Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
kAMLA v. AJPA Parishad Sehkari Awas Samiti Ltd
Complaint No. 8201816432
- Decision date
- 2019-04-25
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-0॥, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्री भानु प्रताप सिंह, सदस्य |_शिकायतकर्तो | यतव | 4 | | 5 | 82086447 i कमार अग्रवाल भारत कमार भदावत | 6 | ————+ 7 82086484 = आनन्द प्रकाश | अनिता गुप्ता | aoreesss | छुशबू अग्रवाल | 7020827% [5 बनाम अजपा परिषद सहकारी आवास समिति लि0 आदेश 40.04.2049 शिकायतकर्ता अरूण कुमार उर्फ fits के साथ i अन्य शिकायकतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Dronagiri से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा a Scanned by CamScanner 2 रहा है। शिकायत Ho 820:876348 अरूण कुमार उर्फ पिंगल दर वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र के माध्यम से शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध निम्न अनुतोष चाहे गये हैं :- . शिकायतकर्ता की यूनिट बंधक मुक्त करायी जाये। कंपलीशन सार्टिफिकेट के पश्चात रजिस्ट्री करायी जाये। प्रस्तावित सुविधायें पूर्ण कराकर कब्जा दिलाया जाये | 4. विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये। 2. 3.
शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Dronagiri, में फ्लैट ए-704, बुक कराया गया और विपक्षी की मांग के अनुसार धनराशि जमा करायी गयी, विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिनांक 30.09.205 तक दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नही दिया गया और न ही विलम्ब की कोई क्षतिपूर्ति दी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से t264 वर्ग फुट यूनिट के कीमत वसूल की गयी है, जबकि यूनिट का क्षेत्रफल 800 वर्ग फुट है, इस प्रकार अधिक क्षेत्रफल की कीमत को वापसी दिलाते हुए यूनिट का कब्जा व विलबित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में छायाप्रति पत्र दिनांक 22. 4.2045, छायाप्रति पत्र दिनांक 46.4.20:5, पत्र दिनांक 28.3.2045, छायाप्रति बंधक नामा, माननीय उच्च न्यायालय का आदेश दिनाक 75.24.2008, परियोजना के फोटो, पत्र दिनांक 23.3.20:5, छायाप्रति आदेश मुख्य निर्वाचन आयोग, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की छायाप्रतियां, छायाप्रति आदेश अपर आवास aged, सूचना दिनाक 48.4.2048,5.40.2048, छायाप्रति प्रथम सूचना रिपोर्ट, विपक्षी की रेरा वेबसाईट पर दी गयी सूचनाओं की प्रति, ब्रोशर की प्रति, छायाप्रति बैनामा दिनांक 26.3.2042,शेयर प्रमाण पत्र, आवंटन पत्र, की छायाप्रति प्रस्तुत की गयी है। विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के Go- का कब्जा आवंटियों को वर्ष 2006-0 में दिया जा चुका है। द्वितीय चरण की परियोजना हेतु vow sara एवं विकास as Scanned by CamScanner 3
परिषद लखनऊ से कय योग्य एफ.ए.आर. की कीमत पूछे जाने के उपरान्त उनके कार्यालय पत्र दिनांक 25.2.2044 से 22,43,65,680,//- रूपये जमा कराने के आदेश पारित किये गये, किन्तु कय योग्य एफ.ए.आर. की गणना सही नहीं है। 406 यूनिट की स्वीकृति दिनांक 9.4.20:2 को प्राप्त स्वीकृति में एफ.ए.आर. की मांग 8,63,36,000 /- रूपये की मांग गणना से अधिक थी, बार बार पूछने पर भी अंतिम गणना 6,33,32,8722,/- रूपये बतायी गयी, जो कि अभी भी अत्याधिक थी, पुनः निर्वाचन के उपरान्त 5.44.202 को अंतरिम कमेटी द्वारा कार्यभार ग्रहण किया गया। परिषद द्वारा अंतिम रूप से गणना कर अंकन 5,72,50,980 /— रूपये बतायी गयी, जो कि अत्याधिक थी, बाद में यह धनराशि 45 प्रतिशत ब्याज लगाकर 6,72,50,980/- रूपये कर दी गयी, जिसमें 4,68,2,745 /— रूपये जमा किये गये और शेष धनराशि किस्तों में करने का अनुरोध किया गया, तो आवास विकास परिषद द्वारा उक्त धनराशि को 4 fit में करते हुए कुछ क्षेत्रफल बंधक रखने को कहा गया, जिसके पश्चात दिनांक 27.920:4 को बंधक पत्र निष्पादित किया, जिसमें कुछ त्रुटियां होने पर संशोधित बंधक पत्र निष्पादित किया गया, जिसमें परिषद द्वारा अनुचित रूप से लगभग 92 लाख रूपये का ब्याज अंकित करते हुए बंधक क्षेत्रफल को दुगना कर दिया गया। समिति के प्रतिवादपत्र पर विचार किये बिना परिषद द्वारा मनमाने ढंग से 9,48,46,939,//- रूपये की वसूली हेतु जिलाधिकारी गाजियाबाद को पत्र प्रेषित कर दिया गया, जिसके कम में गाजियाबाद जिलाधिकारी द्वारा परियोजना को सील कर दिया गया, जिसके पश्चात समिति द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका सं० 36835,/2048 योजित की गयी, जो कि अंतिम आदेश हेतु विचाराधीन है। समिति के विरूद्ध एक अंतरिम कमेटी गठित की गयी, जिससें निर्माण कार्य बाधित हुआ और अंतरिम समिति का कार्यकाल 6 माह होने के कारण 8.7.208 को स्वतः अवसान हो गया और समिति द्वारा जिला * प्रशासन से अनुरोध किया /माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सील खोलने का कार्य करे, सील खुलने के पश्चात जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा दे दिया जायेगा। दिनाक 28.06.20:2 को समिति के द्वितीय चरण के मानचित्र अनुमोदन देने के पश्चात भी समिति को मानचित्र दिनांक 23. 320i5 को उपलब्ध कराये गये, सदस्यों द्वारा समय से भुगतान न किये जाने के कारण परियोजना विलंबित हुई। अत: उपरोक्त आधार पर प्रार्थनापत्र निरस्त
किये जाने का अनुरोध किया गया। | ० Scanned by CamScanner , 4 विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में परिषद के साथ किये गये पत्राचार से सम्बंधित पत्रों की छायाप्रतियां, एफ.ए.आर. की गणना, माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की प्रतियां, दाखिल की गयी हैं। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के मध्य निम्न बिन्दु विवादय हैं :- + क्या शिकायतकर्ता अपनी जमा धनराशि वापस पाने के अधिकारी हैं? 2 प्रस्तावित सुविधाओं के साथ यूनिट का पंजीकरण कराने के पश्चात कब्जा दिलाया जाये। 3. विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये | निस्तारण बिन्दु to 4 शिकायतकर्ता मनीष अग्रवाल व प्रदीप कुमार गर्ग द्वारा कहा गया है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा देने में विफल रहा है, जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने की याचना की गयी है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं के कारण परियोजना विलंबित हुई है, किन्तु वह जून 2049 तक कब्जा दे देगा, विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में समिति के सचिव द्वारा एक प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करने हेतु इस तथ्य की पुष्टि की गयी कि वह जून 20:9 तक आवंटियों को कंपलीशन प्रमाण पत्र सहित कब्जा दे देगा। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील do 744 /20:7 चित्रा शर्मा आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदि में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" The figures........ which have been made available presently, following the opening of the web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." इस स्टेज पर रियल एस्टेट सेक्टर की वर्तमान वित्तीय स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए धनराशि वापस किये जाने से उन आवंटियों के हित प्रतिकूलतः का Scanned by CamScanner 5 प्रभावित होने संभावित है, जो कि यूनिट का कब्जा लेना चाहते हैं। साथ ही विपक्षी की ओर से सशपथ कहा गया है कि जून 20I9 तक कब्जा दे दिया जायेगा, यदि शिकायतकर्ता को fora के लिए धनराशि/ब्याज के साथ कब्जा मिल जाता है तो इससे सभी आवंटियों के हित साध्य हो सकेंगें। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि व्यवस्था के अन्तर्गत को धनवापसी किया जाना उचित प्रतीत नही होता है। तदनुसार बिन्दु to 4 Pratt किया जाता है। निस्तारण बिन्दु स0 2 बिन्दु Wo 2 के अन्तर्गत सभी शिकायतकर्तागण का मुख्य अनुतोष है, कि विपक्षी से प्रस्तावित सुविधाओं के साथ यूनिट कर पंजीकरण कराकर कब्जा दिलाया जाये।
शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा कब्जा 30.9.20i5 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नही दिया गया है। यूनिट का पंजीकरण कराकर कब्जा नही दिया जा रहा है॥ निर्माण की गुणवत्ता बहुत खराब है, वर्तमान में निर्माण कार्य बंद है, परियोजना सील है, और निकट भविष्य में कब्जा दिया जाना संभव नही है। इसके विपरीत विपक्षी का कहना है कि कुछ कारणों से परियोजना विलंबित हुई, पर इसके लिए विपक्षी उत्तरदायी नही है। विपक्षी की ओर से परियोजना को विलंबित रहने का मुख्य कारण उ0प्र0आवास एवं विकास परिषद द्वारा समय से परियोजना का स्वीकृत नक्शा न दिये जाने एवं एफ.ए.आर. की कीमतों को लेकर होने वाला विवाद बताया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में परिषद से समिति द्वारा हुए पत्र व्यवहार की लंबी वार्ता सम्बंधी पत्र दाखिल किये गये हैं, जिसके अवलोकन से विदित है कि पक्षकारों के मध्य एफ.आर.ए. की कीमत से सम्बंधित विवाद है, जिसके सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय में कार्यवाही विचाराधीन है, किन्तु विपक्षी इस तथ्य को विलंब के कारण के रूप में प्रस्तुत नही कर सकता है, उसके द्वारा आवंटियों के साथ एक अनुबन्ध किया गया था, जिसके अनुसार समिति को विपक्षी कब्जा देने के लिए बाध्य है, यह विपक्षी का दायित्व था कि वह आवंटन से पूर्व अपने समस्त विवादों को सुलझाने के पश्चात परियोजना का कार्य शुरू किया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा पहले ही आवंटन कर अनुबन्ध किया गया है, जिस ,कारण दोनो पक्ष उक्त अनुबन्ध से बाध्य हैं। Scanned by CamS canner 6
शिकायतकर्तागण की ओर से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाया गया और साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना वर्तमान में सील है और कोई निर्माण कार्य नहीं चल रहा है और निकट भविष्य में परियोजना पूर्ण होने की संभावना नही है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में संग्रह अमीन द्वारा तहसीलदार को प्रेषित पत्र की प्रति दाखिल की गयी है, जिसमें उल्लिखित किया गया है कि वसूली प्रमाण पत्र के सापेक्ष धनराशि जमा न करने पर सम्पत्ति सील की गयी है। पीठ की ओर से स्थलीय निरीक्षण हेतु आदेशित किया गया, जिस पर उप-सचिव रेरा श्री शशिकांत वर्मा द्वारा दिनांक 5.2208 को मौके का निरीक्षण कर आख्था प्रस्तुत की गयी, जिसमें परियोजना के गेट स0 4 पर उपजिलाधिकारी गाजियाबाद के आदेश 22. 9.20i8 के अनुपालन में अंकन 9,48,46,939,//- रूपये की बकाया धनराशि न जमा करने के कारण Ee किये जाने का नोटिस चस्पा है और एक गेट के ताले पर सील लगा हुआ है। साथ ही मौके पर निर्माण कार्य की विश्लेषण कर बताया गया कि टॉवर का स्ट्रक््चर कार्य लगभग पूर्ण है, दो दो लिफ्ट लगायी गयी हैं, जिनमें से एक चालू है, मौके पर एस.टी.पी., बिजली व पानी का कार्य पूर्ण हो चुका है, वायरिंग हो चुकी है। दरवाजे व खिडकियां लगी हुई हैं। परियोजना के फोटो भी चस्पा किये गये, जिनके अवलोकन से विदित है कि परियोजना लगभग पूर्णता की ओर है। जहां तक सील का प्रश्न है, तो विपक्षी की ओर से कहा गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश से सील खोलने की कार्यवाही की जा चुकी है। अपने कथन के समर्थन में माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से विदित है कि वर्तमान में परियोजना सील नही है। अतः विपक्षी से अपेक्षित है कि वह परियोजना को यथाशीघ्र पूर्ण कर कब्जा आवंटियों को देना सुनिश्चित करें।
