Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sanjay Nawani and Kajol Nawani v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/01/104761/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Present: Shri Deepak Swaroop Saxena, Member Complainants: D. Sonika Sharma and D.V. Ravi Shankar, along with 03 others versus ATS Realty Pvt. Ltd. Complaint cases (serial no. / complaint no. / complainant / unit no. / amount paid as per receipt / date of allotment / date of possession): 1. NCRI44/02/05426/2023 / D. Sonika Sharma and D.V. Ravi Shankar / unit 804 / Rs. 33,83,679 / allotment 48.44.20i5 / possession 42 months + 3 months grace period, i.e., August 209 2. Flra44/02705404/2023 / Anil Kumar Sagar / unit 233 / Rs. 46,69,48 / allotment 4.05.20i5 / possession 42 months + 3 months grace period, i.e., February 2049 3. [?]/70476II/2025 / Sanjay Navani and Kajol Navani / unit 6445 / Rs. 36,97,234 / allotment 29.06.2049 / possession 34.08.2049 4. Etar44/02705409/2023 / Sushil Kumar Gupta and Meenu Gupta / unit 3082 / Rs. 35,42,780 / allotment 07.07.205 / possession 42 months + 3 months grace period, i.e., April 209 versus Others The Complainants have filed a suit against the Respondent. The facts and evidence of all these complaints are the same. All these complaints relate to one project, ATS ALLURE. Therefore, they are being disposed of by a single decision. The file of complaint no. 78244/02/05426/2023 [?] of D. Sonika Sharma and D.V. Ravi Shankar will be the leading case.
The present complaint application has been instituted by the Complainants against the Respondent, seeking possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the leading Complainant's statement is that the units mentioned in the above table were booked in the project ATS ALLURE run by the Respondent, and against them the amounts mentioned in the table were paid to the Respondent. The Complainants say that the Respondent was to complete the project and give possession of the unit by the date mentioned in the table, but has not done so till now. Therefore the Complainants have lodged this complaint against the Respondent under Section 34 of the RERA Act. In support of their statement, the Complainants have filed photocopies of the allotment letter, statement of account and receipts.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 उपस्थिति:-- So दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायतकर्ता डी.सोनिका शर्मा व डी.वी.रवि शंकर के साथ 03 एटीएस रिएलटी प्रा0लि0 क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | कब्जा दिये जाने की सं०0 रसीद के अनुसार तिथि तिथि जमा धनराशि रु0 ], 7 NCRI44/02/05426/2023 | डी. a | 804 रु0 33,83,679 / 48.44.20i5 | 42 माह +3 माह डी.वी रवि शंकर अनुग्रह अवधि अर्थात अगस्त 209 2. फ्लरा44/02705404/2023 अनिल कुमार | 233 रु0 46,69,48 / 4.05.20i5 | 42 माह +3 माह सागर अनुग्रह अवधि अर्थात 'फरवरी 2049 3, जल्राबक0/70476॥/2025 | संजय नवानी व. | 6445 रु0 36,97,234/ 29.06.2049 34.08.2049 कजोल नवानी 4- | एटर44/02705409/2023 | सुशील कुमार गुप्ता | 3082 BO 35,42,780 / 07.07.205 | 42 माह +3 माह व मीनू गुप्ता अनुग्रह अवधि अर्थात अप्रैल 209 बनाम अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- ]7८२44/02/05426/2023 डी सोनिका शर्मा व डी.वी रवि शंकर की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। — = संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान किया गया।
शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परच्चु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीद की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या6 / 208 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्राएलि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर किया है। शिकायतकर्ता समय से धनराशि भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के Fah पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुका है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था WT फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ user जारी किया — Se 2
जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, Rete sim एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलमिबत हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की gar दर होगी ? निस्तारण प्रश्न We प्रश्न GT- इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड--49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029//4985 एम.सी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /207 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." i 3
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में aifas—t9 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस आधार पर लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदूनुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 48.4.2045 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह APE अवधि के साथ अर्थात अगस्त 2079 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न fet पीठों में वाद —_—_ FD 4 दायर किया है जो निरस्त हो चुका है परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 30.03.2022 को जारी किया गया जो अनुबंधानुसार कब्जा दिये जाने के तिथि से काफी पश्चात् का है। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को अगस्त .2049 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य var शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Ho 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over 5 नाल फू... possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " ना Seo. 6 अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 Ww के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sor के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के ue 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+i9feera की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। ” == ae उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 नवम्बर 2023 तक SA /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय erg शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 07.09.2079 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Bo 33,83,879/ पर धारक] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र, अनुबन्ध के अनुरूप उक्त तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2076 की धारा 2(28)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी शक्ल] प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के ey 8
बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। NS नर ३ (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण