Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pankaj Kumar Sakhuja v. Greater NOIDA Industrial Development Authority
Complaint No. 9201817513
- Decision date
- 2019-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमवुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत Ho 920:8:9356 एवं 9204847543 अर्चना त्यागी एवं पंकज सखूजा बनाम ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरंण, गौतमवुद्धनगर आदेश 08.02.209 शिकायतकर्ता अर्चना त्यागी व पंकज सखूजा द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनो शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Lohiya Enclave से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत to 9204849356 अर्चना त्यागी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध अविलम्ब कब्जा दिलाने अथवा 24 प्रतिशत ब्याज सहित मूल धनराशि का भुगतान कराये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी की परियोजना BHS-7 Lohiya Enclave, 07#/0.०- में फ्लैट के लिए आवेदन दिया था एवं उन्हे फ्लैट 4502,सी टॉवर सी आवंटित किया गया। उक्त बुकिंग के सापेक्ष Ger 27,55,7i7/- रूपये जमा कराये wa! विपक्षी को दिनांक 29.4.2047 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक विपक्षी द्वारा कब्जा नही fear गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में पत्र दिनाक 29.4. 2044, भुगतान विवरण, पत्र दिनांक 23.2.20:5, पत्र दिनांक 4.3.2045, पत्र दिनाक 40.3.2045, रसीद, की छायाप्रतियां आदि दाखिल की गयी हैं। ला ॥ Scanned by CamScanner 2
विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता को सैक्टर ऑमीकॉन-4 में भवन Wo 502/eh, ब्लॉक सी, रकबा 58.48 वर्ग मीटर आवंटित किया गया। परियोजना में विलम्ब समय समय पर उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक दुविधाओं व अचानक होने वाली घटनाओं के कारण हुआ है। उसके अनुसार तीन वर्ष में कलम दिये जाने की बात संभावित थी, रेरा पोर्टल पर 30.6.2048 की तिथि दी गयी है तथा दिसम्बर 20:8 तक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित करने जा रहे हैं। उन्होने प्राधिकरण की वेबसाईट पर उस विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया, जिसमें जून 2048 तक कब्जा देने व प्रतीक्षा न कर पाने वाले आवंटियों को ब्रोशर की शर्त बी-03 के अनुरूप 4 प्रतिशत ब्याज दर से धनराशि लौटाने का विकल्प दिया गया था। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में आख्या दिनांक 5.2.20:8, बोशर की प्रति, पत्र दिनांक 29.4.2074, भुगतान विवरण, पत्र दिनांक 23,2.205, पत्र दिनांक 4.3.2045, की छायाप्रतियां दाखिल की गयी।
उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजन में यूनिट के लिए आवेदन किया गया था, जिस पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट आवंटित की गयी और आज तक कब्जा नही दिया गया। ब्रेशर के अनुसार आवंटन पत्र निर्गत करने की तिथि से तीन वर्ष के अन्दर कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता के अनुसार दिनांक 29..20:7 तक कब्जा दिया जाना था और अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र की प्रति दाखिल की गयी है, जिस पर दिनांक 29.4. 2044 अंकित है, जिससे स्पष्ट है कि दिनांक 29.4.2047 तक विपक्षी को कब्जा देना था। विपक्षी का कहना है कि चेकलिस्ट जारी की जा चुकी है और 6 माह में शिकायतकर्ता को रजिस्ट्री करानी थी, किन्तु शिकायतकर्ता का कहना है कि मौक पर यूनिट तैयार नही है, स्वयं विपक्षी द्वारा कहा गया है कि प्रशासनिक दुविधाओं व अचानक होने वाली घटनाओं के कारण परियोजना विलंबित हुई है, किन्तु इस ais स्टेटमेंट के अतिरिक्त कोई साक्ष्य नही दिया गया है। विपक्षी द्वारा यह स्वयं स्वीकार्य है कि रेरा की वेबसाईट पर दिनांक 30.6.2048 की कम्पलीशन दी गयी है, किन्तु अंतिम सुनवाई (अर्थात दिनांक 25.4.2049) तक भी ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नही हुआ था। ओ.सी./सी.सी. के अभाव में उक्त परियोजना को पूर्ण नही माना जा सकता। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है। जल id Scanned by CamScanner
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भून्सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.2078 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें Ware के रुप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें were 9 (li) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर o(iii) # निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+! प्रतिशत की ama दर पर व्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी शिकायतकर्ता से MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह यदि कोई धनराशि बकाया है, तो प्राप्त कर ओ.सी.,/सी.सी. सहित कब्जा प्रदान करना सुनिश्चित करें और अनुबंधित अवधि अर्थात 29..2047 से से ओ.सी.,/सी.सी. afer कब्जा दिये जाने की तिथि तक, शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ४८70] प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना सुनिश्चित करें |यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समयोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार वापस की जायेगी विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें और रजिस्ट्री के दिनांक ee a Scanned by CamScanner 4 से 30 दिन के अंदर शेष कार्य पूर्ण कराकर कब्जा शिकायतकर्ता को देना सुनिश्चित करें। इस आदेश की एक प्रति सम्बंधित पत्रावली पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन उ0फप्र०भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Dee WO Kane (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner