Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Arun Kumar Dixit v. U.P. Awas Evam Vikas Parishad
Complaint No. LKO162/07/77494/2021
- Decision date
- 2026-06-30
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Lucknow
Source: UP RERA order
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Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकाकर हाऊस, युराना हैदराबाद, लखनऊ सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी शिकायत सं0- LK0062/07/77494/202 सुनवाई तिथि: 30-06-2026 Arun Kumar Dixit V/S U.P. Awas Evam Vikas Parishad आदेश पत्र शिकायत वीडियो कॉनर्फेसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु प्रस्तुत की गयी। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री सागर मेंहदी उपस्थित। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री एन.एन. पाण्डेय उपस्थित | उभयपक्षों के विद्वान अधिवक्ता को अवशेष देयता के बिन्दु सुनकर विस्तृत आदेश पारित किया गया। पोर्टल पर तकनीकी समस्या के कारण आदेश पोर्टल पर अपलोड न होने के कारण उभयपक्ष को आदेश की जानकारी नहीं हो सकी | आदेश दिनांक 25-05-2026 को पोर्टल पर अपलोड किया जाय | पत्रावली सुनवाई हेतु दिनांक 45--07-2026 को पेश किया जाय । 6) न्यायनिर्णायक अधिकारी 20 E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकाकर हाऊस, पुराना हैदराबाद, लखनऊ सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी शिकायत सं0- L.KO62/07/77494/202 Arun Kumar Dixit V/S U.P. Awas Evam Vikas Parishad आदेश शिकायत वीडियो कॉनफेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हेतु प्रस्तुत की गयी। शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री सागर मेंहदी एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री एन.एन. पाण्डेय को विस्तार से सुनकर पत्रावली आदेश हेतु सुरक्षित की गई। इस में मामले में पक्षकारों के मध्य विवाद केवल विलम्ब ब्याज की गणना को लेकर है।
विपक्षी के अनुसार परियोजना पूर्ण होने के पश्चात पूर्णता प्रमाण पत्र दिनांक 27-74-209 को जारी हुआ। पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के पश्चात शिकायतकर्ता के पक्ष में प्रथम प्रदेशन ua दिनांक 07-40--2020 को निर्गत किया गया। प्रदेशन पत्र दिनांक o7—-0--2020 के अनुसार शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि w44,94,422/— दिनांक 30-44-2020 तक जमा करना था। शिकायतकर्ता ने दिनांक 30-44-2020 तक प्रदेशन पत्र दिनांकित o7--i0-2020 में अंकित धनराशि G.44,84,.422 /— को जमा नहीं किया। विपक्षी का कथन है कि उसने पूर्व में निर्गत प्रदेशन पत्र दिनांक 07-0--2020 के अनुक्रम में दिनांक 44--03-2022 को संशोधित प्रदेशन पत्र निर्गत किया। दिनांक 44-03-2022 को निर्गत संशोधित प्रदेशन पत्र के द्वारा शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि रू.5,09,442 /~ दिनांक 30-74-2020 तक जमा करने की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने निर्धारित समय के अन्दर अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया। इसलिए विपक्षी ने दिनांक 30-44-2020 से दिनांक 30-03-2022 तक की अवधि के ब्याज की गणना करते हुए दिनांक 42--06-2025 को पुनः संशोधित गणनापत्र प्रेषित किया। शिकायतकर्ता ने संशोधित गणना पत्र दिनांक ॥2-06-2025 में अंकित अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया। शिकायतकर्ता ने संशोधित गणना पत्र दिनांक 42--06-2025 में अंकित धनराशि का विरोध किया |
शिकायतकर्ता के विरोध के आधार पर इस न्यायालय द्वारा दिनांक 03-09-2025 को आदेश पारित करते हुए विपक्षी को आदेशित किया कि वह io दिन के अन्दर संशोधित प्रदेशन पत्र दिनांक 44--03--2022 में ufo के मद में मांगी गई धनराशि एवं शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को जमा की गई धनराशि को घटाते हुए पुनः संशोधित प्रदेशन पत्र जारी करे। आदेश दिनांक 03-09--2025 के अनुपालन में संशोधित गणना पत्र दिनांक 30-09-2025 जारी किया गया, जिसके अनुपालन में NE RI दिनांक 09-40-2025 को ¥.,03,46 / - जमा किया गया। Page एणा 7 E-Court विपक्षी का कथन है कि गणना पत्र दिनांक 30-09-2025 में धनराशि का विवरण गलत अंकित होने के कारण पुनः संशोधित गणना पत्र दिनांक 24--04-2026 जारी किया गया। विपक्षी का यह भी कथन है कि संशोधित गणना पत्र दिनांकित 24 04-2026 4 विलम्ब अवधि के ब्याज की गणना uciavi% की दर से जनवरी 2026 तक शत्रुटिपूर्ण आगणित होने तथा कॉपर्स फण्ड की धनराशि भुगतान होने के बावजूद दुबारा अंकित होने के कारण गणना पत्र दिनांकित 24-04-2026 को संशोधित कर सही गणना पत्र दिनांकित 44-02-2026 जारी किया गया। गणना पत्र दिनांकित 44-02-2026 में विलम्ब ब्याज की धनराशि का भुगतान करके एवं कब्जा सम्बन्धी औपचारिकताएं पूर्ण करने तक रु75,/- प्रतिदिन की दर से flaw शुल्क शिकायतकर्ता द्वारा देय बताया गया। विपक्षी के कथनों के विरूद्ध शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा मांग पत्र दिनांक 24-04-2026 के द्वारा की जा रही मांग अवैध एवं मनमानी है, जिसका भुगतान करने के लिए शिकायतकर्ता बाध्य नहीं है।
शिकायतकर्ता का कथन है कि पूर्व में विपक्षी ने मांग पत्र दिनांक 07-40-2020 के द्वारा रु4,84,482 ,“- दिनांक 30-44--2020 तक जमा करने की मांग की गई थी। विपक्षी द्वारा की गई इस मांग को विवादित करते हुए प्राधिकरण के समक्ष जुलाई 2024 में वर्तमान शिकायत प्रस्तुत की गई। मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 04-42--2024 के द्वारा विपक्षी को निर्देशित किया कि वह नया मांगपत्र जारी करे। मा. प्राधिकरण के आदेश दिनांक 24-42-2024 के अनुपालन में विपक्षी द्वारा नया मांग पत्र दिनांकित 44—-03-2022 जारी किया। मा. पीठ के आदेश का अनुपालन करते हुए शिकायतकर्ता ने मांग पत्र दिनांकित 44-03--2022 में अंकित समस्त धनराशि का दिनांक 34-03-2022 तक भुगतान कर दिया। कॉपर्स wos का दिनांक 09-40-2025 को भुगतान कर दिया गया। दिनांक 3:-03-2022 तक समस्त धनराशि का भुगतान किए जाने, मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध विपक्षी द्वारा प्रस्तुत अपील खारिज होने के परिणामस्वरूप प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश अंतिम हो जाने के पश्चात विपक्षी को अतिरिक्त धनराशि की मांग करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। विपक्षी पूर्व में विवादित की जा चुकी धनराशि को पुनर्जीवित नहीं कर सकता। विपक्षी द्वारा मांग पत्र दिनांक 07-40-2020 / 30-44-2020 के आधार पर, जिसे मा. प्राधिकरण के समक्ष विवादित किया गया था। मा. प्राधिकरण ने इन मांग Ua द्वारा मांगी गई धनराशि का शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान किए जाने का कोई आदेश पारित नहीं किया। मा. प्राधिकरण के आदेश के अनुपालन में नया मांग पत्र दिनांकित 44--03--2022 जारी होने पर पूर्ववर्ती मांग पत्र समाप्त हो गया। विपक्षी द्वारा वर्ष 2020 में जारी मांग पत्र के आधार पर किसी भी धनराशि की मांग नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा मांगपत्र दिनांकित 27-04-2026 के द्वारा की जा रही मांग अवैध व विधिविरूद्ध है। शिकायतकर्ता " ee भी धनराशि भुगतान के a Page 2 of 7 E-Court लिए अवशेष नहीं है। मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 04-42-2024 के अनुसार समस्त भुगतान किया जा चुका है। उभयपक्षों के तर्कों को सुनने तथा अभिलेख के अवलोकन से परिलक्षित होता है कि परियोजना पूर्ण होने के पर पूर्णता प्रमाण पत्र दिनांक 27-4:-20:9 को जारी हुआ। पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के पश्चात शिकायतकर्ता के पक्ष में प्रथम vera पत्र दिनांक o7—t0—2020 को निर्गत किया गया। प्रदेशन पत्र दिनांक 07-40-2020 में शिकायतकर्ता द्वारा रू44,84,422,“- का भुगतान दिनांक 30-7:-2020 तक जमा कराये जाने की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने दिनांक 30--44-2020 तक प्रदेशन पत्र दिनांकित 07-40-2020 में अंकित धनराशि रू.44,84,422,/- का भुगतान नहीं किया। शिकायतकर्ता द्वारा रू.44,84,422,“- की मांग को अवैध व विधिविरूद्ध बताकर विवादित करते हुए मा. प्राधिकरण के समक्ष वर्तमान शिकायत प्रस्तुत किया गया। मा. प्राधिकरण ने उभयपक्षों को सुनने के पश्चात अपने आदेश दिनांक 04-42-2024 के द्वारा विपक्षी को निर्देशित किया कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 30 दिन के अन्दर अंतिम गणना पत्र जारी करे तत्पश्चात अग्रिम 30 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता से नियमानुसार धनराशि प्राप्त कर विकय विलेख कराकर शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित करे।
मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 04-42-2024 रेरा पोर्टल पर दिनांक 03-42-2024 को अपलोड किया गया। आदेश अपलोड होने की तिथि दिनांक 03-42-2024 से ३0 दिन अर्थात 02--04-2022 तक विपक्षी को अंतिम गणना पत्र जारी करना था। अंतिम गणना पत्र जारी होने के पश्चात अग्रिम 30 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को अवशेष धनराशि का भुगतान करना था। विपक्षी ने मा. प्राधिकरण द्वारा निर्देशित अवधि दिनांक 02-04--2022 तक कोई भी अंतिम गणना पत्र शिकायतकर्ता को प्रेषित नहीं किया। विपक्षी ने मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 04-42-2024 के आधार पर अंतिम गणना»मांग पत्र दिनांक 44-03--2022 को जारी किया। गणना पत्र दिनांक 44-03-2022 के द्वारा शिकायतकर्ता से रु.5,09,442,“- भुगतान किए जाने की मांग की गई। मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक o:-72-202: में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विपक्षी द्वारा 30 दिन के अन्दर अंतिम गणना »मांग पत्र जारी किया जायेगा। अंतिम गणना मांग पत्र जारी होने की तिथि से अग्रिम 30 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान किया जायेगा। मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 04-42--2024 के आधार पर अंतिम गणना पत्र दिनांक 44--03-2022 को जारी किया गया मा. प्राधिकरण के आदेश के अनुसार अंतिम मांग पत्र निर्गत किए जाने की तिथि दिनांक 44-03-2022 से अग्रिम 30 दिन अर्थात 44-04 2022 तक शिकायतकर्ता को मांगपत्र दिनांक 44-03-2022 में अंकित धनराशि का भुगतान करना था। शिकायतकर्ता के अनुसार दिनांक 3i-03-2022 तक समस्त धनराशि का भुगतान कर दिया EEA Page 3 of 7 E-Court
इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि पूर्व में विपक्षी द्वारा दिनांक 07-40-2020 को मांगपत्र प्रेषित कर रु.(4,84,422,/- शिकायतकर्ता से भुगतान करने की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने इस धनराशि को विवादित करते हुए मा. प्राधिकरण के समक्ष वर्तमान शिकायत प्रस्तुत किया | उभयपक्षों को सुनने के पश्चात मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 04-42-2024 के द्वारा शिकायत का अंतिम निस्तारण करते हुए विपक्षी द्वारा मांगपत्र दिनांक 07-40--2020 में अंकित धनराशि को स्वीकार न करते हुए विपक्षी को निर्देशित किया कि वह 30 दिन के अन्दर अंतिम गणना पत्र जारी करे। मा. प्राधिकरण के आदेश दिनांक 04-42-2024 के आधार पर विपक्षी द्वारा जो अंतिम गणना पत्र दिनांक 44-03--2022 को प्रस्तुत किया गया, उसमें शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि रु.5,09,442 ,/“- बताई गयी। इस प्रकार विपक्षी द्वारा मांगी गई रु.44,84,422 /- की धनराशि को प्राधिकरण द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। प्राधिकरण के निर्णय को स्वीकार करते हुए विपक्षी ने दिनांक 44-03-2022 को जो अंतिम गणना पत्र प्रस्तुत किया उसमें शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि रु.5,09,442 // - बताई गयी। इस प्रकार स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा पूर्व में रु44,84,422 /- की जो मांग की जा रही थी वह सही नहीं थी। विपक्षी ने दिनांक 44-03-2022 को जो अंतिम मांग पत्र प्रस्तुत किया उसमें भुगतान की तिथि 30-44--2020 बताई गयी। वर्ष 2022 में जारी मांग पत्र के द्वारा वर्ष 2020 में भुगतान किए जाने की मांग प्रथम दृष्टया अनुचित एवं अतार्किक प्रतीत होती है
मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 0i-72-202 गें विपक्षी को निर्देशित किया कि 30 दिन के अन्दर अंतिम गणना पत्र जारी करे। अंतिम गणना पत्र जारी होने के अग्रिम 30 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता को भुगतान करना था। मा. प्राधिकरण के आदेश के अनुपालन में अंतिम गणनामांग पत्र दिनांक 02-04-2022 तक जारी करने के बजाय दिनांक 44-03-2022 को निर्गत किया गया। अंतिम गणना मांग पत्र दिनांक 44-03-2022 में मा. पीठ द्वारा आदेशित, आदेश अपलोड होने की तिथि दिनांक 03-42-2024 से अग्रिम 30 दिन अर्थात 02--04-2022 से अग्रिम 30 दिन की अवधि में बकाया धनराशि का भुगतान किए जाने की मांग करने के बजाय शिकायतकर्ता से दिनांक 30-44-2020 तक भुगतान किए जाने की मांग की गयी, जो अनुचित एवं विधिविरूद्ध है। इस मामले में देयता के निर्धारण की तिथि को लेकर विवाद है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की देयता मांग पत्र दिनांक o7-40-2020 के आधार पर निर्धारित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका विरोध करते हुए शिकायतकर्ता का कथन है कि जब शिकायतकर्ता ने मांगपत्र दिनांक o7-0-2020 को विवादित करते हुए मा. प्राधिकरण के समक्ष चुनौती दे fear) प्राधिकरण ने भी अपने आदेश में मांगपत्र दिनांक 07-40-2020 में मांगी जा रही धनराशि को सही नहीं माना तभी विपक्षी को नया गणना »मांगपत्र जारी करने का निर्देश दिया। इसलिए मांग पत्र दिनांक 07-40--2020 के आधार पर शिकायतकर्ता की कोई भी देयता निर्धारित नहीं की जा सकती। ae निर्धारण मा. Page 4 of 7 E-Court प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 04--42-2024 के आधार पर जारी अंतिम गणना »मांगपत्र दिनांकित 44--03--2022 के आधार पर ही की जा सकती है।
उभयपक्षों के तर्कों का तुलनात्मक मूल्यांकन करने से शिकायतकर्ता का पक्ष कथन ज्यादा स्वाभाविक एवं तर्क संगत प्रतीत होता है। प्राधिकरण ने मांग पत्र दिनांक 07-40--2020 में अंकित धनराशि को सही नहीं पाया और विपक्षी को नया गणना» मांगपत्र निर्गत करने का निर्देश दिया। विपक्षी द्वारा मा. प्राधिकरण के आदेश को स्वीकार करते हुए नया अंतिम गणना,मांग पत्र निर्गत किया गया। मांग पत्र दिनांक 07--40-2020 में रु.4,84,422 /— शिकायतकर्ता द्वारा देय बताया गया था जबकि मा. पीठ द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में Peta अंतिम गणना/मांगपत्र दिनांकित 74-03-2022 में रु.5,09,422 /— शिकायतकर्ता द्वारा देय बताया wary विपक्षी द्वारा दिनांक 44-03-2022 को निर्गत मांगपत्र में मात्र रु5,09,422,/-- अवशेष धनराशि की मांग किए जाने से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा स्वयं यह स्वीकार किया गया कि उसके द्वारा निर्गत पूर्ववर्ती मांगपत्र दिनांक 07-40--2020 में मांगी जा रही G.47,84,422/— धनराशि की मांग सही नहीं of] जब विपक्षी द्वारा स्वयं स्वीकार किया जा चुका है कि मांगपत्र दिनांक 070-40--2020 के माध्यम से की जा रही मांग सही नहीं थी तो मांगपत्र दिनांक 07-40--2020 के आधार पर कोई देयता स्वीकार नहीं की जा सकती। शिकायतकर्ता की देयता का निर्धारण मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 0i-72~202 के अनुपालन में जारी किए गये अंतिम गणना»मांगपत्र दिनांकित 44-03-2022 के आधार पर ही की जायेगी।
उभयपक्षों के मध्य विवाद इस बिन्दु पर भी है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से विलम्ब की अवधि के लिए रु75,/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब शुल्क मांगा जा रहा है। विपक्षी के अनुसार उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद की अनावासीय एवं आवासीय सम्पत्ति के निस्तारण सम्बन्धी विनियम यथा संशोधित 2046 के नियम--42 के आधार पर रु75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब शुल्क मांगा जा रहा है। विपक्षी के उपरोक्त कथनों का खण्डन करते हुए शिकायतकर्ता द्वारा कहा जा रहा है कि वर्तमान न्यायालय निष्पादन न्यायालय के रूप में कार्य कर रहा है। मा. प्राधिकरण के जिस आदेश का निष्पादन कराया जा रहा है, उसमें रु75,/- की दर से विलम्ब शुल्क वसूल किए जाने का कोई निर्देश नहीं है। मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 0-42--2024 में स्पष्ट कर दिया है कि उभयपक्षों द्वारा विलम्ब की स्थिति में MciRii% की दर से ही विलम्ब ब्याज देय होगा। उभयपक्षों के तकों के प्रकाश में विचारणीय प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या विलम्ब के लिए विलम्ब शुल्क का निर्धारण विपक्षी द्वारा अभिकथित रु75,/-- प्रतिदिन की दर से अथवा शिकायतकर्ता द्वारा दावा की जा रही MCLR+I% की दर से किया जायेगा ? इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि रेरा अधिनियम की धारा 2(»७) में ब्याज का अर्थ स्पष्ट किया गया है। इस धारा के प्राविधानों के अनुसार GE व प्रोमोटर दोनों के ही मामले में विलम्ब की दशा में समान दर पर ब्याज देय होगा। Page 5 of 7
मा. प्राधिकरण ने भी अपने आदेश दिनांक 04-42-2024 में प्रवर्तनीय भाग के बिन्दु संख्या-2 में निर्देशित किया है कि विपक्षी, शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि के लिए दिनांक 27-02-2048 से प्रदेशन पत्र जारी करने की तिथि 07-40-2020 तक की अवधि के लिए स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा निर्धारित McLRii% की दर से विलम्बित ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें | इसी प्रकार आदेश के बिन्दु-3 में यह we किया है कि रेरा अधिनियम की धारा-2(०७)0) के प्राविधानों के अनुसार यदि प्रोमोटर द्वारा आवंटी के व्यतिकम पर कोई ब्याज दर लिया जाता है तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा व्यतिकम किए जाने पर आवंटी को भी दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा A MCLR+I% की दर से ब्याज देय होगा। संविधियों के Ader का सुस्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम या विनियम सारवान विधिक प्राविधानों के विरूद्ध नहीं हो सकता। रेरा अधिनियम की धारा-2(»७)() के प्राविधान सारवान विधिक प्राविधान हैं। विपक्षी द्वारा रेग्युलेशन संख्या-42 के आधार पर रू. 75/- प्रतिदिन की दर से विलम्ब शुल्क की जो गणना की जा रही है वह रेरा अधिनियम की धारा-2(2४)0) के सारवान विधिक प्राविधानों के विरूद्ध एवं मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश में दिए गये निर्देश संख्या-2 एवं 3 का उल्लंधन है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि के लिए दिनांक 27-02-20I8 से प्रदेशन पत्र जारी करने की तिथि 07-40-2020 तक की अवधि के लिए स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया द्वारा निर्धारित MCLRiI% की दर से विलम्बित ब्याज अदा किया गया है। इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा यदि भुगतान में कोई विलम्ब किया गया है तो विपक्षी भी शिकायतकर्ता से MCLRH% की दर से ही विलम्ब ब्याज वसूल कर सकता है।
अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या शिकायतकर्ता ने भुगतान में कोई विलम्ब किया है? अंतिम गणना मांग पत्र दिनांक 44--03-2022 के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान से सम्बन्धित जो प्रपत्र दाखिल किए गये हैं, उसके अनुसार शिकायतकर्ता ने दिनांक 34-03-2022 तक अवशेष धनराशि रु.5,09,442,“-, विविध शुल्क के मद में रु.8,464 /-, विविध शुल्क पर जी.एस.टी. की मद में रु.4,469 //-, जमा धनराशि पर जी.एस.टी. के मद में रु.92,852,/- तथा जमा धनराशि एवं शुद्ध देय धनराशि पर जी.एस.टी. %.94,700/—- का भुगतान कर दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम गणना पत्र दिनांक 44--03-2022 के द्वारा मांगी गयी रख-रखाव शुल्क रु.2646,/-, कॉपर्स फण्ड रु.,00,000/--. आजीवन सदस्यता शुल्क रु.500,// - अर्थात कूल रु.,03,446 //-- का भुगतान दिनांक 09-40--2025 को किया गया। मा. प्राधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 04-42-2024 में विपक्षी को निर्देशित किया कि 30 दिन के अन्दर अंतिम गणना पत्र जारी करे। अंतिम गणना पत्र जारी होने के अग्रिम 30 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता को भुगतान करना था। विपक्षी द्वारा अंतिम गणना मांग पत्र दिनांक 44-03-2022 को निर्गत किया गया। ee” पत्र दिनांक Page 6 of 7 E-Court 74-03-~-2022 से 30 दिन के अन्दर अर्थात दिनांक 44--04-2022 तक शिकायतकर्ता द्वारा समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा रख-रखाव शुल्क रु.2,646,/-, कॉपर्स ws B.4,00,000 /-, आजीवन सदस्यता शुल्क रु500,/- अर्थात कुल %.4,03,.46/— को छोड़कर मांगपत्र दिनांक 44-03--2022 में मांगी गयी समस्त धनराशि का भुगतान दिनांक 3i-03-2022 तक कर दिया गया।
शिकायतकर्ता द्वारा रख-रखाव शुल्क रु2.646 / -, कॉपर्स BS रु.4,00,000 /-., आजीवन सदस्यता शुल्क रु.500,/- अर्थात कुल रु.4,03,446 /— दिनांक 09-40-2025 को जमा किया गया। मा. पीठ के निर्देशों के अनुपालन में अंतिम गणना» मांगपत्र निर्गत किए जाने के 30 दिन के अन्दर भुगतान कर दिया जाना चाहिए था। विपक्षी द्वारा अंतिम मांगपत्र दिनांक 44-03-2002 को जारी किया गया। मांगपत्र की तिथि से 30 दिन अर्थात 44-04-2022 तक भुगतान कर दिया जाना चाहिए था जबकि शिकायतकर्ता ने %.2,03,246/— का भुगतान दिनांक o9—i0-2025 को किया गया है। इस प्रकार शिकायतकर्ता द्वारा रु4,03,446 /- की विलम्बित भुगतान की धनराशि पर दिनांक 44-04--2022 से 08-40-2025 की अवधि के लिए McLRH% की दर से ब्याज देय होगा। शिकायतकर्ता 45 दिन के अन्दर उपरोकतानुसार विलम्ब ब्याज की धनराशि का भुगतान कर भुगतान का प्रमाण विपक्षी के कार्यालय में प्रस्तुत करे। शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान का प्रमाण प्रस्तुत किए जाने की तिथि से ०4 माह के अन्दर विपक्षी ert शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट का विक्रय विलेख निष्पादित व पंजीकृत कराकर वास्तविक भौतिक कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित किया जायेगा। विपक्षी द्वारा विक्रय विलेख व कब्जा प्रमाण-पत्र की प्रति रेरा पोर्टल पर अपलोड कर उसकी भौतिक प्रति रेरा मुख्यालय, लखनऊ में प्राप्त कराया जाये | पत्रावली सुनवाई हेतु दिनांक 30-06-2026 को पेश हो। (हरीश Brant” न््यायनिर्णायक अधिकारी, रेरा Page 7 of 7 b