शिकायतकर्ता की ओर से यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा 4264 वर्ग फुट क्षेत्रफल आवंटित किया गया था, किन्तु वर्तमान में मौके पर 800 वर्ग फूट जगह है, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण से प्राप्त किया गया अतिरिक्त क्षेत्रफल का पैसा वापस दिलाया जाये। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रोविजनल पोजेशनलैटर की प्रति दाखिल की गयी है, जिसमें यूनिट का कुल क्षेत्रफल 822.786 वर्ग फुट दिया गया है, जिसकी पर रजिस्ट्री की जानी है, जबकि वादी की ओर से दाखिल किये गये आवंटन पत्र में यूनिट का क्षेत्रफल 4264 वर्गफुट cia किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा कहना हैं कि उससे धनराशि भी i264 वर्गफुट की ही ली \ x Scanned by CamScanner 54 गयी है, जिसकारण अतिरिक्त धनराशि को वापस कराये जाने का कथन किया गया है। ऐसी दशा में विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि यदि आवंटन पत्र से कम क्षेत्रफल पर कब्जा दिया जा रहा है, तो कम दिये जाने वाले क्षेत्रफल की धनराशि को अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित किया जाये।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि उसकी सम्पत्ति को विपक्षी द्वारा बंधक रखा गया है, ऐसे दशा में यदि विपक्षी बकाया धनराशि का भुगतान नही करता है, तो उसकी सम्पत्ति जब्त कर ली जायेगी, जिससे उसको अपार क्षति कारित होगी। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में जनसूचना अधिकारी द्वारा दिनांक 3.44.20:8 को दी गयी सूचना की प्रति दाखिल की गयी, जिसमें बंधक पत्र एव उप आवास आयुक्त को प्रेषित पत्र दिनांक t64.20:5 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसमें शिकायतकर्ता की यूनिट को बंधक रखे जाने का उल्लेख है, जिससे स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकयतकर्ता की यूनिट को बंधक रखा गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि की बजरिये बैनामा स्वामी है, किन्तु परियोजना की पूर्णता अथवा अपनी देनदारी के लिए उसे आवटित एवं विकय की गयी यूनिट को बंधक रखने का अधिकार नही है | अब यदि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट को बंधक रखा गया है, तो यह विपक्षी का दायित्व है कि वह wad यूनिट को बंधक मुक्त कराकर उसकी रजिस्ट्री शिकायतकर्ता के पक्ष में करना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्तागण की ओर से यह भी आपत्ति की गयी कि विपक्षी द्वारा परियोजना लांच करते समय स्विमिंग पूल व सोलर वाटर हीटर व अन्य सुविधायें प्रस्तावित की गयी थीं, किन्तु अब उसके द्वारा न तो स्विमिंग पूल बनाया जा रहा है और न ही सोलर वाटर हीटर ही लगाया जा रहा है। इस सम्बंध में विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ब्रोशर में प्रस्तावित सभी सुविधायें परियोजना में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें |
शिकायतकर्ता का यह भी कथन है कि वर्तमान में दो समितियां हैं और दोनो समितियों द्वारा अपने अपने सदस्यों को यूनिट आवंटित की गयी हैं और दोनो समितियों के मध्य विवाद माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में लंबित है, ऐसी दशा में यदि दूसरी समिति केस जीत जाती है, तो वह शिकायतकर्ता की यूनिट किसी अन्य को विकय कर देगी। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रकरण में पारित आदेशों की प्रतियां व समिति के सदस्यों की सूची दाखिल की गयी हैं, जिनके अवलोकन से fea है कि पक्षकारों के मध्य मामला माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है pli Scanned by CamScanner 8 और इस सम्बंध में उक्त प्रकरण की बाबत कोई आदेश पारित किया जाना विधिसम्मत नही है। चूकि की ओर से आवंटन पत्र की प्रति दाखिल की गयी है, जिससे विदित है कि यूनिट wo ए-704 शिकायतकर्ता को आवंटित है और वह नियमानुसार देय धनराशि जमा कर उक्त यूनिट को पाने का अधिकारी है। अतः विपक्षी को इस सम्बंध में आदेशित किया जाता है कि वह बंधक मुक्त कराने के पश्चात शिकायतकर्ता की रजिस्ट्री कराने के उपरान्त कब्जा देना सुनिश्चित करें। तदनुसार बिन्दु do 2 frente किया जाता है। निस्तारण बिन्दु vo 3
बिन्दु to 3 के अन्तर्गत विलंबित अवधि के ब्याज के प्रश्न का निर्धारण किया जाना है। शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी को 30.9.20i5 तक कब्जा देना था, किन्तु आज तक नही दिया गया है। विपक्षी द्वारा विलंबित अवधि के लिए शिकायतकर्ता से 48 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला गया है, अतः शिकायतकर्ता को विपक्षी से i8 प्रतिशत की दर से विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र की प्रति दाखिल की गयी है, जिसमें पोजेशन- के wer सं0 3 में यूनिट का कब्जा सितम्बर 205 और 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ मार्च 20I6 तक कब्जा दिये जाने का कथन किया गया है। स्वयं विपक्षी के क्थनानुसार अभी तक परियोजना पूर्ण नही है। विपक्षी की ओर से प्रार्थनापत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया कि वह समिति 34 मार्च तक लगभग oo प्रतिशत फ्लैट, जरूरत के सभी सुविधाओं के साथ कब्जा देने में समक्ष है तथा जून 209 तक हर स्थिति में कंपलीशन सार्टिफिकेट लेकर रजिस्ट्री कराने हेतु तत्पर है, जिससे विदित है कि विपक्षी जून 20:9 तक आवंटियों को कंपलीशन सार्टिफिकेट सहित कब्जा दे देगा, किन्तु शिकायतकर्तागण अनुबंधित अवधि से कब्जा मिलने तक की अवधि के लिए रेरा के प्राविधानों के अनुसार विलंबित अवधि का ब्याज पाने के अधिकारी हैं। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer ‘Y iccount of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is Scanned by CamScanner liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does Not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। var अनुबन्ध में विलंब की अवधि में शिकायतकर्ता को किस दर से विलंबित अवधि की पूर्ति की जायेगी इसका कोई उल्लेख नही है, तो ऐसी दशा में रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार विलंबित अवधि का ब्याज दिया जायेगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (li) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% wy Scanned by CamScanner 0 unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oli) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक ब्याज की अवधि का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील सं0 6649-50/20i8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20!6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent —.Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त, विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में vad शिकायतकर्तागण ओ.सी.//सी.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तदनुसार बिन्दु सं0 3 निस्तारित किया जाता है।
जहां तक क्षतिपूर्ति का प्रश्न है, तो we अधिनियम के अन्तर्गत इसका क्षेत्राधिकार एडजूडिकेटर को है, इस सम्बंध में पीठ द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। तदनुसार शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र निस्तारित किया जाता है। 4. विपक्षी उपरोक्त आदेश के अनुसार मांग पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। 2. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह जून 209 तक, यदि कोई देय बकाया है, तो उसे प्राप्त कर परियोजना को पूर्ण कर, ओ.सी./सी.सी. सहित, शिकायतकर्तागण को रजिस्ट्री कराकर 'कब्जा देना सुनिश्चित करें। \ १८ / Scanned by CamScanner 34 विपक्षी, शिकायतकर्ता को t4.20:6 (प्रत्येक शिकायतकर्तागण के अनुबन्ध के अनुसार)से 30.4.206 तक अनुबन्ध के अनुसार व दिनांक 4.5.2046 से ओ.सी. /सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक, MCLR+H प्रतिशत ब्याज सहित अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी | यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो वह नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। 4. आदेश की एक एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों. पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व बयाज की प्रत्येक मामले में { गणना की जायेगी। 5. इस आदेश का उल्लघंन sooo (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20I6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। sgt “टला (भानु सिंह) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण «soo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner