Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sumit Narula v. Apex Dream Homes Private Limited
Complaint No. ADJ/NCR144/08/132286/2025
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-08-26
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण नवीन भवन, राज्य नियोजन संस्थान, कालाकाकर हाऊस, पुराना हैदराबाद, लखनऊ सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी न्यायालय. _ न्यायनिर्णायक अधिकारी उपस्थित - हरीश त्रिपाठी परिवाद संख्या _ 493/९८7२44/08/32286/2025 Sumit Narula & Princy Chaudhary so eseeeeeeeeComplainant बनाम Apex Dream Homes Private Limited teesseeeeeee ReSpondent निर्णय शिकायतकर्ता Sumit Narula & Princy Chaudhary द्वारा विपक्षी / प्रोमोटर Apex Dream Homes Private Limited के विरुद्ध कब्जे में विलम्ब एवं अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या विकय करार के अधीन आरोपित किन्ही अन्य बाध्यताओं का निर्वहन करने में विपक्षी के असफल रहने के परिणामस्वरूप प्रतिकर दिलाये जाने की प्रार्थना के साथ परिवाद आवेदन प्रस्तुत किया गया है। शिकायत अभिकथनों का सार यह है कि शिकायतकर्ता ने विपक्षी की परियोजना APEX ATHENA(UPRERAPRJI0394) में दिनांक 30-07-204 को यूनिट S संख्या- 7-4304 को बुक कराया। आवंटन पत्र /विकय अनुबंध दिनांक 30-07-2044 को & aia निष्पादित किया गया। यूनिट का कुल विकय मूल्य रु.॥4990000.00 था | विकय मूल्य के Fs em 0) सापेक्ष शिकायतकर्ता यतकर्ता द्वारा रु42954975.00,/- का भुगतान किया गया है। आवंटन पत्र /विकय अनुबंध की शर्तों के अनुसार कब्जा 24 माह अर्थात दिनांक 30-07—206 तक दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण भुगतान करने के बावजूद, प्रमोटर / विपक्षी यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करने में असफल रहा। एक वर्ष के अत्यधिक विलम्ब के पश्चात् दिनांक 40.06.2077 को कब्जा प्रदान किया गया है। विपक्षी द्वारा आज तक शिकायतकर्ता के पक्ष में हस्तान्तरण विलेख निष्पादित नहीं किया गया है।
arom el yaa eat Fy प्रमोटर / विपक्षी ने शिकायतकर्ता के विरूद्ध पूर्व में प्राधिकरण के समक्ष शिकायत संख्या NCRI4400027/2004 संस्थित किया था। उक्त शिकायत में विपक्षी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि शिकायतकर्ता ने विपक्षी Ca %.i,9,00,488.00 का हक Page 4 [3732 E-Court भुगतान कर दिया था। sat शिकायत में पारित आदेश दिनांक 9.2.2024 का पालन करते हुए शिकायतकर्ता ने कब्जे और अन्य शुल्कों के लिए बकाया अंतिम राशि रु. 40,54,487 रुपये का भुगतान विपक्षी के खाते में दिनांक 25.02.2025 के चेक संख्या-003036 के माध्यम से कर दिया। उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर जून 20:6 से भौतिक कब्जा प्राप्ति की तिथि 40.06.2047 तक कब्जे में विलम्ब के लिए प्रतिकर दिलाये जाने का अनुतोष मांगा गया है। अपने कथन के समर्थन में शिकायतकर्ता ने आवंटन पत्र, विकय अनुबंध, शिकायत GI-NCRI440I0027/2024 में पारित आदेश, मांग पत्र तथा बकाया अंतिम भुगतान रु.0,54,487 दिनांक 25.02.2025 के चेक की छाया प्रति दाखिल किया है। शिकायत अभिकथनों का खण्डन करते हुए विपक्षी द्वारा आपत्ति प्रस्तुत कर यह अभिकथित किया गया है कि शिकायतकर्ता पूर्व शिकायत WeA-NCR440I0027/2024 में प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 49.42.2024 के अनुपालन में अवशेष धनराशि रु.0,54,487 का भुगतान कर आवंटित यूनिट की रजिस्ट्री नहीं करा रहा है। उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा अवशेष धनराशि ©.40,54,487 अनुरक्षण चार्ज के रूप में रू.942743.00 तथा त्रिपक्षीय सब लीज डीड पंजीकृत एवं निष्पादित करने हेतु आवश्यक wry तथा पंजीयन शुल्क जमा करने के लिए शिकायतकर्ता को आदेशित किये जाने का अनुरोध किया किया गया है।
विपक्षी की आपत्ति के विरूद्ध प्रत्युतर दाखिल कर शिकायतकर्ता ने आपत्ति में किये गये कथनों का खण्डन किया तथा शिकायत में किये गये अभिकथनों पर बल देते हुए पुनः दोहराया है। उभयपक्षों के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी गई। पत्रावली में उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं सामग्री का सम्यंक परिशीलन किया। उभयपक्षों के तर्कों, अभिकथनों एवं प्रति अभिकथनों तथा प्रस्तुत साक्ष्य व सामग्री पर विचार करने के उपरान्त निम्नलिखित अवधार्य बिन्दु उत्पन्न होते हैं- का आदेश पारित किए जाने योग्य है? 2. क्या विपक्षी अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या fea करार के अधीन आरोपित किन्ही अन्य बाध्यताओं का निर्वहन करने में असफल रहा है, जिसके लिए शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति DE a हैं? 4. क्या कब्जे में विलम्ब के लिए इस न्यायालय द्वारा ब्याज के रूप में “न फ्र् ०02 a Page 2 of 2 th E-Court अवधार्य बिन्दु de-oi यह sod बिन्दु इस आशय का है कि क्या कब्जे में विलम्ब के लिए इस न्यायालय द्वारा ब्याज के रूप में प्रतिकर का आदेश पारित किए जाने योग्य है? यह अवधार्य बिन्दु शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद में किये गये अभिकथनों एवं याचित अनुतोष के आधार पर उत्पन्न हुआ है अतः इसे साबित करने का प्रमाण भार शिकायतकर्ता पर है। उपरोक्त प्रश्न पर विचार करने से पूर्व इस संबंध मे सुसंगत विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक निर्णयों का उल्लेख किया जाना समीचीन होगा। धारा-74 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2046 में न््यायनिर्णायक अधिकारी की नियुक्ति एवं क्षतिपूर्ति का न्याय निर्णयन करने की शक्ति एवं प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
धारा-72 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2046 में न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा क्षतिपूर्ति का निर्धारण करते समय विचार में रखे जाने वाले कारकों का उल्लेख किया गया है। धारा-74 व धारा-72 के प्रावधान निम्नवत् है - SIRT-7 Power to adjudicate;- () For the purpose of adjudging compensation under Secion 2, 4, 8 and Saction 9, the Authority shall appoint in consultation with the appropriate Government one or more judicial officer as deemed necessary, who is or has been a District Judge to be an adjudicating officer for holding an inquiry in the prescribed manner, after giving any person concerned a reasonable opportunity of being heard: Provided that any person whose complaint in respect of matters covered under Section ]2, ]4, ]8 and Sction 9 is pending before the Consumer Disputes Redressal forum or the Consumer Disputes Redressal Comminssion or the National Consumer Redressai Commission, estabiished under section 9 of the Consumer Protection Act. 986 (68 of AZ on or a Page 3 of 32 before the commencement of this Act, he may, with the permission of such Forum or Commisiion, as the case may be, withdraw the complaint pending before it and file an application before the adjudicating officer under this Act. (2) The application for adjudging compensation under sub- sction (I), shall be dealt with by the adjudicating officer as expeditiously as possible and dispose of the same within a period of sixty days from the date of receipt of the application.
Providing that where any such application could not be disposed of within the said period of sixty days, the adjudicating officer shall record his reasons in writing for not disposing of the application within the period (3) While holding an inquiry the adjudicating officer shall have power to summon and enforce the attendance of any person acquainted with the facts and circumstances of the case to give evidence or to produce any document which in the opinion of the adjudicating officer, may be useful for or relevant to the subject matter of the inquiry and if, on such inquiry he is satisfied that the person has failed to comply with the provisions of any of the sections specified in sub-section (I), he may direct to pay such compensation or interest, as the case any be, as he thinks fit in accordance with the provisions of any of those sections. घारा-72 Factors to be taken into account by the adjudicating officer;- While adjudging the quantum of compensation or interest, as the case may be, under section 7i, the adjudicating officer shall have due regard to the following factors, namely:- (a) The amount of disproportionate gain or unfair advantage, wherever quantifiable, made as a result or the default; (b) The amount of loss caused as a result of the default; (c) The repetitive nature of the AZ Page 4 of 42 (d) Such other factors which the adjudicating officer considers necessary to the case in furtherance of justice. E-Court
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) offfraa—zoie की aris!) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि प्रमोटर अपार्टमेन्ट / फ्लैट ore » बिल्डिंग को निर्धारित घारा-8 Return of Amount and Compensation - (I) If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment. plot or building, (a) In accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) Due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, He shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available. to returen the amount received by him in respect of the apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act. Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rgte.as may he handin f th jon, 2 GE as may prescribed. ZA, समय में पूरा करने अथवा कब्जा प्रदान करने में असफल रहता है तो आवंटी द्वारा मांग किये जाने पर समस्त जमा की गयी धनराशि ब्याज सहित वापस की जायेगी तथा प्रमोटर आवंटी को होने वाली क्षति के लिए क्षतिपूर्ति भी देने के लिए उत्तरदायी होगा।
धारा--8(0) के परन्तुक के अनुसार जहां कब्जे में विलम्ब के बावजूद आवंटी परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता वहां पर प्रोमोटर कब्जा प्रदान किए जाने की तिथि तक विलम्ब के प्रत्येक माह के लिए आवंटी को विहित दर पर ब्याज भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। धारा-48 के प्रावधान निम्नवत् है:- Page 5 042 E-Court उपरोक्त विधिक प्रावधानों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि भू-सम्पदा (विनियम एवं विकास) अधिनियम--2046 की धारा-74 के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी की नियुक्ति अधिनियम की धारा-42, 44, 48 एवं 9 के अधीन क्षतिपूर्ति का न्याय निर्णयन करने के लिए की गयी है। पूर्व में प्राधिकरण एवं न््यायनिर्णायक अधिकारी की अधिकारिता के संबंध में यह स्पष्ट नहीं था कि कौन सा अनुतोष प्राधिकरण द्वारा स्वीकार किया जायेगा और कौन सा अनुतोष न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा स्वीकार किया जायेगा। Alo सर्वोच्च न्यायालय द्वारा M/s Newtech Promoters and Developers Pvt' Ltd' VS State of uftar Pradesh [202 SCC Online 044] के मामले में निर्णय के प्रस्तर-86 में विधिक स्थिति को स्पष्ट कर दिया गया है। प्रस्तर-86 निम्नवत् हैः-
86. From the scheme of the Act of which a detailed reference has been made and taking note of power of adjudication delineated with the regulatory authority and adjudicating officer, what finally culls out is that although the Act indicates the distinct expressions like ‘refund’, ‘interest’, ‘penalty’ and ‘compensation’, a conjoint reading of Sections 8 and 9 clearly manifests that when it comes to refund of the amount, and interest on the refund amount, or directing payment of interest for delayed delivery of possession, or penalty and interest thereon, it is the regulatory authority which has the power to examine and determine the outcome of a complaint. At the same time, when it comes to a question of seeking the relief of adjudging compensation and interest thereon under Sections !2. 4. I8 and 9, the adjudicating officer exclusively has the power to determine. keeping in view the collective reading of Section 7 read with Section 72 of the Act. If the adjudication under Sections 2, | 4, 8 and 9 other than compensation as envisaged, if extended to the adjudicating officer as prayed that. in our view. may intend to expand the ambit and scope of the powers and functions of the adjudicating officer under Section 7] and that would be against the mandate of the Act 206.
मान. सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त निर्णय के पश्चात् विधिक स्थिति स्पष्ट हो गयी है। जिसके अनुसार न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा मात्र क्षतिपूर्ति के अनुतोष पर विचार किया जायेगा। शेष अनुतोष प्राधिकरण के ८2 >चिज्यारणीय होगें। Page 6042 E-Court शिकायतकर्ता का कथन है कि उसने विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या-- F-30 को बुक कराया। यूनिट का कुल मूल्य रु.॥990000.00 था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु.-2954975.00 का भुगतान किया गया। आवंटन पत्र/विकय अनुबंध की शर्तों के अनुसार कब्जा 24 माह अर्थात fai 30-07-206 तक दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण भुगतान करने के बावजूद, प्रमोटर » विपक्षी निर्धारित समय में कब्जा प्रदान करने में असफल रहा। एक वर्ष के अत्यधिक विलम्ब के पश्चात् दिनांक 0.98.20i7 को कब्जा प्रदान किया गया है। विपक्षी द्वारा आज तक शिकायतकर्ता के पक्ष में हस्तान्तरण विलेख निष्पादित नहीं किया गया है। उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर जून 2076 से भौतिक कब्जा प्राप्ति की तिथि 70.06.20i7 तक कब्जे में विलम्ब के लिए प्रतिकर दिलाये जाने का अनुतोष मांगा गया है। शिकायतकर्ता के कथनों के विरूद्ध विपक्षी द्वारा अभिकथित किया गया है कि शिकायतकर्ता पूर्व संस्थित शिकायत Pea-Ncri440:0027/2024 में मा. प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 49.42.2024 के अनुपालन में अवशेष धनराशि रु.0,54,487 अनुरक्षण चार्ज के रूप में रू.942743.00 तथा त्रिपक्षीय सब लीज Se पंजीकृत एवं निष्पादित करने हेतु आवश्यक स्टाम्प तथा पंजीयन शुल्क जमा कर रजिस्ट्री नहीं करा रहा है। उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा अवशेष धनराशि भुगतान करने के लिए शिकायतकर्ता को आदेशित किये जाने का अनुरोध किया किया गया है।
अब विचारणीय प्रश्न यह उत्पन्न होता है कि क्या शिकायतकर्ता परियोजना में रहते हुए कब्जे में विलम्ब के लिए प्रतिकर पाने का अधिकारी है ? रेरा अधिनियम की aria) & प्राविधानों के अनुसार यदि निर्माण कार्य में आवंटी परियोजना से बाहर जाता है तो ऐसी स्थिति में वह कब्जे में विलम्ब के लिए ब्याज तथा प्रतिकर दोनों पाने का अधिकारी होगा। धारा-48(॥) के परन्तुक अनुसार यदि आवंटी विलम्ब के बावजूद परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता तो आवंटी कब्जे में विलम्ब के लिए विहित दर पर मात्र ब्याज पाने का अधिकारी होगा। आवंटी कब्जे में विलम्ब के आधार पर कोई प्रतिकर पाने का अधिकारी नहीं होगा। यह आवंटी का विकल्प है कि वह परियोजना से बाहर होकर ब्याज व प्रतिकर दोनों प्राप्त करना चाहता है अथवा विलम्ब के बावजूद परियोजना में बने रहते हुए विलम्ब के लिए विहित दर पर ब्याज प्राप्त करना Cr, | Page 7 of 42 इस बिन्दु पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस्पीरिया स्ट्रकक््चर लि; बनाम अनिल पटनी (2020) 70 एस सी सी. 783 मामले में दिए गये निर्णय के पैरा-25 का उल्लेख करना समीचीन होगा, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय ने यह अवधारित किया है कि यह आवंदी का विकल्प है कि वह meta (4) अथवा aT-48 (") Huge दोनों में से किस प्राविधान के अनुसार आगे बढ़ना चाहता है।
“95. In terms of Section $8 of the RERA Act, if a promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment duly completed by the date specified in the agreement, the promoter would be liable, on demand, to return the amount received by him in respect of that apartment if the allottee wishes to withdraw from the Project. Such right of an allottee is specifically made without prejudice to any other remedy available to him". The right so given the allottee is unqualified and if availed, the money deposited by the allottee Chas to be refunded with Interest at such rate as may be prescribed. The proviso to Section 8() contemplates a situation where the allottee does not intend to withdraw from the Project. In that case he is entitled to and must be paid interest for every month of delay till the handing over of the possession. It is up to the allottee to proceed either under Section 8(l) or under proviso to Section 8(I). The case of Himanshu Giri came under the latter category. The RERA Act thus definitely provides a remedy to an allottee who wishes to withdraw from the Project or claim return on his investment.” मा. उप्ररेरा अपीलीय अधिकरण द्वारा दिये गये निर्णयों के अनुसार यदि आवंटी परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता है, तो वह केवल प्रत्येक माह के विलम्ब के लिए विहित दर पर मात्र ब्याज पाने का अधिकारी होगा। विलम्ब के बावजूद आवंटी यदि परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता, तो कब्जें में विलम्ब के लिए कोई प्रतिकर 3} EE: का अधिकारी नहीं होगा। if "we ts a
मा. अपीलीय अधिकरण द्वारा यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि wai विलम्ब के लिए दिया जाने वाला विलम्ब ब्याज न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा प्रतिकर के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कब्जें Ze ag के लिए विलम्ब ब्याज प्राधिकरण द्वारा ही स्वीकार किया जायेगा। Page 8 of 42 E-Court इस संबंध में उल्लेखनीय है कि मान. उ.प्र. रेश अपीलीय अधिकरण ने मान. उच्च न्यायालय के द्वारा ध्रुव कुमार चतुर्वेदी के मामले में दिए गये निर्णय पर विचार करते हुए अपील संख्या-54,/2024 उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद बनाम dite कुमार भण्डारी में पारित निर्णय दिनांकित 42-06-2024 में अवधारित किया है कि न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा कब्जें में विलम्ब के लिए ब्याज के रूप में प्रतिकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। मान. उ.प्र. रेश अपीलीय अधिकरण ने अपील संख्या-54 ,/ 2024 उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद बनाम धीरेन्द्र कुमार भण्डारी के मामले में पारित निर्णय दिनांकित 42-06-2024 में अपील संख्या-70,/2023 ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण बनाम रंजन मिश्रा के मामले में पारित पूर्ववर्ती निर्णय व आदेश दिनांकित 20-04-2023 एवं मान. उच्च न्यायालय के निर्णय पर विचार करते हुए पुनः दोहराते हुए अपील संख्या-70,/ 2023 में पारित निर्णय को आज भी प्रभावी माना है। इस प्रकार मान. उ.प्र. रेरा अपीलीय अधिकरण ने मान. उच्च न्यायालय के उपरोक्त निर्णय पर विचार करने के पश्चात यह निर्णीत किया है कि न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा कब्जें में विलम्ब के लिए ब्याज के रूप में प्रतिकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। wal में विलम्ब के लिए ब्याज प्राधिकरण द्वारा ही स्वीकार किया जा सकता है। अपील संख्या-54 / 2024 में पारित निर्णय का सुसंगत प्रस्तर-28 निम्नवत् हैः-
28. In view of the aforesaid analysis the Regulatory Authority is vested with the power to determine interest for the delay in handing over possession of the unit to the allottee. The Adjudicating Officer has no jurisdiction to award interest for the delay in handing over possession in the name of compensation. Further, in view of the findings on question nos. (3), (4) and (5) the compensation granted by the Adjudicating Officer in pursuance to the provisions of Section [2 and 8(3) of the Act are also not sustainable, hence, all the 24 orders passed by the Adjudicating Officer impugned in all the 24 appeals, are without jurisdiction and not sustainable in the eyes of law. मान. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यूटेक प्रोमोटर एवं डेवलपर्स के उपरोक्त मामलें में निर्णय के प्रस्तर-86 एवं मा. अपीलीय अधिकरण द्वारा पारित उपरोक्त निर्णयों में किये गये सम्प्रेक्षणों से स्पष्ट है कि यदि कब्जा देने में कोई विलम्ब पाया जाता है और इस विलम्ब के बावजूद आवंटी परियोजना रो बाहर नहीं जाना Ce तो er-ia(4) का परन्तुक लागू होगा। था Page 9०042
शिकायतकर्ता परियोजना से बाहर नहीं जाना चाहता। वह यूनिट का कब्जा प्राप्त कर चुका है। इसलिए वह कब्जे में विलम्ब के आधार पर कोई प्रतिकर पाने का अधिकारी नहीं होगा। कब्जे में यदि कोई विलम्ब पाया जाता है तो शिकायतकर्ता विलम्ब के लिए ar—te(!) परन्तुक के अनुसार प्रत्येक माह के विलम्ब के लिए विहित दर पर मात्र ब्याज पाने का अधिकारी होगा। विलम्ब के लिए दिया जाने वाला यह ब्याज न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा प्रतिकर के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कब्जे में fos के लिए ब्याज प्राधिकरण द्वारा ही स्वीकार किया जा सकता है। उपरोक्तानुसार अवधार्य बिन्दु संख्या-04 नकारात्मक रूप से शिकायतकर्ता के विरूद्ध निर्णात किया जाता है। अवधार्य बिन्दु संख्या-05 यह अवधार्य बिन्दु इस आशय का है कि क्या विपक्षी अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या विकय करार के अधीन आरोपित ferret अन्य बाध्यताओं का निर्वहन करने में असफल रहा है, जिसके लिए शिकायतकर्तागण क्षतिपूर्ति पाने के अधिकारी हैं ? यह अवधार्य बिन्दु शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत में किये गये अभिकथनों एवं प्रस्तुत किये गये साक्ष्य के आधार पर उत्पन्न हुआ है। इसलिए इसे प्रमाणित करने का प्रमाण भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता ने अधिनियम »नियमों / विनियमों एवं विक्रय अनुबन्ध के अधीन विपक्षी द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल रहने के आधार पर रु.5.00 लाख प्रतिकर की मांग किया है।
शिकायतकर्ता ने अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या विकय करार के अधीन आरोपित बाध्यताओं का निर्वहन करने में असफल रहने के आधार पर प्रतिकर दिलाये जाने का अनुतोष मांगा है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विपक्षी किन प्राविधानों का अनुपालन करने में असफल रहा है और उसके परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता को क्या क्षति हानि कारित हुई है। शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी ने शिकायतकर्ता के पक्ष में << Lee कि विलेख निष्पादित न कर रेरा अधिनियम की धारा-47 के प्राविधानों का उल्लंघन * ag. a है, जिसके आधार पर वह प्रतिकर पाने का अधिकारी है। छ Me wg इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि पूर्व में विपक्षी प्रोमोटर द्वारा प्राधिकरण के ‘ing समक्ष उपरोक्त वर्णित एक अन्य शिकायत प्रस्तुत की गई BZ दो सदस्यीय Page 40 of 2 os E-Court पीठ द्वारा निर्णीत की गई थी। मा. पीठ ने अपने आदेश दिनांक t9~72-2024 में विपक्षी (प्रोमोटर) को 30 दिन के अन्दर अद्यतन मांगपत्र प्रेषित करने तथा आवंटी को अद्यतन मांगपत्र के अनुसार 60 दिन के अन्दर अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर अपेक्षित स्टाम्प शुल्क, पंजीयन शुल्क एवं अन्य प्रकीर्ण व्यय के साथ हस्तांतरण विलेख निष्पादित कराना सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया था। शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी को सम्पूर्ण भुगतान कर दिये जाने के बावजूद हस्तांतरण विलेख निष्पादित नहीं किया जा रहा है। जबकि विपक्षी का कथन है कि शिकायतकर्ता ने मा. पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 49-42-2024 के अनुपालन में अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर अपेक्षित स्टाम्प शुल्क, पंजीयन शुल्क एवं अन्य प्रकीर्ण व्यय के साथ हस्तांतरण विलेख निष्पादित नहीं कराया जा रहा है।
उभयपक्षों के मध्य अवशेष धनराशि को लेकर विवाद है। अवशेष धनराशि के सम्बन्ध में विवाद का निपटारा प्राधिकरण द्वारा ही किया जा सकता है। जहां तक कब्जे में विलम्ब का सम्बन्ध है तो चूंकि शिकायतकर्ता ने कब्जा प्राप्त कर लिया है इसलिए कब्जे में विलम्ब के लिए कोई प्रतिकर पाने का अधिकारी नहीं होगा। मा. प्राधिकरण ने प्रीति गुप्ता बनाम गौरसंस इण्डिया प्रालि. शिकायकत W-ADINNCRI44/20/474/2023 में पारित आदेश दिनांक 23-07-2025 में यह अवधारित किया है कि नियमों या विनियमों या fea करार के अधीन आरोपित बाध्यताओं का निर्वहन करने में असफल रहने के आधार पर प्रतिकर प्राप्त करने के RS) लिए शिकायतकर्ता को यह साबित करना होगा कि विपक्षी किन सांविधिक अथवा ह/ संविदात्मक दायित्वों का पालन करने में असफल रहा है। यह भी साबित करना होगा कि विपक्षी के असफल रहने के परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता को क्या क्षति/हानि कारित हुई है। बिना इन तथ्यों को साबित किये कोई प्रतिकर स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रतिकर प्राप्त करने की पुरोभाव्य शर्त शिकायतकर्ता द्वारा क्षति / हानि के सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट अभिवचन किया जाना तथा क्षति/हानि को साबित करने के लिए विधिक साक्ष्य प्रस्तुत किया जाना है। शिकायतकर्ता द्वारा क्षति /हानि के सम्बन्ध में न तो ऐसा कोई अभिवचन किया गया है और न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है कि उसे क्या क्षति कारित हुई | वर्तमान sand बिन्दु के अन्तर्गत विचारणीय Ex Oy सामान्य एवं अस्पष्ट Page 4 of 2 E-Court
(General and Vague) © | शिकायतकर्ता ने an—i7 के अतिरिक्त अधिनियम के किसी प्राविधान, नियमावली के किसी नियम एवं विनियम अथवा विकय अनुबंध की किसी शर्त का कोई विनिष्दिट उल्लेख नहीं किया है, जिसके उल्लंघन के लिए प्रतिकर दिलाया जा सके। इस प्रकार इस अवधार्य बिन्दु के अन्तर्गत प्रतिकर के लिए आवश्यक तथ्यों को विनिर्दिष्ट रूप से अभिकथित एवं साबित नहीं किया जा सका है। इसलिए शिकायतकर्ता इस आधार पर कोई प्रतिकर पाने का अधिकारी नहीं है। अवधार्य बिन्दु संख्या-02 उपरोक्तानुसार नकारात्मक रूप से निर्णीत किया जाता है। उपरोक्त विवेचना के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि शिकायतकर्ता द्वारा याचित अनुतोष इस न्यायालय द्वारा स्वीकार किये जाने योग्य नहीं हैं। आदेश शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत परिवाद आवेदन अस्वीकार किया जाता है। पक्षकार अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे। निर्णय को पोर्टल पर अपलोड किया जाये। पत्रावली “BB, wre | दिनांक: 26-08-2026 ord QF 5b | “SS न्यायनिर्णायक अधिकारी Page 2 042