Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Inderpreet Singh v. Ametek Buildtech India Private Limited
Complaint No. NCR144/01/104979/2023
- Decision date
- 2026-04-22
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-3 रेक्टिफिकेशन आदेश अन्तर्गत धारा-39 शिकायत संख्या :-- $०९०-39/॥९८ट२44/0/04979/2023 अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम इंदरप्रीत सिंह पत्रावली आदेशार्थ सुरक्षित थी। शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा रेश अधिनियम की धारा-39 के अन्तर्गत संशोधन प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा उललेखित किया गया है कि रेरा अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत सुनवाई के दौरान दाखिल लिखित जवाब में त्रुटिवश वह यह अंकित नहीं कर पाये कि उनके द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष शिकायत योजित होने से पूर्व ही werd यूनिट पर तृतीय पक्ष दीपा शर्मा के अधिकार सृजित किये जा चुके है। शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उल्लेखित किया गया है कि उनके द्वारा जानबूझकर यह तथ्य पीठ से नही छिपाया गया है बल्कि त्रुटिवश यह तथ्य पीठ के समक्ष प्रस्तुत् करने में असमर्थ रहे है।
विपक्षी आवंटी द्वारा शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल की गयी है जिसमें यह उल्लेखित है कि शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पूर्ण कार्यवाही के दौरान प्रश्नगत यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये जाने का तथ्य पीठ से छिपाया गया है। विपक्षी आवंटी द्वारा उललेखित किया गया है कि शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जो अनुतोष वर्तमान शिकायत के माध्यम से चाहा गया है वह रेक्टिफिकेशन नही बल्कि अमेन्डमेन्ट है जोकि रेरा अधिनियम की धारा-39 की परिधि में नही है। अतः विपक्षी आवंटी द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल संशोधन प्रार्थना पत्र निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी आवंटी द्वारा दाखिल आपत्ति पर शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपना जवाब दाखिल किया गया है जिसमें यह उल्लेखित है कि प्रश्नगत यूनिट की रजिस्ट्री तृतीय पक्ष दीपा शर्मा के नाम पर दिनांक 43.09.2025 को प्रश्नगत प्रकरण में आदेश पारित होने से पूर्व हो चुकी है जोकि पब्लिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है। शिकायतकर्ता ait अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उललेखित किया गया है कि उनके द्वारा
प्रश्नगत प्रार्थना पत्र केवल इसलिए दाखिल किया गया है ताकि पीठ अपने आदेश के ऑपरेटिव पार्ट में यह सुधार कर लें कि प्रश्नगत यूनिट वर्तमान प्रकरण के आवंटी के नाम में पुर्नस्थापित किये जाने के लिए उपलब्ध नही है तथा कानून में भी ऐसी कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उललेखित किया गया है कि विपक्षी आवंटी के पास केवल अन्य यूनिट प्राप्त करने तथा जमा धनराशि वापस प्राप्त करने का ही विकल्प उपलब्ध है। शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा Awe, बलरामा बनाम वोलकार्ट ब्रदर व एस. नागराज बनाम स्टेट ऑफ कर्नाटका का संदर्भ अंकित किया गया है जिसमे यह निष्कर्ष दिया गया है कि गलत तथ्यों व रिकॉर्ड पर उपलब्ध मेटेरियल फैक्ट को नजरअंदाज करते हुए पारित आदेश को न्यायहित में सही किया जाना आवश्यक है। यहाँ यह स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता अमेटेक बिल्डटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्वयं दाखिल शिकायत में यह तथ्य अंकित किया गया है कि वह प्रश्नगत यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सूजित होने के तथ्य प्रस्तुत् करने में असमर्थ रहे है। शिकायतकर्ता की ओर से संशोधन प्रार्थना पत्र रेश अधिनियम की धारा-39 के अन्तर्गत दिनांक 05.0.2025 को योजित किया गया है। जबकि पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत आदेश दिनांक 09.09.2025 को पारित किया गया है। इस प्रकार शिकायतकर्ता की ओर से पस्तुत संशोधन प्रार्थना पत्र रेश अधिनियम की धारा-39 में प्राविधानित 2 वर्ष की अवधि के भीतर है।
न्यायालय द्वारा पारित अंतिम आदेश में त्रुटि परिशोधन /संशोधन हेतु भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-39 में निम्नवत् प्रावधान किया गया है :- प्राधिकरण, अभिलेखों से प्रकट किसी गलती को सुधारने की दृष्टि से, इस अधिनियम की अधीन किये गये आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय, उसके द्वारा पारित किसी आदेश को संशोधित कर सकेगा और यदि पक्षकारों द्वारा उसके ध्यान में गलती लायी जाती है तो ऐसा संशोधन करेगा। परन्तु ऐसा कोई संशोधन किसी आदेश के सम्बंध में, जिसके fase इस अधिनियम के अधीन अपील प्रस्तुत की गयी है, नहीं किया जायेगा। परन्तु यह कि प्राधिकरण अभिलेख से प्रकट किसी गलती का सुधार करते समय, इस अधिनियम के उपबन्ध के अधीन पारित उसके आदेश के सारवान् भाग का संशोधन नहीं करेगा। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया जिससे यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम की (3 209 के तहत शिकायतकर्ता अमेटेक Aosta इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पीठ द्वारा पारित 2 aie मूल आदेश के आपरेटिव पार्ट में संशोधन किये जाने का अनुरोध किया गया है। यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता द्वारा wer अधिनियम की धारा 39 के तहत जो वांछित अनुतोष चाहा गया है वह रेरा अधिनियम की धारा 39 की परिधि से बाहर है क्योंकि रेरा अधिनियम की धारा 39 में स्पष्टतः उल्लिखित है कि पीठ द्वारा अभिलेखों से प्रकट किसी गलती को ही सुधारा जा सकता है और यदि शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल संशोधन प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है तो पीठ द्वारा पारित मूल आदेश के सारवान भाग में परिवर्तन हो जायेगा जोकि रेरा अधिनियम की धारा-39 की परिधि से बाहर है।
अतः उक्त तथ्यों एवं रेरा अधिनियम की धारा 39 को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता अमेटेक festa इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की ओर से प्रस्तुत रेक्टिफिकेशन प्रार्थना पत्र दिनांक 05.40.2025 निरस्त किया जाता है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। पत्रावली दाखिल पं. काठ: To 4.2826 Slo दीपक स्वरूप WRT (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण