Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Nasimuddin Ansari v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/01/1257/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2021-01-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Bench: [?] Proceedings under Section 63. Present: Smt. Kalpana Mishra, Member Complaint No.: NCR44/0/4257/2020 Naseemuddin Ansari Versus M/s La Residentia Developers Pvt. Ltd. [?] This file has been presented for proceedings under Section 63 of the Act and other relevant provisions, for violation of an earlier order passed in the matter. In the complainant's complaint, the Bench had passed the following orders on 46.42.2020: 4. The opposite party is directed to ensure that it gives possession of the complainants' unit, after completing all facilities as per the allotment letter/agreement and after adjustment as per paragraph 2 of the order, by issuing a demand letter, along with OC/CC, on or before 34.2.202; and to get the registry executed as per rules after receiving the stamp duty payable.
2. The opposite party shall ensure that it pays the complainant interest at the rate of MCLR+[?] percent per annum for the delayed period, from 43.02.2044 to 30.04.20i6, at the rate of Rs.5/- per square foot per month, and from 07.05.20i6 till OC/CC is obtained, or till the electrical safety certificate, fire safety certificate, structural certificate and lift installation certificate are obtained along with OC/CC, or 30 days after the application for OC/CC, or as per the Uttar Pradesh RERA circular dated 04.09.2049, or the date on which possession is offered, whichever is later. The amount of this interest shall be adjusted in the final payment amount. If the amount of interest is more than the amount payable, it shall be returned to the complainant. Keeping in view the force majeure period, interest shall not be calculated for the delay in the project from 25.03.2020 to 25.09.2020, nor shall interest for this period be taken from the complainant towards any additional liability. In the case of the second complainant, the calculation shall be made in accordance with the agreement in the manner stated above.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ- कार्यवाही अन्तर्गत धारा-63 उपस्थिति :-- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या -—NCR44/0/4257/2020 नसीमुद्दीन अंसारी बनाम aad ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स wo feo यह पत्रावली पूर्व में पारित आदेश के उल्लंघन एवं अधिनियम की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही किये जाने हेतु पेश की गयी है। शिकायतकर्ता की शिकायत में पीठ द्वारा दिनांक 46.42.2020 को निम्नवत् आदेश पारित किये गये थे :- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट को आवंटन पत्र /अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर एवं आदेश के प्रस्तर-2 के अनुसार समायोजन के उपरान्त मांग पत्र जारी कर ओ.सी. /सी.सी. सहित दिनांक 34.2.202 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 43.02.2044 से दिनांक 30.04.20i6 तक 5/— रुपये प्रति वर्गफूट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 07.05.20i6 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा इलैक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट, लिफ्ट इंस्टालेशन सर्टिफिकेट सहित ओ.सी. //सी.सी. के लिए आवेदन के 30 दिन बाद या उत्त्तर प्रदेश 'रेरा' के परिपत्र दिनांक 04.09.2049 के अनुसार अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता को MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की री
जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिरिक्त देयता के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। दूसरे शिकायतकर्ता के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। विपक्षी का निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2(28)0) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ॥४८7.२+ प्रतिशत है। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में ' प्रतिपादित farm के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की - धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। दिनांक 07.04.2022 को शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्थना पत्र देते हुए सूचित किया गया कि प्रोमोटर / विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 46.42.2020 का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके क्रम में विपक्षी को दिनांक 44.04.2022 को पत्रांक संख्या-4232 /रेरा,/ अनु0नोटिस / 2024-22 के
माध्यम से नोटिस जारी करते हुए सूचित किया गया कि वे दिनांक 30.04.2022 तक अनुपालन आख्या उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी। aif विपक्षी को पुनः दिनांक 07.02.2022 को कारण दर्शाओ नोटिस (पत्रांक संख्या-4530 /यू.पी.रेरा // 2020-24) के माध्यम से जारी करते हुए उन्हें सूचित किया गया कि वे आदेश दिनांक 46.42.2020 की अनुपालन आख्या दिनांक 25.02.2022 तक निश्चित रूप से उपलब्ध कराएं, परन्तु विपक्षी द्वारा कोई अनुपालन आख्या उपलब्ध नहीं करायी गयी। पत्रावली को धारा-63 के अन्तर्गत सुनवाई हेतु दिनांक 20.05.2022 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें उभयपक्ष उपस्थित हुए। दिनांक 20.05.2022 को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया कि पीठ द्वारा पूर्व में पारित आदेश दिनांक 46.42.2020 का विपक्षी द्वारा अनुपालन नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि उक्त परियोजना से सम्बन्धित माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 29.06.2024 को आदेश पारित किया गया है, जिसके अनुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति की गयी है, जिसे परियोजना से सम्बन्धित अग्रिम कार्यवाही किये जाने के दायित्व सौंपे गये हैं और परियोजना का समस्त निर्माण कार्य दिसम्बर, 2022 तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,// 2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में आई.ए. नं0--46886 /2048, आई.ए. नं0-409882 // 2020, आई.ए. नं0-44865 / 2020, आई.ए. नं0-453344 / 2049, आई.ए. नं0-420307 / 2020, आई.ए. नं0-423299 // 2220 एवं आई.ए. नं0--6397 / 2024 (ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स कै सम्बन्ध में) में दिनांक 29.06.2024 को पृष्ठ संख्या 4१ में प्रस्तर 22 व 23 में निम्नलिखित अवधारणा दी गयी है :- "22. Even if the entire project cannot be made over to the NBCC for the reasons stated above, another aspect of the matter that may require consideration is whether the component representing 632 flats could still be made over to the NBCC. However, that course would also not be feasible as those 632 unsold flats are spread over in various towers; some of them are in Phase one while the others are in Phase two and three. 23. An important aspect of the matter is that unlike all the other projects of the Amrapali Group which were made 3 9०५ over to the NBCC, the development with respect to the instant project has always been an on-going process..." इसी आदेश के पृष्ठ संख्या 43 पर निम्न आदेश पारित किया गया है — iii. all the amounts received by way of such transactions of sale are credited to a separate account completely under the control of the Receiver and/or his nominee;
iv. the cost of the construction with respect to 632 flats, upon due certification by the Chartered accountants of the * Company and to the satisfaction of the Receiver, shall be made over to the Company; and v. it shall however be open to the Receiver to give such advances towards the construction of these 632 flats from and out of the amounts deposited in the account as specified hereinabove, depending upon the stage and progress of construction. उपरोक्त उललेखित आदेश में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह पाया गया है कि परियोज़ना के 632 Wea कई टावरों में स्थित हैं और यह ford एक टावर में एक साथ नहीं हैं। परियोजना में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति की गयी है, जिसके संरक्षण में परियोजना के 632 फ्लैट्स के निर्माण हेतु धनराशि प्राप्त की जा रही है और दिसम्बर, 2022 तक परियोजना को पूर्ण किये जाने हेतु समयावधि प्रदान की गयी है। ऐसे में उक्त पत्रावली को दिसम्बर, 2022 तक abeyance में रखा जाता है। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। दिनांक:- 24/08 / 2022 कल्पना मिश्रा (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण