Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Kusum Lata Dixit v. U.P. Awas Evam Vikas Parishad
Complaint No. LKO162/07/77561/2021
- Decision date
- 2026-07-02
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Lucknow
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकाकर हाऊस, पुराना हैदराबाद, लखनऊ सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी शिकायत सं0- LKO62/07/7756/202 दिनांक 02-07-2026 Kusum Lata Dixit V/S U.P. Awas Evam Vikas Parishad आदेश शिकायत वीडियो कार्न््फेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु प्रस्तुत की गयी। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सागर मेंहदी एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता एन.एन. पाण्डेय को विस्तार से सुना गया। इस मामले में पक्षकारों के मध्य विवाद केवल विलम्ब ब्याज की गणना के संबंध में है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के मांग पत्र दिनांक 2:-0:-2026 ert की जा रही मांग अवैध एवं मनमाना होने के आधार पर भुगतान के दायित्व से इन्कार किया जा रहा है। मांगपत्र दिनांक 24-04-2026 के कम संख्या-6 पर कार्पस फण्ड के रूप में रु ,03,443 /— तथा कम संख्या-7 पर दिनांक 3i-03-2022 से रु.75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब धनराशि भुगतान की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कथन है कि मांगपत्र दिनांक 27-07-2026 के पूर्व ही दिनांक 08-40-2025 को कार्पस फण्ड का भुगतान किया जा चुका है। जहां तक B75 /— प्रतिदिन की दर से विलम्ब ब्याज का सम्बन्ध है तो इसी परियोजना से सम्बन्धित एक अन्य शिकायत WAN-LKO62/07/77494/202] अरूण कुमार दीक्षित बनाम उ.प्र, आवास एवं विकास परिषद में पारित आदेश के द्वारा रू75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब धनराशि की मांग को विधिविरूद्ध माना जा चुका है, इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा अब कोई धनराशि देय नहीं है।
शिकायतकर्ता के कथनों का खण्डन करते हुए विपक्षी की ओर से कहा गया कि दिनांक 26-04--2026 को जो नया मांगपत्र प्रेषित किया गया है वह इस न्यायालय के आदेश के आधार पर प्रेषित किया गया है। इससे पूर्व दिनांक t4-03~2022 को मांगपत्र प्रेषित कर विभिन्न धनराशियों के साथ-साथ कार्पस फण्ड रू.4,03,443,//- की भी मांग की गई थी मांगपत्र दिनांक ॥4-03-2022 के द्वारा vat धनराशि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 3i-03~—2022 तक जमा किया जाना था जबकि शिकायतकर्ता ने धनराशि दिनांक 08-t0-2025 को जमा किया है परन्तु विलम्ब के लिए कोई ब्याज भुगतान नहीं किया है। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत किये गये मांगपत्र दिनांक 44-03-2022 के अवलोकन से परिलक्षित होता है कि कार्पस फण्ड .4,03,443/— का भुगतान दिनांक 34--03-2022 तक किये जाने की मांग की गयी थी, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा यह भुगतान दिनांक 08—40—2025 को किया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा कार्पस फण्ड की धनराशि रू. ,03,443/-8 भुगतान में विलम्ब किया है। रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता कार्पस फण्ड रु.(,03,443/“- की धनराशि पर दिनांक 45-03--2022 से दिनांक 07~0-2025 तक के विलम्ब के लिए McLR% की दर से विलम्ब ब्याज का भुगता- करने के लिए उत्तरदायी है। मांगपत्र दिनांक 25-04-2026 के विरूद्ध शिकायतकर्ता की आपत्ति का दूसरा बिन्दु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से विलम्ब की अवधि के लिए रु75 /- Ae की दर से विलम्ब as au 7 E-Court
शुल्क की मांग किये जाने का है। विपक्षी के अनुसार उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद की अनावासीय एवं आवासीय सम्पत्ति के निस्तारण सम्बन्धी विनियम यथा संशोधित 206 के नियम-42 के आधार पर रु.75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब शुल्क मांगा जा रहा है। विपक्षी @ उपरोक्त कथनों का खण्डन करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा कहा जा रहा है कि वर्तमान न्यायालय निष्पादन न्यायालय के रूप में कार्य कर रहा है। मा. प्राधिकरण के जिस आदेश का निष्पादन कराया जा रहा है, उसमें रु75,/-- की दर से विलम्ब शुल्क वसूल किए जाने का कोई निर्देश नहीं है। मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 04-42-2024 में स्पष्ट कर दिया है कि उभयपक्षों द्वारा विलम्ब की स्थिति में McLRtim की दर से ही विलम्ब ब्याज देय होगा। उभयपक्षों के तर्को के प्रकाश में विचारणीय प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या विलम्ब के लिए विलम्ब शुल्क का निर्धारण विपक्षी द्वारा अभिकथित w7s/— प्रतिदिन की दर से अथवा शिकायतकर्ता द्वारा दावा की जा रही MCLR+I% की दर से किया जायेगा ? इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि रेरा अधिनियम की धारा-2(०७) में ब्याज का अर्थ स्पष्ट किया गया है। इस धारा के प्राविधानों के अनुसार आवंटी व प्रोमोटर दोनों के ही मामले में विलम्ब की दशा में समान दर पर ब्याज देय होगा। मा. प्राधिकरण ने भी अपने आदेश दिनांक 04-42--2024 में प्रवर्तनीय भाग के बिन्दु संख्या-2 में निर्देशित किया है कि विपक्षी, शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि के लिए दिनांक 27-02-2048 से प्रदेशन पत्र जारी होने की तिथि तक की अवधि के लिए स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा निर्धारित MCLR+I% की दर से विलम्बित ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें।
इसी प्रकार आदेश के बिन्दु-3 में यह स्पष्ट किया है कि रेरा अधिनियम की धारा-2(2)0) के प्राविधानों के अनुसार यदि प्रोमोटर द्वारा आवंटी के व्यतिकम पर कोई ब्याज दर लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा alter किए जाने पर आवंटी को भी दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRHIm% की दर से ब्याज देय होगा। संविधियों के निर्वचन का सुस्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम या विनियम सारवान विधिक प्राविधानों के विरूद्ध नहीं हो सकता। रेरा अधिनियम की धारा-2(४४)() के प्राविधान सारवान विधिक प्राविधान हैं। विपक्षी द्वारा रेग्युलेशन संख्या-42 के आधार पर रु75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब शुल्क की जो गणना की जा रही है वह रेरा अधिनियम की धारा-2(2०)0) के सारवान विधिक प्राविधानों के विरूद्ध एवं मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश में दिए गये निर्देश संख्या-2 एवं 3 का उल्लंधन है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि के लिए दिनांक 27-02-20:8 से Te पत्र जारी करने की तिथि तक की विलम्ब अवधि के लिए स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा निर्धारित McLe+im की दर से विलम्बित ब्याज अदा किया गया है। इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा यदि भुगतान में कोई विलम्ब किया गया है, तो विपक्षी भी शिकायतकर्ता से MCLRH% की दर से ही विलम्ब ब्याज वसूल कर सकता है। उपरोक्त विवेचना एवं विश्लेषण के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा रु.4,03,43 /- की विलम्बित भुगतान की धनराशि पर दिनांक 45-04--2022 से 07-40-2025 की अवधि के लिए MCLRH% की दर से ब्याज का भुगतान किया जायेगा। शिकायतकर्ता 45 दिन के अन्दर उपरोकतानुसार "GB ज की धनराशि का भुगतान कर भुगतान का प्रमाण विपक्षी के कार्यालय में प्रस्तुत करे। Zo E-Court
शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की तिथि से ०4 माह के अन्दर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट का विक्रय विलेख निष्पादित व पंजीकृत कराकर वास्तविक भौतिक कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित किया जायेगा। विपक्षी द्वारा विक्रय विलेख व कब्जा प्रमाण-पत्र की प्रति रेरा पोर्टल पर अपलोड कर उसकी भौतिक प्रति रेरा मुख्यालय, लखनऊ में प्राप्त कराया जाये। पत्रावली सुनवाई हेतु दिनांक i2-08-2026 को पेश हो। & (हरीश त्रिपारी न्यायनिर्णायक अधिकारी, रेरा