Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Yash Khanduri v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. 220187181
- Decision date
- 2019-03-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
7 somo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या : 22087784 यश Get, निवासी फ्लैट so 63, ज्योति अपार्टमेन्ट, परवाना रोड, पीतमपुरा, दिल्ली | शिकायतकर्ता बनाम मैसर्स उप्पल चढढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड, सी-493, सैक्टर-44, नोएडा, उत्तर प्रदेश, अन्य पता 24, ओक Bisa, छतरपुर फार्म, नई दिल्ली। 44.02.2049 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध विलंबित अवधि की क्षतिपूर्ति मय ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षिप्त में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Greenwood Enclave में फ्लैट संख्या 927, प्रथम तल (4340 वर्ग फीट) 37.0.205 4 बुक कराया था जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर किस्तों के आधार पर 28,46,954,/- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा आज तक नही दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरूद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि परियोजना रेरा के अन्तर्गत पंजीकृत है और रेरा में परियोजना की पूर्णता का वर्ष 2024 दिया गया है, जिसके अन्तर्गत परियोजना को पूर्ण कर लिया जायेगा, जिसके पश्चात ही विपक्षी के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जानी उचित है, रेरा के प्रवर्तन में आने से पूर्व किये गये किसी वाद की \ जा न््अे Scanned by CamScanner
सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेरा के अन्तर्गत नही है। परियोजना के विलंब का ~ कारण अधिग्रहण के विरूद्ध किसानों द्वारा किया गया धरना प्रदर्शन है, जिस कारण परियोजना विलंबित हुई | उभयपक्ष के तर्को को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक किया गया, किन्तु विपक्षी द्वाव आज तक कब्जा नही दिया गया है। अतः अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने के पश्चात कब्जा दिलाये जाने को अनुरोध किया गया है। प्रस्तुत प्रकरण में दोनों पक्षों के बीच कोई एग्रीमेन्ट हस्ताक्षरित नहीं है, किन्तु विपक्षी भी इस बात से सहमत है कि प्रश्नगत परियोजना विलम्बित है। विधिक रूप से विपक्षी द्वारा रेरा अधिनियम का पूर्वगामी प्रभाव न होने की बात कही गई है। यह बात उनके द्वारा उद्धरत नीलकमल रिएल्टर सबअर्बन (प्रा)) लिमिटिड बनाम यूनियन आफ इण्डिया में अवधारित है कि रेरा अधिनियम यद्यपि पूर्वगामी नहीं है तथा इसका प्रभाव ” रेट्रोएक्टिव” होगा,यदि “ore ऑफ एक्शन” रेरा लागू होने के बाद भी “सरवाइव” करता है। एग्रीमेन्ट के अभाव में “आरविट्रेशन” के विकल्प सम्बंधी विधि आपत्ति वैसे भी ग्राहय नहीं है। तथापि बाद में अधिनियम लागू होने के कारण रेरा के प्राविधान लागू होंगे। विपक्षी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 20 प्रतिशत धनराशि भी नहीं दी है एवं उक्त परियोजना रेरा को घेषित वर्ष 2024 की समय सीमा में पूरी कर ली जायेगी।
विपक्षी का यह कहना ग्राहय नहीं है कि प्रस्तुत प्रकरण रेरा की परिधि में नहीं आता क्योंकि यह उ0प्र0 में रेरा के पूर्णरूप से कार्यरत होने से पूर्व का है। स्पष्टतया परियोजना रेरा में पंजीकृत है। अतः रेरा के नियम आदि इस पर लागू होंगे। उल्लेखनीय है कि परियोजना वर्ष 2074 में लांच की गयी थी, जिससे स्पष्ट है कि परियोजना काफी लंबे समय से लंबित है और अभी भी विपक्षी की ओर से परियोजना की पूर्णता की वर्ष 2024 दी गयी है, किन्तु इस तिथि की पुष्टि किसी शपथपत्र द्वारा नही की गयी है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता द्वारा यदि अपनी जमा धनराशि की मांग की जा रही है, तो यह विधिसंगत प्रतीत होती है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स waarda प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में याचीगण की ओर से यह तर्क लिया गया था कि :- Section 4(2)()(c) enables the promoter to revise the date of completion of project and hand over possession. The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(4)(c) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with Scanned by CamScanner penal consequences laid down under RERA. In othe words, by giving opertunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)()(¢), he is not absolved of the liability under the agreement for sale.
Section 8(/)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. पत्रावली पर यह स्पष्ट है कि चार वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई बिल्डर बायर wire विपक्षी द्वारा नहीं दिया गया है। इसके विपरीत कोई तथ्य पत्रावली पर नहीं है। यद्यपि यह स्पष्ट है कि प्रस्तुत प्रकरण में कोई एग्रीमेन्ट नहीं है। तदनुसार शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र स्वीकार किये जाने योग्य है। विपक्षी कंपनी को आदेशित किया जाता है कि वे आवश्यक रूप से अधिभोग प्रमाण सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें।
इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र०भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। * 2... Q, + TL (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण. उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक Scanned by CamScanner