Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Neeraj Agarwal v. D.S. Infraheights Private Limited
Complaint No. LKO162/09/82774/2021
- Decision date
- 2026-04-16
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Lucknow
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकाकर हाऊस, पुराना हैदराबाद, लखनऊ सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी शिकायत सं0- LKOI62/09/82774/202 सुनवाई तिथि: 6-04-2026 Neeraj Agarwal V/S__ 9.8. Infraheights Private Limited आदेश पत्र शिकायत संख्या- LKOI62/09/82774/202I Neeraj Agarwal V/S D.S. Infraheights Private Limited मा. पीठ-02 के आदेश, दिनांक 27-02-2028 के द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली के नियम-24 में निहित शक्तियों के अर्न्तगत यूनिट के कब्जे की कार्यवाही कराने हेतु इस न्यायालय को संदर्भित की गई है। शिकायत वीडियो asia के माध्यम से सुनवाई हेतु प्रस्तुत की गयी। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री सौरम मिश्रा उपस्थित। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री वत्सल गुप्ता उपस्थित। धारा-34 के अधीन मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 06-07--2022 का अनुपालन कराने हेतु धारा-63 के अधीन मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 27-02-2026 के द्वारा रेरा नियमावली के नियम-24 के अधीन कब्जे की कार्यवाही कराये जाने हेतु पत्रावली इस न्यायालय को संदर्भित की गई है। आज विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता द्वारा कपट एवं दुर्व्यपदेशन के आधार पर धारा-34 के अधीन मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 06-07-2022 को वापस लिए जाने की प्रार्थना के साथ एक आवेदन दिनांकित 46-04-2026 wea feat है।
आवेदन के विरूद्ध शिकायतकर्ता की ओर से यह निवेदन किया गया कि विपक्षी द्वारा वर्तमान आवेदन शिकायतकर्ता को तंग व परेशान करने तथा मा. पीठ द्वारा पारित कब्जे के आदेश दिनांकित 06-07-2022 का अनुपालन करने से बचने के लिए दुर्भावनापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान न्यायालय निष्पादन न्यायालय के रूप में कार्य कर रही है। निष्पादन न्यायालय के रूप में इस न्यायालय द्वारा मा. पीठ के आदेश को वापस नहीं लिया जा gaat) यह न्यायालय केवल आदेश दिनांक 06-07-2022 जिस रूप में है, उसका उसी रूप में अनुपालन करा सकता है। आदेश में कोई परिवर्तन अथवा आदेश को वापस नहीं लिया जा सकता। वर्तमान पत्रावली इस न्यायालय को मा. पीठ के आदेश से कब्जे की कार्यवाही हेतु संदर्भित किया गया है। वर्तमान न्यायालय निष्पादन न्यायालय के रूप में कार्य कर रहा है। यह सुस्थापित विधि है कि निष्पादन न्यायालय डिकी के पीछे नहीं जा सकता (Executing Court can not go behind the decree) अर्थात डिकी जैसी भी है, उसका उसी रूप में अनुपालन कराया जायेगा। यह भी सुस्थापित विधि है कि निष्पादन न्यायालय द्वारा feel की शुद्धता एवं वैधता का परीक्षण भी नहीं किया जा सकता । डिकी में कोई परिवर्तन एवं परिवर्द्धन नहीं किया जा सकता। जैसा कि मा. सर्वोच्च न्यायालय ने वासुदेव धनजीभाई मोदी बनाम राजाभाई ए.आई.आर. 4970 सुप्रीम कोर्ट 4475 के अग्रणी वाद में अवधारित किया है। इस मामले में मा. पीठ द्वारा धारा-34 के अधीन दिनांक 06-07-2022 को आदेश पारित करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया गया था कि वह 45 दिन 2222 शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्री कराकर कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित करें| yo qc E-Court
विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 06--07-2022 का अनुपालन न करने पर शिकायतकर्ता द्वारा आदेश के कियान्वयन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 27-02-2026 के द्वारा पत्रावली कब्जे की कार्यवाही हेतु संदर्भित की गई है। वर्ष 2022 में पारित आदेश का विपक्षी द्वारा आज तक अनुपालन नहीं किया गया है। आदेश दिनांक 06-07-2022 के विरूद्ध विपक्षी द्वारा अपीलीय अधिकरण के समक्ष कोई अपील भी प्रस्तुत नहीं की गई है। अब निष्पादन की कार्यवाही में मा. पीठ द्वारा पारित मूल आदेश दिनांक 06--07-2022 को वापस लिये जाने की प्रार्थना के साथ आवेदन प्रस्तुत किया गया है। निष्पादन न्यायालय के रूप में इस न्यायालय द्वारा मा. पीठ के आदेश दिनांक 06-.07-2022 को वापस नहीं लिया जा सकता। अतः विपक्षी की ओर से प्रस्तुत आवेदन दिनांकित 465-04-2026 को खारिज किया जाता है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह एक सप्ताह के अन्दर अपनी अनुपालन आख्या रेरा पोर्टल पर अपलोड कर उसकी भौतिक प्रति रेरा मुख्यालय, लखनऊ को प्राप्त कराना सुनिश्चित करें | पत्रावली सुनवाई हेतु दिनांक 30-04-2026 को पेश हो। न्यायनिर्णायक अधिकारी 26