Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amritraj Singh Negi v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/01/116734/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-11-08
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता पीयूष oid एवं ऐश्वर्या कौशिक कांत के साथ 05 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना THE DOWNTOWN से सम्बन्धित हैं। अत: एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत 2886 | क्रम सं. शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या | कुल मूल्य | जमा धनराशि | I. | एिटार44/0/6639/2024 | पीयूष कांत एवं ऐश्वर्या | DT/KG/834 | 20,93,925 /- | 2,24,034 /- कौशिक कांत 2. | पिटारा44/076599/2024 मोहम्मद जावेद VE | DT/KG/425 | ,52,425/— | ,34,808 / - सुनील तनेजा ३... फटारा4407रह्राउ:2024 प्रदीप स्वरूप एवं. | 07/76/50 | 9,07,007— | 5,89,605 / - गरिमा स्वरूप 4. | पिटार44/0/6724/2024 | नेहा गर्ग एवं नीशू गुप्ता | छ/767945 | ॥,2,425/- | 0,45,398 /- 5... पटारा440776580/2024 सुकन्या sea एवं. | फाशरठ/203 | 43,4,650 /- | 72,8,452 /- अर्जुन बहल | | इटार44/076734/2024 अमृतराज सिंह नेगी | DT/KG/948 | 40,32,650 /- | 39,82,847 /— एवं श्रीमती पूजा नेगी बनाम प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किये गये हैं।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में दिनांक 44.08.204 को 8" फ्लोर पर यूनिट संख्या-07/76/834 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कूल मूल्य 20,93,925 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 24,4403/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने में 4 वर्ष का विलम्ब किये जाने के बावजूद भी उक्त यूनिट का कब्जा ऑफर नहीं किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा ATT विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की ost के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस fear जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में ast के अन्तर्गत लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-6०एां४ Grand में दिनांक 44.08.2044 को 8" फ्लोर पर यूनिट GIA-DT/KG/834 बुक करायी गयी थी। अनुबन्ध पत्र के अनुसार यूनिट का कुल मूल्य 20,93,925 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 2,4,03 /- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, केवल 05 प्रतिशत धनराशि का भुगतान, जोकि कब्जा प्रस्ताव-पत्र HIT किये जाने के दौरान किया जाना था, अवशेष है। अनुबन्ध के अनुसार फ्लैट का कब्जा कास्टिंग राफ्टिंग की तिथि से 05 वर्ष के भीतर प्रदान किया जाना था। परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 02.08.20:4 को प्रारम्भ हुआ, ऐसे में उपरोक््तानुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.209 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। हाल ही में विपक्षी द्वारा दिनांक 29.42.2023 को इंटीरियर एवं फिनिशिंग कार्य के लिए कब्जा प्रस्ताव पत्र के साथ 6,92,045 /- रुपये की धनराशि का अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जोकि अवैध और निराधार है तथा आवंटन पत्र दिनांक 8.09.20:4 की शर्तों के विरुद्ध है, जिसके लिए शिकायतकर्ता को बाध्य नहीं किया जा सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का अधिभोग प्रमाण-पत्र (ओ.सी.) प्राप्त नहीं किया गया है और न ही परियोजना से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये गये हैं, जिस कारण विपक्षी द्वारा प्रेषित अन्तिम मांग, जो कब्जा दिये जाने पर देय है, अवैध aN ee गा on kn —_ ses ee _ Page 2 2
है और स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के om | परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में 04 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी समस्त धनराशि 2,I4,03l/—- रुपये i3% वार्षिक ब्याज की दर से वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त 5,00,000/- रुपये की धनराशि मानसिक उत्पीड़न हेतु दिलाये जाने का भी अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन लिखित शिकायत, मांग पत्र, ई-मेल पत्राचार, प्रश्नगत शिकायत में श्रीमती ऐश्वर्या कौशिक कांत का नाम सह-आवंटी के रूप में अंकित किये जाने हेतु प्रार्थना पत्र दिनांक 08.02.2025, आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांकित 44.08.2044, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, प्रत्युत्त, लिखित बहस आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गई हैं।
विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता को परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट We-pT/KG/834 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित t4.08.2074 के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को 6 माह की aque अवधि सहित दिनांक 44.02.2024 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा बिल्डर IRR WHE की सहमत शर्तों के अनुसार शिकायतकर्ता को ई-मेल के माध्यम से दिनांक 27.42.2023 को इंटीरियर एवं फिनिशिंग कार्य के लिए कब्जा प्रस्ताव पत्र के साथ मांग पत्र प्रेषित किया गया, परन्तु शिकयतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण विलम्बित हुआ, जिसके लिए विपक्षी द्वारा नोएडा विकास प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका संख्या-4547,// 2048 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को chat डीड निष्पादित की गयी तथा नोएडा प्राधिकरण की “शून्य अवधि” नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक oF 0.208 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 0202.20:8 को विपक्षी
पीठ-? ले का. गौतमदुद्धनगर Page 3 Che
द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश = किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.0.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.40.2043 तक और दिनांक 29.0.2043 से 9.08.20i5 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी है। नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या-नोएडा वाणिज्य / 2020 / 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 74.08.20:3 से दिनांक t90820i5 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि एवं माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु t6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, मांग पत्र व कब्जा प्रस्ताव पत्र दिनांकित 28.42.2023, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.2048, नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.03.2020 की प्रति, रेरा कार्यालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.08.202 की प्रति, रेरा प्राधिकरण की पीठ-4ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.42.2020 आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी कंपनी ने उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन पत्र दिनांक 44.08.20:4 एवं शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि को अपने लिखित उत्तर में स्वीकार किया गया है और विपक्षी द्वारा फ्लैट आवंटन अनुबन्ध 'के अनुसार दिनांक 44.02.2024 तक शिकायतकर्ता को sat यूनिट का कब्जा Ey प्रदान किया जाना था, जैसा कि विपक्षी कंपनी द्वारा अपने लिखित उत्तर में y > 4 i the-2 2 ela गौतमबुद्धनगर/ & Page 4
स्वीकार किया गया है। परियोजना का निर्माण कार्य दिनाक ०४९७००७५ को... गया है। परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 02.08.2044 को प्रारम्भ किया गया था और वर्ष 2049 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर अगस्त, 20:9 तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी कंपनी द्वारा वर्तमान शिकायत दर्ज किये जाने की तिथि तक भी उक्त यूनिट का न तो ओ.सी. सहित कब्जा का प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया है और न ही परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है, जिसे पूर्ण करने में 04 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य को पूर्ण करने एवं कब्जे में हुए विलम्ब के लिए “शून्य अवधि” एवं एन.जी.टी. निर्माण प्रतिबंध और कोविड-49 लॉकडाउन का अनुचित रूप से लाभ उठाये जाने का दावा किया गया है, जोकि निराधार है। शिकायतकर्ता द्वारा wre इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाम ट्रेवर डेलिमा मामले में दिए गए निर्णय का सन्दर्भ दिया है, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि प्रमोटर, आवंटी की सहमति के बिना निर्माण एवं कब्जे की अवधि को एकतरफा नहीं बढ़ा सकते हैं और आवंटी से किये गये वादे के अनुसार समय-सीमा का अनुपालन करना प्रमोटर की जिम्मेदारी है तथा ऐसा न करने पर आवंटी भुगतान रोक सकते हैं अथवा जमा धनराशि वापसी की मांग कर सकते हैं। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को जीरो पीरियड एवं एन.जी.टी. का लाभ न दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया है :- «a शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलायी जा सकती है ? निस्तारण बिन्दु den-ot
निस्तारण बिन्दु संख्या-04 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जा सकती है ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिवचनों के आधार पर आधारित है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है ? शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-९४७8। Grand में दिनांक 74.08.20i4 को 8" फ्लोर पर यूनिट संख्या-07/60/834 बुक करायी गयी थी। अनुबन्ध पत्र के अनुसार (आओ यूनिट का कुल मूल्य 20,93,925/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता 2,4,03 /— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, केवल os प्रतिशत का भुगतान, जोकि कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्राप्त किये जाने के दौरान Page 5
किया जाना था, अवशेष है। अनुबन्ध के अनुसार फ्लैट का कब्जा कास्टिंग राफ्टिंग की तिथि से 05 वर्ष के भीतर प्रदान किया जाना था। परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 02.08.204 को प्रारम्भ हुआ, ऐसे में उपरोकतानुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2049 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। हाल ही में विपक्षी द्वारा दिनांक 29.42.2023 को इंटीरियर एवं फिनिशिंग कार्य के लिए कब्जा प्रस्ताव पत्र के साथ 6,92,045 /- रुपये की धनराशि का अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जोकि अवैध और निराधार है तथा आवंटन पत्र दिनांक t8.09.20i4 की शर्तो के विरुद्ध है, जिसके लिए शिकायतकर्ता को बाध्य नहीं किया जा सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का अधिभोग प्रमाण-पत्र (ओ.सी.) प्राप्त नहीं किया गया है और न ही परियोजना से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त किये गये हैं, जिस कारण विपक्षी द्वारा प्रेषित अन्तिम मांग, जो कब्जा दिये जाने पर देय है, अवैध है और स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में 04 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी समस्त धनराशि 2,4,03/—- रुपये 8% वार्षिक ब्याज की दर से वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त 5,00,000 /- रुपये की धनराशि मानसिक उत्पीड़न हेतु दिलाये जाने का भी अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित उत्तर दाखिल करते हुए कहा | है कि शिकायतकर्ता को परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या-07/<0/834 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन/अनुबन्ध पत्र दिनांकित 74.08.20:4 के प्रस्तर-26 के अनुसार शिकायतकर्ता को 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 74.02.202' तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर aie की सहमत शर्तों के अनुसार शिकायतकर्ता को ई-मेल के माध्यम से दिनांक 27.42.2023 को इंटीरियर एवं फिनिशिंग कार्य क॑ लिए कब्जा प्रस्ताव पत्र के साथ मांग पत्र प्रेषित किया गया, परन्तु शिकयतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण विलम्बित हुआ। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 20:7 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार ae Page 6 पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य = एवं माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु i:6 दिन की we दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन/»अनुबन्ध पत्र दिनांकित 44.08.2044 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्ष के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-09 के कब्जे वाले प्रस्तर-26 में उल्लेख किया गया है कि विपक्षी कंपनी द्वारा आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 5 वर्ष एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 43.02.2020 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना / टॉवर का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका हो और सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया जा चुका हो। प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अभी तक उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस की गयी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि का उक्त अवधि में उपभोग किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस प्राप्त किये जाने हेतु प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी है। समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों में यह उचित होगा कि विपक्षी, शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस करें | इस सम्बन्ध में रेशर अधिनियम की amis (4) § स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि :-
"Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or Page 7 =m due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." urge यदि प्रोमोटर करार के निबन्धों के अनुसार उसमें दिये गये अवधि तक समय से किसी अपार्टपेन्ट, भू-खण्ड या भवन को पूरा करने में असमर्थ रहता है या कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंटी की मांग पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो प्रकरण के अनुसार, उस अपार्टमिन्ट, भू-खण्ड या भवन के सम्बन्ध में उसके द्वारा प्राप्त धनराशि ब्याज सहित लौटाने का दायी होगा।
यदि प्रमोटर द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूर्ण नहीं कराया जाता है और आवंटियों को अनुबन्धानुसार कब्जा नहीं दिया जाता है, तो माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा इस सम्बन्ध में प्रदीप कुमार गुप्ता बनाम इरियो ta रियलटेक प्रा.लि. सी.सी. t89/20:7 4 अभिनिर्धारित किया है कि :- In my opinion, since the OPs were already in default as far as the offer of possession was concerned, when the sm 6", 7° & 8 installments were demanded, the complainants were under no obligation to pay the said installments. As far as the default in payment of the 4" installment by the complainants in CC No.!999/20I6 & CC No.2000/206 is concerned, it would be seen that the said installment was raised at the stage of casting of roof slab of the lower basement. The demand was raised about two weeks before the last date for offering possession of the flats to the said complainants. Since the construction was still at the stage of casting roof slab of SY Page 8
lower basement at that time, the complainants knew that even if they pay the 47 installment, it was impossible for the OPs to deliver possession of the apartments to them by the last date stipulated in this regard i.e. 23.0.20I7 or within six months thereafter, ie. 23.07.20l7 even if the benefit of the grace period was given to them. When a flat buyer who is saddled with a demand applicable at the stage when the construction is at a very initial stage and the demand is raised just two weeks before the last date for offer of possession, he is not expected to sink more money with the builder despite knowing that the builder will not be able to honour his contractual obligation even if the benefit of a grace period of six months which was otherwise available only in case of unforeseen circumstances, is given to him. Therefore, even the complainants in CC No.l999/20l6 & CC No.2000/206 cannot be said to be defaulters, in the sense that they would lose their legal right to claim refund of the amount paid by them and the compensation for the defect/deficiencies on the part of the builder in rendering services to them. उपरोकतानुसार यह we है कि यदि प्रोमोटर द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूर्ण नहीं किया जाता है, तो आवंटी अपने आगामी किश्तों के भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, क्योंकि बिल्डर द्वारा किये गये अनुबन्ध के शर्तों का उल्लंघन किया गया है। ऐसे में प्रोमोटर द्वारा निर्माण में किये गये विलम्ब एवं अनुबन्ध की शर्तों के उल्लंघन के लिए आवंटी उत्तरदायी नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त इस सम्बंध में स्पष्ट करना है कि उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमनन और विकास) अधिनियम की धारा-84 की उपधारा-2 के खण्ड-(च) और धारा-43 की उपधारा-2 के साथ पठित var धारा-84 की उपधारा-+ द्वारा प्रदत्त शक्तियों का अधिकार प्रयोग करते हुए दिनांक 47.:0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास), (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली (Rules), 20:8 अधिसूचित की गयी है। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय /पट्टा विलेख के प्रारूप के wu, पर 92 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) G4 में ब्याज दर wy, 5. निर्धारित है, जिसके प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- का गौतमबदुद्धनगर Page 9 9.2(i) Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest. उपरोक्त नियमावली से यह we है कि यदि परियोजना के ॥ में विलम्ब होता है, तो आवंटी द्वारा भुगतान रोक दिया जायेगा और निर्माण की स्थिति को सही करने के उपरान्त आवंटी द्वारा बिना ब्याज की शेष धनराशि का भुगतान किया जायेगा। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और न ही विपक्षी को ओ.सी. / सी.सी प्राप्त हुई है।
यह भी स्पष्ट किया जाता है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 43.02.2020 तक कब्जा दिया जाना था, जिसको विपक्षी द्वारा पूर्ण करने का दायित्व था। शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जाये। स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया और न ही विपक्षी को इस परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त हुआ है। अतः शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा-48(9)(ए) के अन्तर्गत वह परियोजना से बाहर आने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-382 /20:9 कोलकाता वेस्ट इंटरनेशनल सिटी प्रा.लि. बनाम देवाशीष wer में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "It would be manifestly unreasonable to construe the contract between the parties as requiring the buyer to wait indefinitaly for possession.by 206, nearly seven year has elapsed from the date of agreement. Even according to the developer, the completion certificate was received on 29 March 20I6. This was nearly seven years after the extended date for the handing over of possession prescribed by the agreement. A buyer can be expected to wait for possession for a reasonable period. A period of seven years is beyond what is reasonable. Hence, it would have been manifestly unfair to non-suit the buyer merely on the basis of the first prayet in the reliefs sought before the SCDRC. There was in any event a prayer for refund."
साथ ही साथ इसी क्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील y= .संख्या-42238 /20i8 पायनियर ada aes एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम राघवन में भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 0 see no illegality in the Impugned Order dated 23.0.20I8 passed by the National Commission. The Appellant — Builder failed to fulfill his contractual obligation of obtaining the Occupancy Certificate and offering possession of the flat to the Respondent — Purchaser within the time stipulated in the Agreement, or within a reasonable time thereafter. The Respondent — Flat Purchaser could not be compelled to take possession of the flat, even though it was offered almost 2 years after the grace period under the Agreement expired. During this period, the Respondent — Flat Purchaser had to service a loan that he had obtained for purchasing the flat, by paying Interest @0% to the Bank. In the meanwhile, the Respondent — Flat Purchaser also located an alternate property in Gurugram. In these circumstances, the Respondent — Flat Purchaser was entitled to be granted the relief prayed for i.e. refund of the entire amount deposited by him with Interest."
उपरोक््तानुसार दी गयी विधि व्यवस्था में गृहक्रेता को एक उचित समय तक प्रतीक्षा कराया जा सकता है व लम्बे विलम्ब की स्थिति में पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के उपरान्त भी शिकायतकर्ता जमा धनराशि पाने का अधिकारी है, क्योंकि अनुबन्ध में दी गयी अवधि के अनुसार शिकायतकर्ता को कब्जा नहीं मिला है व प्रकरण में अत्यधिक विलम्ब हुआ है। चूंकि परियोजना समय से पूर्ण नहीं की गयी है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज पाने का अधिकारी है। जहां तक शिकायकतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a Page i Ke) नगर | & penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who
has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर द्वारा wat धनराशि का उपभोग किया गया है। इसके अतिरिक्त Re संख्या-८.५० .3289/2020 दिनांक 06.02.2020 “रुद्रा बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स प्रा. लि. बनाम पूनम सूद एवं अन्य” में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2048 की प्रस्तर-9.2(8) के अनसार प्रमोटर की ओर से विलम्ब किये जाने की स्थिति में आवंटी के पास अनुबन्ध को समाप्त करने का विकल्प होगा एवं इस स्थिति में प्रोमोटर “भारतीय स्टेट बैंक” के होम लोन दर ४८,२+] प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से 45 दिनों में समस्त जमा धनराशि वापस करने के लिए उत्तरदायी होगा। साथ ही साथ उच्च न्यायालय द्वारा MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर को उचित एवं सही माना गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 7.20.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें दिये गये विक्रय ,/ पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि :-
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" Fe) oY Page 2 यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर-9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर धनराशि वापस दिलाये जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि, जमा करने की तिथि से लेकर धनराशि वास्तविक अदायगी की तिथि तक, MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें। 2. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि वह रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे | 3. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी।
4... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। (०2 पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावलियाँ दाखिल-दफ्तर हों | / ax वेंकटेश / # Jos (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 3