Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Tariq Khan v. Ar Landcraft LLP
Complaint No. NCR144/01/116259/2024
- Decision date
- 2026-01-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ- भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या |... | यूनिट न0 | जमा धनराशि रु0 एग्रीमेंट दू कब्जा दिये वांछित अनुतोष सं0 . सब-लीज की | जाने की तिथि तिथि I. | NCRI44/0/I6259/2024 | तारिक खान | V-4028 | Go 2,87,43,859/ | 03.07.2020 | 04.09.2024 | यूनिट का कब्जा व । न् विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम ए आर लैण्डक्राप्ट एलएलपी शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथनः है कि- विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना Park Lane- Godrej Golf Link 4 यूनिट GT v-40i8 बुक करायी गयी थी.. जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता--द्वारा>विपक्षी--को-धनराशि Go 2,87,43,859 ,/-का भुगतान किया गया। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंट टू सब-लीज, रसीदें व प्रतिउत्तर की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम * विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) | विपक्षी द्वारा जारी- रसीद संख्या..656339 03.06.2020 ¥O 5,00,000/ रसीद संख्या.657234 05.06.2020 रु०0 5,00,000/ रसीद संख्या 657775 08.06.2020 ®%O — 5,00,000 / रसीद संख्या 658586 _ |09.06.2022 ¥%O 5,00,000/ रसीद संख्या 658562 * 09.06.2020 BO 5,00,000/
रसीद संख्या 658558 09.06.2020 ®%O —5,00,000 / रसीद संख्या 659497 44.06.2020 BO 4,33,859 / रसीद संख्या 4252444 , 07.06.2022 रु0 5,00,000 / 4 रसीद संख्या 4253205 08.06.2022 रु0 5,00,000 / रसीद संख्या 4254450 09.06.2022 रु0 0,00,000 / रसीद संख्या 4266800 49.06.2022 रु0 4,94,00,000 / रसीद संख्या 4279794 29.06.2022 रु०0. 8,50,000 / wile संख्या 4288488 04.07.2022 %O —5,60,000 / रसीद संख्या 652754 _ + | 22.05.2020 %O —§,00,000 / कुल UT: ~— | Bo 2,87,43,859 / विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल की गयी जिसमें विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों को छिपाते हुए वर्तमान शिकायत दर्ज करायी गयी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 22.05.2020 को आवेदन फार्म के माध्यम से उनकी परियोजना में विला यूनिट संख्या d4-ois बुक करायी गयी थी जिसकी कुल कीमत रु0 9,96 55,703 / थी | विपक्षी द्वारा दिनांक 08.06.2020 को शिकायतकर्ता के पक्ष में आवंटन पत्र जारी किया गया जिसके पश्चात उभयपक्षों के मध्य दिनांक 0307.2020 .को सब-लीज-डीड निष्पादित हुई जिसके क्लाज-7.4 के अनुसार शिकायतकर्ता 'को आवंटित यूनिट का कब्जा 04.09.2024 तक उपलब्ध कराया जाना om |
विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी की परियोजना फोर्स भैज्योर के कारण विलम्बित हुई है। कोविड महामारी के कारण यूपी.रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 06.06.2020 को उन परियोजनाओं के लिए जिनकी पूर्णता तिथि 25.03. 2020 को या उसके बाद समाप्त हो गई थी, परियोजना पूर्णता तिथि 6 माह बढा दी गयी। इस प्रकार परियोजना पूर्ण किये जाने की तिथि 07.44.2022 से 30.04. 2023 तक विस्तार किया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि अप्रैल व मई 202। में कोरोना का द्वितीय लहर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य प्रभावितः हुआ। उपरोक्त परिस्थितियों के बावजूद विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष वांछित अनापत्ति प्रमाण प्राप्त करके दिनांक 28.04.2022 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया परन्तु ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा aia जारी नहीं किया गया है जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव जारी नहीं किया जा सका। विपक्षी द्वारा फालो अप लेने के उपरांत ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 28.05 2024 को ओ.सी जारी किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 04.07. 2024 को शिकायतकर्ता को ईमेल के माध्यम से अवगत कराया गया कि विपक्षी को 2 ता ओससी प्राप्त, हो चुका है तथा शिकायकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट or कब्जा लिये जाने हेतु भी सूचित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा लेने नहीं आये। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। ह
विपक्षी ने लिखित आपत्ति के समर्थन में आवंटन-पत्र की प्रति, एग्रमेंट हू सब-लीज डीड की प्रति, यूपी.रेरा आदेश दिनांक 06.06.2020 व 48.08.2024 की प्रति, अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांकित 28.05.2024 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। : विपक्षी द्वारा प्रकरण में कोई लिखित बहस दाखिल नहीं किया गया है। उभयप्नक्षों के cel को सुना गया।. | उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण-विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि "का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ?.. निस्तारण प्रश्न संख्या-4 प्रश्न संख्या-। इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि wifas-9 महामारी वः : अन्य फोर्स मैज़्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। . कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोंक 25.03.2020 से-6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण माज़ी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों दृष्टिगत रखते हुये fave aifis-i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न dear7 frend किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2:- प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य एग्रीमेंट ट् सब-लीज निष्पादित हुआ। शिकायतकर्ता को एग्रीमेंट टू सब लीज के अनुसार यूनिट का कब्जा सितम्बर 2024, में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। यहॉ यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रकरण में विपक्षी द्वारा दाखिल एग्रीमेंट | सब लीज पर केवल विपक्षी बिल्डर व शिकायतकर्ता द्वारा हस्ताक्षर किये wa है तथा एग्रीमेंट < wa लीज परे. रजिस्ट्रॉर के Hidatsa रजिस्ट्रर्ड होने का कोई साक्ष्य अंकित नहीं है। | ह विपक्षी का कहना है कि sas-9 महामारी व अन्य फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी तर्क प्रस्तुत किया है कि विपक्षी को 28.05.2024 को sia प्राप्त हो चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 03.07.2020 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को 04.09.2024 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इसके
अतिरिक्त विपक्षी को 28.05.2024 को परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त हुआ है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में लगभग 03 वर्ष से अधिक का विलंम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतंकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। रेरा अधिनियम की धारा-48() में प्राविधान है कि :- Section 8 (I) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed".
उपरोक्त वर्णित प्राविधान में यह स्पष्ट है कि शिकातकर्ता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा. धनराशि को ब्याज सहित वापस मांग सकते है अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा सितम्बर 202 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने लिखित आपत्ति में यह स्वीकार किया है कि परियोजना विलम्बित हुयी है। विपक्षी की ओर से ओ-सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य दाखिल किया गया है। | इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 03 वर्ष से अधिक का विलम्ब है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। अतः शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है।.इस सम्बन्ध में सिविल अपील tio 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है fe - 5 oS
"the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser’ could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था & अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। | जहाँ तक ब्याज देयता का. प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section I8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " aa: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर .ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। ह
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्गक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) Ss 6 परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- " : : . : The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee purehase of the apartm under any head whatsoever towards the ent, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान wr. दृष्टिगत. रखते हुए आवंटी को ४८,२+।प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी '४टा,९+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2
निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है।. \. विपक्षी को आदेशित किया . * आदेश जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, * शिकायतकर्ता की यूनिट siden पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी विलम्बित अवधि का ब्याज शिकायतकर्ता को दिनांक 02.09.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Bo 2,87,43,859/ पर MCLR+I- प्रतिशत. ब्याज अदा करना . भुगतान की जाने वाली - सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक fo होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस 7 . जाया की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा ‘A(zaie अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के
डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा . डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी .॥0२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का Veo भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 204 6 की धारां-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिनों में नहीं किया जाता है, a शिकायतकर्ता आदेश का क्रियान्वयन Rr प्राधिकरण के माध्यम से करा सकेंगे। + आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 8 TVS छत छछ5 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य + उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर