Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Priyanka Sharma v. Greater NOIDA Industrial Development Authority
Complaint No. 9201820286
- Decision date
- 2019-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य कम Yo शिकायत Fo ma शिकाय ू] 9204820286 प्रियंका शम 2 6204844648 राजीव अग्रवाल 3 82086352 [अनामिका गुप्ता | 4 40204822634 मनीष GAR अग्रवाल | | 5 | 420:824887 + lataw | जैन बनाम ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरंण, गौतमबुद्धनगर आदेश 20.02.2049 शिकायततकर्ता प्रियंका शर्मा के साथ 04 अन्य शिकायकतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें rps-o2, zera2r से सम्बंधित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Po 9204820286 प्रियंका शर्मा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं क्षतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्तागण का कथन है कि उन्होने द्वारा विपक्षी की परियोजना RPS ZETA-2, में प्लॉट बुक कराया गया और उक्त बुकिंग के सापेक्ष शतप्रतिशत धनराशि जमा करायी गयी। अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी को जनवरी 2073 तक प्लॉट का कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी ert amt तक कोई कब्जा नही दिया गया। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा भूखण्ड का कब्जा दिलाये जाने एवं विलंबित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ‘ede ny Scanned by CamScanner 2
विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है आवंटित कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी की परियोजना में 300 वर्ग मीटर के भूखण्ड आवंटित किया गया था। ब्रेशर की शर्तों के अनुसार दिनांक 7.4.20:3 तक कब्जा दिया जाना था। उक्त आवासीय योजना हेतु ग्यम मकौडा के अन्तर्गत भूमि अधिग्रहित की गयी थी | उक्त अर्जन के विरूद्ध राधे श्याम द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका 64427 /2008 योजित की गयी, जो कि दिनांक 45.42.2008 को निरस्त की दी गयी, जिसके विरूद्ध याची द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में एस.एल.पी. 3264 /2044 योजित की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 45.4.2074 को गाटा सं0 70,394 व 399 का अधिग्रहण निरस्त कर दिया गया, जिसके पश्चात अन्य ग््रमवासियों द्वारा भी याचिका की गयी | यद्यपि माननीय सर्वोच्च न्यायालय सिर्फ राघे श्याम का अर्जन निरस्त किया गया है, किन्तु समस्त wa वासियों द्वारा जन आंदोलन कर दिया गया, जिस कारण aT मकौडा की भूमि पर विकास कार्य नहीं हो पा रहा है और आवंटियों को कब्जा नही दिया जा सका। ऐसी दशा में विपक्षी ब्रेशर की शर्तों के अनुसार 4 प्रतिशत साधारण ब्याज सहित आवंटियों का पैसा वापस करने के लिए तैयार है। विपक्षी की ओर से जानबूझ कर लापरवाही नही की गयी है। अतः प्राधिकरण के विरूद्ध दंडात्मक ब्याज की राशि शिकायतकर्तागण को दिलायी जानी न्यायोचित नही है।
शिकायतकर्ता की ओर से प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि दिनांक 34.0.2043 को विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को पत्र प्रेषित करते हुए यह स्वीकार किया गया है कि शिकायतकर्ता का भूखण्ड ay साकीपुर के अन्तर्गत है, जिसके अर्जन में किसी प्रकार की कोई बाधा नही है और विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किसान प्रतिकर धनराशि की मांग की गयी, जो कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनाक 30.4.2044 को जमा करायी गयी | ऐसी स्थिति में जबकि शिकायतकर्ता को आवंटित भूमि aa मकौडा का भाग नही है। शिकायतकर्ता एक सदभावी केता है और अपनी आवंटित भूमि का कंब्जा चाहता है। अतः विपक्षी से भूमि का कब्जा दिलाये जाने की याचना की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवेदन पत्र, छायाप्रति चैक, छायाप्रति पत्र दिनांक 7.2.209, छायाप्रति एग्रीमेन्ट लीज, छायाप्रति पत्र दिनांक 38. 2043, छायाप्रति पत्र दिनांक 34.0.20:3, Brae रसीद, छायाप्रति पत्र दिनांक 242. 2048, छायाप्रति पत्र दिनांक 23.8.2048 प्रस्तुत किये गये | विपक्षी की ओर से काउंटर दाखिल करते हुए कहा गया कि स्कीम आरंभ न होने की स्थिति में विपक्षी dee की शर्तों के अनुसार 4 प्रतिशत ब्याज सहित धनराशि वापस करने को तैयार है और आवंटियों को उक्त धनराशि स्वीकार कर लेनी चाहिये, किन्तु आवंटी शिकायत का समाधान नही चाहते हैं, ब्रोशर तकनीकी a ds Scanned by CamScanner 3 रूप से Wire है, जिसकी वैधता को केवल सिविल न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, जिस कारण वाद खारिज किये जाने योग्य है। उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्तागण को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी की परियोजना में भूखण्ड हेतु आवेदन किया गया और विपक्षी द्वारा आवंटियों को भूखण्ड आवंटित किया गया। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नही है कि विपक्षी द्वारा उक्त परियोजना पर कार्य नही किया जा सका और यह स्पष्ट रूप से कह दिया गया है कि वह ऐसा कोई आश्वासन नही दे सकता है कि किसानों से विवाद कितने समय तक चलेगा अथवा कब तक इस विवाद का निस्तारण होने की संभावना है। इस तरह वर्तमान में उक्त परियोजना में कब्जा दिया जाना संभव नही है। दौरान बहस शिकायतकर्तागण द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया कि यदि विपक्षी किसी अन्य परियोजना में उन्हे विकल्प प्रस्तुत करें तो वह विकल्प के लिए तैयार हैं। विपक्षी द्वारा कहा गया कि उसे अन्य परियोजना में विकल्पों की उपलब्धता जांचने के लिए एक माह का समय दिया जाये, अन्यथा वह धनवापसी कर सकता है। चूंकि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि से शिकायतकर्तागण की धनराशि का उपभोग किया गया। ऐसी दशा में शिकायतकर्तागण Sat धनराशि पर ब्याज पाने के अधिकारी हैं। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के WER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wea 9 (ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-
The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: — 93 Scanned by CamScanner 4 यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wear o(iii) F निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को Mcir+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। विपक्षी को आदेशित किया जाता है वह :- (क) दिनांक 30 जून 2049 तक किसानों से विवादों को निस्तारित कर शिकायतकर्तागण प्रश्नगत योजना में आवंटित प्लॉटस का कब्जा प्रदान करने की निश्चित तिथि बतायें और विलंबित अवधि/तिथि से (अग्रणी वाद में दिनांक 7.4.203 से) 30.4.20:6 तक, ब्रोशर की शर्तो के अनुसार व रेरा लागू होने के बाद से अर्थात 4.5.2046 से कब्जा दिये जाने तक MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। (ख) दिनाक 30.6.2049 तक अपनी अन्य परियोजनाओं में विकल्पों की उपलब्धता के आधार पर शिकायतकर्तागण को उनको आवंटित भूखण्ड के क्षेत्रफल के निकटतम विकल्प के आधार पर तथा आवंटन तिथि पर लागू दरों (बाद की परियोजना में एम.सी.एल.आर.+ की ब्याज दर से एन.पी.वी. के आधार पर अनुपात निकालते हुए) के अनुपात में धनराशि समायोजित करते हुए व आवंटियों की सहमति लेकर विकल्प उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
(ग) यदि विपक्षी उक्त दोनो विकल्पों के अनुसार कार्यवाही करने में असफल रहते हैं, तो इसका कारण इस न्यायालय को शपथपत्र सहित दर्शित करते हुए, दिनांक 3:.720I9 तक शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि वापस करना सुनिश्चित करें, साथ ही शिकायतकर्तागण द्वारा धनराशि जमा करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक Tee प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना सुनिश्चित करें। इस आदेश का उल्लघंन ome (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20I6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Kane (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण. उ0पग्र0 भूसस्मम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner