Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sheo Shankar Choudhary v. Gardenia Aims Developers Private Limited
Complaint No. 920171565
- Decision date
- 2018-04-10
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, 06 जगदीश चन्द्र बोस मार्ग, लालबाग, लखनऊ। शिकायत संख्या-920474565 दिनांक 06 अप्रैल 2048 श्री शिव शंकर चौधरी, मेसर्स गार्डनिया एम्स डेवलपर्स प्रा0लि0, बी0-8, फ्लैट नं0-202, बनाम टावर नं0-34, फ्लैट नं0-604, गार्डनिया एम्स ग्लोरी, कामन deer गेम्स विलेज, सेक्टर-46, नोएडा। नई दिल्ली-440092 आदेश श्री शिव शंकर चौधरी द्वारा उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण में यह शिकायत उत्तरदाता प्रोमोटर-मेसर्स गार्डनिया एम्स डेवलपर्स प्राणलि0 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी है। शिकायत आईए0डी0 नं0-920474565 पर पंजीकृत कर उत्तरदाता को नोटिस जारी की गयी है। उभयपक्षों द्वारा अपना अभिकथन प्रस्तुत किया गया है। शिकायतकर्ता के विद्वान अधिवक्ता श्री कैलाश प्रसाद पाण्डेय तथा उत्तरदाता के विद्वान अधिवक्ता श्री अनुराग अरोरा को ध्यानपूर्वक सुना गया। शिकायत संक्षेप में यह है कि शिकायतकर्ता द्वारा उत्तरदाता की सेक्टर-46 नोएडा स्थित ग्लोरी परियोजना में मई 2040 में टावर-88 में फ्लैट नं०-202 बुक किया गया था। बिल्डर बायर एणग्रीमेंट दिनांक 28.05.2040 को संपादित किया गया और बी0बी0ए0 के अनुसार माह अक्टूबर 2042+,/-3 माह में प्रदान किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा माह दिसम्बर 2040 तक फ्लैट के 95 प्रतिशत के मूल्य का भुगतान कर दिया है। कब्जा प्रदान करने की निर्धारित समय सीमा लगभग 5 वर्ष पूर्व बीत जाने के पश्चात भी प्रोमोटर द्वारा फ्लैट का विधिवत कब्जा नहीं दिया गया है। उनके द्वारा फ्लैट का विधिवत कब्जा तत्काल प्रदान करने और अर्थदण्ड का भुगतान कराने का अनुरोध किया गया है। उत्तरदाता द्वारा अपने अभिकथन में मुख्यतः निम्नलिखित बातें कहीं गयी हैं:-
4. शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 26.44.2046 को फ्लैट का फिट-आउट पजेशन ले लिया गया है, परन्तु रू0 99,337.00 अवशेष का भुगतान नहीं किया गया है। 2. भारत सरकार के नोटिफिकेशन संख्या sois44(e) & eer भू-सम्पदा नियमन एवं विकास अधिनियम 2046 की कुछ धाराएं दिनांक 0.05.2046 से तथा अन्य ORIG भारत सरकार के नोटिफिकेशन We soi2i6(E) दिनांक 49.04.2047 के आधार पर दिनांक 04.05.2047 से प्रभावी हैं। इस प्रकार अधिनियम दिनांक ot. 05.2047 से पूर्णरूपेण लागू किया गया है। आनगोइंग परियोजनाओं के लिए दिनांक 34.07.20I7 की समय सीमा दी गयी थी। उत्तर प्रदेश द्वारा परियोजनाओं के पंजीकरण के लिए वेबसाइट दिनांक 26.07.2047 को प्रारंभ की गयी। 3. HO बाम्बे उच्च WI द्वारा नीलकमल रियाल्टर्स सबअर्बन प्राणलि0 एवं यूनियन आफ इंडिया तथा कुछ अन्य संबद्ध Re याचिकाओं में पारित आदेश दिनांक 06.:220I7 में यह अवधारित किया गया है कि रेरा अधिनियम के प्राविधाना प्रास्पेक्टिव हैं। Soyo में अधिनियम तथा नियमावली दिनांक 04.08. 2047 से या परियोजना की रेरा में पंजीयन की तिथि से लागू होंगे 4. परियोजना रेरा में पंजीकृत होने के पश्चात प्रोमोटर रजिस्ट्रेशन में दी गयी समय सीमाओं के अनुपालन के लिए उत्तरदायी होंगे और रजिस्ट्रेशन से पूर्व की त्रुटियों के लिए शिकायतयों को सुनने का क्षेत्राधिकार रेरा को प्राप्त नहीं है। वर्तमान शिकायतकर्ता को ग्लारी-46 (फेज-04 से फेज-07) परियोजना में टावर 88 में यूनिट नं0-202 आवंटित किया गया था और प्रोमोटर द्वारा ऐसी परिस्थितियों के आधार पर जो उनके नियंत्रण के बाहर थीं, Gear प्लान में इकाई के एलाटमेंट के पश्चात परिवर्तन किया गया था। रेरा में पंजीकरण के अनुसार परियोजना की पूर्णता की तिथि 45.40.2020 है।
उत्तरदाता द्वारा इस अवधि में परियोजना पूर्ण कर ली जाएगी। उनके द्वारा शिकायत निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के अभिकथनों के आधार पर भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण में प्रश्नगत सुनवाई के क्षेत्राधिकार के संबंध में निष्कर्ष निम्नानुसार है:- 4. भू-सम्पदा (नियमन एवं विकास) अधिनियम के मूलभूत उद्देश्यों में से एक भू-सम्पदा क्षेत्र के उपभोक्ताओं के हितों का संरक्षण करना और विवादों का शीघ्र समाधान कराना है। अधिनियम के इस उद्देश्य के साथ-साथ अन्य उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चत करने के उद्देश्य से अधिनियम की धारा-3() में यह बाध्यकारी व्यवस्था की गयी है कि ऐसी परियोजनाएं जो अधिनियम के लागू होने की तिथि पर चल रही हैं आनगोइंग) तथा जिनका कम्पलीशन सर्टीफिकेट नहीं जारी हुआ है, प्रोमोटर द्वारा उनका रजिस्ट्रेशन अधिनियम के लागू होने के 03 माह के अंदर रेरा में सुनिश्चित किया जाएगा। इस प्राविधान को अधिनियम में सम्मिलित करने और बाध्यकारी करने का उद्देश्य आनगोइंग परियोजनाओं में Sorel तथा अन्य पक्षों के उन समस्त हितों का संरक्षण है, जिनके संबंध में पक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध /अण्डरस्टैण्डिंग के आधार पर अधिकार तथा दायित्व सृजित हो गए हैं। 2. आनगोइंग परियोजनाओं में आवंटियों के हितों के संरक्षण का अधिकार तथा दायित्व रेरा का है, यह अधिनियम की धारा-79 के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है,
जिसमें यह व्यवस्था की गयी है कि किसी भी सिविल न्यायालय को, किसी ऐसे मामले, जिस पर प्राधिकरण या अधिनिर्णायक अधिकारी अथवा अपील अधिकरण निर्णय करने हेतु इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन सशक्त हैं, कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण की अधिकारिता नहीं होगी। अधिनियम द्वारा जिन मामलों में रेरा को क्षेत्राधिकार दिया है, उन मामलों के विचारण से सिविल न्यायालय को वर्जित कर दिया गया है। अतः इस संबंध में संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है कि आनगोइंग परियोजनाओं में पक्षों के मध्य विद्यमान तथा होने वाले विवादों में सुनवाई तथा निस्तारण का क्षेत्राधिकार रेरा को प्रदान किया गया है। 3. अधिनियम की oei—7i में यह व्यवस्था दी गयी है कि कोई भी व्यक्ति जिसका, धाराओं-42,44,48 तथा i9 से आच्छादित मामलों के संबंध में, परिवाद इस अधिनियम के प्रावर्तन पर या उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा-09 के अधीन स्थापित उपभोक्ता विवाद परितोष पीठ या उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग अथवा
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग के समक्ष लंबित है, तब वह ऐसे पीठ या आयोग, जैसा मामला हो, की अनुमति से उसके समक्ष लंबित परिवाद को वापस ले सकता है तथा इस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णायक अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। अधिनियम की धारा-74 उन मामलों में भी रेरा को सुनवाई का क्षेत्राधिकार देता है, जो उपभोक्ता पीठों »/ आयोगों में अधिनियम के प्रभावी होने के पहले से विचाराधीन हैं। स्पष्टतया रेरा अधिनियम की मंशा अधिनियम के लागू होने के बाद सृजित होने वाले अधिकारों एवं उत्तरदायित्वों संबंध में भी विचारण तक सीमित न होकर, ऐसी समस्त आनगोंइंग परियोजनाओं के मामलों में क्षेत्राधिकार प्रदान करना है जिनमें पक्षों के मध्य विवाद उत्पन्न हो चुका है या भविष्य में हो सकता है। अधिनियम की धारा-4(2)()(८) में यह प्राविधान किया गया है कि रेरा में परियोजना रजिस्ट्रेशन के समय प्रोमोटर द्वारा एक घोषणा पत्र दिया जाएगा, जिसमें परियोजना पूर्ण करने की अवधि की जानकारी दी जाएगी। अधिनियम के इस प्राविधान का उद्देश्य यह नहीं है कि आनगोइंग परियोजनाओं के मामलों में प्रोमोटर द्वारा मनमाने ढंग से परियोजनाओं को पूर्ण करने की तिथि उद्घोषित की जाएगी और उसका सहारा लेकर स्वयं को आवंटी के साथ पूर्व में निष्पादित अनुबंध के प्राविधानों से अवमुक्त कर लिया जाएगा। वास्तव में इस अधिनियम का उद्देश्य प्रोमोटर द्वारा आवंटी के साथ निष्पादित अनुबंध या उनके द्वारा पूर्व में दी गयी अन्य वचनबद्धताओं के परिदृश्य में ही परियोजना की पूर्णता अवधि की उद्घोषण सुनिश्चित करवाना है। उनके द्वारा परियोजना की पूर्णता के संबंध में आवंटी को दी गयी वचनबद्धता उन पर बाध्यकारी है।
5. ऐसे अनुबंध जो आनगोइंग परियोजनाओं के अंतर्गत प्रोमोटर तथा आवंटी के मध्य निष्पादित किये गये हैं तथा जिनका प्रभाव अवशेष है तथा जिनमें प्रभावी शर्तों का उललघंन हुआ है, उनके संबंध में अधिनियम के प्राविधानों के अंतर्गत रेरा में शिकायत प्रस्तुत करके अनुतोष प्राप्त करने का कारण उसी दिन से सृजित हो जाता है जिस दिन पर किसी भी पक्षकार द्वारा अनुबंध की शर्तों के अनुपालन में त्रुटि की गयी हो और इस त्रुटि के बने रहते हुए रेरा में अनुतोष प्राप्त करने का उनका अधिकार विद्यमान रहेगा और अग्रतर मजबूत होता जाएगा। iS ५ q +t my जज उपरोक्त विवेचना के आधार पर मेरा स्पष्ट निष्कर्ष है कि प्रश्नगत शिकायत रेरा के क्षेत्राधिकार में है जिस पर अधिनियम तथा अनुबंध की शर्तों को के अनुसार आवंटी शिकायतकर्ता को रेरा से अनुतोष प्राप्त करने का अधिकार है। उत्तरदाता द्वारा अपने इस कथन के समर्थन में कि Var ले-आउट प्लान में कोई परिवर्तन किया गया था, से संबंधित विवरण, परिवर्तन का आधार या अपने इस कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। उत्तरदाता तथा आवंटी /शिकायतकर्ता के मध्य फ्लैट एलाटी एग्रीमेंट दिनांक 44.05.2040 को हस्ताक्षरित किया गया था, जिसके प्रस्तर-25 में यह प्राविधान किया गया है कि आवंटी को आवंटित फ्लैट का कब्जा माह अक्टूबर 2042+ /-3 माह में दिया जाएगा। यदि इस अवधि में उत्तरदाता द्वारा आवंटी को फ्लैट
का कब्जा नहीं प्रदान किया जाता तो उत्तरदाता द्वारा सुपर एरिया के प्रतिवर्गफुट पर रू0 05 प्रतिमाह की दर से विलंब धनराशि का भुगतान किया जाएगा। उत्त्तरदाता प्रोमोटर तथा adda /शिकायतकर्ता के मध्य निष्पादित फ्लैट एलाटी एग्रीमेंट के अनुसार आवंटी को आवंटित फ्लैट का कब्जा प्रदान करने के लिए निर्धारित अंतिम समय सीमा जनवरी 2043 है, जो 05 वर्ष पूर्व समाप्त हो गयी है। अतः आवंटी /शिकायतकर्ता अनुबंध की शर्तों के अनुसार नोएडा अथारिटी द्वारा प्रदत्त कम्पलीशन सर्टीफिकेट के पश्चात दिनांक 04.02. 2043 से सुपर एरिया के प्रतिवर्गफुट पर Go 05 प्रतिमाह की दर पर अर्थदण्ड सहित प्राप्त करने के अधिकारी हैं। यदि शिकायतकर्ता पर नियमानुसार कोई देयता है, तो उनके द्वारा उसका भुगतान विधिक कब्जा /रजिस्ट्री के समय किया जाएगा। अतः उत्तरदाता प्रोमोटर-मेसर्स गार्डनिया एम्स डेवलपर्स प्राणलि0 को एतदद्वारा आदेश दिया जाता है कि आवंटी शिकायतकर्ता श्री शिव शंकर चौधरी को आवंटित फलैट का कब्जा नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए दिनांक 04.02.2043 से सुपर एरिया के प्रतिवर्गफुट पर wo 05 प्रतिमाह की दर से अर्थदण्ड के भुगतान सहित दिनांक 34.42.2048 तक प्रदान करें। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को उनका त्रुटिरहित लेखा भी उपलब्ध कराएं | विपक्षी प्रोमोटर द्वारा आदेश का अनुपालन न किए जाने पर शिकायतकर्ता आवंटी को यह अधिकार होगा कि उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सके। इस आदेश का उल्लंघन उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।
आदेश आज दिनांक 06.04.2048 को हस्ताक्षरित तथा उदघोषित किया गया। दिनांक:--06.04.2048 Digitally signed A B RA R by ABRAR (eRe अहमद) AHMED उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण AHMED Pate:2078.04.09 20:72:06 +05'30'