Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
shiv Kateesh Verma v. M R Mittals Infratech Private Limited
Complaint No. 6201812965
- Decision date
- 2019-04-24
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई ts-04, श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत Wo 620:82965 शिवकतीश वर्मा निवासी 57, ब्लॉक, ए सैक्टर t4, न्यू विजय नगर, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश | cata, शिकायतकर्ता बनाम मैसर्स एम.आर. मित्तल इंफाटेक प्रा.लि., s-22, त्रिवेणी कॉम्पलैक्स, $-70-72, जवाहर पॉर्क, लक्ष्मी नगर, दिल्ली-92। 03.04.2049 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु प्रस्तुत किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Rajnagar Residency में फ्लैट नं० $-t005 बुक कराया था तथा विपक्षी को समय-समय पर किश्तों के आधार पर कुल GO 22,99,90I / aT किये गये। विपक्षी द्वारा बिल्डर एग्रीमेन्ट के अनुसार 02.40.20i6 तक कब्जा दिये जाने की तिथि के सापेक्ष अभी तक कोई कब्जा शिकायकर्ता को नही दिया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके द्वारा दिनांक 29.4.206 तक 95 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका था, बाद में प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को ई ब्लॉक से जी ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया और मई 20I6 में नया अनुबन्ध निष्पादित कराया गया। अब विपक्षी न तो पुरानी यूनिट $-2005 दी जा रही है और न ही नई यूनिट vh-oor दी जा रही है, ही Scanned by CamScanner | 2 जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का IN किया गया।
विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि राजनगर रेजीडेंसी एक बडा प्रोजेक्ट है, जिसे कई फेज में पूरा किया जा रहा है। कुछ टावर बनकर तैयार हैं। शिकायतकर्ता की यूनिट ft005 बनकर तैयार है और उसके कंपलीशन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा बाद में अपनी समस्याओं को सुलझाते हुए स्वेच्छा से बडी यूनिट जी-906 में हस्तांतरित किया गया, जो कि पूर्ण है और उसका पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा नई यूनिट के लिए बैंक से ऋण लिया गया है, जो कि कब्जे के लिए तैयार है, शिकायतकर्ता जी.एस.टी. की धनराशि देने के लिए तैयार नही है, जिसका भुगतान कर कब्जा प्राप्त कर सकता है। अतः वाद खारिज किये जाने की याचना की गयी है। उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्को को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। मुख्य शिकायतकर्ता की ओर से निम्न अनुतोष चाहे गये हैं :- = fame से यूनिट का कब्जा दिलाये जाने व कब्जा मिलने तक मय ब्याज क्षतिपूर्ति | 2. क्या शिकायतकर्ता विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं0 4
बिन्दु सं० 4 के सम्बंध में उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि विपक्षी न तो उसकी पुरानी यूनिट g-i005 का कब्जा दे रहा है और न ही नयी यूनिट जी-904 का कब्जा दे रहा है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता की यूनिट ई-4005 बनकर तैयार है और उसके कंपलीशन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा बाद में अपनी समस्याओं को सुलझाते हुए West से बडी यूनिट जी-906 में हस्तांतरित किया गया, जो कि पूर्ण है और उसका पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा नई यूनिट के लिए बैंक से ऋण लिया गया है, जो कि कब्जे के लिए तैयार है, शिकायतकर्ता जी. एस.टी. की धनराशि देने के लिए तैयार नहीं है, जिसका भुगतान कर कब्जा प्राप्त कर सकता है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में एक अन्य वाद में ओ.सी. दिनांकित 6.7.20:8 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से विदित है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण है और कब्जे के लिए तैयार है। विपक्षी का कहना ae Scanned by CamScanner 3
थ्र कि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी यूनिट ¥-t005 से जी-906 में हस्तांतरित की गयी, जिसका एरिया बढा हुआ है और शिकायतकर्ता जी.एस.टी. देने को तैयार नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके द्वारा यूनिट की पूरी कीमत के साथ शिकायतकर्ता द्वारा मांगी गयी अतिरिक्त धनराशि भी अदा की जा चुकी है, और अपने कथन के समर्थन में विपक्षी को दिये गये चैक व अपनी पास बुक की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को बिजली लोड, मीटर व टैक्स के मद में अंकन 2,76547/- रूपये की धनराशि अदा की जा चुकी है, पासबुक से अवलोकन से विदित है कि चैक की धनराशि उसके खाते से निकाली जा चुकी है। ऐसी दशा में यह सुस्पष्ट हे कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी का समस्त भुगतान कर दिया गया है, किन्तु विपक्षी द्वारा उसे न तो कब्जा दिया जा रहा है और न ही उसकी रजिस्ट्री की जा रही है, जो कि अनुचित है। शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा व रजिस्ट्री कराने का अधिकारी है। तदनुसार बिन्दु सं? 4 निस्तारित किया जाता है। . निस्तारण बिन्दु to 2
इस बिन्दु के अन्तर्गत यह निधारित किया जाता है कि क्या शिकायतकर्ता किसी विलम्बित अवधि का ब्याज को पाने का अधिकारी है? जहां तक विलम्ब का प्रश्न है, तो शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके द्वारा at 203 में बुकिंग करायी गयी थी, किन्तु उसे आज तक कब्जा नहीं दिया गया है, जबकि उसके द्वारा समस्त धनराशि अदा की जा चुकी है। विपक्षी का कहना है कि परियोजना पूर्ण है और उसका ओ.सी. आ चुका है, शिकायतकर्ता द्वारा स्वेच्छा से बडी यूनिट लेने का निर्णय लिया है और नये अनुबन्ध के अनुसार कोई विलंब नही है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम बुकिंग यूनिट Ho ¥-005 दिनांक 20..203 को करायी गयी है और पक्षकारों के मध्य अनुबन्ध दिनांक 2.4.203 को निष्पादित किया गया है, जिसमें यूनिट का कब्जा 30+6 माह (ग्रेस पीरियड) सहित $ माह में दिया जाना था, इस प्रकार प्रथम अनुबन्ध के अनुसार कब्जे की विलंबतम तिथि 24.2076 थी, किन्तु इस मध्य विपक्षी की परियोजना इस तिथि तक तैयार नहीं हो सकी। विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा स्वेच्छा से अपनी यूनिट बदल कर बडी यूनिट ली गयी, जिसमें दिसम्बर 20:8 तक कब्जा. देना था और उसकी ओ.सी. दिनांक 6.7.208 को आ चुकी है। अतः उसके द्वारा कोई विलम्ब कारित नही किया गया है। दूसरी यूनिट का अनुबन्ध दिनांक 5.7208 को निष्पादित किया गया है, जिसमें यूनिट का कब्जा दिसम्बर 20:8 को तक दिये जाने का उल्लेख है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त शिकायत 27.6208 को योजित की गयी है, जिससे प्रतीत होता है कि विपक्षी द्वारा शिकायत होने के उपरान्त यह अनुबन्ध निष्पादित किया गया है, पक्षकारों के मध्य किसी समझौते के अन्तर्गत यह अनुबन्ध निष्पादित हुआ, ऐसा भी eo Scanned by CamScanner 4
कोई कथन विपक्षी की ओर से नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा अब उसे सम्पूर्ण धनराशि अदा करने के पश्चात भी कब्जा नहीं दिया जा रहा है। ऐसी दशा में जबकि पूर्ण धनराशि अदा करने के उपरान्त भी आज तक शिकायतकर्ता को कब्जा नहीं दिया गया और एक लम्बी अवधि से विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की धनराशि का उपभोग किया गया है, मात्र नये अनुबन्ध के आधार पर विलम्ब को क्षम्य नही किया जा सकता है, क्योंकि विपक्षी aR 2.4.2073 से शिकायतकर्ता की धनराशि का उपभोग किया जा रहा है और उसे ओ.सी. दिनांक 6. 7.2048 को प्राप्त हुई है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता अपनी पूर्व अनुबंधित अवधि 2.4. 20i6 से नये अनुबन्ध की अवधि तक शिकायतकर्ता अपनी जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है। पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से क्षतिपूर्ति का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त क्षतिपूर्ति अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी है उसी दर से क्षतिपूर्ति देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नहीं, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.2046) से पूर्व, चूंकि पक्षकारों का अनुबन्ध प्रभावी है, जिस कारण अनुबन्ध के अनुसार क्षतिपूर्ति की जानी चाहिये और रेरा के आने के बाद रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ae Scanned by CamScanner जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा श्र एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2028 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wee 9 (|) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-
The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर ofiii) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। चूंकि शिकायतकर्ता यूनिट की सम्पूर्ण कीमत अदा कर चुका है। ऐसी दशा में विपक्षी शिकायतकर्ता को ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित at) तदनुसार बिन्दु सं० 2 निस्तारित किया जाता है। जहां तक क्षतिपूर्ति का प्रश्न है, तो te अधिनियम के अन्तर्गत इसका क्षेत्राधिकार एडजूडिकेटर को प्राप्त है, इस सम्बंध में पीठ द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। तदनुसार शिकायत प्रार्थनापत्र निस्तारित किया जाता हैं। 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश अपलोड होने की तिथि से ३० दिन के अन्दर शिकायतकर्ता को यूनिट तैयार कराकर कब्जा दे और देय ery शुल्क प्राप्त कर शिकायतकर्ता की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। साथ ही विपक्षी दिनांक 24.20:3 से 30.4.20I6 तक 5/- रूपये प्रति वर्गफुट प्रति माह की दर से व दिनाक 45.20I6 से दिनांक 5:7.20:8 तक शिकायतकर्ता की जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज देना सुनिश्चित करे। सता Scanned by CamScanner onal
इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 2. Kea ra (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner