Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Geeta Jain v. Kwality Township Pvt Ltd
Complaint No. 9201818756
- Decision date
- 2019-11-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई tic—07, श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य कम सं० | शिकायत सं० | शिकायतकर्ता | 2 5204840900 आशा डोगरा 2 5204844090 विभा जयासवाल 3 | 9204848756 गीता जैन 4 52080808 | गगन घ 5 | 520:80902 [आशा डोगरा | 6 | 520480884 निखिल गोयल 7 5204840897 बलप्रीत सिंह बनाम मैसर्स क्वालिटी टाउनशिप प्रा0लि0 शिकायतकर्ता आशा डोगरा व अन्य 06 शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों कें तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें परियोजना ARK Residency से सम्बंधित है| अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo 5204840900 आशा डोगरा अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध परियोजना के विकास कार्य पूर्ण कराये जाने एवं सेल डीड निष्पादित कराये जाने हेतु अन्यथा जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षिप्त में शिकायतकर्तागण का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना ARK Residency में एक फ्लैट Wo 203 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 22,32,545,/- रूपये का ye 2 भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिनांक 30.09.
2045 तक दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के निर्धारित अवधि में शिकायतकर्तागण को कब्जा देने में असमर्थ रहा। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के कार्य निर्धारित समय नहीं पूर्ण कराये गये है और उनके द्वारा दबाव में आधे-अधूरे बने हुए फ्लैट का कब्जा 28 मार्च 2047 को लिया गया। विपक्षी को कई अनुस्मारक भेजे जाने के बावजूद भी विकास कार्य पूर्ण नहीं कराये गये और ना ही सेल Se निष्पादित किया गया। जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरूद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवेदन फार्म, जमा धनराशि का विवरण, पोजेशन प्रमाणपत्र की छायाप्रतियां दाखिल की गयीं। ' पीठ द्वारा विपक्षी को प्रथम नोटिस दिनांक 24.05.2048 को जारी किया गया जिसमें उन्हें सूचित किया गया था, कि निर्धारित तिथि को उपस्थित होकर आवश्यक साक्ष्यों सहित अपना लिखित अभिकथन प्रस्तुत करें। प्रथम सुनवाई दिनांक 26.40.2048 को की गयी जिसमें शिकायतकर्ता उपस्थित हुए और उनके द्वारा बताया गया कि मेरठ स्थित परियोजना में फ्लैट खरीदा गया प्रतिवादी द्वारा फ्लैट की रजिस्ट्री नहीं कर रहा है। प्रतिवादीं अनुपस्थित थे। द्वितीय सुनवाई दिनांक 07.42. 2048 को नियत की गयी जिसमें विपक्षी दूसरी बार प्रतिवादी उपस्थित रहे। अन्तिम सुनवाई दिनांक o8.o8.20i9 को भी नियत की गयी थी। जिसमें शिकायतकर्तागण उपस्थित। प्रतिवादी भी उपस्थित हुए। परन्तु प्रतिवादी द्वारा कोई भी प्रतिवादपत्र दाखिल नहीं किया war) ऐसी स्थिति में एक पक्षीय कार्यवाही के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं रहा।
इसके अतिरिक्त परियोजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त किये जाने हेतु प्राधिकरण के तकनीकी दल द्वारा स्थलीय निरीक्षण कराया गया, जिसके निरीक्षण के उपरान्त पता चला fe ewer मेटेरियल अल्प मात्रा में उपलब्ध है साथ ही यह we | दि पाया कि निर्माण पूर्ण करने हेतु मानव संसाधन मात्र 3-4 तक ही मौजूद है। कार्य बहुत' ही धीमी गति से किया जा रहा है। | मध्यस्थता बैठक में विपक्षी द्वारा कथन प्रस्तुत किया गया कि प्रोजेक्ट पर बैंक का ऋण होने के कारण ओ.सी. प्राप्त न होने के कारण फ्लैट केताओं की रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है। बैंक से बात चल रही है, जिसमें प्रोजेक्ट की अनसोल्ड इंवैन्ट्री के तौर पर रखने का प्रस्ताव है। बैंक के साथ की जा रही कार्यवाही को जल्द से जल्द पूर्ण करते हुए शिकायतकर्ताओं के हक में रजिस्ट्री करा दी जायेगी। जबकि बैंक का 6 करोड़ की धनराशि शेष है परियोजना में सेल की गयी यूनिटों पर कोई आपत्ति नहीं है, बैंक अपनी रिकवरी धनराशि के लिए कार्यवाही कर रहा है। प्रोमोटर द्वारा कहा गया कि परियोजना स्थल पर बिजली की समस्या होने के कारण परियोजना स्थल पर निर्माण कार्य पूर्ण तरीके से नहीं हो पा रही है। प्रोमोटर ने अवगत कराया गया कि विद्युतीकरण के लिए सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान कर दिया गया है तथा विद्युत विभाग का भौतिक निरीक्षण भी करा दिया गया है। मध्यस्थता बैठक के उपरान्त विपक्षी को निम्न निर्देश दिये गये- आंवटियों को विद्युत कनेक्शन प्राथमिकता. के आधार पर उपलब्ध कराये जायें। सभी फ्लोर व ग्राउण्ड पर टाइलिंग का कार्य व लिफ्ट को फंक्शनल कर दिया जायें तथा पार्क के लिए एरिया की मरम्मत (मैंटीनेंस) का कार्य पूर्ण कर लिया जायें। Fire Fighting System का कार्य पूर्ण कर लिया जायें।
उभयपक्षों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी और अनुबन्ध के अनुसार कब्जा अनुबन्ध निष्पादित होने के 30 एे-- 4 माह में दिया जाना था। विपक्षी को समुचित अवसर देने के बावजूद भी कोई प्रतिवादपत्र नहीं दाखिल किया गया। शिकायतकर्ता की शिकायत को दृष्टिगत रखते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है :- 4. शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग करना उचित है ? बिल्डर द्वारा क्या परियोजना का ओ.सी/सी.सी प्राप्त कर लिया गया है व रजिस्ट्री की स्थिति ? निस्तारण बिन्दु सं0 4 शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 30.09.20i5 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु फ्लैट को पूर्ण रूप से पूरा नहीं किया गया एवं दबाव में दिनांक 28.03.2047 को फ्लैट का कब्जा आधे-अधूरे निर्माण में लिया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट के विकास कार्य को पूर्ण कराया जाये और सेल डीड निष्पादित कराया जाये अन्यथा जमा धनराशि वापस दिलायी we | पत्रावली पर दाखिल कब्जा पत्र दिनांक 28.03.2047 के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता को भौतिक कब्जा मिल गया है। ऐसे में प्रतीत होता है कि परियेजना पूर्ण है और मात्र ओ.सी/सी.सी प्राप्त करना अवशेष है। शिकायतकर्ता की मुख्य मांग विकास कार्य पूरा कराने व रजिस्ट्री कराने अन्यथा ब्याज सहित धनराशि लौटाने की है।
यह तथ्य भी विचारणीय है कि रेरा की वेबसाईट पर उक्त परियोजना के शुरू होने की तिथि 09-04-20222, अर्थात परियोजना को शुरू हुए लगभग 7 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है और रेरा की वेबसाईट पर ही प्रस्तावित पूर्णता की तिथि 34.08.2048 दी गयी है, जो कि बीत चुकी है। ऐसी स्थिति में अपेक्षित है कि ओ.सी /सी.सी प्राप्त कर परियोजना पूर्ण हो। अतः बिल्डर द्वारा परियोजना का ओ. सी /सी.सी की प्रति सभी अवंटियों को उपलब्ध कराने व रजिस्ट्री कराने हेतु निर्देश दिया जाना उपयुक्त होगा। ऐसी स्थिति में, जबकि शिकायतकर्ता कब्जा प्राप्त कर Yor” 5 लगभग 2 af से फ्लैट में रह रहे हो। यह प्रकरण रेरा अधिनियम की धारा-48 के अन्तर्गत आच्छादित नहीं होता। तदनुसार बिन्दु vo 4 Prana किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश - विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि परियोजना का ओ.सी/सी.सी प्राप्त कर तीन माह में शिकायतकर्ता की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। सचिव रेरा परियोजना की ओ.सी /सी.सी अपलोड न होने की स्थिति में निरीक्षण कराकर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करायें। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन उ0फप्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक 3/ //०/2049 Waveeeerion \ KIWI ASN (कल्पना मिश्रा) > \\° if (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण