Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ravinder Thakur v. Rise Projects Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/01/116498/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-06-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar | Order under Section 34, Bench-2 (formerly Bench-4) Presiding Officer: Shri T. Venkatesh, Member Complaint No.: NCRI44/0/6498/2024 Ravinder Thakur and Nutan Thakur Vs. M/s Use Projects Private Limited The present complaint application has been instituted by the complainant against the opposite party seeking possession of the unit in question and interest for the delayed period. Briefly, the complainant's case is that the complainant booked unit no. 80008-2-74-20 in the opposite party's project Rise Resort Residences Phase-I on 27.08.2020. The total price of the unit was Rs. 64,57,000/-, against which the complainant paid Rs. 5,44,600/- to the opposite party from time to time in installments. The complainant further states that under the flat buyer agreement dated 03.09.2020, the opposite party was to make possession of the unit available on or before 34.07.2022, but the opposite party has still not handed over possession of the unit. The complainant has therefore filed this complaint under Section 34 of the RERA Act against the opposite party, seeking possession of the unit along with interest for the delayed period.
In support of the complaint under Section 34, the complainant states that the complainant paid Rs. 6,58,875/- to the opposite party on 27.08.2020 as booking amount. Thereafter, on 03.09.2020, the parties executed a flat buyer agreement for sale of the said unit, in which the opposite party assured the complainant that possession of the flat would be handed over by July 2022. Thereafter, the complainant paid Rs. 26,35,500/- to the opposite party on 44.40.2020 and Rs. 6,47,88/- on 24.05.2024. Against the total price of the unit of Rs. 64,57,000/-, the complainant paid Rs. 49,4,600/- to the opposite party. Thereafter the opposite party sent a pre-cancellation letter, following which the complainant paid Rs. ,00,000/- [?] on 24.42.2023 and Rs. ,00,000/- [?] on 22.42.2023 to the opposite party. Thus, to date, against the total price of the unit of Rs. 64,57,000,/-, the complainant has paid Rs. 5,4,600/- to the opposite party. Copies of the payment records are annexed.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी :- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या :- NCRI44/0/6498/2024 रविन्दर ठाकुर एवं नूतन ठाकुर बनाम मैसर्स Use प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase-l में दिनांक 27.08.2020 को यूनिट संख्या--80००८-2-74-20। बुक करायी गयी थी। यूनिट का कूल मूल्य 64,57,000/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 5,44,600/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 03.09.2020 के अनुसार दिनांक 34.07.2022 तक या उससे पूर्व यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में धारा-34 के अन्तर्गत विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को दिनांक 27.08.2020 को 6,58,875/- रुपये बुकिंग धनराशि के रूप में भुगतान किया गया था और उसके पश्चात् उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.09.2020 को उक्त यूनिट की बिक्री के लिए फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि जुलाई, 2022 तक फ्लैट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, तत्पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 44.40.2020 को 26,35,500/— रुपये का तथा दिनांक 24.05.2024 | Page |
को 6,47,88/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत 64,57,000/— रुपये के सापेक्ष 49,4,600/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, उसके पश्चात् विपक्षी द्वारा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, जिसके उपरांत शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.42.2023 को ,00,000/—eua तथा दिनांक 22.42.2023 को ,00,000/-eaa की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, इस प्रकार शिकायतकर्ता द्वारा आज तक यूनिट की कुल कीमत 64,57,000,/- रुपये के सापेक्ष 5,4,600 /- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिनकी प्रतियां संलग्न हैं। शिकायतकर्ता द्वारा दिसम्बर, 2022 में परियोजना का wes निरीक्षण किया गया, जहाँ शिकायतकर्ता द्वारा पाया कि परियोजना का स्ट्रक्चर पूर्ण किया जा चुका था, परन्तु जून, 2024 तक यूनिट का कब्जा मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, जबकि विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि अप्रैल, 2023 तक यूनिट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, जोकि विपक्षी यूनिट का कब्जा सौंपने में विफल रहा है। विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण किये बिना दिनांक 45.40.2023 को ई-मेल के माध्यम से फिट-आउट पत्र प्रेषित किया गया और दिनांक 46.0.2023 को अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें विलम्ब ब्याज के समायोजन के बिना विपक्षी द्वारा 8,29,50/- रुपये की धनराशि की मांग की गयी, जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 29.44.2023 को एक प्री-निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिसका शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को जवाब दिया गया और यूनिट का कब्जा दिये जाने का अनुरोध किया गया, परन्तु विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी के निर्देश पर शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.42.2023 एवं दिनांक 22.42.2023 को 2,00,000,/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता आवंटन पत्र/अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार कब्जे के वैध प्रस्ताव की तिथि पर अवशेष धनराशि 6,29,50/- रुपये का भुगतान करने के लिए तैयार है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. के साथ यूनिट का भौतिक कब्ज। एवं MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, ई-मेल पत्राचार, मांग पत्र, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 03.09.2020, दिनांक 45.40.2023 को ई-मेल के माध्यम से प्रेषित फिट--आउट पत्र, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 29.44.2023, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि का विवरण, लिखित बहस आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि विपक्षी की परियोजना ‘RISE RESORT Page 2
RESIDENCES' सेक्टर-टेकजोन-4, ग्रेटर नोएडा, रेरा में पंजीकृत है, जिसकी पंजीकरण GI-UPRERAPRI756 है। शिकायतकर्ता द्वारा उक्त परियोजना में अगस्त, 2020 में यूनिट संख्या-$४७०-2-74-20। बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.09.2020 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया था तथा शिकायतकर्ता द्वारा 50:25:25 के अनुपात में देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु भुगतान योजना का चयन किया गया। यूनिट का कुल मूल्य 64,57,000/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज तक 49,44,379/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया तथा 8,29,50 /- रुपये की धनराशि शिकायतकर्ता पर देय है। शिकायतकर्ता द्वारा बुकिंग के समय 6,27,500/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया तथा दिनांक 26.05.2024 को 29,75,000/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया, जिसे विपक्षी द्वारा स्वीकार करते हुए विधिवत् wie जारी की गईं। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.42.2023 को ,6,905/— रुपये की धनराशि एवं दिनांक 22.42.2023 को 95,238 /- रुपये की धनराशि का आंशिक भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता दिनांक 22.05.202 के मांग पत्र का अनुपालन करने में विफल रहे है तथा शिकायतकर्ता को दिनांक 42.40.2023 को फिट-आउट के लिए प्रस्ताव-पत्र जारी किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा कहा गया कि विपक्षी आवश्यक औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद यूनिट का कब्जा सौंपने की स्थिति में होगा ताकि sar यूनिट का कब्जा सुचारू रूप से प्रदान किया जा सके। फिट-आउट पत्र के साथ विपक्षी द्वारा मांग पत्र भी प्रेषित किया गया, जिसे विपक्षी द्वारा अंतिम मांग पत्र माना गया और शिकायतकर्ता से सभी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने का आग्रह किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान न करके मांग पत्र का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा द्वारा दिनांक 46.40.2023 को अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से 8,29,50/— रुपये की धनराशि का भुगतान करने का अनुरोध किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु ई-मेल के माध्यम से दिनांक 28.0.2023 को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया, जिसे बाद में दिनांक 79.7.2023 को डाक के माध्यम से प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को उक्त धनराशि का तुरन्त भुगतान करने का आग्रह किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम की धारा-9(6) का अनुपालन नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा अनुबन्ध दिनांक 03.09.2020 के नियमों एवं शर्तों के अनुसार दिनांक 29.4.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया कि वह 3 दिनों के अन्दर उपरोक्त किश्तों का भुगतान करें, ऐसा न करने पर उक्त यूनिट की बुकिंग निरस्त कर दी जाएगी, परन्तु शिकायतकर्ता प्री-निरस्तीकरण पत्र का अनुपालन करने में तथा देय धनराशि
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की तीसरी एवं चौथी किश्त 8,29,450/- रुपये का भुगतान करने में विफल रहे, जिस कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 46.42.2023 को अन्तिम निरस्तीकरण पत्र के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया, जिस कारण वर्तमान शिकायत पोषणीय नहीं है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि वर्ष 2048-2024 की अवधि के मध्य पर्यावरण प्रदूषण के कारण माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिल्ली एन.सी.आर. में समय-समय पर निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था, जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण की सामग्री उपलब्ध न होने के कारण 500 दिनों से अधिक निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ | विपक्षी का कहना है कि परियोजना में विलम्ब का कारण शिकायतकर्ता सहित कई अन्य आवंटियों द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का समय पर भुगतान न किया जाना है, जिससे परियोजना की प्रगति पूर्ण रूप से प्रभावित हुई | विपक्षी कंपनी प्रश्नगत यूनिट को निरस्त कर उ.प्र. रेरा नियमावली, 20i8 के Witte फॉर सेल दिनांकित 03.09.2020 के प्रस्तर-9.3 के अनुसार अर्नेस्ट मनी जब्त कर शेष धनराशि वापस करने हेतु तैयार है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी के अन्तर्गत नहीं आता है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत को खारिज करने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 03.09.2020, मांग पत्र दिनांकित 22.05.2024, फिट-आउट पत्र दिनांक 42.0.2023, अन्तिम मांग पत्र दिनांकित 42.40.2023, 46.40.2023, अनुस्मारक पत्र दिनांकित 28.40.2023 व 49.44.2023, प्री-निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 29.44.2023, निरस्तीकरण पत्र दिनांकित 46.42.2023, परियोजना का फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट दिनांकित 26.02.2024, लिफ्ट सेफ्टी सर्टिफिकेट दिनांकित 20.05.2024, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया कि उनके विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences ?॥३७०- में दिनांक 27.08.2020 को यूनिट WeA—Street-2-T4-20l बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 64,57,000/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके ERT 5,4,600/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। sat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनां 03.09.2020 को बिक्री अनुबन्ध निष्पादित किया Page 4
गया, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा जुलाई, 2022 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर ओ.सी./सी.सी. सहित शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा दिसम्बर, 2022 में परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया गया और विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि अप्रैल, 2023 तक यूनिट का कब्जा सौंप दिया जाएगा। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण किये बिना ही दिनांक 45.40.2023 को ई-मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता को फिट-आउट पत्र प्रेषित किया गया और दिनांक 46.40.2023 को अन्तिम मांग पत्र प्रेषित कर 8,28,50/- रुपये की धनराशि का भुगतान करने की मांग की गयी, जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 29.44.2023 को एक प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया। उसके पश्चात् विपक्षी के निर्देश पर शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.:2.2023 एवं दिनांक 22.42.2023 को 2,00,000/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा दिनांक 46.42.2023 को प्रेषित किया गया निरस्तीकरण पत्र अवैधानिक है, क्योंकि विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना को पूर्ण नहीं किया गया है तथा विपक्षी द्वारा स्वयं अपने लिखित जवाब के साथ फायर एन.ओ.सी. दिनांकित 26.02.2024, लिफ्ट सेफ्टी सर्टिफिकेट दिनांकित 20.05.2024 प्रस्तुत किये गये हैं, जोकि प्री-निरस्तीकरण पत्र व निरस्तीकरण पत्र के बाद प्राप्त किये गये हैं। अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करने के उपरान्त वैधानिक कब्जा प्रस्ताव पत्र प्रेषित किये जाने के दौरान शिकायतकर्ता से 25% धनराशि की मांग करेगा। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के ओ.सी.,/ सी.सी. के साथ यूनिट का भौतिक कब्जा एवं McLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध weal का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता द्वारा Wee प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2 क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 बिन्दु संख्या-04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा ware प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद Page 5 | | विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी को दिनांक 27.08.2020 को 6,58,875 /- रुपये बुकिंग धनराशि के रूप में भुगतान किया गया था और उसके पश्चात् उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.09.2020 को उक्त यूनिट की बिक्री के लिए फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि जुलाई, 2022 तक फ्लैट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, तत्पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 44.0.2020 को 26,35,500/— रुपये का तथा दिनांक 24.05.2024 को 6,47,I88/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत 64,57,000/— रुपये के सापेक्ष 49,44,600/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, उसके पश्चात् विपक्षी द्वारा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, जिसके उपरांत शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.42.2023 को ,00,000/—-wuey तथा दिनांक 22.42.2023 को ,00,000/-ead की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, इस प्रकार शिकायतकर्ता ERr ant तक यूनिट की कुल कीमत 64,57,000/- रुपये के सापेक्ष 5,4,600/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जिनकी प्रतियां संलग्न हैं। शिकायतकर्ता द्वारा दिसम्बर, 2022 में परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया गया, जहाँ शिकायतकर्ता द्वारा पाया कि परियोजना का स्ट्रक््चर पूर्ण किया जा चुका था, परन्तु जून, 2024 तक यूनिट का कब्जा मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी, जबकि विपक्षी द्वारा आश्वासन दिया गया था कि अप्रैल, 2023 तक यूनिट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, जोकि विपक्षी यूनिट का कब्जा सौंपने में विफल रहा है। विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण किये बिना दिनांक 45.40.2023 को ई-मेल के माध्यम से फ़िट-आउट va प्रेषित किया गया और दिनांक 46.40.2023 को अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें विलम्ब ब्याज के समायोजन के बिना विपक्षी द्वारा 8,29,50/— रुपये की धनराशि की मांग की गयी, जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 29.44.2023 को एक प्री-निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिसका शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को जवाब दिया गया और यूनिट का कब्जा दिये जाने का अनुरोध किया गया, परन्तु विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी के निर्देश पर शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.42.2023 एवं दिनांक 22.2.2023 को 2,00,000/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता आवंटन पत्र /अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार कब्जे के वैध प्रस्ताव की तिथि पर अवशेष धनराशि 6,29,:50/- रुपये का भुगतान करने के लिए तैयार है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. के साथ
Page 6 यूनिट का भौतिक कब्जा एवं MCLR+H प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा vat परियोजना में अगस्त, 2020 में यूनिट संख्या-8#००-2- 74-20। बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.09.2020 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया था तथा शिकायतकर्ता द्वारा 50:25:25 के अनुपात में देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु भुगतान योजना का चयन किया गया। यूनिट का कुल मूल्य 64,57,000 /— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज तक 49,44,379 /- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया तथा 8,29,50/- रुपये की धनराशि शिकायतकर्ता पर देय है। शिकायतकर्ता द्वारा बुकिंग के समय 6,27,500 /- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया तथा दिनांक 26.05.2024 को 29,75,000/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया, जिसे विपक्षी द्वारा स्वीकार करते हुए विधिवत् रसीदें जारी की गईं। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.2.2023 को ,6,905/— रुपये की धनराशि एवं दिनांक 22.42.2023 को 95,238 /- रुपये की धनराशि का आंशिक भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता दिनांक 22.05.2024 के मांग पत्र का अनुपालन करने में विफल रहे है तथा शिकायतकर्ता को दिनांक 42.40.2023 को फिट-आउट के लिए प्रस्ताव-पत्र जारी किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा कहा गया कि विपक्षी आवश्यक औपचारिकताओं को पूर्ण करने के बाद यूनिट का कब्जा सौंपने की स्थिति में होगा ताकि उक्त यूनिट का कब्जा सुचारू रूप से प्रदान किया जा सके। फिट-आउट पत्र के साथ विपक्षी द्वारा मांग पत्र भी प्रेषित किया गया, जिसे विपक्षी द्वारा अंतिम मांग पत्र माना गया और शिकायतकर्ता से सभी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने का आग्रह किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान न करके मांग पत्र का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा द्वारा दिनांक 46.40.2023 को अन्तिम मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से 8,29,50/— रुपये की धनराशि का भुगतान करने का अनुरोध किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु ई-मेल के माध्यम से दिनांक 28.40.2023 को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया, जिसे बाद में दिनांक 49.44.2023 को डाक के माध्यम से प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को उक्त धनराशि का तुरन्त भुगतान करने का आग्रह किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा we अधिनियम की aARIH-9(6) का अनुपालन नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा अनुबन्ध दिनांक 03.09.2020 के नियमों एवं शर्तों के अनुसार दिनांक 29.44.2023 को प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया कि वह 3 दिनों के
Page 7 अन्दर उपरोक्त किश्तों का भुगतान करें, ऐसा न करने पर उक्त यूनिट की बुकिंग निरस्त कर दी जाएगी, परन्तु शिकायतकर्ता प्री-निरस्तीकरण पत्र का अनुपालन करने में तथा देय धनराशि की तीसरी एवं चौथी किश्त i8,29,50/— रुपये का भुगतान करने में विफल रहे, जिस कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 6.2.2023 को अन्तिम निरस्तीकरण पत्र के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया, जिस कारण वर्तमान शिकायत पोषणीय नहीं है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पद्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित उल्लेखित है :- "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or it. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +49%6 unless provided otherwise under the Rules. within Sorty-five days of receiving the termination notice:
Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every manth of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within Sorty-five days of it becoming due." धारा--9.3 :- "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued eee >> बल notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination." अनुबन्ध / आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान पेमेन्ट प्लान के अनुसार किया जाना था, जिसमें बुकिंग पर 6,27,500,/- रुपये की धनराशि का भुगतान, द्वितीय किश्त बुकिंग के 45 दिनों 25,40,000 //- रुपये की धनराशि का भुगतान, तृतीय किश्त परियोजना का सुपर स्ट्रक््चर पूर्ण होने पर 45,68,750 //- रुपये की धनराशि का भुगतान, चतुर्थ किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के समय 45,68,750 ,/“- रुपये की धनराशि का भुगतान, पंचम किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के दौरान सिंकिंग फण्ड के रूप में 9t,000/— रुपये की धनराशि का भुगतान, छठवीं किश्त कब्जा ऑफर किये जाने के दौरान आई.एफ.एम.एस. के रूप में प्रतिशत 94,000 //- रुपये की धनराशि का भुगतान, किया जाना था। इसी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किया जाना था।
प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 64,57,000/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 5),4,600 //- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि लगभग 80 प्रतिशत है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध पत्र दिनांकित 03.09.2020 के अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 34.07.2022 तक पूर्ण कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर नहीं किया गया है और विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 46.42.2023 को दिया गया eS Page 9 था, जोकि अनुबन्धानुसार परियोजना पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान जाने की समयावधि के 47 माह बाद दिया गया है और न ही अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना से सम्बन्धित केवल फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट दिनांकित 26.02.2024, लिफ्ट सेफ्टी सर्टिफिकेट दिनांकित 20.05.2024 प्राप्त किये गये हैं। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी यूनिट wes निरस्त नहीं करायी गयी है। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक,अपूर्ण है। रेशा अधिनियम की ors के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण बिन्दु संख्या-02 निस्तारण बिन्दु संख्या-02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 27.08.2020 को यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.09.2020 को अनुबन्ध,/आवंटन पत्र निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 34.07.2022 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का भौतिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा t8 (॥) में प्राविधान है कि :-- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- —z—{E[“=&=E——£—{[{_{__—{[_——zz—————— Page 0 (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 03.09.2020 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसक पृष्ठ संख्या-46 के प्रस्तर-7.4 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 37.07.2022 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है।
जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 // 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल” में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 2 "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the _Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण होने में विलम्ब हुआ है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 07.08.2022 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के "नीलकमल Raced सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(za) में प्राविधान है कि — (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय // पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.26) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case Page 3 ef the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-740 / 8--3-48-65 विविध, 46 के द्वारा मॉडल wits के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specitications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" Page 4 डे क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) ® प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 frente किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. /सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय tera शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2022 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(०)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक am Page 5 दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी |
4... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तंथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5... शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता er पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। AY उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Rea