Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Prashant Jagwani v. Logix Infrastructure Pvt.ltd
Complaint No. 2201931471
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2019-07-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Hearing Bench-04A Shri Rajeev Kumar, Chairman Complaint No.: 220937474 Prashant Jagwani versus M/s Logix Infrastructures Pvt. Ltd. The present complaint application has been instituted by the Complainant against the Respondent, seeking possession and interest for the period of delay. In brief, the Complainant's statement is that she booked flat J-096 [?] in the Respondent's project Blossom County Phase-3. On the basis of "fail" [?], she has paid from time to time a total of Rs. 45,93,420,/-. The Respondent was to give possession to the Complainant by 26.06.2042, but has not given possession till now. The Complainant has therefore requested possession and interest for the period of delay. In support of her statement, the Complainant has filed the details of the amount deposited, the flat buyer agreement, the loan letter, and photocopies of e-mails.
The Respondent, filing its written statement, has said that the Complainant has filed the suit by misusing the law. Tower-N is nearly complete, and an application for the Occupancy Certificate has already been made to the Noida Development Authority. The Complainant has not paid according to the payment plan on time, and Rs. 7,97,944/- remains outstanding from her. The Respondent says that the project was delayed due to force majeure, which had been mentioned earlier in clause 6.2 of the agreement and to which the parties had agreed. An agreement has been reached between Logix Group and ATS Group to complete the project, due to which work on the project is going on at a rapid pace. In support of its statement, the Respondent has filed photographs of the project's tower and photocopies of the statement of the Complainant's dues. Both parties were heard and the file was perused. On the basis of the parties' pleadings, the following issues were framed:- 4... Is the Complainant's allotted unit J-096? 2. Whether the delay in the project shall be calculated on the basis of the dates given at the time of registration with RERA? 3. Whether, on the ground that the building is being given at the earlier rate, no interest etc. shall be payable, as determined in Bangalore Development Authority versus Syndicate Bank (2007CTS) (CP)? 4. Was the Respondent's project delayed due to force majeure? If so, what is the effect?
है ॥ उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-04ए श्री राजीव कुमार,अध्यक्ष शिकायत संख्या : 220937474 प्रशान्त जगवानी बनाम मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायततकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्ब अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Blossom County Phase-3 4 फ्लैट Jo जे-096 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर fail के आधार पर 45,93,420,/- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा दिनांक 26.06.2042 तक दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया, अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्ब अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में जमा धनराशि का विवरण, फ्लैट केता अनुबन्ध, ऋण पत्र, ई-मेल की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते- हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए वाद योजित किया गया है। टॉवर-एन लगभग पूर्ण है और ओ.सी हेतु नोएडा विकास प्राधिकरण को आवेदन किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार भुगतान नहीं किया गया है और उन पर 7,97,944/-रूपये की देय धनराशि बाकी है। विपक्षी का कहना है कि परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई जो कि पूर्व में अनुबन्ध के WAR 6. 2 में उललखित था और पक्षकरों द्वारा सहमति दी गयीं। लॉजिक्स ग्रुप एवं ए.टी.एस ग्रुप के मध्य परियोजना को पूर्ण करने हेतु समझौता हुआ है। जिस कारण परियोजना में तीव्र गति से काम चल रहा है। 2 विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में परियोजना के टॉवर के फोटो, शिकायतकर्ता की देय धनराशि का विवरण की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4... क्या शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट जे-096 है ? 2. क्या रेरा में रजिस्ट्रेशन के समय दी गयी तिथियों के आधार पर a परियोजना के विलम्ब की गणना होगी ? 3. क्या पूर्व दर पर भवन देने के आधार पर कोई ब्याज आदि देय नहीं होगा जैसा कि बैगंलौर डवलपमेन्ट अथारिटी बनाम सिंडीकेट बैंक (2007CTS) (CP) में अवधारित है ? 4. क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 5. क्या विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? निस्तारण बिन्दु to 4 शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत में यूनिट जे-096 अंकित किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र के we 6 में कहा गया है कि शिकायतकर्ता
द्वारा टॉवर-एन के सप्तम तल पर यूनिट सं०-704 कय किया गया है। जिसका फ्लैट dat अनुबन्ध दिनांक 40.06.200 को जारी किया गया। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि फ्लैट केता अनुबन्ध दिनांक t0.06.20:0 को निष्पादित किया गया जिसके प्रस्तर सी में यूनिट सं० 704 टॉवर एन में आवंटन किया गया है। जिसका सुपर एरिया t675 है। ऐसे में शिकायतकर्ता की यूनिट एन-704 मानी जायेगी। तद्नुसार बिन्दु Wo-7 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2 बिन्दु संख्या 2 इस तथ्य पर विचरित है क्या रेरा में रजिस्ट्रेशन के समय दी गयी तिथियों के आधार पर ही परियोजना के विलम्ब की गणना होगी ? इस सम्बंध में मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737 /20॥7 नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया a दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है। जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है fe The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)0)(0) he is not absolved of the liability under the agreement for sale.
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधान के अनुसार अनुबन्ध में दिये गये पूर्णता एवं कब्जे देने के प्रस्तर का पुनर्लेखन नहीं किया जा सकता। धारा 4(2)0)(सी) के अन्तर्गत प्रोमोटर एक नई समय सीमा दे सकता है, जो कि अनुबन्ध पर निर्भर नहीं होगा और उक्त धारा रेरा में दिये गये प्राविधान के परिणाम स्वरूप केवल अर्थदंड से बचाया जा सकता है। अतः इससे अवधारित किया जाता है कि प्रोमोटर अनुबन्ध में दिये गये कब्जे की तिथि के लिए उत्तरदायित्व है एवं विलम्ब की गणना अनुबन्ध के अनुसार की जायेगी। तद्नुसार बिन्दु संख्या 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु do 3 विपक्षी की ओर से यह भी कथन किया गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कुछ सिद्धान्त विनियमित किये गये है जिससे की आवेदक को राहत के रूप में विलम्ब से कब्जे मिलने एवं न मिलने के सम्बंध में निर्णय दिया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में बैंगलोर डेवलेपमेन्ट एथारिटी बनाम सिंडीकेट बैंक 2007 सी.टी.जे. 689 (एस.सी.) प्रस्तुत किया गया है, जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " Where an alternative site is offered or delivered (at the agreed price) in view of its inability to deliver the earlier allotted plot/flat/house, or where the delay in delivering possession of the allotted plot/flat/house is for justifiable reasons, ordinarily the allottee will not be entitled to any interest or compensation. This is because the buyer has the benefit of appreciation in value. " OY 4
उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि आवंटी को अन्य कोई विकल्प दिया जाता है जो कि किसी कारण वश न्यायोचित है। तो वह अन्य किसी ब्याज अथवा क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नहीं है। इस निर्णय की मूल अवधारणा है कि इस अवधि में सम्पत्ति के मूल्य में अभिवृद्धि हुई है जिसका लाभ केता को प्राप्त हुआ होगा। यह निर्णय रेरा अधिनियम के लागू होने से पूर्व का है एवं रेरा की धारा ia S प्राविधान स्पष्ट है। वैसे भी विगत वर्षों में रियल स्टेट की स्थिति देखते हुए प्रत्येक मामले में ऐसा अवधारित नहीं किया जा सकता कि प्रोपर्टी की दरों में अभिवृद्धि हुई होगी ऐसी दशा में तथ्यों एवं परिस्थितियों की भिन्नता के कारण उपरोक्त विधि व्यवस्था प्रश्नगत प्रकरण पर लागू नहीं होती है। तद्नुसार बिन्दु wo 3 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 4 बिन्दु wo 4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक स्थगन आदेश, निर्णय व Rat से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, जिसके सम्बंध में विपक्षी द्वारा अपने अनुबन्ध के प्रस्तर 6.2 में उल्लेख किया गया है, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा भी हस्ताक्षरित किया गया था, विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन स्पेसिफिक फोर्स मैज्योर स्थितियों के कारण उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही किसी फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नही है। तदनुसार बिन्दु to 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 5 बिन्दु Wo 5 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। X शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है, जिस कारण वह शीघ्र कब्जा एवं विलंब अवधि का ब्याज चाहता है। जिस पर विपक्षी की ओर से कहा गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण को cee एन हेतु ओ.सी का आवेदन किया जा चुका है। जिसके शीघ्र मिलने की सम्भावना है।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 43.06.2049 को पीठ में सुनवाई के दौरान दिसम्बर 2049 में कब्जे दिये जाने की बात कही गयी। यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित करने से ist6 माह (ग्रेस पीरियड) में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक t0.0620I0 को निष्पादित किया गया है एवं अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी को 40.06.2042 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नही दिया गया है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को अनुबंधित अवधि के पश्चात शिकायतकर्ता को ओ.सी.,/ सी.सी. तक की अवधि पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay oY interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के TER 6.6 के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से धनराशि का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता धनराशि पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त धनराशि अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि —
For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. | have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 64, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 04.05.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 04.05.2046 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। कि) जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:-
The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oii) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देयं धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक किस अवधि तक ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील wo 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " Ds 8 उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी et) तदनुसार बिन्दु to 5 Peake किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि आदेश अपलोड होने के 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता की सहमति से पूर्व में आवंटित समकक्ष क्षेत्रफल की इकाई के पूर्व में तय दरों के अनुसार अपने किसी अन्य पूर्ण टॉवर में ओ. G/M सहित कब्जा दें अन्यथा टॉवर एन में आवंटित फ्लैट का कब्जा सम्बंधित प्राधिकरण से ओ.सी /सी.सी सहित प्राप्त कर दिनांक 3.42.209 से पूर्व देना सुनिश्चित करें।
2... विपक्षी दिनांक 0.0620:2 से दिनांक 304.20I6 तक 5/- रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 04.05.206 से ओ.सी./ सी.सी. सहित कब्जा पत्र जारी करने की तिथि तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी। 3, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 206 के धारा 2 (००) के अन्तर्गत परिभाषित किया गया है कि यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। 4. इस आदेश का उल्लघंन उ0फप्र०भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। aa a iy) (राजीव GAR) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण