of possession together with interest for the delayed period, and a direction to the opposite party to pay EMI until the date of offer of possession. In brief, the complainant's statement is that they booked Unit [?]—T-28/403 in the opposite party's project, La Residentia. The total price of the unit was Rs. 38,64,262/-, against which the complainant has paid Rs. 34,75,389/-. The opposite party has not yet offered possession of the unit, but the opposite party stopped paying the pre-EMI from April 2048, whereas the opposite party was to pay the EMI until the date of offer of possession of the unit. The complainant has therefore requested that possession be offered together with interest for the delayed period, and that the opposite party be directed to pay the EMI until the date of offer of possession. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of the allotment-cum-flat buyer agreement dated 29.04.2075, the tripartite agreement dated 29.04.2075, the home loan letter and the account statement.
The opposite party filed a counter-reply dated 43.04.2024 and a revised counter-reply, stating that the Authority allotted Plot No. [?]-06, area 97,226.62 sq. m., which was divided and allotted to M/s La Residentia Developers [?] as Plot No. [?]-06, area 80026.62 sq. m. The project was launched on 46.03.2044. The project has 39 towers in total. Phase-4 of the project has 48 towers (Tower-4 to [?]) with 4,408 units. Of these, OC has been obtained for 42 towers, and an application for OC for the remaining towers has been made before the Greater Noida Industrial Development Authority. Possession is being given in the towers for which OC has been obtained, and at present possession of 4480 units has been given. Phase-2 of the project has 44 towers (Tower-49 to 29), where finishing work is going on, and possession of the unit will be given in June 2022 + 6 months grace period. Phase-3 of the project has 40 towers (Tower-30 to 39), where finishing work is going on, and possession of the unit, with all facilities, will be given by December 2022 + 6 months grace period.
ह॥ उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए आदेश अन्तर्गत emis श्री राजीव कुमार, माननीय अध्यक्ष शिकायत संख्या :- (२44/0/689] 8/202] अश्विनी बनाम ला रेजिडेन्सिया डेवलपर्स wo feo प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा ऑफर सहित विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने, विपक्षी को कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान" करने के लिए निर्देशित किये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना La Residentia में यूनिट Wea—-T-28/403 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 38,64,262/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 34,75,389 /- रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा ऑफर नहीं किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा अप्रैल 2048 से प्री--ई.एम.आई. का भुगतान करना बन्द कर दिया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान किया जाना था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा ऑफर सहित विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने, विपक्षी को कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन कम फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 29.04.2075, त्रिपक्षीय अनुबन्ध पत्र दिनांकित 29.04.2075, गृह ऋण सम्बन्धी पत्र एवं खाता विवरण की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। 9% 2
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दिनांकित 43.04.2024 एवं पुनरीक्षित प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि प्राधिकरण द्वारा प्लॉट नं०-0प्त-06, क्षेत्रफल 97,226.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया, जिसको बाटते हुए मैसर्स ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स vio feo को प्लॉट नं०-6प्त-06, क्षेत्रफल 80026.62 वर्ग मीटर आवंटित किया गया। परियोजना दिनांक 46.03.2044 को लॉन्च की गयी eft) परियोजना में कुल 39 टॉवर्स है। परियोजना के फेज़-4 में कुल 48 टॉवर्स (टॉवर-4 से is तक) हैं, जिसमें 4,408 यूनिटस् हैं। उक्त टॉवर्स में से 42 टॉवर्स का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है और अवशेष टॉवर्स का ओ.सी. प्राप्त किये जाने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जा चुका है। जिन टॉवरों का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, उसमें यूनिटों का कब्जा दिया जा रहा है और वर्तमान में 4480 यूनिटों का कब्जा दिया जा चुका है। परियोजना के फेज़-2 में कुल 44 टॉवर्स' (टॉवर-49 से 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून 2022 + 6 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। परियोजना के फेज-3 में कुल 40 टॉवर्स (टॉवर-30 से 39 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और दिसम्बर 2022 + 6 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा और सभी सुविधाओं सहित दिसम्बर 2022 तक कब्जा दे दिया जायेगा।
परियोजना विभिन्न न्यायालय के आदेशों के कारण विलम्बित हुई। दिनांक 49.07.2044 से दिनांक 24.08.2042 तक निर्माण कार्य बन्द रहा। इस अवधि में माननीय सर्वोच्च न्यायालंय के समक्ष किसानों द्वारा कई Re याचिकायें योजित की गयी। मार्च 2043 के बाद निर्माण कार्य धीमी गति से शुरू हुआ। मार्च 204 से वर्ष 2043 तक निर्माण कार्य की गति बहुत धीमी रही। अन्ततः दिनांक 44.05.2045 को माननीय सर्वोच्च. न्यायालय द्वारा भूमि अधिग्रहण को Re याचिका संख्या-4506 / 2045 “सावित्री देवी बनाम Goo सरकार एवं आदि“ में स्वीकृति दी TH! ऐसे में 4 वर्ष विलम्ब को शून्य पीरियड माना जाना चाहिए। विपक्षी की परियोजना रेरा में पंजीकृत है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23.07.2049 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने क। निर्देश दिया। वर्तमान में कम्पनी यूनिटों का छांटने में लगी है, ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का अनुपालन किया जा सके | विपक्षी कंपनी ने Re याचिका संख्या o40/20:7 “eA चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य" में एक हस्तक्षेप आवेदन दायर किया, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कम्पनी ला रेजिडेन्सिया को दिनांक 44.40.2049 के आदेश के माध्यम से किसी भी संपत्ति को अलग करने से रोक दिया। अतः विगत 4 माह से इसकी पुनर्विक्रय पर रोक के कारण कंपनी,” परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव on 3
पड़ा है और इसने कंपनी को संकट में डाल दिया है, इस कारण कंपनी का नकदी प्रवाह भी प्रभावित होता है। इस सुस्त कारोबारी माहौल के साथ कंपनी, परियोजना को और अधिक प्रभावित किया है, फिर भी कंपनी निर्माण कार्य को प्रारम्भ करने का प्रबंधन कर रही है, निषेधाज्ञा आदेश के कारण निर्माण धीमा हो गया है, अनुपालन बाधा आदेश में विपक्षी ने पहले ही एक हलफनामा दायर किया है। परियोजना में फिनिशिंग का कार्य तीव्र गति चल रहा है और दिसम्बर 2022 तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दे दिया जायेगा। शिकायतकर्ता द्वारा सबवेंशन स्कीम के अन्तर्गत उनकी परियोजना के टॉवर-प-28 के 44वें तल पर फ्लैट संख्या-728/403 बुक कराया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा 3,86,458 ,/“-- रूपये की धनराशि का भुगतान स्वयं किया गया और 27,88,934 /— रूपये की धनराशि का भुगतान बैंक द्वारा ऋण के रूप में किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट की कुल कीमत 38,64,262/— रूपये + कर आदि के सापेक्ष 3,75,380/— रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया। अनुबन्ध दिनांक 29.04.205 के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह + 6 माह ग्रेस पीरियड दिया जाना था। यदि यूनिट का कब्जा दिये जाने में देरी की जाती है, तो वह अनुबन्ध के प्रस्तर-49(०) के अनुसार क्षतिपूर्ति अदा करेगें। *
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस परियोजना, “ला रेजिडेन्सिया” में, आम्रपाली समूह की “इक्विटी” होने के आधार पर विपक्षी को 632 फ्लैट सौंपने के निर्देश दिये गये, जिस पर विचार करने के लिए विपक्षी ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन दायर किया है। “ला रेजिडेन्सिया” को स्वतंत्र परियोजना के रूप में मानने और सभी समर्पित किए गए 632 फ्लैटस् के निर्माण एवं भूमि की लागत की एवज़ में उन्हें रु. 445 करोड़ विपक्षी के पक्ष में दिए जाने चाहिए। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा समुचित आदेश पारित किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रश्नगत प्रकरण में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23.07.2049 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। विपक्षी द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शिकायतकर्ता का फ्लैट माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधीन 632 यूनिटों में से है अथवा नहीं। इसके अतिरिक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिविल अपील संख्या-940,/2047 "बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य" में आई.ए. नं0-46886 / 2048, आई.ए. नं0-409882 / 2020, आई.ए. नं0--444865 / 2020, आई.ए. नं0--453344 / 2049, आई.ए. नं0-420307 // 2020, आई.ए. नं०-423299 /2020 एवं आई.ए. नं0--6397 // 2024 (लॉ रेसीडेन्सिया प्रोजेक्ट के सम्बन्ध में) में दिनांक 29.06.2024 को पारित आदेश में उ0प्र0 रेरा को आदेश पारित करने में स्थगन नहीं लगाया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण लगभग 2 वर्ष विचारार्थ था तथा आम्रपाली ग्रुप के 632 wey के लिए Q¢ 4 पृथक अनुश्रवण व्यवस्था के अतिरिक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अन्तिम आदेश में वर्तमान प्रमोटर्स द्वारा ही अब परियोजना पूर्ण की जानी है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दिनांकित 45.44.2024 दाखिल करते हुए तथ्यों की पुनरावृत्ति की गयी है और कहा गया है कि सबवेंशन स्कीम के अन्तर्गत 24 माह का भुगतान किया जाना था और यदि विपक्षी फ्लैट का कब्जा देने में विफल रहता है, तो अतिरिक्त प्री-ई.एम.आई. का भुगतान विपक्षी द्वारा किया जायेगा। विपक्षी द्वारा प्री-ई.एम.आई. का भुगतान 24 माह + 9 माह 533 माह किया गया है। एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.20i5 & WaR-5 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत का भुगतान -करने के उपरान्त ही उक्त एम.ओ.यू. मान्य है, परन्तु प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए उक्त एम.ओ.यू. दिनांकित 09,.06.20i5 मान्य नहीं है। अतः विपक्षी द्वारा कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि का ब्याज दिनांक 29.04.20i5 + 42 माह + 6 माह ग्रेस पीरियड + 33 माह प्री-ई.एम.आई. के मद में किये गये भुगतान को जोड़ते हुए अदा करने के लिए तैयार हैं। विपक्षी द्वारा कथन के समर्थन A एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.2045 की प्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के cat ot सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2. अनुबन्धानुसार बिल्डर का प्री-ई.एम.आई. के भुगतान का उत्तरदायित्व कब तक है ? . a) क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4
बिन्दु संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। पे विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना विभिन्न न्यायालय के आदेशों के कारण विलम्बित हुई। मार्च 2044 से वर्ष 2043 तक निर्माण कार्य की गति बहुत धीमी रही। अन्ततः माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भूमि अधिग्रहण को fe याचिका संख्या-4506 /20i5 “सावित्री देवी बनाम उ0प्र०0 सरकार एवं आदि“ में स्वीकृति दी गयी। ऐसे में 4 वर्ष विलम्ब को शून्य पीरियड माना जाना चाहिए। यद्यपि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या निर्माण पर कोई स्थंगनादेश था तथापि प्रस्तुत प्रकरण में अनुबन्ध वर्ष 2047 का है एवं तब तक भूमि सम्बन्धी प्रकरण निर्णीत हो चुके थे। इस सम्बन्ध में अनुबन्ध के WeT-9(a) निम्नलिखिल eat है:-
496)... That the Developer shall complete the development/construction of the flat within. 42 months Jrom the date of signing of agreement which may very for + 6 months. That the Developer shall not be held responsible or liable for not performing any of its obligations or undertakings provided for in this Agreement if such performance is prevented, delayed or hindered by act of God, fire, storm, flood, explosion, war, riot, terrorist act, sabotage, court cases, injunctions not within the reasonable control of the Developer. The completion date is subject to force majeure conditions. No claim by way of damages/ compensation shall lie against the Developer in case of delay in handing over the possession on account of the force majeure condition and the Developer shall be entitled to a reasonable extension of time for the delivery of possession of the flat to the allottee. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43029 // 4985 “एम. सी. मेहता बनाम भारत सरकार” में पारित आदेश दिनांक 04.44.2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है :- With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities’ including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They pis
have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place. We direct that construction, demolition and activities be stopped forthwith as well as garbage burning. In case, any person is found in construction and demolition activity and garbage burning in Delhi and NCR region, he/she shall be penalized. Any person is doing construction and demolition activity in violation of this order, shall be penalized with Rs.l Lac for such activity. For garbage burning he/she shall be penalized with Rs.5,000/- and besides liable for violation of the order passed by this Court to be dealt with in accordance with law. इसके अतिरिक्त उपरोक्त सिविल अपील संख्या-43029 / 4985 में पारित आदेश दिनांक 09.42.2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है :- In the affidavit dated 05.2,.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
#॥|2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction. activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more." Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as ms a = quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04.:4.20i9 से दिनांक 44.02.2020) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 09.2.2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04.44.209 से दिनांक 09.2.209) एवं 33 दिन (66+2) (दिनांक 40.42.2049 से दिनांक 44.02.2020 तक Ua 6 बजे से सुबह 6 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। अतः उपरोक्त उल्लेखित आदेशों के कम में कुल 68 दिनों में निर्माण प्रभावित रहा। विपक्षी ऐसी दशा में कुल 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण आंशिक रूप से लाभ पाने का अधिकारी है। समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) @ प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता के अतिदेय पर कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदूनुसार बिन्दु dea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि अनुबन्धानुसार बिल्डर का प्री-ई.एम.आई. के भुगतान का उत्तरदायित्व कब तक है ? यह बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी: द्वारा अप्रैल 2048 से प्री-ई.एम.आई. का भुगतान करना बन्द कर दिया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान किया जाना था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। Ou इस पर विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि सबवेंशन स्कीम के अन्तर्गत 24 माह का भुगतान किया जाना था और यदि विपक्षी फ्लैट का कब्जा देने में विफल रहता है, तो अतिरिक्त प्री-ई.एम.आई. का भुगतान विपक्षी द्वारा किया जायेगा। विपक्षी द्वारा प्री-ई.एम.आई. का भुगतान 24 माह + 9 माह 533 माह किया गया है। एम.ओ.यू. दिनांकित 0906205 के प्रस्तर-5 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत का भुगतान करने के उपरान्त ही उक्त एम.ओ.यू मान्य है, परन्तु प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए var vasa, दिनांकित 09.06.2045 मान्य नहीं है। अतः विपक्षी द्वारा कहा गया है कि वह शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि का ब्याज दिनांक 29.04.20i5 + 42 माह + 6 माह ग्रेस पीरियड + 33 माह प्री-ई.एम.आई. के मद में किये गये भुगतान को जोड़ते हुए अदा करने के लिए तैयार हैं। उभय val के मध्य हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय अनुबन्ध दिनांक 29.04.2045 के पृष्ठ संख्या-4 पर अंकित प्रस्तर-3 निम्नलिखित उल्लेखित है :-
"The housing loan advanced to the Borrower by DHFL shall be repayable by the Borrower by way of Equated Monthly Installments (EMI). The date of commencement of EMI shall be the first day of the month follawing the month in which the disbursement of the loan will have been completed and consequently the due date of payment of first EMI shall be as per the terms of the loan agreement executed by the Borrower. Till the commencement of EMI the Borrower shall pay Pre-EMI, which is calculated at the Rate of Interest as mentioned in the aforesaid loan agreement. Under the Scheme finalized with the Developer, the Pre-EMI shall be paid by the Developer on behalf of the borrower for a limited period of Twenty Four (24) months 24 months or offer of possession / fit-out from the date of first disbursement of the loan OR till such time the Developer does not hand over possession of the residential unit/flat to the Borrower, whichever period lesser This amount may be subject to income-tax and the liability to bear lic with the Borrower." उपरोक्तानुसार विपक्षी द्वारा सबवेंशन स्कीम के अन्तर्गत प्री-ई.एम.आई. का भुगतान 24 माह की अवधि या कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि,/फिट आऊट या कब्जा दिये जाने की तिथि, जो भी कम हो, तक किया जाना था, परन्तु इसके उपरान्त पक्षकारों के मध्य दिनांक 09.06.20:5 को एक एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित हुआ। छ। उभय पक्ष a हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.20i5 पर अंकित प्रस्तर-3 एवं 4 निम्नलिखित उल्लेखित है :-
"३, That this agreement is executed between the parties only for the purpose of “No Pre-EMI till 24 months or till the date of offer of possession/ fit-out whichever is earlier" scheme and this MOU shall be in addition to and form an integral part of booking form, Allotment Letters, FBA and other documents _an_may_be required to be signed with the buyer. All terms and conditions, except herein, shall be governed by the terms and conditions of the Allotment Letter, FBA and company policies & other documents. 4. That the tenure of this subvention scheme, as approved by concerned bank/financial institution is 24 months. The Developer expects to offer possession of the booked unit to the Buyer by that time, However if due to any reason, the possession offer of the booked unit gets delayed, then the Developer undertakes to pay the EMI only to the Buyer even after 24 months. The payment of EMI shall continue till offer of possession Letter with regard to the booked flat is issued to the Buyer."
उपरोक्त से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्री-ई.एम.आई. का भुगतान कब्जा ऑफर किये ज़ाने की तिथि तक किया जाना है। प्रश्नगत्र प्रकरण में विपक्षी द्वारा कहा गया है कि एम.ओ-यू. दिनांकित 0906.20i5 के प्रस्तर-5 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत का भुगतान करने के उपरान्त ही उक्त THY मान्य है, परन्तु प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। इसलिए उक्त एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.20i5 मान्य नहीं है, लेकिन विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि शिकायतकर्ता द्वारा 90 प्रतिशत से कम धनराशि का भुगतान किया गया हो। ऐसे में विपक्षी का यह तर्क स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है कि उभय पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.20:5 की शर्तें प्रभावी नहीं है। प्रकरण में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा ऑफर नहीं किया गया है। वर्णित स्थिति में विपक्षी उभय पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.2045 के अनुसार प्री-ई.एम.आई. का भुगतान कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को करें तथा यदि कोई पूर्व में किसी किश्त का 2 १0 भुगतान नहीं किया गया है, तो उसका समायोजन कब्जा ऑफर करते समय करना सुनिश्चित करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3 निस्तारण बिन्दु संख्या-3 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यदि नहीं तो क्या अनुतोष अनुमन्य होगा ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्तागण पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा ऑफर नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा ऑफर सहित विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 23.07.209 को 632 यूनिटों को आम्रपाली ग्रुप को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। वर्तमान में कम्पनी यूनिटों का छांटने में लगी है, ताकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का अनुपालन किया जा सके। विपक्षी द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि शिकायतकर्ता का फ्लैट माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधीन 632 यूनिटों में से है अथवा नहीं। इसके अतिरिक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिविल अपील संख्या-940 ,/2047 "बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य" में आई.ए. Ho-t68:86/20I8, आई.ए. नं0-409882 / 2020, आई.ए. नं0-444865 / 2020, आई.ए. नं0-453344 ,/2049, आई. ए. नं0--420307 / 2020, आई.ए. नं0-423299 / 2020 एवं आई.ए. नं0--6397 / 2024 (लॉ रेसीडेन्सिया प्रोजेक्टं के सम्बन्ध में) में दिनांक 29.06.2024 को पारित आदेश में उ0प्र0 WS आदेश पारित करने में wea नहीं लगाया है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण लगभग 2 वर्ष विचारार्थ था तथा आम्रपाली ग्रुप के 632 Wey के लिए पृथक अनुश्रवण व्यवस्था के अतिरिक्त वर्तमान प्रमोटर्स द्वारा ही अब परियोजना पूर्ण की जानी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि परियोजना के फेज़-2 में got टॉवर्स (टॉवर 49 रो 29 तक) हैं, जिसमें फिनिशिंग कार्य चल रहा है और जून 2022 +.6 माह ग्रेस पीरियड में यूनिट का कब्जा दे दिया wT OL i2 रेरा एक्ट की धारा 48 (4) F प्राविधान है कि :-
Section 76 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give posteusession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: : Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. पत्रावली पर विपक्षी द्वारा दाखिल अनुबन्ध दिनांक 29.04.20i5 के प्रस्तर-9(9) में निम्नलिखित उल्लेख किया गया है :- /9(9)... That the Developer shall complete the development/construction of the flat within 42 months from the date of signing of agreement which may very for + 6 months.
अतः उपरोक््तानुसार शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि 29.04.2045 से 42 + 6 माह (ग्रेस पीरियड) अर्थात् दिनांक 29.04.209 तक फ्लैट का कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह भी विचारणीय है कि प्रकरण वर्ष 2047 से दिनांक 29.06.2024 | 42 के बीच माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचारणीय रहा। इस दृष्टि से परियोजना अत्यधिक विलम्बित श्रेणी- में नहीं कही जा सकती। इसके अतिरिक्त फोर्स मैज्योर के मद में विपक्षी कुल os दिन की अवधि के लिए लाभ पाने का अधिकारी है। (जैसा कि निस्तारण बिन्दु संख्या-4 में वर्णित है|) जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं0० 6649-50 ,// 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 29.04209 + 68 दिन अर्थात् दिनांक 07.07.2049 से ओ.सी»सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि - "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to Diy 43 withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable, "
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(28) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause— (7) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के » 44 प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में add हेतु प्राविधानित है कि:-
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home Ioan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश I, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के फ्लैट की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.03.2022 तक ail. सी/सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय CEI शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 07.07.2049 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर ,शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह
px 45 धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी | साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Aza) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि ae उभय पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. दिनांकित 09.06.2045 के अनुसार प्री-ई.एम.आई. का भुगतान कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता को करें तथा यदि कोई पूर्व में किसी किश्त का भुगतान नहीं किया गया है, तो उसका समायोजन कब्जा ऑफर करते समय करना सुनिश्चित करें | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये।
यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। कि | Qe दिनांक :- y “) / 2022 नह, गी मीट (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण