Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amit Kishore Bansal v. Jkg Construction Pvt Ltd
Complaint No. 5201810344
- Decision date
- 2019-07-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष कम सं० | शिकायत सं? | Reward | | 4 | 320i87947 | दिग्विजय नेगी | 2 [| 5207840344 [ अमित किशोर बन्सल | बनाम मैसर्स जे.के.जी. कंस्ट्रकशन प्राणलि0 शिकायतकर्ता दिग्विजय नेगी व अमित किशोर बन्सल द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Plam Court 0॥856- से सम्बंधित है। अतः: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत do 320487947 दिग्विजय सिंह अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं जमा धनराशि पर ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना IKG Palm Court Phasel¥ फ्लैट Ao बी-2,606 बुक कराया था जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर किस्तों के आधार पर 44,05,860 /— रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा देने में असमर्थ रहा। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 2, 42.205 तक फ्लैट का कब्जा देना का वादा किया था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी कि परियोजना में कब्जा एवं जमा धनराशि पर ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि की रसीदें, मांग पत्र, आवंटन पत्र, स्वागत पत्र की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। 2
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते" हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबन्ध के अनुसार पूर्णता की तिथि 32.42.205 है किन्तु अनुबन्ध में फ्लैट की पूर्णता की कोई तिथि नहीं दी गई है एवं मौखिक रूप से जून 2008 बतायी गई। जो कि रेरा में परियोजना के प्रथम चरण की पूर्णता की तिथि थी, परन्तु वित्तीय संकट एवं रियल स्टेट मार्केट में नकारात्मक परिदृश्य होने के कारण कब्जा जून 20:8 तक नहीं दे पाये अब पूर्णता के लिए संशोधित तिथि जून 2079 दी गयी है। विपक्षी का यह भी कहना है कि कुछ फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना का कब्जा जून 20:8 तक देने में असमर्थ रहा। परियोजना के प्रथम चरण (A-L,A-2,B- व 8-2 टॉवर्स) का कब्जा जून 200 तक दे दिया जायेगा एवं साईट पर कार्य तीव्र गति से चल रहा है। द्वितीय चरण (टॉवर्स C-I,C-2, व) का कब्जा दिनांक 34.42. 2049 तक दे दिया जायेगा व कार्य चल रहा है। उक्त के समर्थन में एक शपथ पत्र भी दिया गया है। उभयपक्षों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। यह निर्विवादित है कि विपक्षी की परियोजना में शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट बुक करायी गयी किन्तु विपक्षी द्वारा परियोजना की पूर्णता की तिथि अनुबन्ध में नहीं दी गयी है जिससे विदित हो कि वह कब तक कब्जा दे देगें। विपक्षी द्वारा कहा गया कि परियोजना वित्तीय संकट और रियल स्टेट मार्केट में नकारात्मक परिदृश्य होने के कारण विलम्बित हुई। पीठ के समक्ष दिनांक 02.05.20:9 को सुनवाई के दौरान शपथ पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि जून 2049 तक कब्जा दे देगें और aia के लिए आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता की शिकायत को दृष्टिगत रखते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है :-
4... क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? * 2. कया शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? निस्तारण बिन्दु to 4 बिन्दु do । इस आशय का विरचित किया गया है कि am force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना वित्तीय संकट और रियल स्टेट मार्केट में नकारात्मक परिदृश्य होने के कारण विलम्बित हुई। के किन्तु विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही किसी फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नही किया गया है, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नही है। तदनुसार बिन्दु vo 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 2 शिकायतकर्तागण द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा 04.42.2046 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण जमा धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि वह परियोजना के फेज-4 के आवंटियों को जून 209 व फेज-2 के आवंटियों को दिसम्बर 20:9 तक कब्जा दे देगा। विपक्षी द्वारा अपने इस कथन के समर्थन में कम्पनी के अधिकृत हस्ताक्षरी श्री मनीष गोयल का दाखिल शपथ पत्र उद्दधरत किया गया है।
विपक्षी की ओर से यह भी कथन किया गया है कि दिनांक 34.42.2046 की तिथि शिकायतकर्ता द्वारा गलत दी गयी है, ऐसा कोई अभिकथन विपक्षी की ओर से नही किया गया है किन्तु मौखिक रूप से पूर्णता के बारे में जून 2048 बतायी गई। पत्रावली पर उपलब्ध अनुबन्ध के अवलोकन से विदित है कि उक्त अनुबन्ध में परियोजना की पूर्णता की तिथि बाबत कोई कथन नही किया गया है। उक्त स्थिति में यह नहीं माना जा सकता कि विपक्षी स्वेच्छानुसार शिकायतकर्ता को कब्जा देगें और कब्जे की तिथि अंतहीन होगी। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3533-3534 /20i7 4 स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है fe: Moreover, a person cannot be made to wait indefinitely for the possession of the flats allotted to them and they are entitled to seek the refund of the amount paid by them, along with compensation. Although we are aware of the fact that when there was no delivery period stipulated in the agreement, a reasonable time has to be taken into consideration. In the facts and circumstances of this case, a time period of 3 years would have been reasonable for completion of the contract i.e., the possession was required to be given by last quarter of 20I4. Further there is no dispute as to the fact that until now there is no redevelopment of the property. Hence, in view of the above discussion, which draw us to an irresistible conclusion that there is deficiency of service m on the part of the appellants and accordingly the issue is answered.
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार फ्लैट के कब्जे हेतु किसी व्यक्ति को अनिश्चित समय तक प्रतीक्षा नहीं करा सकता, जहाँ अनुबन्ध में कब्जे की तिथि नहीं दी गयी है वहाँ एक रीज़नेवल समयावधि इस कार्य हेतु अवधारित की जानी होगी। प्रस्तुत प्रकरण में आवंटन पत्र में निष्पादन की तिथि 06.06.20i3 को की गई है। स्वयं बिल्डर द्वारा जून 208 की तिथि मौखिक रूप से बतायी गई एवं स्वीकार की गयी है जो अनुबन्ध से लगभग 5 वर्ष बाद है यदि वह तिथि नहीं मानी जाये, तो भी परियोजना विलम्बित है और विलम्ब के लिए शिकायतकर्ता को ब्याज दिलाये जाना उचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन wife. ant बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 48()(9) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is mérely compensation for use of money. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप fara तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के ही
विलंब की अवधि में 3 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- कं For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. / have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 8, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (देनाक i52006) 8 wl अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने, के बाद दिनांक 4.5.2046 से रेरा के प्राविधानों के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,“पटटा विलेख के प्रारूप के TER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% a unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oflii) F निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए" आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक ब्याज की अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50,/2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्तागण मात्र ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तदनुसार बिन्दु to 2 Penta किया जाता है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को ओ.सी. /सी.सी.सहित 30.06.20:9 तक यदि wy देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर पंजीयकरण कराना सुनिश्चित करें। 2 विपक्षी, शिकायतकर्ता को da पीरियड के साथ दिनांक 06.06.20I8 से ओ. सी /सी.सी.तक MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे | साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि aX 7 देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप विलम्बित अवधि का ब्याज प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20I6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। न नाश i 2 ०७ (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण