Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rishi pratap shahi v. Emm Vee Infrastructures (India) Private Limited
Complaint No. 6201811762
- Decision date
- 2019-07-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
4 उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार,अध्यक्ष कम सं0 | शिकायत do a 620i84637 | लक्ष्मी कान्त 720i8i4690 [वरूण तोमर | [s2orsi5049 [आलोक कूमार॒ | 62048762 | ऋषि प्रताप शाही 720i874683 प्रीति चौधीपी | | 6 |raoea7a [चन्द्रापांडय | aa ७) | ० | + [५० |७>|+-+ बनाम एम.वी.इंफास्ट्रक्चर्स इंडिया प्रा.लि. शिकायतकर्ता लक्ष्मी कान्त अनुरागी के साथ 5 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Dwarka Heights से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत to 6204844637 लक्ष्मी GT अनुरागी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Dwarka Heights यूनिट संख्या- 925 एफ बुक कराया था तथा विपक्षी को समय-समय पर किश्तों के आधार पर अंकन 35,79,700/— रूपये की धनराशि अदा की गयी, किन्तु विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा देने में असफल रहा। यूनिट सबवेंशन स्कीम में कय की गयी थी, किन्तु विपक्षी द्वारा ई.एम.आई. अदा नहीं की जा रही है। अतः शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि की रसीदें, छायाप्रति दाखिल की गयी। x 2
पीठ द्वारा विपक्षी को दिनांक 05.06.20I8 को नोटिस जारी किये गये, जिसमें उन्हें निर्देशित किया गया था कि निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर आवश्यक साक्ष्यों सहित अपना लिखित अभिकथन प्रस्तुत करें। विपक्षी के अधिवक्ता श्री सिद्धार्थ नंदवानी दिनांक 05.t020I8 को उपस्थित हुए और प्रतिवाद पत्र दाखिल करने हेतु समय चाहा गया। दिनांक t6.4.20:8 को विपक्षी अनुपस्थित थे। दिनांक 25.07.2049 को विपक्षी द्वारा बताया गया है कि 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है और 35 करोड़ की आवश्यकता है। यदि शिकातयकर्तागण द्वारा बकाया धनराशि दे दी जाती है, तो मार्च 2020 तक परियोजना पूर्ण करके कब्जा दे सकते है। दिनांक 28.02.20I9 को पीठ द्वारा परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कराये जाने हेतु आदेश दिये गये। दिनांक 26.04.2049 को विपक्षी द्वारा शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा कि 6 से 8 माह में कब्जा दे देगें। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक कराया था। इस पर भी कोई विवाद नही है कि विपक्षी निर्धारित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। विपक्षी की ओर से कोई प्रतिवादपत्र दाखिल नहीं किया गया है। किन्तु एम.वी इन्फास्ट्रक्चर्स के मैनेजिंग डायेक्टर द्वारा शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि परियोजना का अधिकांश कार्य पूर्ण चुका है मात्र फिनिशिंग होना बाकी है जिसमें लगभग 6 से 8 माह का समय लगेगा। रेरा की वेबसाईट पर परियोजना शुरू होने की तिथि 07.0:.203 दर्ज है, जो कि 6 वर्ष पुरानी है और पूर्णता की तिथि 37.03.2020 है। रेरा की तकनीकी टीम द्वारा ware निरीक्षण कराया गया जिसमें यह पाया गया कि परियोजना में कोई मजदूर कार्य नहीं कर रहे है और विधिक कंसलटेन्ट द्वारा बताया गया कि फिनिशिंग मटेरियल 50 प्रतिशत है। परियोजना के बाहरी विकास कार्य अभी शुरू नहीं कराये गये है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है। 4. क्या विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में सबवेंशन स्कीम होने के बावजूद भी ई.एम.आई. का भुगतान नहीं किया ? 2. क्या शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग करना उचित है ? 3. an शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज दर ? १5४ निस्तारण बिन्दु सं0 4 3
शिकायतकर्तागण द्वारा यह भी कहा गया कि उनके द्वारा सबवेंशन स्कीम में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसकी ई.एम.आई. का भुगतान कब्जे मिलने तक विपक्षी द्वारा किया जाना था, किन्तु अब विपक्षी द्वारा ई.एम.आई. का भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिस कारण शिकायतकर्ता को उक्त ई.एम.आई. का भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे वह विषम आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहा है। इस पर विपक्षी की ओर से कोई तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि रेरा के गठन का मूल उददेश्य से गृहकेताओं के हितों को दृष्टिगत रखते हुए रियल एस्टेट सैक्टर का विकास करना है। ऐसी परिस्थितियों में पीठ को दोनो पक्षों के आर्थिक हितों को दृष्टिगत रखते हुए सामंजस्य स्थापित करना है। ऐसी दशा में चूंकि विपक्षी परियोजना पूर्ण करने में तत्पर है और ऐसी स्थिति में यदि वह धनराशि को परियोजना से निकालता है, तो इससे अनेको ऐसे गृहकेताओं के हित प्रभावित होना अधिसंभावित हैं, जो अपने घरों के लिए प्रतीक्षारत हैं, किन्तु अनुबन्ध के विपरीत यदि गृहकेताओं द्वारा यदि ई.एम.आई. का भुगतान किया जा रहा है, तो शिकायतकर्ता इसका लाभ पाने का अधिकारी है। शिकायतकर्ता को उसके द्वारा भुगतान कीजा रही ई.एम.आई. का लाभ अंतिम भुगतान में समायोजित किया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु सं० 4 Prema किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0 2 शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी aT 07.07.206 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नहीं दिया गया है, जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी की ओर से शपथ पत्र दाखिल करते हुए वह 6 से 8 माह में कब्जा दे देगें।
जहाँ तक केता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा is () में प्राविधान है कि :- Section 78 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case "८ the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें।
रेरा अधिनियम की धारा 3 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ " to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder " का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल इस्टेट सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “३2. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (Dany other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी eo deed के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। इस कम में मा. मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल Raced सबअरबन प्रालि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के WER 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- ("५ >
“24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 2, /4, /6 and 79, A promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.” उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के
आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, compensation fo ranting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेया पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया" (744, 2047) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है :- 40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ........++++ Secondly, the figures
which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं WI एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। Revs का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन“, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य "wo seed”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। निस्तारण बिन्दु सं0-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 3
शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना 04.04.2046 तक पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी की परियोजना अभी तक पूर्ण नही है। विपक्षी की ओर से कहा गया कि उसके द्वारा 6 से 8 माह में कब्जा दे देगे। इस प्रकार शिकायतकर्ता अनुबन्ध के अनुसार विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Section 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed "Ys the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
ara: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sa के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक धनराशि एवं ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 8, 38, 59, 60, 6, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. aa उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.206) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 45.206 @ रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली cog अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें TER 9 (ii) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the x Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर offi) ¥ निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्ब के लिए ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 ,//2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " arias विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तद्नुसार बिन्दु Wo-3 Prema किया जाता है। जहां तक मुआवजा (Compensation) देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के क्षेत्राधिकार में है। अतः इस बिन्दु पर प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। / आदेश ON 9 विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को दिसम्बर 2049 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा दें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री Pere |
विपक्षी, शिकायतकर्तागण को प्रत्येक मामले में ग्रेस पीरियड के साथ अनुबंधित अवधि के पश्चात् से दिनांक 30.4.20I6 तक अनुबन्ध में दी गयी धनराशि की अनुसार व दिनांक 07.05.20I6 से ओ.सी.//सी.सी. की तिथि तक McLR+H प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे | ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी | विपक्षी अनुतोष सं० 4 देने में असफल रहता है, तो शिकायतकर्तागण को दिसम्बर 2049 के पश्चात् 45 दिन के अन्दर जमा धनराशि, जमा करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक McLee प्रतिशत ब्याज सहित अदा करना सुनिश्चित करें। यदि इस यूनिट को कय करने के लिए बैंक से कोई ऋण लिया गया है, तो पहले बैंक की धनराशि वापस की जायेगी, और शेष धनराशि शिकायतकर्ता को दी जायेगी। आदेश की एक एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का veda उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण