Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deeraj Koul v. Patel Advance Jv S-406 L.G
Complaint No. 2201931154
- Decision date
- 2019-11-29
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
! somo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। पीठ-4 श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत संख्या-2204934454 धीरज कौल बनाम मैसर्स पटेल एडवांस जे.वी प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्र उनके द्वारा बुक की गयी यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना NEOTOWN PHASE-I के ब्लॉक-डी3 में फ्लैट संख्या-605 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 2,77,778,/- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा विलम्ब के लिए अर्थदंड न दिये जाने के कारण भुगतान प्राप्त करने से मना कर दिया गया। उनके द्वारा एकतर्फा निरस्तीकरण पत्र भेज दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्र उनके द्वारा बुक की गयी यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवेदन फार्म, आवंटन पत्र, फ्लैट dar अनुबन्ध मांग पत्र, ई-मेल, जमा धनराशि की WAS आदि की छायाप्रतियां द।खिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा फ्लेक्सी wre प्लॉन के अन्तर्गत 45 दिनों में धनराशि अदा की जानी थी। यूनिट का क्षेत्रफल 4500 वर्ग फूट से 4600 वर्ग फूट की बढ़ोत्तरी पर शिकायतकर्ता की सहमति ली गयी, किन्तु उनके द्वारा समय से भुगतान नहीं किया गया। मांग पत्र दिनांक 05.04.2044 को जारी किया गया। इसी कम में विभिन्न मांग दिनांक 07.03. 2043, दिनांक 24.04.2044 को किये गये। फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि अदा 2
नहीं की गयी। लीगल नोटिस दिनांक 45.07.2074 को शिकायतकर्ता को प्रेषित करते हुए उनकी यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि अदा किये जाने हेतु सूचित किया गया था। फिर भी भुगतान न किये जाने के कारण दिनांक 27.05.2046 को शिकायतकर्ता की बुकिंग निरस्त करते हुए चैक रूपये 2,77,778 /- रूपये वापस कर दी गयी थी और उनकी यूनिट निरस्त हो चुकी है। दिनांक 29.04.209 को शिकायतकर्ता को पुनः अपनी जमा धनराशि प्राप्त करने हेतु सूचित किया गया om शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया और समय से भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में मांग पत्रों, लीगल नोटिस दिनाक 43.44.2044, चैक दिनांक 05.05.206 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया | पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- 4... क्या शिकायतकर्ता का फ्लैट पुर्नजीवित किए जाने योग्य है व क्या उन्हें कब्जा दिलाया जाये ? निस्तारण बिन्दु to 4 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी एकत्रफा यूनिट का निरस्तीकरण कर दिया गया और उनके द्वारा दी जा रही धनराशि पर विपक्षी द्वारा अर्थदंड की मांग की जा रही है। विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा समय से भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण उनके यूनिट का निरस्तीकरण कर दिया गया और शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि का चैक दिये जाने पर शिकायतकर्ता द्वारा नहीं लिया जा रहा है।
पत्रावली पर दाखिल पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा बुकिंग के समय to प्रतिशत धनराशि और शेष 30 प्रतिशत धनराशि 45 दिनों में अदा की जानी थी, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट wit के अनुसार भुगतान नहीं किया गया है। यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा dre प्लॉन के कम में कई अनुस्मारक पत्र एवं मांग पत्र शिकायतकर्ता को भेजे गये, जिस पर उनके द्वारा dre प्लॉन के अनुसार भुगतान नहीं किया गया। अन्ततः विपक्षी द्वारा दिनांक 44.052046 को निरस्तीकरण कर दिया गया और धीरज ale के नाम रूप 2,77,778 /- रूपये का चैक दिनांक 05.05.206 चैक WeAT-00287, एच.डी. एफ.सी बैंक, शिकायतकर्ता को भेजा गया। शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। यह भी स्पष्ट है कि भुगतान किये जाने में विलम्ब शिकायतकर्ता 2६ 3 की ओर से किया गया है। पत्रावली पर दाखिल फ्लैट अनुबन्ध दिनांक 09.04. 2044 के अवलोकन से विदित है कि अनुबन्ध निष्पादन की तिथि से 24 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था, जिसके अनुसार कब्जे की तिथि 09.0.2043 होती है। स्पष्ट है कि परियोजना भी विलम्बित है।
शिकायतकर्ता द्वारा समय से विपक्षी को भुगतान न किये जाने पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी Mcie+i प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विपक्षी शेष धनराशि पाने का अधिकारी है। यदि शिकायतकर्ता इससे सहमत नहीं है, तो वह अपनी जमा धनराशि विपक्षी से प्राप्त कर सकते है। चूंकि शिकायततकर्ता द्वारा यूनिट के कब्जे का अनुतोष चाहा गया है। अतः न्यायहित में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता आवंटन पत्र/पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार यूनिट की कुल अवशेष धनराशि पर विलम्ब के लिए McLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर विपक्षी को धनराशि अदा कर कब्जा प्राप्त करें। असहमति की स्थिति पर शिकायतकर्ता अपनी जमा धनराशि विपक्षी से प्राप्त wt) तद्नुसार बिन्दु dean निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह oo दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की मूल यूनिट उपलब्ध न होने की दशा में परियोजना में समकक्ष इकाई का वैकल्पिक यूनिट पूर्व में तय दरों पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें | 2... शिकायतकर्ता को आदेशित किया जाता है कि वह विपक्षी को 60 दिनों के अन्दर We cia के अनुसार अवशेष धनराशि, मय धटा॥एक] प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। 3. यदि शिकायतकर्ता कब्जा लेने में इच्छुक नहीं है, तो विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वे 277778/— रूपये 60 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता को, धनराशि देने की तिथि से दिनांक 05.05.2046 तक (जब धनराशि चैक द्वारा भेजी गयी थी) MCLRH प्रतिशत की वार्षिक साधारण ब्याज सहित वापिस अदा करें। 2
4. इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक28/ | | /2009 च्ज् 9.५२... | Xe ey (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण