Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sunil and Alpana Kaushik v. Sare Saamag Realty Private Limited
Complaint No. 320188223
- Decision date
- 2019-04-02
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
; उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य samo | शिकायत संठ _]__ शिकायतकर्ता | [देवेन्द्र अग्रवाल -औ*]"| Fs [eaorerarss | rae अग्रवाल "| | 4 _| 720784445 वीरेन्द्र कुमार | 5 | 820I7203 संजीव कुमार वर्मा [ 6 [39080222 _ सुनील कीशिक | बनाम मैसर्स सारे समग रियलिटी प्राणलि0 आदेश 06.03.2049 शिकायतकर्ता देवेन्द्र अग्रवाल के साथ 03 अन्य शिकायकतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Spring View Heights से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत सं0 420:89538 देवेन्द्र अग्रवाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध अपनी जमा धनराशि एवं बैंक द्वारा ऋण के रूप में दी गयी धनराशि को वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Spring View Heights में यूनिट ए-502, में बुक कराया था, जिसकी अनुमानित कीमत रू0 46,82,442/- थी तथा विपक्षी द्वारा किये गये eo Oy Scanned by CamScanner 2 अनुबन्ध के अनुसार जनवरी 2047 तक कब्जा दिया जाना था। इस मद में शिकायकर्ता द्वारा विपक्षी को समय-समय पर किश्तों के आधार पर कुल रू0 28,94,898 /-अदा किये गये, किन्तु शिकायतकर्ता द्वारा आज तक कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरूद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में भुगतान की रसीदें, ई मेल की प्रति दाखिल की गयी है। विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता के साथ दिनांक 28.7.2004 को अनुबन्ध कर यूनिट आवंटित की गयी थी, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। अनुबन्ध की धारा 24 के अनुसार परियोजना में विलंब हो सकता है, जो कि शिकायतकर्ता को स्वीकार्य था और विलंब की क्षत्तिपूर्ति के लिए भी अनुबन्ध में प्राविधान है, जिसके अन्तर्गत विपक्षी शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति देने को तैयार है। शिकायतकर्ता का यह कहना गलत है कि विपक्षी द्वारा प्री-ई.एम.आई का भुगतान नही किया जा रहा है, जबकि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध के अनुसार 36 महीने तक ई.एम.आई. का भुगतान किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से अपनी किस्तों का भुगतान नही किया गया है। निर्माण कार्य प्रगति पर है और 53 प्रतिशत कार्य किया जा चुका है और इस स्तर पर धनवापसी करना विपक्षी के लिए संभव नही है। विपक्षी की ओर से यह भी कहा गया कि वह दिसम्बर 2049 तक परियोजना का कार्य पूर्ण कर लेगा और आवंटियों को कब्जा प्रदान कर देगा। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन मं परियोजना के फोटो, मानचित्र स्वीकृति पत्र,शिकायतकर्ता का खाता विवरण, बिल्डर बायर wile, बैंक को प्रेषित पत्र की छायाप्रतियां प्रस्तुत की गयी। साथ ही विपक्षी की ओर से कब्जे की तिथि की बाबत कंपनी के निदेशक श्री दीपक ज्योति का शपथपत्र भी प्रस्तुत किया गया। उभयपक्ष के अभिकथनों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। शिकायतकर्त्ता का कहना है कि उसके द्वारा विपक्षी की परियोजना में एक यूनिट बुक करायी गयी, जिसके एवज में विपक्षी को धनराशि भी अदा की गयी, किन्तु हट | 4
Scanned by CamScanner किम विपक्षी द्वाव आज तक कब्जा नहीं दिया गया और न ही प्री ई.एम.आई का भुगतान किया जा रहा है,। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं के कारण परियोजना विलंबित हुई, जिसके लिए विपक्षी उत्तरदायी नही है और निर्माण कार्य प्रगति पर है और 3t04.2020 तक कार्य पूर्ण कर कब्जा शिकायतकर्ता को दे दिया जायेगा | शिकायतकर्तागण की सामूहिक शिकायतों को दृष्टिगत रखते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है :- 4. शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग करना। 2. विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में सबवेंशन स्कीम होने के बावजूद भी ई.एम.आई. का भुगतान न किया जाना। 3... विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये। निस्तारण बिन्दु सं० 4 शिकायतकर्तागण द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा जनवरी 2047 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं के कारण विलंब कारित हुआ, किन्तु विपक्षी अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप परियोजना पूर्ण करने को तत्पर है और परियोजना पर निर्माण कार्य प्रगति से चल रहा है और वह दिसम्बर 2079 तक शिकायतकर्तागण को कब्जा दे देगा। विपक्षी द्वारा अपने इस कथन के समर्थन में कंपनी के निदेशक श्री दीपक ज्योति का शपथपत्र दाखिल किया गया। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील सं0 744,// 2047 चित्रा शर्मा आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदि में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है :-
" 40. The figures........ which have been made available presently, following the opening of the web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of vor Scanned by CamScanner ay, 4 92% of the home buyers many of whom would also have legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." इस स्टेज पर रियल एस्टेट सेक्टर की वर्तमान वित्तीय स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए धनराशि वापस किये जाने से उन आवंटियों के हित प्रतिकूलतः है, जो कि यूनिट का कब्जा लेना चाहते हैं। साथ ही विपक्षी की ओर से सशपथ कहा गया है कि दिसम्बर 2049 तक कब्जा दे दिया जायेगा, यदि शिकायतकर्ता को विलम्ब के लिए धनराशि,/ब्याज के साथ कब्जा मिल जाता है तो इससे सभी आवंटियों के हित साध्य हो सकेंगें | माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित उक्त के अधीन शिकायतकर्तागण को धनवापसी किया जाना उचित प्रतीत नही होता है| तदनुसार बिन्दु wo 4 Pratt किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं० 2 सं0 2 शिकायतकर्तागण द्वारा यह भी कहा गया कि उनके द्वारा सबवेंशन स्कीम में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसकी ई.एम.आई. का भुगतान कब्जे मिलने तक विपक्षी द्वारा किया जाना था, किन्तु अब विपक्षी द्वारा ई.एम.आई. का
अनुबन्ध के अनुसार ई.एम.आई. का भुगतान विपक्षी द्वारा किया गया है एवं वर्तमान में रियल एस्टेट मार्केट मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसी दशा में विपक्षी स्वयं विषम आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहा है और वर्तमान में वह पूर्ण रूप से परियोजना को पूर्ण करने में तत्पर है, ऐसी दशा में वह ई.एम.आई. का भुगतान करने में असमर्थ है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि रेरा के गठन का मूल उददेश्य से गृहक्ेताओं के हितों को दृष्टिगत रखते हुए रियल एस्टेट सैक्टर का विकास करना है। ऐसी परिस्थितियों में पीठ को दोनो पक्षों के आर्थिक हितों को दृष्टिगत रखते हुए सामंजस्य स्थापित करना है। ऐसी दशा में चूंकि विपक्षी परियोजना पूर्ण करने में तत्पर है और ऐसी स्थिति में यदि वह धनराशि को परियोजना से निकालता है, तो इससे अनेको ऐसे गृहकेताओं के हित प्रभावित होना अधिसंभावित हैं, जो अपने घरों के लिए प्रतीक्षारत हैं, किन्तु अनुबन्ध के विपरीत यदि गृहकेताओं द्वारा यदि ई.एम.आई. का भुगतान किया जा रहा है, तो शिकायतकर्ता इसका लाभ पाने का अधिकारी है। शिकायतकर्ता को a , eS Scanned by CamScanner उसके द्वारा भुगतान की जा रही ई.एम.आई. का लाभ अंतिम भुगतान में समायोजित कर दिया जाये। तदनुसार बिन्दु vo 5 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0 3 शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना जनवरी 2047 तक पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी की परियोजना अभी तक पूर्ण नही है। अतः विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये। विपक्षी की ओर से कहा गया कि विलंब के लिए अनुबन्ध की धारा 4. में प्राविधान है, जिसके अनुसार विलंबित अवधि पर विपक्षी 5/— रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से प्रतिपूर्ति प्रदान करेगा, जिसके लिए विपक्षी तैयार है।
पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध 4. में निर्माण कार्य 36+6 माह (ग्रेस पीरियड) में समाप्त कर कब्जा देने का कथन किया गया है, उक्त अनुबन्ध दिनांक 5.4.2044 को निष्पादित किया गया है, इस प्रकार कब्जा देने की विलंबतम तिथि 45.7.20:7 थी, किन्तु विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा देने में असमर्थ रहा है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को अनुबंधित अवधि के पश्चात शिकायतकर्ता को ओ.सी.//सी.सी. सहित कब्जा दिये जाने तक की अवधि पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल . Raced सबअर्बन wife. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. en ou Scanned by CamScanner 6 अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध की धारा 4. के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से क्षतिपूर्ति का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त क्षतिपूर्ति अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी है उसी दर से क्षतिपूर्ति देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. / have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 48, 38, 59, 60, 64, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of Provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के
प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 5.2046) 8 yg अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 75.206 WS प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.:0.20I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली ad 5, yy Scanned by CamScanner 7 aos अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wea 9 (i) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर fii) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक मुआवजा देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के darter में है। अतः इस बिन्दु पर प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। तदनुसार शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र निस्तारित किया जाता है | 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ओ.सी./सी.सी.सहित si4220I9 तक यदि कोई देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर पंजीयकरण कराना सुनिश्चित करें। (५ 2. विपक्षी, शिकायतकर्तागण को प्रत्येक मामले में ग्रेस पीरियड के साथ अनुबंधित अवधि के पश्चात से 5/- रूपये प्रतिवर्गफुट प्रतिमाह की दर से दिनांक 304.20:6 तक व दिनांक 4.5.206 से ओ.सी./ सी.सी. सहित मांग पत्र जारी करने की तिथि तक, MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित शा ले Scanned by CamScanner 8 की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। 3. विपक्षी, शिकायतकर्ता द्वारा दौरान निर्माण जमा की जाने वाली ई.एम. आई.की धनराशि को अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित किया जाये।
4. यदि विपक्षी दिनांक 34.42.209 तक शिकायतकर्तागण को कब्जा देने में असफल रहता है, तो दिनांक 3.42.2049 के पश्चात 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि MCLRH प्रतिशत की दर से जमा करने की तिथि से भुगतान करने की तिथि तक मय ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें, यदि इस इकाई हेतु बैंक से ऋण लिया हो, तो इस धनराशि का उपयोग पहले बैंक का ऋण व देय ब्याज लौटाने के बाद शेष धनराशि शिकायतकर्ता को दी जायेगी। 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये। 6. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0मू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Yo dren due T— (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण soo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamScanner