Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Dhaneshwari Devi Dhyani v. Radicon Infrastructure & Housing Pvt Ltd
Complaint No. 320187681
- Decision date
- 2018-07-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश नामित प्राधिकारी / उपाध्यक्ष हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण, हापुड़ प्राधिकारी / उपाध्यक्ष हापुड़- विकास प्राधिकरण, हापुड़ शिकायत संख्या:- 3208768॥ श्रीमती धनेश्वरी देवी cart बनाम मै0 रेडिकॉन इन्फास्ट्रक्चर एण्ड हाउसिंग प्राएलि0 निर्णय यह शिकायत श्रीमती धनेश्वरी देवी ध्यानी पत्नी श्री सत्येन्द्र प्रसाद cart निवासी a6 /474, प्रथम ae, Gaer-7, रोहिणी, नई दिल्ली द्वारा विपक्षी मै0 रेडिकॉन इन्फास्ट्रक्चर एण्ड हाउसिंग प्राएलि0, बी-64, सैक्टर-67, नौएडा के विरूद्ध भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के समक्ष प्रस्तुत की गयी जो उपरोक्त प्रमोटर द्वारा भूखण्ड Wea vivs-ord, Gaexteeh, dex नौएडा, गौतमबुद्धनगर पर विकसित की जा रही वेदान्तम परियोजना के सम्बन्ध में है। शिकायत आई0डी0 wea-s2008768 पर पंजीकृत कर विपक्षी प्रमोटर को नोटिस जारी की गई। सुनवाई के दौरान नियत तिथियों पर उभयपक्ष /उनके अधिकृत प्रतिनिधि उपस्थित हुए तथा मौखिक अभिकथन के साथ-साथ लिखित अभिकथन भी प्रस्तुत किया गया तथा कतिपय अभिलेख दाखिल किये गये। उभयपक्षों को सुना गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनके द्वारा मै? रेडिकॉन इन्फास्ट्रक्चर एण्ड हाउसिंग प्राएलि0 द्वारा नौएडा, गौतमबुद्धनगर में विकसित की जा रही परियोजना वेदान्तम में दिनांक 47.03.20:2 को एक फ्लैट संख्या ए-706 क्षेत्रफल 780 वर्गफुट बुक किया गया था जिसका अलॉटमेंट लैटर दिनांक 34.0420I3 को उनके पक्ष में जारी किया गया था जो उभय पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित है। फ्लैट के कुल मूल्य Ko 40,09,60000 के विरूद्ध उनके द्वारा अब तक कूल अंकन GO 77,32,98000 की धनराशि का भुगतान प्रमोटर के पक्ष में किया जा चुका है। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रमोटर द्वारा फ्लैट का कब्जा 76.03.20:5 तक दिया जाना था परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य के रूप में अपने आवेदन, प्रमोटर के पत्र दिनांक 25.04.202, बुकिंग कंफर्मेशन संबंधी प्रमोटर के वैलकम लैटर दिनांक 27.042002, आवंटन पत्र दिनांक 34004 .20i3, व जमा धनराशि की रसीदों की छायाप्रतियाँ प्रस्तुत की गयीं। शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट का कब्जा दिलाने, कब्जे में हुई देरी के लिए 24 प्रतिशत ब्याज दिलाने, अनुचित मांग वापस लेने के लिए प्रमोटर को आदेश देने व क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रार्थना की गयी। '
विपक्षी प्रमोटर की ओर से दिनांक 44.05.208 को अपना लिखित अभिकथन / आपत्ति प्रस्तुत की गयी जिसमें कहा गया कि यह शिकायत प्राधिकरण के समक्ष पोषणीय नहीं है क्योंकि इस प्राधिकरण का गठन उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 09,06.20:7 द्वारा अस्थाई रूप से किया गया है तथा रेरा प्राधिकरण का स्थाई रूप से गठन अभी तक नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) Pramach—20r6 के नियम-2 ज (IV) के अनुसार जिन परियोजनाओं में सभी विकास कार्य पूरा कर दिया गया हो और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष, समापन प्रमाणपत्र हेतु आवेदन कर दिया गया हो, वह बल एही gear की श्रेणी में नहीं मानी जायेगी। प्रमोटर के अनुसार उनके द्वारा फेज वन (टॉवर £44, ई-2, B+, बी-2 व ए) के कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के लिए दिसम्बर, 20I6 में ही आवेदन किया जा चुका है। अतः वह रेरा अधिनियम एवं नियमावली से आच्छादित नहीं है। वेदान्तम परियोजना के ले-आउट प्लान दिनांक 73.04.2077 को स्वीकृत किये गये थे तथा रिवाइज्ड प्लान दिनांक 8.06.2074 को स्वीकृत किये गये थे। अतः एग्रीमेंट के प्रस्तर-7 के अनुसार परियोजना पूर्ण करने की निर्धारित अवधि ले-आउट प्लान के सैंक्शन की तिथि से 42 माह होती है। प्रमोटर को टॉवर Et, ई-2, डी-4, बी-2 व ए के लिए टीओसी मिल चुका है तथा आवंटियों को ऑफर ऑफ फिटआउट पजैशन की सूचना भेज दी गयी है। आवंटी द्वारा अधिकतर समय पर भुगतान नहीं किया गया है तथा अनुचित लाभ उठाने क॑ उद्देश्य से यह शिकायत की गयी है। शिकायतकर्ता की यह शिकायत भी गलत है कि उनसे अनुचित ब्याज, पजैशन चार्ज और ट्रांसफर चार्ज की मांग की जा रही है। प्रमोटर द्वारा जो भी मांग की गयीं हैं, वह एग्रीमेंट के अनुसार हैं। अतः शिकायतकर्ता की शिकायत खण्डित किये जाने योग्य है। लिखित प्रतिउत्तर के
हट 4 साथ भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 26.04.206, Yoo शासन द्वारा जारी अधिसूचना दिनांक 09.06.207, कम्ग्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत आवेदन, ग्रेटर नौएडा प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत रिवाइज्ड प्लान दिनांक 4806.2074, ग्रेटर नौएडा प्राधिकरण द्वारा जारी अस्थाई आक्यूपैन्सी सर्टिफिकेट व परियोजना के श्वेत श्याम फोटोग्राफ प्रस्तुत किये गये। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक ot06.20:8 को रिज्वाइन्डर प्रस्तुत किया गया जिसमें कहा गया कि परियोजना के अंतर्गत अनेक कार्य अभी भी पूरे नहीं हुए हैं। लिफ्ट काम नहीं कर रही हैं, पानी की आपूर्ति नहीं है, चारदीवारी व पार्क तथा अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधायें भी उपलब्ध नहीं है। विपक्षी को जनवरी, 20:8 F केवल अस्थाई आब्यूपैन्सी सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है तथा स्थाई आक्यूपैन्सी सर्टिफिकेट अभी भी प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा वास्तविक कब्जा नहीं दिया जा रहा है बल्कि उनसे अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है जो गलत है। शिकायतकर्ता द्वारा रिज्वाइन्डर के साथ विपक्षी द्वारा प्रेषित पत्र दिनांक 4 7.0.208, ASEM प्लान, डिमाण्ड लैटर दिनांक 27,03.2008, प्रमोटर के पत्र दिनांक 27-2.2097, पैमेन्ट प्लान दिनांक 24.04.202 की छायाप्रतियाँ तथा परियोजना के रंगीन फोटोग्राफ प्रस्तुत किये गये। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों व अभिकथनों के आधार पर की गयी विवेचना के आधार पर
प्रकरण के संबंध में मुख्य तथ्य निम्न प्रकार हैं- : उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली-206 के नियम-2 ज (५) के अनुसार जिन परियोजनाओं में सभी विकास कार्य पूरा कर दिया गया हो और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष, समापन प्रमाणपत्र हेतु आवेदन कर दिया गया हो, वह बल रही Rata की श्रेणी में नहीं मानी जायेगी। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों व फोटो से स्पष्ट है कि परियोजना में अभी भी सभी विकास कार्य पूर्ण नहीं हुए हैं। अतः परियोजना उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली-206 के नियम-2 ज (७) से आच्छादित नहीं है तथा विकासशील परियोजना की श्रेणी में है जो भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 से आच्छादित है। विपक्षी प्रमोटर द्वारा वेदान्तम परियोजना में फ्लैट संख्या ए-१706 के आवंटन के संबंध में दिनांक 34.04.2043 को सुश्री धनेश्वरी देवी ध्यानी के पक्ष में आवंटन पत्र निष्पादित किया गया है जो उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित है। आवंटन के सापेक्ष प्रमोटर द्वारा प्रतिफल प्राप्त किया गया है। * आवंटन पत्र के प्रस्तर-07 (पृष्ठ-7) के अनुसार फ्लैट का कब्जा बुकिंग की तिथि से 03 वर्ष की अवधि में अर्थात् दिनांक 2604.20:5 तक दिया जाना था परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। इस प्रकार कब्जा देने में लगभग 03 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। ।
- प्रस्तुत तथ्यों से स्पष्ट है कि प्रमोटर द्वारा निर्धारित अवधि में उक्त फ्लैट का कब्जा आवंटी को हस्तांतरित नहीं किया गया है तथा इस प्रकार अधिनियम के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है। भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2076 की aie के अनुसार यदि सम्प्रवर्तक किसी अपार्टमेंट, भूखण्ड या भवन को पूरा करने में असफल रहता है या उसका कब्जा देने में असमर्थ रहता है तो वह आवंटी की मांग पर यथार्थिति, उस अपार्टमेंट, भूखण्ड या भवन के संबंध में उसके द्वारा प्राप्त रकम को ऐसी दर पर ब्याज सहित, जो इस निमित्त विहित की जाये, इस अधिनियम के अधीन यथा-उपबंधित रीति में प्रतिकर लौटाने का दायी होगा। यदि आवंटी जमा धनराशि की वापसी नहीं चाहता है तो सम्म्रवर्तक द्वारा उसे कब्जा सौंपे जाने तक विलम्ब के प्रत्येक मास के लिए उस पर जो विहित की जाये, ब्याज का संदाय किया जायेगा। यदि सम्प्रवर्तक इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या Rea करार के अधीन उस पर अधिरोपित fet अन्य बाध्यताओं का निवर्हन करने में असफल रहता है तो वह आवंटियों को प्रतिकर का इस अधिनियम के अधीन यथा-उपबन्धित रीति में संदाय करने के लिए उत्तरदायी होगा। . उपरोक्त आधार पर प्रमोटर आवंटी को जमा धनराशि पर जमा के दिनांक से ब्याज तथा प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु दायी है। अधिनियम की धारा-2(यक) के अनुसार व्यतिकम की दशा में, सम्प्रवर्तक द्वारा आबंटिती से प्रभार्य ब्याज की दर ब्याज की उस दर के बराबर होगी, जो सम्प्रवर्तक, व्यतिकम की दशा में, आबंटिती को संदत्त करने का दायी होगा। इस प्रकार व्यतिकम की स्थिति में उभय पक्षों द्वारा एक समान दर से ब्याज के भुगतान की व्यवस्था की गयी है। आवंटन पत्र के wRR-4(i), पृष्ठ-6 में यह प्राविधान किया गया है कि
=a Nn wo > a fon] आवंटी द्वारा धनराशि के भुगतान के व्यतिकम की दशा में आवंटी से 24 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज “ लिया जायेगा। प्रकरण में सम्प्रवर्तक द्वारा व्यतिकम किया गया है, अतः उस पर भी इसी दर से ब्याज आरोपित किया जाना उचित है। 7. अतः अधिनियम की धारा-37 में दी गयी शक्तियों का उपयोग करते हुए aR-te के अनुसार आवंटी को कब्जा दिलाने एवं कब्जे में विलम्ब की अवधि के लिए प्रमोटर से ब्याज की धनराशि दिलाये जाने के आदेश पारित किया जाना न्यायोचित है। आदेश शिकायतकर्ता की प्रार्थना आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है तथा विपक्षी प्रमोटर fo रेडिकॉन इन्फास्ट्रक्चर एण्ड हाउसिंग प्राणलि0 को आदेशित किया जाता है कि वह आवंटी श्रीमती धनेश्वरी देवी को वेदान्तम परियोजना में आवंटित किये गये एक फ्लैट संख्या ए-4706 का कब्जा शीघ्रातिशीघ्र हस्तांतरित करे। कब्जा दिये जाने तक उक्त फ्लैट के विरूद्ध जमा की गयी धनराशि पर दिनांक 27.04205 से कब्जे के दिनांक तक 24 प्रतिशत वार्षिक की दर से देय ब्याज की धनराशि का भुगतान किया जाये। शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति के लिए अधिनियम की धारा-7 के अंतर्गत न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करे।
इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-206 की धारा-63 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा तथा देय धनराशि की वसूली धारा-40 की उपधारा-() के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, शोध रकम की वसूली, स्थानीय विधि में विहित रीति में, भू-राजस्व के बकाया के तौर पर की जायेगी। विपक्षी प्रमोटर द्वारा इस आदेश का अनुपालन न किये जाने की दशा में शिकायतकर्ता,// आवंटी को यह अधिकार होगा कि वह उ0प्र0 जा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से उक्त आदेश का कार्यान्वयन कराने की कार्यवाही कर सकता है। यह आदेश आज दिनांक 25.06.208 को हस्ताक्षरित तथा उद्घोषित किया गया। दिनांक:- 25.06.2048 pt ce I gsb* (गया प्रसाद) नामित प्राधिकारी / उपाध्यक्ष a