Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sachin Sharma v. Fuhaar Infrareality (Opc) Private Limited
Complaint No. LKO162/07/140524/2026
- Decision date
- 2026-08-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
Source: UP RERA order
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Judgment text
भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकांकर हाउस, ओल्ड हैदराबाद, लखनऊ - 226007 (SH) भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की asi के अन्तर्गत आदेश विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की asi के अन्तर्गत आदेश पीठ- 02 पीठासीन:- श्रीमती डिम्पल वर्मा (सदस्य) शिकायत संख्या-[॥(0462/07/44 0524/2026 we शिकायतकर्ता बनाम FUHAAR INFRAREALITY (OPC) PRIVATE LIMITED __.........._. विपक्षी प्रतिनिधित्व-- शिकायतकर्ता :- स्वयं विपक्षी :- अनुपस्थित शिकायतः- शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध ब्याज सहित धनराशि वापसी की मांग की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का मुख्यतः यह कथन है कि वह विपक्षी की परियोजना FUHAAR PARADISE लखनऊ में इकाई संख्या-&270 , &279 बुक कराया था, जिसकी कुल कीमत रु. 42,96,000,/- (बारह लाख छियानबे हजार रूपये मात्र) थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके द्वारा सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में यह भी इंगित किया है विपक्षी द्वारा इकाई का कब्जा प्रदान करने में 36 माह का विलम्ब किया गया है तथा इकाई की रजिस्ट्री अप्रैल-2023 में निष्पादित हो गयी थी, किन्तु अभी तक इकाई का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा प्रॉसपेक्टस , विज्ञापनों के माध्यम से भ्रामक सूचना प्रदान की गयी है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि वापसी की मांग Dae RRS | A दान याओ f 4/3 = द्वारा अपने शिकायत के समर्थन में निम्नलिखित अभिलेख अपलोड किया गया है, किन्तु अभिलेखों की स्वअभिप्रमाणित भौतिक प्रति उपलब्ध नहीं करायी गयी है :-
4. विक्रय-विलेख दिनांक 05-04--2023 की प्रति (अनअभिप्रमाणित)। . भुगतान की गयी धनराशि की रसीद की प्रति (अनअभिप्रमाणित)। . खाता विवरण की प्रति (बिना किसी नाम के /अनअभिप्रमाणित)। . SITE LAYOUT PLAN की प्रति (अनअभिप्रमाणित)। a oS fev) i) . MEMO OF COMPLAINT की अहस्ताक्षरित की प्रति (अनअभिप्रमाणित) | प्रश्नगत शिकायत की प्रथम सुनवाई दिनांक 49-08-2026 को की गयी, जिसमें विपक्षी की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री हरीश पाण्डेय उपस्थित थे। अंतिम सुनवाई दिनांक 27-08-2026 को की गयी जिसमें भी विपक्षी की ओर से उनके विद्वान अधिवक्ता श्री हरीश पाण्डेय उपस्थित थे। पत्रावली व पोर्टल के अवलोकन से स्पष्ट है कि विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता का वकालतनामा अपलोडेड नहीं है, किन्तु त्रुटिवश आर्डरशीट दिनांक 49-08-2026 में वकालतनामा अपलोडेड है टंकित हो गया है जिसे जिसे दिनांक 27-08-2026 के आर्डरशीट में वकालतनामा अपलोडेड नहीं है, संशोधित कर दिया गया। इस प्रकार विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता की उपस्थिति मान्य नहीं है। ऐसी स्थिति में “Tustice delayed is Justice denied” के सिद्धांतों पर और समय दिये जाने का औचित्य नहीं बनता हैं। अतः: एक पक्षीय आदेश पारित करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है। उपस्थित पक्षकारों के तर्कों को सुना गया और पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किया जाता है :- 4. क्या शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु ea निस्तारण बिन्दु संख्या-। इस आशय से विचरित किया गया है कि an शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? यदि हाँ तो ब्याज की N. Uenve _ = क्या होगी ?
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में यह भी इंगित किया है विपक्षी द्वारा इकाई का कब्जा प्रदान करने में 36 माह का विलम्ब किया गया है तथा इकाई की रजिस्ट्री अप्रैल-2023 में निष्पादित हो गयी थी, किन्तु अभी तक इकाई का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा प्रॉसपेक्टस / विज्ञापनों के माध्यम से भ्रामक सूचना प्रदान की गयी है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि वापसी की मांग की गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध विक्रय-विलेख दिनांकित 05-04--2023 से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में प्रश्नगत इकाईयों का विक्रय-विलेख निष्पादित किया जा चुका है, किन्तु शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी समस्त धनराशि को वापस दिलाये जाने की मांग की गयी है। जहाँ तक शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग किया गया है तो इस सम्बन्ध में विक्रय-विलेख के निरस्तीकरण हुए बिना धनराशि वापस दिलाया जाना न्यायोचित नहीं है। शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा इकाई का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, अतः प्रश्नगत अनुतोष में शिकायतकर्ता का हित Peta है, परन्तु शिकायतकर्ता की शिकायत रेरा में पोषणीय नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता आवंटी नहीं बल्कि ओनर (Owner) हो चुका है। अत: प्रश्नगत शिकायत में पीठ का क्षेत्राधिकार प्राप्त न होने एवं बिना हस्ताक्षरित Memo of complaint होने के कारण शिकायत को अपूर्ण मानते हुए निरस्त किया जाता है। शिकायतकर्ता विपक्षी के विरूद्ध समक्ष न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने के लिए व अन्य वैधानिक कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र हैं। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। पत्रावली अभिलेखागार में संचित हो। & ee) ही —— = Rho 4) (डिम्पल वर्मा) अत, सदस्य
दिनांक :-22-/ ०१ / 2026 Sa. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 3/3