Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
gaurav awasthi v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. 420189793
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
Sono भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत Ho 420489793 गौरव अवस्थी बनाम महागुन (इंडिया) प्रा.लि. आदेश 06.03.2049 प्रस्तुत वाद शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट पूर्ण कर कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी की परियोजना La Residentia ¥ फ्लैट सं. टी-44 /'502 बुक कराया था और अंकन 36,54,970,/- रूपये की धनराशि विपक्षी को अदा की गयी। यूनिट का कब्जा दिनांक 25.220:8 को दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट को पूर्ण कर कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में छायाप्रति एम.ओ.यू., त्रिपक्षीय अनुबन्ध, अनुबन्ध पत्र, ई-मेल, भुगतान का विवरण, प्रस्तुत किया गया है। पीठ द्वारा विपक्षी को नोटिस जारी किये गये, जिस पर विपक्षी पीठ के समक्ष उपस्थित आया, किन्तु पर्याप्त अवसर दिये जाने के बाद भी विपक्षी की ओर से कोई प्रतिवादपत्र दाखिल किया गया। a U Scanned by CamScanner उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है, किन्तु विपक्षी का कहना है कि वह शीघ्र ही निर्माण पूर्ण कर शिकायतकर्ता को कब्जा दे देगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में अनुबन्ध की तिथि 48..20i5 से 42+6 माह (ग्रेस पीरियड) अर्थात 8.07.20I9 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा रेरा की वेबसाईट पर परियोजना शुरू होने की तिथि t5.4207 और पूर्ण की तिथि 45.6. 20t9 दी गयी है, जो कि निकट की तिथि है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबशर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 8(4)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है wa | / Scanned by CamScanner 3
कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से क्षतिपूर्ति का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त क्षत्तिपूर्ति अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विषक्षी द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी है उसी दर से क्षतिपूर्ति देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the Present case. / have already indicated that the Provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 64, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह ere है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक .5.206) @ Wd अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक .5.2046 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक i740.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये _विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के fore प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, a af Scanned by CamScanner along with interest at the rate egeal to MCLR (Marginal Cast of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise ender the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर ७५(॥0) में निर्धारित है। उक्त ग्राविघधान को दृष्टिगत रखते हुए SRA को cies: प्रतिशत की अब यह ws विचाराणीय 2m] aes अब यह प्रश्न ERTS है कि Res की यह अदधि Se तक होगी। गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया १३ ६३०३६ ६९३ [<I इस सम्बंध में सिदिल अपील Ho 6849-50 ,” 208 ERS लिमिटेड T " the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Oocupency Certificate wes obtzined 35 per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4) of the Consumer Complaint,
wherein she has admitted thet the Apoellant - Builder had obtained the Completion Certificate as lee as April 20I6. The Respondent - Purchaser could not have any fimther grievance after April 20I6 with respet ४० deley in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought net to be allowed to reap the benefits of her own delay in teking Se उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओसी. मिलने द कब्जा ऑफर करने की तिथि. जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओसी./सीसी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। विपक्षी की ओर से SM की प्रति as नही की गयी है. जिससे यह निर्घारित किया जा सके कि ओसी. किस तिथि को प्राप्त हुआ था। अतः शिकायतकर्ता दिनांक ii208 से ओसी /सी सी.आने sea पोजेशन ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो त्तक ब्याज पाने का अधिकारी है। 8 जहां तक मुआदजा देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के Sater में है। aa इस बिन्दु पर प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त शिकायत्कर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी थी. कि विपक्ली द्वारा त्रिय्लीय अनुबन्ध के अनुसार SUAS. का भुगतान नही किया जा रहा है। इस सम्बंध में पत्रावली पर Beis अनुब्न्ध की प्रति दाखिल है, जिसमें विपक्षी ER 24 महीने अथवा कब्जा दिये जाने तक ईएमआई. का भुगतान किये जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह ई.एमआई. द किराया दोनो का एक Ps Hs w Scanned by CamScanner 5
साथ भुगतान कर रहा है, जिससे विषम आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहा है | ई. एम.आई. अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी का दायित्व था, इस सम्बंध में शिकायतकर्ता को जमा की गयी ई.एम.आई. का लाभ अंतिम भुगतान में समायोजित कर दिया जा सकता है। तदनुसार शिकायतकर्ता का निस्तारित किया जाता है। ‘. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह, यदि कोई देय बकाया है, तो उसे प्राप्त कर दिनांक 306.20I9 तक ओ.सी.,/ सी.सी. सहित कब्जा प्रदान करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर पंजीकरण करायें। साथ ही विपक्षी दिनाक 4.4.20I9 से ओ.सी.,//सी.सी. सहित कब्जा ऑफर किये जाने तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर McLRH प्रतिशत की दर से ब्याज देना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम धनराशि में समायोजित की जायेगी और ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार वापस की जाये। 2. शिकायतकर्ता द्वारा जमा ई.एम.आई. की धनराशि अंतिम भुगतान में समायोजित की जाये। 3. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। a (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 3उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner