Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mr. Nikhil Rijhwani v. ATS Housing Private Limited
Complaint No. ADJ/NCR144/11/124670/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-06-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-34 2-शिकायत eAT—ADI/NCR44/I/24670/2024 श्री निखिल रिझवानी , बनाम ह एटीएस हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड आदेश दिनांक: 27.06.2025 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री यश गुप्ता उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी उपस्थित gg | शिकायतकर्ता द्वारा आज दिनांक 27.06.2025 को वीडियो कॉन्फेसिंग के माध्यम से बहस के दौरान अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा आज तक भी यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से कब्जे में हुए विलम्ब के रूप में प्रतिकर दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। . प्रस्तुत मामलें में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा आवंटित यूनिट का भौतिक कब्जा वर्ष 2024 में उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु आज तक भी विपक्षी द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता को किराये के मकान पर वर्ष 2022 से निवास करना पड़ रहा है। इस आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से कब्जे में हुए विलम्ब के आधार पर प्रतिकर feed जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 05.06.2025 को अपनी आपत्ति दाखिल करते हुए एवं आज सुनवाई में बहस के दौरान अवगत कराया गया है कि शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा' सिविल अपील संख्या-6745-6749 / 2024 “मैसर्स =a प्रोमोटर्स एंड
डेवलपर्स wo feo बनाम स्टेट ऑफ यूपी. व अन्य” में पारित आदेश दिनांकित 44.44. 2024 .का भी उल्लेख किया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश —=t__ के आधार पर प्रस्तुत शिकायत माननीय न्यायनिर्णायक अधिकारी के क्षेत्राधिकार में पोषणीय नहीं है। ॥ पूर्व में प्राधिकरण एवं न््यायनिर्णायक अधिकारी की अधिकारिता के सम्बन्ध में यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सा अनुतोष प्राधिकरण द्वारा स्वीकार किया जायेगा और कौन सा अनुतोष न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा स्वीकार किया जायेगा। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 / 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo feo बनाम स्टेट ऑफ यूपी. व अन्य” में दिनांक 44.44. 2024 को पारित आदेश के प्रस्तर-86 में स्पष्ट रूप से यह व्यवस्था दी गयी है कि कब्जे में विलम्ब तथा विलम्ब ब्याज की बाबत शिकायत की सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेरा प्राधिकरण को है न की न्यायनिर्णायक अधिकारी को है। प्रस्तर-86 निम्न प्रकार हैं :-
"86. From the scheme of the Act of which a detailed reference has been made and taking note of power of adjudication delineated with the regulatory authority and adjudicating officer, what finally culls out is that although the Act indicates the distinct expressions like ‘refund’, ‘interest’, ‘penalty’ and ‘compensation’, a conjoint reading of Sections 8 and 9 clearly manifests that when it comes to refund of the amount, and interest on the refund amount, or directing payment of interest for delayed delivery of possession, or penalty and interest thereon, it is the regulatory authority which has the power to examine and determine the outcome of a complaint. At the same time, when it comes to a question of seeking the relief of adjudging compensation and interest thereon under Sections 2, 4, 8 and 9, the adjudicating officer exclusively has the power to determine, keeping in view the collective reading of Section 7] read with Section 72 of the Act. If the adjudication under Sections 2, 4, 8 and 9 other than compensation as envisaged, if extended to the adjudicating officer as prayed that, in our view, may intend to expand the ambit and scope of the powers and functions of the adjudicating officer under Section 7] and that would be against the mandate of the Act 20I6."
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यूटेक प्रोमोटर एवं डेवलपर्स के उपरोक्त मामलें में निर्णय के प्रस्तर-86 के परिपेक्षों से स्पष्ट हो चुका है कि उपरोक्त प्रश्न का विचारण न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा नहीं किया जा सकता है। माननीय सर्वोच्च न्यायायल के उपरोक्त निर्णय के पश्चात् विधिक स्थिति स्पष्ट हो गयी है, जिसके अनुसार न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा मात्र क्षतिपूर्ति के अनुतोष पर विचार किया जायेगा। शेष अनुतोष प्राधिकरण के समक्ष विचाराणीय होगें। क्योंकि शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है और न ही शिकायतकर्ता द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है, जिससे यूनिट की भौतिक कब्जे की स्थिति स्पष्ट हो सकें। इसलिए शिकायतकर्ता कब्जे एवं विलम्ब ब्याज हेतु वह रेरा की सक्षम पीठ के समक्ष फार्म “एम” में शिकायत दर्ज कर सकता है। प्रस्तुत शिकायत की सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस पीठ को प्राप्त नहीं है। अतः ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता इस आधार पर इस पीठ से कोई अनुतोष प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। शिकायतकर्ता की शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है:- ह आदेश शिकायतकर्ता की प्रश्नगत शिकायत उपरोकतानुसार निरस्त की जाती है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तदनुसार पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। दिनांक :- 27.06.2025 seal a ae A ere feo? eX (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण