Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mr. Manav Mehta v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/01/104104/2023
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- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 206 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट न0 | पत्रावली पर आवंटन पत्र | कब्जा दिये वांछित अनुतोष उपलब्ध रसीद के | तिथि जाने की तिथि अनुसार जमा धनराशि रु0 पटरा44/0/0404/2023 | मानव मे 2405 Bo 32,87,382/ | 24.0:.20I4 | 42 माह तथा | यूनिट का 03 माह अनुग्रह | कब्जा व अवधि अर्थात् | विलम्बित अवधि अक्टूबर 20:7 | का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। कार्यालय आख्या दिनांक 4.:0.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8, wrt ws डिसबर्स्ड, एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र अथवा अन्य कोई प्रपत्र किसी पक्षकार द्वारा पत्रावली आदेशार्थ सुरक्षित होने के उपरांत दिनांक 44.40. 2024.तक पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट संख्या 2705 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को तालिका में अंकित धनराशि wo 32,87,382,// का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया है कि विपक्षी की परियोजना 62 माह से विलम्बित है। अतः: शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में आवंटन पत्र व कस्टमर लेजर की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- SS fl क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी- 20.42.2022 0 32,87,382 / कस्टमर लेजर
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फार्म दिनांक 29.0.2043 के माध्यम से विपक्षी की परियोजना एटीएस एलौर में यूनिट बुक करायी गयी थी जो एनेक्चर आर-2 है, जिसके पश्चात् आवंटन पत्र दिनांक 2i0i204 को निष्पादित करते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या 2405 आवंटित की गयी थी जो Wray आर- 3 है। शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट का कुल मूल्य Bo 36,42,500,//तथा टैक्स था। शिकायतकर्ता द्वारा डिफाल्ट किये जाने के बावजूद विपक्षी ने परियोजना पूर्ण करते हुए दिनांक 30.03.2022 को इन्टीमेशन लेटर भेजा गया तथा दिनांक 47.04. 2022 को फाइनल ऑफर आफ पजेशन भेजे गये जो एनेक्चर आर-4 है। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र दिनांक 44.06.2022, 02.08.2022 व 07.0.2022 को भेजे गये जो wae acs है। शिकायतकर्ता द्वारा रु० 32,87,382,/ का भुगतान किया गया है जो एनेक्चर आर-6 है। विपक्षी द्वारा दिनांक 26.05.2022 को शिकायतकर्ता को सब-लीज डीड कराये जाने हेतु पत्र भेजा गया जो Wear आर-ः7 है। विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक 29.07.2024 को ओ.सी हेतु यमुना एक्सप्रेसवे इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के समक्ष आवेदन किया गया था तत्पश्चात् दिनांक 30.03.2022 को प्राधिकरण द्वारा कम्पलीशन सर्टिफिकेट मंजूर कर ली गयी। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि atfrs—to महामारी व माननीय एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्माण कार्य पर समय समय पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण भी परियोजना में 378 दिन निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। विपक्षी की परियोजना में वर्ष 2024 में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है तथा विपक्षी को ओ.सी भी प्राप्त हो चुका है जो एनेक््चर आर-44 है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान परिवाद पोषणीय न होने के कारण अर्थदण्ड के साथ खारिज किये जाने, शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि मय ब्याज के साथ भुगतान कर कब्जा लिये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
=—SS 2 विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति के समर्थन में आवेदन फार्म, आवंटन पत्र, इंटीमेशन ऑफ फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन, फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन, कस्टमर लेजर, अनुस्मारक पत्रो, व अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छाया प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या i: प्रश्न We इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह veers किया गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय /एन.जी.टी के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा जिस कारण विपक्षी ने यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि में 378 दिनों का लाभ दिये जाने का अनुरोध किया है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि: ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।”
पत्रावली पर दाखिल आवंटन पत्र दिनांकित 24.04.2044 के प्रस्तर 7.2 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित उल्लेख है कि :- Se 3 The Developer shall be entilted to an extension of time fom the expiry of the completion date, if the completion of construction of the said Apartment is delayed on account of any of the following reasons ;- a. Non-availability of steel, cement, other building materials, water or elecrtic supply or labour, or Any change in the Applicable Law or existence of any injuction, stay order, prohibitory order ordirections passed by any court, tribunal, body or competent Authority; or. Delay in securing any permission, Approvals, NOC, sanction building plan, building completion and/ r occupation cerfificate, water, electricity, drainage or sewerage connection from the competent authority for reasons beyond the control of the Developer or; Force Majeure Event or any other reasons (not limited to the reasons mentioned above) beyond the control of or unforeseen by the Developer, which may prevent or delay the Developer in performing its obligations as specified in this Allotment Letter. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 743029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-20॥9 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- आदेश
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित दिनांक 09-2-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- "१2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the —SS 4
month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-i-20I9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-20:9 से दिनांक 09--42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक साँय ०७ बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना नन््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त afas—i9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) @ प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त 5 अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी। विपक्षी की परियोजना 62 माह विलम्बित है। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। विपक्षी का कहना है कि कोविड-49 महामारी व माननीय एनजीटी द्वारा निर्माण कार्य पर समय समय पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण भी परियोजना में निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि उन्हें अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो गया है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त होने के पश्चात् शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक ॥4.04.2022 को जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा औपचारिकताओं को पूर्ण कर कब्जा नहीं लिया जा रहा है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 03 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात अक्टूबर 20:7 4 प्राप्त होना था। विपक्षी को परियोजना से सम्बन्धित मार्च 2022 में ओ.सी प्राप्त हुआ है और इसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 44.04.2022 को शिकायतकर्ता के पक्ष में ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 7 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया = om 5
गया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट के साथ विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील tio 6649-50 /20:8 "'सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी alee" A माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to
complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such
time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: wat निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 7.40.20I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I of cer की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय —— ss 8
है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRHI प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 Paka किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश \, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2... विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.44.20:7 से ओ.सी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि «WO 32,87,382,/ पर MCLR+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी | ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,/4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25. 03. 2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को fear जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी art यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —$=—2e The. 2024 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 0