Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajeev Kumar Singh v. Emaar Mgf Land Limited
Complaint No. LKO162/12/115485/2023
- Decision date
- 2026-01-29
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Lucknow
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकांकर हाउस, ओल्ड हैदराबाद, लखनऊ- 226007 (उ.प्र) भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास अधिनियम, 20:6 की asi के अन्तर्गत आदेश पीठ-02 पीठासीन:- श्रीमती डिम्पल वर्मा (सदस्य) शिकायत संख्या- LKO62/42/445485/2023 राजीव BAR RS शिकायतकर्ता बनाम EMAARMGFLANDLIMITED ee विपक्षी प्रतिनिधित्व- शिकायतकर्ता :- ff गौतम जौहरी, अधिवक्ता विपक्षी — fet कुमार, अधिवक्ता शिकायत:- शिकायततकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध विलम्बित ब्याज सहित कब्जा दिलाए जाने हेतु शिकायत दाखिल की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना “GOMTI GREENS INTEGRATED TOWNSHIP” में इकाई संख्या- 667-6-:207/40 दिनांक 27-02-2042 को आरक्षित कराया गया था। इकाई की कुल कीमत रू. .44,75,307 /- (एक करोड़ ग्यारह लाख पचहत्तर हजार तीन सौ सात रूपए मात्र) है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता के अनुसार उनके द्वारा रू. 95,68,746 /“- (पंचानबे लाख अड़सठ हजार सात सौ छियालीस रूपए मात्र) का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत में यह भी इंगित किया गया है कि अस्थायी आवंटन-पत्र के प्रस्तर-44 के अनुसार इकाई का कब्जा iste माह अर्थात् दिनांक SS. Vemne. - /5- a मुज्ण 08-05-2044 तक विपक्षी द्वारा प्रदान किया जाना था, किन्तु 09 वर्ष के उपरान्त भी अभी तक कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा बिना ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किए अवैधानिक कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 25-40-2023 को प्रेषित किया गया है।
अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित ब्याज सहित कब्जे की मांग की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने समर्थन में निम्नलिखित साक्ष्य दाखिल किया गया है:- 4. अस्थायी आवंटन पत्र दिनांक 07-05-2042 की प्रति (स्वअभिप्रमाणित) | 2. भुगतान की गयी धनराशि की रसीदों की प्रतियाँ (स्वअभिप्रमाणित) | 3. खाता विवरण दिनांक 25-40-2023 की प्रति (स्वअभिप्रमाणित) | 4. Nomination Wa दिनांक 25--06-2042 की प्रति (स्वअभिप्रमाणित)। 5. भुगतान योजना की प्रति (स्वअभिप्रमाणित)। 6. मांग पत्र दिनांक 05-0-2023 की प्रति (स्वअभिप्रमाणित)। 7. कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 25-40-2023 की प्रति (स्वअभिप्रमाणित) |
विपक्षी द्वारा आपत्ति-पत्र दिनांक 24-05-2024 में मुख्यतः यह इंगित किया गया है कि दिनांक 28-04-2009 को निजी विकासकर्ता के रूप में लाईसेंस प्राप्त किया गया। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि दिनांक 24-42-2044 को विकास समझौता हुआ था जिसके अनुसार लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की 40 प्रतिशत भूमि एवं विपक्षी द्वारा 60 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की जानी थी। दिनांक 22--006-2044 को परियोजना का डी.पी.आर. सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया था जिसके पश्चात् दिनांक 26.2.20:4 को परियोजना का मानचित्र स्वीकृत हुआ था, जो कि कालान्तर में पुनः दिनांक 24-08-2046 को परिवर्तित होकर दिनांक 22-2-209 तक विस्तारित किया गया और पुनः एल.डी.ए. द्वारा इसे दिनांक 22-42-2023 तक दीर्धिकृत किया गया। आगे लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा उनके हिस्से का अधिग्रहण पूरा नहीं किया गया जिस कारण विपक्षी द्वारा 60 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण अर्थात् लगभग 435.84 एकड़ के स्थान पर विपक्षी को अपने प्रयासों से 85 प्रतिशत भूमि जो कि लगभग 492 एकड़ है, को कालान्तर में अत्यधिक अनुचित दरों SHS K.- Venne_)
में खरीदना पड़ा। फिर भी कुछ भूमि ऐसी श्रेणी की थी जो विपक्षी द्वारा अधिग्रहित नहीं की जा सकीं, जिसके कारण परियोजना के विकास में बाधा उत्पन्न हुई। किन्तु दिनांक 49-04-2043 को विपक्षी द्वारा अथक प्रयास किए जाने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 4984 की धारा-4 के अन्तर्गत 42.627 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि पुराना भूमि अधिग्रहण अधिनियम waa कर दिया गया और The Right to Fair Compesnsation and Transparency in Land Acquisition, ‘Rehabilitation and Resettlement Act, 203 “The New Act’ दिनांक 0i-0:-2074 को लागू किया गया। इसी क्रम में पूर्व में भूमि अधिग्रहण नियम की धारा-4 के अन्तर्गत की गयी कार्यवाही निरस्त हो गयी। विपक्षी द्वारा उक्त भूमि पर पर्याप्त विकास कार्य पूर्ण किए जाने के बावजूद भी लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा अधिगृहित की जाने वाली भूमि पर विकास, पहुंच के मामले लम्बित रहे। चूंकि विपक्षी द्वारा कुछ भूमि सीधे किसानों से ली गयी थी उसमें भी किसानों के वारिसानों / तृतीय पक्ष के द्वारा कानूनी विवाद उत्पन्न कर दिया गया। तद्उपरान्त लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन व डिक्लरेशन क्रमशः: दिनांक 27-09-2024 व 04-04-2022 का समावेश नए अधिनियम में किया गया जिससे कि शेष भूमि का अधिग्रहण किया जा WS | तद्उरान्त दिनांक 26-42-2022 को भूमि अधिग्रहण का अवार्ड जारी करते हुए विपक्षी को भूमि का भौतिक कब्जा प्रदान किया गया।
विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है, किन्तु कोविड-49, जी.एस.टी. में बदलाव, विमुद्रीकरण आदि के कारण जो विपक्षी के नियंत्रण में नहीं थे, परियोजना में विलम्ब हुआ। आगे यह इंगित किया है कि शिकायतकर्ता की प्रश्नगत इकाई संख्या- ७७7-&- E070 आरम्भ में वरूण प्रोपर्टीज के द्वारा बुक करायी गयी थी। इसके उपरान्त वरूण प्रोपर्टीज द्वारा दिनांक 25-06-2042 के नामांकन UT द्वारा उक्त इकाई श्री राजीव कुमार सिंह को नामांकित कर दी गयी। इकाई की कुल कीमत रु, 7,237,596 /— L ©) -3/5- &\. Venne,
(एक करोड़ तेईस लाख संतावन हजार पाँच सौ छियानबे रूपए मात्र) थी जिसमें 0#७ Charges जैसे IFS/FMS/GST tery ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क आदि को जोड़ा नहीं गया है। शिकायतकर्ता द्वारा इकाई की मूल लागत का सम्पूर्ण भुगतान कर दिया गया है, किन्तु अन्य शुल्क जैसे स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि का भुगतान नहीं किया है। अनुबन्ध पत्र के wee-4 एवं 42 के अनुसार विपक्षी को अधिकार है कि वह परियोजना में उपयुक्त आवश्यक परिवर्तन कर सकता है। अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-57 में अंकित है कि यदि विपक्षी द्वारा कुछ कारणों की वजह से जो कि उसके नियंत्रण से परे हैं, निर्धारित समय अवधि में कब्जा प्रदान नहीं किया जाता है तो वह कारण Force Majeure की श्रेणी में माने जाएंगे। विपक्षी द्वारा आगे यह भी अवगत कराया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत इकाई के हस्तानांतरण के समय अंडरटेकिंड दी गयी थी कि उनके द्वारा परियोजना के विलम्बित होने पर कोई क्षतिपूर्ति का दावा नहीं किया जाएगा। इस प्रकार विपक्षी का कथन है कि उनके द्वारा जानबूझकर विलम्ब नहीं किया गया है बल्कि उपरोक्त कारणों से विलम्ब हुआ है जो कि विपक्षी के नियंत्रण के परे है। विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र के प्रस्तर-47 में इंगित किया गया है कि अन्य शुल्क जैसे स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि का भुगतान नहीं किया है- शिकायतकर्ता विपक्षी के कार्यालय में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित है। अतः विपक्षी द्वारा vette शिकायत निरस्त किए जाने की मांग की गयी है। विपक्षी द्वारा अपने समर्थन में निम्नलिखित साक्ष्य दाखिल किया गया है:- t. अस्थायी आवंटन पत्र दिनांक 07-05-2042 की प्रति (अनअभिप्रमाणित) | 2. Nomination पत्र दिनांक 25-06-2042 की प्रति (अनअभिप्रमाणित)।
3. भुगतान योजना की प्रति (अनअभिप्रमाणित)। 4. मांग /अनुस्मारक पत्रों की प्रतियाँ (अनअभिप्रमाणित)। 'शिकायतकर्ता द्वारा अपने प्रत्युत्तर दिनांक 30-06-2024 -में विपक्षी के आपत्ति-पत्र में इंगित तथ्यों का खण्डन करते हुए मुख्यतः: यह इंगित किया गया है कि वह शेष धनराशि और शुल्क का भुगतान करके विलम्बित ब्याज सहित कब्जा लेने के (=) —_ Nv. Ue we. a 2. E (a) 2 लखनऊ | & ie gute, oie SI ५ पज़ लिए तैयार =| ] उपस्थित WOR! के det को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया। Sat आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किए जाते हैं :- . क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या--4 बिन्दु deri इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई ? प्रथम aifas—i9 की लहर को प्राकृतिक आपदा ,»महामारी मानते हुये, दिनांक 43.05.2020 को भारत सरकार आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की अधिसूचना संख्या-0-47024/230/2048-#00॥9-00/6735-9056405 के द्वारा कार्यालय ज्ञापन के प्रस्तर-6 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :-
लत 6. Ministry has examined the said recommendation of CAC and accordingly advises all States/Union Territories and their Real Estate Regulatory Authorities that in order to avoid submission of separate application for extension of each project and orders thereon, Regulatory Authorities may, in pursuance of section 37 of RERA read with other enabling provisions, in their respective jurisdictions issue following orders/directions to the effect that ‘notwithstanding anything contained to the contrary and by virtue of powers conferred under section 37 read with section 34(f) of the RERA, the registration L >) ८ छजयानक -5/5- * K. be ii iS v2 & @ & a 9 or extension thereto under Section 5, 6, 7(3) of the RERA or Rules thereunder, all registered projects under jurisdiction of Regulatory Authority for which the completion date or revised completion date or extended completion date as per registration expires on or after 25" March, 2020': (i) Regulatory Authorities may issue suitable orders/ directions to extend the registration and completion date or revised completion date or extended completion date automatically by 6 months due to outbreak of COVID-i9 (Corona Virus), which is a calamity caused by nature and is adversely affecting regular development of real estate projects by invoking force majeure clause;
(ii) Regulatory Authorities may, on their own discretion, consider to further extend the date of completion as per registration for another period upto 3 months, if the situation in their respective State or any part thereof, for reasons to be recorded in writing, needs special consideration of invoking ‘force majeure’ in view of current pandemic;...... समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06-06-2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25-03-2020 से 6+3 माह (नौ माह) की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-42-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। तदनुसार बिन्दु संख्या-+ निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 6 /5- KR . Ve Ve —— ¢ निस्तारण बिन्दु Gere इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता द्वारा अपनी शिकायत में इंगित किया गया है कि अस्थायी आवंटन-पत्र के प्रस्तर-44 के अनुसार इकाई का कब्जा 48+6 माह अर्थात् दिनांक 08-05--2044 तक विपक्षी द्वारा प्रदान किया जाना था, किन्तु 09 वर्ष के उपरान्त भी अभी तक कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा बिना ओ.सी.,सी.सी. प्राप्त किए अवैधानिक कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 25-40-2023 को प्रेषित किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित ब्याज सहित कब्जे की मांग की गयी है।
विपक्षी द्वारा आपत्ति-पत्र दिनांक 24-05-2024 में मुख्यतः: यह इंगित किया गया है कि दिनांक 28-04--2009 को निजी-विकासकर्ता के रूप में लाईसेंस प्राप्त किया गया। विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि दिनांक 24-2-2044 को विकास समझौता हुआ था जिसके अनुसार लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की 40 प्रतिशत भूमि एवं विपक्षी द्वारा 60 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की जानी थी। दिनांक 22-06-2044 को परियोजना का डी.पी.आर. सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया था जिसके पश्चात् दिनांक 26.2.2007 को परियोजना का मानचित्र स्वीकृत हुआ था, जो कि कालान्तर में पुनः दिनांक 24-08-2046 को परिवर्तित होकर दिनांक 22-2-209 तक विस्तारित किया गया और पुनः एल.डी.ए. द्वारा इसे दिनांक 22-42--2023 तक दीर्धिकृत किया गया। आगे लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा उनके हिस्से का अधिग्रहण पूरा नहीं किया गया जिस कारण विपक्षी द्वारा 60 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण अर्थात् लगभग 435.8: एकड़ के स्थान पर विपक्षी को अपने प्रयासों से 85 प्रतिशत भूमि जो कि लगभग 492 एकड़ है, को कालान्तर में अत्यधिक अनुचित दरों में खरीदना पड़ा। फिर भी कुछ भूमि ऐसी श्रेणी की थी जो विपक्षी द्वारा अधिग्रहित नहीं की जा wel, के कारण परियोजना के विकास में बाधा उत्पन्न ge! किन्तु दिनांक t9-0l-203 को विपक्षी द्वारा अथक प्रयास किए जाने के बाद लखनऊ विकास _। ore KK. Ve mre.
प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, .984 की धारा-4 के अन्तर्गत 42.627 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अवगत कराया गया है कि पुराना भूमि अधिग्रहण अधिनियम रदूद कर दिया गया और The Right to Fair Compesnsation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 203 “The New Act” दिनांक 04-04-2044 को लागू किया गया। इसी क्रम में पूर्व में भूमि अधिग्रहण नियम की धारा-4 के अन्तर्गत की गयी कार्यवाही निरस्त हो गयी। विपक्षी द्वारा उक्त भूमि पर पर्याप्त विकास कार्य पूर्ण किए जाने के बावजूद भी लखनऊ विकास प्राधिकरण के द्वारा अधिगृहित की जाने वाली भूमि पर विकास,/ पहुंच के मामले लम्बित रहे। चूंकि विपक्षी द्वारा कुछ भूमि सीधे किसानों से ली गयी थी उसमें भी किसानों के वारिसानों तृतीय पक्ष के द्वारा कानूनी विवाद उत्पन्न कर दिया गया। TERT लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन व डिक्लरेशन क्रमशः दिनांक 27-09-2024 व 04-04-2022 का समावेश नए अधिनियम में किया गया जिससे कि शेष भूमि का अधिग्रहण किया जा Ue | तद्उरान्त दिनांक 26-42-2022 को भूमि अधिग्रहण का अवार्ड जारी करते हुए विपक्षी को भूमि का भौतिक कब्जा प्रदान किया गया। विपक्षी द्वारा परियोजना को पूर्ण करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है, किन्तु aifas—t9, जी.एस.टी. में बदलाव, विमुद्रीकरण आदि के कारण जो विपक्षी के नियंत्रण में नहीं थे, परियोजना में विलम्ब हुआ।
आगे यह इंग्रित किया है कि शिकायतकर्ता की प्रश्नगत इकाई संख्या- 667-6- E070 आरम्भ में वरूण प्रोपर्टीज के द्वारा बुक करायी गयी थी। इसके उपरान्त वरूण प्रोपर्टीज द्वारा दिनांक 25-06-2042 के नामांकन पत्र द्वारा उक्त इकाई श्री राजीव कुमार सिंह को नामांकित कर दी गयी। इकाई की कुल कीमत रु. 4,23,57,596 /- (एक करोड़ तेईस लाख संतावन हजार पाँच सौ छियानबे रूपए मात्र) कर रहित थी। शिकायतकर्ता द्वारा इकाई की मूल लागत का सम्पूर्ण भुगतान कर दिया गया है, किन्तु अन्य शुल्क जैसे tery शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि का भुगतान नहीं किया है। -8/5- K. Vewe_, अनुबन्ध पत्र के WAR एवं 42 के अनुसार विपक्षी को अधिकार है कि वह परियोजना में उपयुक्त आवश्यक परिवर्तन कर सकता है। अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-57 में अंकित है कि यदि विपक्षी द्वारा कुछ कारणों की वजह से जो कि उसके नियंत्रण से परे हैं, निर्धारित समय अवधि में कब्जा प्रदान नहीं किया जाता है तो वह कारण Force Majeure की श्रेणी में माने जाएंगे। विपक्षी द्वारा आगे यह भी अवगत कराया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा werd इकाई के हस्तानांतरण के समय अंडरटेकिंड दी गयी थी कि उनके द्वारा परियोजना के विलम्बित होने पर कोई क्षतिपूर्ति का दावा नहीं किया जाएगा। इस प्रकार विपक्षी का कथन है कि उनके द्वारा जानबूझकर विलम्ब नहीं किया गया है बल्कि उपरोक्त कारणों से विलम्ब हुआ है जो कि विपक्षी के नियंत्रण के परे है। विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र के ueai7 में इंगित किया गया है कि अन्य शुल्क जैसे era शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि का भुगतान नहीं किया है-- शिकायतकर्ता विपक्षी के कार्यालय में रजिस्ट्रेशन के लिए आमंत्रित है। अतः विपक्षी द्वारा प्रश्ग्गत शिकायत निरस्त किए जाने की मांग की गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने प्रत्युत्तर दिनांक 30-06-2024 में विपक्षी के आपत्ति-पत्र में इंगित तथ्यों का खण्डन करते हुए मुख्यतः यह इंगित किया गया है कि वह शेष धनराशि और शुल्क का भुगतान करके विलम्बित ब्याज सहित कब्जा लेने के लिए तैयार हैं | पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों से स्पष्ट है कि yea: प्रश्नगत इकाई वरूण wads द्वारा बुक करायी गयी थी जिसके उपरान्त वरूण प्रोपर्टीज द्वारा दिनांक 25-06—202 के नामांकन पत्र द्वारा उक्त इकाई श्री राजीव कुमार सिंह को नामांकित कर दी गयी। विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में इंगित किया है कि इकाई की कुल कीमत रू. 4,23,57,596 /- (एक करोड़ तेईस लाख संतावन हजार पाँच सौ छियानबे रूपए मात्र) कर रहित थी। शिकायतकर्ता द्वारा इकाई की मूल लागत का सम्पूर्ण भुगतान कर दिया गया है, किन्तु अन्य शुल्क जैसे स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क आदि का भुगतान नहीं किया है। विपक्षी द्वारा जारी आवंटन-पत्र दिनांक 07-05-2042 के A पु Vemre_ है -9/5- प्रस्तर-44 के अनुसार i8+48+6 माह [ दिनांक 06--44-2045 तक प्रदान किया जाना था, किन्तु अभी तक प्रदान नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता को विलम्बित ब्याज सहित कब्जा दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। उपरोक्त के सम्बन्ध में रेरा एक्ट की धारा is (4) F प्राविधान है कि :-- “Section 78 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.” इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है| ऐसी दशा में शिकायत्तकर्ता को दिनांक 06-44-2045 से ate /सी-सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा वास्तविक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि (जो भी बाद -0 /85- NK Ue Are गे हो) तक की अवधि के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्याय प्रतीत होता है। ह
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है। माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि — "...257. Section 48(4) (9) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allotice _Wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation. If the allottee does not intend to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable................... 7
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि og रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(2७) में प्राविधान है कि :- “(Za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. K. Ve ne -2I/5- Explanation.—For the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the
allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid;” जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.:0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of defaut) परिभाषित है, जिसमें TER 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- ह "The Allottee shall have the option of terminating ‘the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost_of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + 7% Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice: " यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.3() में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+4 प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)() -2 /5- Bb. Venvre—_
में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या-सी-3289 / 2020 “esl बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स प्रा.लि. बनाम पूनम सूद एवं अन्य” में दिनांक 06.02.2020 को पारित निर्णय में यह उल्लेखित किया गया है कि:-
rues Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.4 (MCLR+‘) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no. had booked a flat and iill the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 20i8. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 2048 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shail be liable to refund the entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 2046, providing otherwise................00......... हर
cara Re याचिका संख्या-सी-9420 // 2020 “हैबीटेक इंफास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम उ.प्र. राज्य सरकार एवं अन्य” में दिनांक 06.07.2020 को महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन देते हुए यह उल्लेखित किया है कि:-- ४......3. On 42.09.2049 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR + % from the date of deposit till the date of order. "३ /5- Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020......... 7. and only on complaint under Section i8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @ MCLR + %, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 2048.......... 29. Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section 48, with the authority was rightly exercised by it in the interest of justice................ माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी रेरा प्राधिकरण के पीठ द्वारा नियमावली के अन्तर्गत ॥॥0।7२ + 4% की वार्षिक ब्याज दर से दिये गये आदेश को उचित एवं सही माना हैं। ; अतः उपरोक्तानुसार माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय से यह अवधारित किया जा सकता है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर उचित एवं सही है। ब्याज दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया MCLRH प्रतिशत से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी स्वीकारा गया है और न्यायोचित ठहराया है।
ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय ,/ पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ॥ प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। Tage बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता से नियमानुसार शेष धनराशि प्राप्त कर इकाई की रजिस्ट्री निष्पादित कर कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित करें तथा शिकायतकर्ता को दिनांक 06-44-2045 से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा वास्तविक -4/5- कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि (जो भी बाद में हो) तक शिकाय द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+i प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। 2. यहाँ यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कोविड-49 के फलस्वरूप हुये फोर्स मैज्योर पीरियड के दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-42-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा 2za) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अत: विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+t प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद add से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की ... धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों में विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा मुख्यालय, लखनऊ में उपलब्ध करा सकते हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। K.- Venve, (डिम्पल वर्मा) ह (सदस्य) दिनांक :- 2 7/ 2। /2026 उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 5-5/5- "