Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amol Akolkar v. Elegant Infracon Pvt Ltd
Complaint No. 2201931734
- Decision date
- 2019-06-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-04, श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत सं0- 2204934734 अमोल अकोलकर बनाम इलीगेन्ट इन्फाकॉन प्रा0लि0 आदेश 02.04.2049 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षिप्त में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना ELEGANT VILLE PHASE-| में एक फ्लैट स0 सी-4505, बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर किश्तों के आधार पर 37,20,538/— रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा 40.40.2046 तक दिया जाना था, शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनके द्वारा कय किये गये फ्लैट सबवेंशन प्लॉन के तहत ली गयी थी, जिसके अनुसार विपक्षी को ई.एम.आई. का भुगतान देना था। विपक्षी द्वारा नामिक कब्जा सितम्बर 2047 में दिया गया और बादा किया गया कि परियोजना का ओ.सी /सी.सी. शीघ्र ही प्राप्त कर लिया जायेगा, किन्तु आज तक ओ.सी. /सी.सी प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरूद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी। rs में रसीदें शिकायतकर्तामम्म द्वारा अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि की # त्रिपक्षीय अनुबन्ध, सम्प्रवर्तक केता अनुबन्ध, बैंक के ऋण का विवरण, जमा धनराशि का विवरण, की छायाप्रतियां दाखिल की गयीं। we 2
विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त न होने के कारण जमा धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, किन्तु शिकायतकर्ता फ्लैट में सितम्बर 20:7 से रह रहा है। ई.एम.आई. का भुगतान जुलाई 2047 किया गया। विपक्षी द्वारा कहा गया है कि ई.एम.आई के प्रकरण के सम्बंध में रेरा संज्ञान नहीं ले सकता है और धारा 88 के अन्दर बाध्य है। यदि अनुबन्ध के कोई शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो इसका क्षेत्राधिकार एडज्यूडिकेटर को है। अनुबन्ध के अनुसार विलम्ब के लिए क्षतिपूर्ति दे दी जायेगी। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी और विपक्षी उसे अनुबंधित अवधि में यूनिट का कब्जा देने में असमर्थ रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 02.04.2049 को पीठ में सुनवाई के दौरान अवगत कराया गया है कि शिकायतकर्ता की यूनिट में किरायेदार रह रहा है। और ओ.सी. के लिए आवेदन किया जा चुका है ओ.सी. आते ही रजिस्ट्री कर दी जायेगी। सितम्बर 2049 तक कब्जा दे देगें। शिकायतकर्ता शिकायत को दृष्टिगत रखते हुए निम्न बिन्दु विचारणीय है :- 4. क्या शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाया वापस दिलाया जाये ? 2. क्या विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में सबवेंशन स्कीम होने के बावजूद भी ई.एम.आई. का भुगतान नहीं किया गया ? 3... क्या इस पीठ को सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार नहीं है ? 4... विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये। निस्तारण बिन्दु सं0 4
शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 0.0.206 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु बिना ओ.सी/सी.सी. के नामिक कब्जा सितम्बर 20:7 को दिया गया है। परियोजना की ओ.सी /सी.सी. प्राप्त नहीं हुई है जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि परियोजना पूर्ण है और ओ.सी. के लिए आवेदन किया जा चुका है और अनुबन्ध के अनुसार विलम्ब के लिए धनराशि अदा कर दी जायेगी। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील सं0 74/207 चित्रा शर्मा आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदि में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है :- We पट " 40. The figures........ which have been made available presently, following the opening of the web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
इस स्टेज पर रियल wee सेक्टर की वर्तमान वित्तीय स्थिति को gerd रखते हुए धनराशि वापस किये जाने से उन आवंटियों क॑ हित प्रतिकूलतः प्रभावित होने संभावित है, जो कि यूनिट का कब्जा लेना चाहते हैं। विपक्षी दिनांक 02.04.2049 को पीठ की सुनवाई के दौरान कहा गया है कि ओ.सी. का आवेदन किया जा चुका है और ओ.सी. आते ही रजिस्ट्री कर दी जायेगी और सितम्बर 2049 तक पूर्ण रूप से कब्जा दे दिया जायेगा। ऐसे में यदि शिकायतकर्ता को विलम्ब के लिए धनराशि,ब्याज के साथ कब्जा मिल जाता है तो इससे सभी आवंटियों के हित urea हो सकेंगें। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित उक्त के अधीन शिकायतकर्ता को धनवापसी किया जाना उचित प्रतीत नही होता है। तदनुसार बिन्दु vo 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2
शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि उनके द्वारा सबवेंशन प्लॉन के तहत फ्लैट को कय किया गया जिसमें की बिल्डर द्वारा कब्जा की तिथि तक ई.एम.आई. का भुगतान करना था, किन्तु नहीं किया गया। जिसपर विपक्षी द्वारा कहा गया है कि ई. एम.आई जुलाई 2047 तक दी गयी है और शिकायतकर्ता फ्लैट में सितम्बर 207 रह रहे है। चूंकि शिकायतकर्ता को कब्जा सितम्बर 2047 में बिना अधिभोग प्रमाण पत्र के दिया गया है ऐसी दशा में कब्जा वैधानिक नहीं माना जायेगा। विपक्षी ओ.सी./सी. सी. प्राप्त करने के उपरान्त ही कब्जा पत्र जारी करने का हकदार है। पत्रावली पर उपस्थित MOU दिनांक 44.06.2044 से विदित है कि बैंक से प्राप्त की गयी धनराशि का ब्याज विपक्षी द्वारा कब्जे पत्र की तिथि तक की जायेगी। जिसमें की विपक्षी द्वारा सहमति दी गयी है और पक्षकारों के हस्ताक्षर है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि रेरा के गठन का मूल उददेश्य से गृहकेताओं के हितों को दृष्टिगत रखते हुए रियल wee सैक्टर का विकास करना है। ऐसी परिस्थितियों में पीठ को दोनो पक्षों के आर्थिक हितों को दृष्टिगत रखते हुए सामंजस्य स्थापित करना है। ऐसी दशा में चूंकि विपक्षी परियोजना पूर्ण है और ऐसी स्थिति में यदि वह धनराशि को परियोजना से पा निकालता है, तो इससे अनेको ऐसे गृहकेताओं के हित प्रभावित होना अधिसंभावित हैं, जो अपने घरों के लिए प्रतीक्षारत हैं, किन्तु अनुबन्ध के विपरीत यदि गृहकेताओं द्वारा यदि ई.एम.आई. का भुगतान किया जा रहा है, तो शिकायतकर्ता इसका लाभ पाने का अधिकारी है। शिकायतकर्ता को उसके द्वारा भुगतान की जा रही ई.एम.आई. का लाभ अंतिम भुगतान में समायोजित कर दिया जाये। तदनुसार बिन्दु vo 2 Frente किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0 3
विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र के प्रस्तर 5 में कहा गया है कि यदि अनुबन्ध का उल्लंघन किया जाता है तो उस सम्बंध में सुनवाई का क्षेत्राधिकार धारा 74 के अर्न्तगत एडज्यूडिकेंटिग अथॉरिटी को है न की रेरा पीठ को। इस सम्बंध में रेरा अधिनियम की धारा 7१ में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि-: (4) For the purpose of adjudging compensation under sections 2, 44, 48 and section 9, the Authority shall appoint in consultation with the appropriate Government one or more judicial officer as deemed necessary, who is or has been a District Judge to be an adjudicating officer for holding an inquiry in the prescribed manner, after giving any person concerned a reasonable opportunity of being heard: Provided that any person whose complaint in respect of matters covered under sections 2, 4, 8 and section 49 is pending before the Consumer Disputes Redressal Forum or the Consumer Disputes Redressal Commission or the National Consumer Redressal Commission, established under section 9 of the Consumer Protection Act, 986, on or before the commencement of this Act, he may, with the permission of such Forum or Commission, as the case may be, withdraw the complaint pending before it and file an application before the adjudicating officer under this Act.
(2) The application for adjudging compensation under sub-section (4), shall be dealt with by the adjudicating officer as expeditiously as possible and dispose of the same within a period of sixty days from the date of receipt of the application: Provided that where any such application could not be disposed of within the said period of sixty days, the adjudicating officer shall record his reasons in writing for not disposing of the application within that period. (3) While holding an inquiry the adjudicating officer shall have power to summon and enforce the attendance of any person acquainted with the facts and circumstances of the case to give evidence or to produce any document which in the opinion of the adjudicating है officer, may be useful for or relevant to the subject matter of the inquiry and if, on such inquiry, he is satisfied that the person has failed to comply with the provisions of any of the sections specified in sub-section (4), he may direct to pay such compensation or interest, as the case any be, as he thinks fit in accordance with the provisions of any of those sections.
उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार एडज्यूडिकेंटिग ऑफिसर सरकार द्वारा नामित किया जा सकता & जो कि क्षतिपूर्ति (Compensation) हेतु प्रकरण आये को तय करेंगें। धारा 74 afegft प्राप्त किये जाने से सम्बंधित है न कि शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि दिलाये जाने और उसके अन्य समस्याओं हेतु। अतः विपक्षी का यह तर्क बलहीन है कि उपरोक्त शिकायत एडज्यूडिकेंटिग अथॉरिटी के क्षेत्राधिकार में है। तदनुसार बिन्दु vo 3 Prana किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 4 शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना 20.:0.20I6 तक पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी को अभी तक ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से कहा गया है कि वह अनुबन्ध के अनुसार शिकायतकर्ता को धनराशि देने को तैयार है। पत्रावली पर उपस्थित सम्प्रवतक केता अनुबन्ध दिनांक 40.05.2044 के प्रस्तर 48 (ए) के अनुसार 24 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ अनुबन्ध निष्पादित की तिथि के उपरान्त फ्लैट को पूर्ण करना था। जिसके अनुसार फ्लैट को पूर्ण करने की तिथि t0 नवम्बर 2006 होती है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 40.44.2046 से ओ.सी.,/सी.सी. सहित कब्जा दिये जाने तक की अवधि पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारितं किया गया है कि :-
Section 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest Qe is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. aa: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vouo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि veri के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को vat अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि — For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. | have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह wre है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 4.5.206 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध ee निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें We 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर offi) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक किस अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,/2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not ही 8 to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तदनुसार बिन्दु vio 4 Frente किया जाता है। तदनुसार शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र निस्तारित किया जाता है । 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह ओ.सी./सी.सी.सहित सितम्बर 2049 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और नियमानुसार स्टाम्पशुल्क प्राप्त कर पंजीकरण कराये। 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता नवम्बर 206 से ओ.सी.//सी.सी. सहित की तिथि तक, MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये।
3. विपक्षी, शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान में जमा की जाने वाली ई.एम.आई.की धनराशि को अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित किया जाये। 4. यदि विपक्षी सितम्बर 209 तक शिकायतकर्ता को कब्जा देने में असफल रहता है, तो सितम्बर 2049 के पश्चात 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि MCLRH प्रतिशत की दर से जमा करने की तिथि से भुगतान करने की तिथि तक मय ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। इस फ्लैट के लिए बैंक से लिये गये ऋण का भुगतान ब्याज सहित पहले किया जाये और शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस की जाये। 5. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20I6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। हु Kaa (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण