Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shilpa Khungar v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/01/116731/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-10-17
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Order under Section-34, Bench-2 (formerly Bench-4) Presiding Officer: Shri T. Venkatesh, Member Complaint No. NCRIL44/0/673/2024 Shilpa Khungar and Raj Kumar Arora Versus Granite Hill Properties Private Limited This complaint has been filed by the complainants against the opposite party seeking registration of the unit. In brief, the complainants state that they booked unit No. 07/76/943 in the opposite party's project THE DOWNTOWN, dated 24.05.2044, the total price of which was Rs. 23,0,000//-. Against this, they paid Rs. 2,94,500/- to the opposite party from time to time in instalments. The complainants say that the opposite party is making unjustified demands, although construction of their project has not been completed. The complainants further say that the opposite party sent a demand letter on the offer of possession for completion of finishing work, due to which the complainants have filed this complaint against the opposite party under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act. Therefore, the complainants have requested registration of the unit. In support of their statement, the complainants have filed photocopies of the application form dated 24.05.2074, a copy of the allotment/agreement letter dated 34.:0.205, receipts of the amounts deposited with the opposite party, etc.
In its reply, the opposite party stated that the complainants were allotted unit No. DIVKG/943 in its project The Downtown, against which the allotment letter dated 34.0.20i5 was executed. As per clause-26 of the allotment letter, possession of the unit was to be made available by 30.04.2024, with a grace period.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी: वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या —NCRIL44/0/673/2024 शिल्पा खुंगर एवं राज कुमार अरोड़ा बनाम ग्रेनाईट हिल प्रॉप्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या-07/76/943 दिनांकित 24.05.2044 को किया गया था, जिसकी कुल कीमत 23,0,000//- रूपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 2,94,500/— रूपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा अनुचित मांग की जा रही है, जबकि उनकी परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इसके अतिरक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पोजशन पर फिनिशिंग का कार्य पूर्ण किये जाने हेतु मांग पत्र प्रेषित किया गया था, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवेदन फॉर्म दिनांकित 24.05.2074, आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित 34.:0.205 की प्रति, विपक्षी को भुगतान की गयी जमा धनराशि की रसीदें, आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता को उनकी परियोजना The Downtown में यूनिट संख्या- DIVKG/943 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष आवंटन पत्र दिनांक 34.0.20i5 को निष्पादित किया गया था। आवंटन पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिनांक 30.04.2024 तक p— 2
उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा दिनांक 27.42.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी का कहना है कि उनकी प्रश्गनगत परियोजना का निर्माण कार्य एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये अतिकमण के कारण विलम्बित हुई है, जिसके लिए विपक्षी द्वारा नोएडा प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष fle याचिका संख्या-4547 /208 योजित किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी एवं प्राधिकरण के मध्य भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.200 को लीज निष्पादित किया था। नोएडा प्राधिकरण की शून्य अवधि निति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.208 को आवेदन किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को का्यलिय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.20i5 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 7908.20i5 तक दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। साथ ही विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 24.08.20:3 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध 8g ti6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा अपनी प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कर प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में नोएडा प्राधिकरण को प्रेषित पत्र की प्रति, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.2048, प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.03.2020 की प्रति, रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 06.06.2020 की प्रति, पीठ-4 ए द्वारा पारित आदेश आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। 3 उभयपक्ष के तर्कों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित बिन्दु विचारणीय है :- 4... क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में पंजीकृत सेल Sts निष्पादित करायी जा सकती है ? निस्तारण बिन्दु to 4 निस्तारण बिन्दु संख्या-4 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में पंजीकृत सेल डीड निष्पादित करायी जा सकती है ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा अनुचित मांग की जा रही है, जबकि उनकी परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इसके अतिरक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पोजशन पर फिनिशिंग का कार्य पूर्ण किये जाने हेतु मांग पत्र प्रेषित किया गया था, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 3i के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु अनुरोध किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता को उनकी परियोजना The Downtown में यूनिट संख्या- DIVKG/943 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष आवंटन पत्र दिनांक 34.40.2045 को निष्पादित किया गया था। आवंटन पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिनांक 30.04.2024 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा दिनांक 27.42.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को मांग पत्र प्रेषित किया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी का कहना है कि उनकी प्रश्गनगत परियोजना का निर्माण कार्य एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये अतिकमण के कारण विलम्बित हुई है, जिसके लिए विपक्षी द्वारा नोएडा प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका संख्या-4547 /2048 योजित किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की | 4
आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी एवं प्राधिकरण के मध्य भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज निष्पादित किया था। नोएडा प्राधिकरण की शून्य अवधि निति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.2048 को आवेदन किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किये जाने हेतु निर्देशित किया war) प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 79.08.20i5 तक शून्य अवधि तथा 29.0.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। साथ ही विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 20:7 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 9.08.20i5 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु t6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा अपनी प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कर प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते हैं। रेरा अधिनियम के अध्याय-3 की aRi7 की उपधारा-(3) एवं उपधारा-(2) में प्रमोटर द्वारा हक का अन्तरण (Transfer of Title) किये जाने के सम्बंध में प्रावधान दिये गये हैं, यह प्राविधान निम्न रूप से उल्लेखित है:-
[7. (0) The promoter shall execute a _ registered conveyance deed in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, and hand over the physical possession of the plot, apartment of building, as the case may be, to the allottees and the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, in a real estate project, and the other title documents pertaining thereto within 5 specified period as per sanctioned plans as provided under the local laws: Provided that, in the absence of any local law, conveyance deed in favour of the allottee or the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, under this section shall be carried out by the promoter within three months from date of issue of occupancy certificate. (2) After obtaining the occupancy certificate and handing over physical possession to the allottees in terms of sub-section (), it shall be the responsibility of the promoter to handover the necessary documents and plans, including common areas, to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, as per the local laws:
Provided that, in the absence of any local law, the promoter shall handover the necessary documents and plans, including common areas, the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, within thirty days after obtaining the occupancy certificate. wad प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रजिस्टर्ड chi /सेलडीड एवं कब्जा दिये जाने से पूर्व बिल्डिंग /अपार्टमेन्ट /प्लॉट आदि का “ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट” अपेक्षित है। बिना उक्त सर्टिफिकेट के “टाईटल ट्रान्सफर” किया जाना सम्भव नहीं है। प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा पत्रावली पर ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट की प्रति दाखिल नहीं की गयी है। अतः समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए यह उचित होगा कि विपक्षी staat सर्टिफिकेट प्राप्त करते हुए, शिकायतकर्ता के पक्ष में शीघ्र पंजीकृत सेल Se रजिस्ट्री निष्पादित करायें। dager बिन्दु wero निस्तारित किया जाता है। Ch = 6 उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 60 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से देय wera शुल्क (यदि कोई अवशेष हो) प्राप्त करते हुए, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री /पंजीकृत सेल डीड निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | | इस आदेश का veda भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 60 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता wa पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति-रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। bal W\t 9 5 ० वेंकटेश (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण