Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Janhwi Shankar Tripathi and Manoj Kumar Dubey v. Yamuna Builtech Private Limited
Complaint No. 9201818172
- Decision date
- 2019-09-06
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
“TLE OF Boro भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-3, परिवाद संख्या : 920:84872 जान्हवी शंकर त्रिपाठी व मनोज कुमार दूबे निवासी- ware न0 447, Ser 2 रावल स्ट्रीट Gage वैशपुर सदर ग्रेटर नोएडा oe ufarat बनाम यमुना fiesta प्रा.लि. सै--2, महालक्ष्मी माल, 5वें फ्लोर, राज नगर, गाजियाबाद ५०००७ मल पके प्रतिवादी पीठासीन- भानु प्रताप सिंह, (सदस्य) परिवादी-: स्वयं प्रतिवादी-: श्री प्रियम सिन्हा व सिद्धान्त अजय सिन्हा, अधिवक्तागण परिवाद : परिवादीगण जान्ह॒वी शंकर त्रिपाठी व मनोज कुमार दूबे निवासी- प्लाट न0 247, थेटा 2 wae Be जैतपुर वैशपुर सदर ग्रेटर नोएडा के द्वारा यमुना बिल्डटेक प्रा.लि के विरूद्ध रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम,2046 की aNI-3t के अन्तर्गत प्रस्तुत शिकायत संख्या-920484872 संस्थित की गयी है। अभिलेखीय साक्ष्य:- परिवादीगण द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीशसाक्ष्य प्रस्तुत किये गये है- 4. लिखित प्रत्यावेदन 2. प्राइज लिस्ट की छाया प्रति 3. शपथ पत्र दिनांक 04.05.2049 की छाया प्रति 4. बैंक द्वारा प्रमाणित हस्ताक्षर ( जान्हवी शंकर त्रिपाठी) दिनांक 02.05.49 की प्रति 5. सचिव रेरा, को लिखे गये पत्र दिनांक 04.44.48 की प्रति प्रतिवादी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीभसाक्ष्य प्रस्तुत किये गये है- 4. प्रतिवाद-पत्र की प्रति 2. प्रोविजिनल बुकिंग विवरण (मनोज दूबे) दिनांक 03.06.48 की छाया प्रति 3. प्रोविजिनल बुकिंग विवरण (जान्हवी शंकर त्रिपाठी) दिनांक 03.06.48 की - छाया प्रति 4. वेलकम लेटर ( जान्हवी शंकर त्रिपांठी ) दिनांक 07.09.8 की प्रति 5. वेलकम लेटर (मनोज दूबे) दिनांक 07.09.48 की प्रति मौखिक साक्ष्य--
परिवादीगण की ओर से परिवादीगण स्वयं तथा प्रतिवादी की ओर से श्री प्रियम सिन्हा व श्री सिद्धान्त अजय सिन्हा, अधिवक्तागण के द्वारा तर्कों को प्रस्तुत किया गया। पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवरण:- (क)- संक्षेप में परिवादीगण का कहना है कि उसके द्वारा प्रतिवादी की परियोजना MIGSUN VILLASA गौतमबुद्धनगर में इकाई संख्या- ७-23 & 24 ground floor right corner को बुक कराया गया था। इकाई की कुल कीमत रू0 30,56,400/- (तीस लाख छप्पन हजार चार सौ रूपये मात्र) थी। परिवादीगण द्वारा कुल WO 4,00,000/-(एक लाख रूपये मात्र) की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। परिवादीगण द्वारा लिखित प्रत्यावेदन में यह उल्लेख किया गया है कि प्रतिवादी द्वारा जो ब्रोशर व तलपट मानचित्र मुझे दिया गया है उसमें शॉप नम्बर अंकित नहीं है। प्रतिवादी ने शॉप नम्बर बदल दिया है। परिवादी ने यह भी कथन किया है कि दोनो केताओं द्वारा किसी भी बुकिंग फार्म में हस्ताक्षर नहीं किया गया है AM EO! (Expression of Interest) पर हस्ताक्षर किया गया है, प्रतिवादी ने बुकिंग फार्म पर फर्जी हस्ताक्षर किये है। परिवादी ने प्रतिवादी द्वारा किये गये फर्जी हस्ताक्षर के सम्बंध में शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया है। परिवादी ने अपने असली हस्ताक्षर बैंक से प्रमाणित हस्ताक्षर की प्रति भी प्रस्तुत किया है। परिवादी द्वारा यह भी कथन किया गया है कि प्रतिवादी द्वारा डिमाण्ड भेजा गया, परन्तु डिमाण्ड पर गलत यूनिट नम्बर लिखा था जिस कारण धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। गलत यूनिट नम्बर के लिए प्रतिवादी को कई बार ईमेल भेजा गया परन्तु प्रतिवादी ने कोई भी उत्तर नहीं दिया। प्रतिवादी ने उस पर दबाव बनाया कि. यूनिट को कैंसिल कर दो और प्रत्येक यूनिट का GO 48 हजार 2 (क) + (ख)_ (ग)
वापस ले लो। अतः परिवादी द्वारा मूल इकाई का अधिग्रहण या जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। प्रतिवादी ने अपने लिखित प्रतिवाद-पत्र उल्लेख किया है कि परिवादी ने कामर्शिएल इकाई यूजीएफ 4 व 45 मिग्सुन विलासा ग्रेटर नोएडा में orc ace क्लीनिक प्रा.लि. के माध्यम से ब्रुक कराई थी। प्रतिवादी ने यह भी कथन किया है कि बुकिंग फार्म में परिवादी ने जो यूनिट संख्या डाला था वहीं यूनिट संख्या है। प्रतिवादी का यह भी कथन है कि परिवादी द्वारा जो शिकायत में यूनिट संख्या 23 व 24 अंकित किया गया है जो पूर्ण रूप से गलत है। बुकिंग फार्म पर दोनो पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किया गया जिसमें यूनिट संख्या १4 व t5 है। परिवादीगण द्वारा समय से धनराशि की भुगतान नहीं किये गये, जिसके सम्बंध में परिवादीगण को दिनांक 07.09.20i8 व 03. o9.20i8 को ईमेल द्वारा पत्र भेजा गया। परिवादी ने 50 (Expression of Interest) UX हस्ताक्षर किये है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों से स्पष्ट है कि परिवादी अपने मूल आवंटन इकाई का अधिग्रहण चाहता है। इस प्रकार परिवादी को उसके मूल इकाई का अधिग्रहण दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश प्रतिवादी को आदेशित किया जाता है कि परिवादी की मूल आवंटन इकाई हस्ताक्षारित आवंटन/अनुबंध,/ EOI (Expression of Interest) में निर्धारित समय सीमा तक सम्पूर्णता प्रमाण पत्र के साथ पूर्व निर्धारित दर के हिसाब से अधिग्रुहण उपलब्ध करायें। रेरा अधिनियम की धारा 2(29) () के अनुसार यदि परिवादी से frst किश्तों का भुगतान करने में विलम्ब किया है तो विलम्ब अवधि का ब्याज दर MCLR+% की दर से अधिक परिवादी द्वारा देय नहीं होगा। परिवादी द्वारा प्रतिवादी पर यह आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी ने BOI
(Expression of Interest) उसके फर्जी ¥ र किये, इस सम्बंध में यह अवगत 3 SSS SS e+ 4 कराना उचित होगा कि परिवादी सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर सकता है क्योंकि इस प्रकार के प्रकरण (हस्ताक्षर से सम्बन्धित प्रकरण) पीठ के हर ह क्षेत्राधिकार में नहीं है। इस आदेश का उल्लंघन उ0प्र0 भून्सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, vos की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक- aye” (arg प्रताप सिंह) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा)