Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Neha Jain v. Svp Builders India Limited
Complaint No. 1201929952
- Decision date
- 2019-10-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमब्ुद्धनगर। - सुनवाई te—04 श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष क0 सं0 शिकायत to =| शिकायतकर्तागण् ] 720484060 शोक अग्रवाल 2 4204929937 विरेन्द्र कुमार जैन 3 4204929952 नेहा जैन 4 4220826958 | शरद टण्डन बनाम एस.वी.पी. बिल्डर्स इंडिया लिमिटेड, शिकायतकर्ता आशोक अग्रवाल के साथ 03 अन्य शिकातयकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें GULMOHUR RESIDENCY (OLIVE TOWER,ORANGE) GHAZIABAD से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo-7207874060 आशोक अग्रवाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा दिलाये जाने एवं रजिस्ट्री दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना GULMOHUR RESIDENCY, OLIVE TOWER में फ्लैट Ho 503 बुक कराया गया और समय समय पर किस्तों के आधार पर अंकन 3367732 /— रूपये की धनराशि भी अदा की गयी। विप्रक्षी द्वारा दिनांक 30.05.20i5 तक्र कब्जा दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही द्विया गया और परियोजना काफी विलंबित है, अब विपक्षी द्वारा कुछ अन्य मदों के अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा व रजिस्ट्री कराये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्तागण' द्वारा अपने कथन के समर्थन में, अनुबन्ध की छायाप्रति आवंटन पत्र की छायाप्रति नो डयूज प्रमाण पत्र, भुगतान की रसीद व ई-मेल्स की छायाप्रतियां प्रस्तुत किये गये।
. विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के साथ वाद योजित किया गया है। कंपनी की - 2 - पॉलिसी के अनुसार विलंब धनराशि पंजीयन के समय समायोजित की जाती है। अनुबन्ध के अनुसार समस्त धनराशि की अदायगी समय से की जायेगी। शिकायतकर्ता को कई बार स्मृति पत्र जारी किया जा चुका है, किन्तु शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान He कब्जा नही लिया गया। उक्त परियोजना में 300 से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं। शिकायतकर्ता की 50 प्रतिशत धनराशि बकाया है, जो कि उसके द्वारा अदा नही की जा रही है | शिकायतकर्ता बकाया भुगतान कर कब्जा प्राप्त कर सकता है। > विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में फ्लैट बॉयर एग्रीमेन्ट खाता विवरण, पजेशन ऑफर, परियोजना व फ्लैट के फोटो, अधिभोग प्रमाण पत्र की प्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। * शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुकिंग करायी गयी और विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नही दिया गया, जबकि विपक्षी का कहना है कि परियोजना पूर्ण है और ओ.सी प्राप्त हो चुका है। शिकायतकर्तागण की ओर से मुख्य अनुतोष निम्नवत है :- 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलंबित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? - निस्तारण बिन्दु do 4 .
शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा जुलाई 205 तक कब्जा दिया जाना था, किन्तु आज तक कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता द्वारा बकाया धनराशि अदा नही की गयी, जिस कारण उसकी परियोजना विलंबित हुई, किन्तु अब ओ.सी. आ चुकी है और शिकायतकर्ता को पोजेशन ऑफर किया जा चुका है, किन्तु वह कब्जा नही ले रहा है | विपक्षी की ओर से अनुबन्ध की प्रति दाखिल की गयी है, जिसमें यूनिट का कब्जा अनुबंध की दिनांक से, उक्त अनुबन्ध दिनांक 30.5.203 को निष्पादित किया गया है, इस प्रकार कब्जा देने की विलंबतम तिथि 305.2045 थी, किन्तु विपक्षी को पूर्णता पत्र दिनाक 6. 7.2088 को प्राप्त हुआ है, जिस कारण शिकायतकर्ता उक्त अवधि पर अपनी जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है। pie nature. The penalty under Sections 8, 38, = 59, 60, 64, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively.” अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 4.5.206) से पूर्व, चूंकि पक्षकारों का अनुबन्ध प्रभावी है, जिस कारण अनुबन्ध के अनुसार क्षतिपूर्ति की जानी चाहिये और रेरा के आने के बाद रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। हु
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें were 9 (ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- “The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:” यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर oii) A निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MciRH प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी धटाए+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। हक - इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- 7
“Section 48(4)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest न is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money.” अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि -उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से क्षतिपूर्ति का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति' पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त क्षतिपूर्ति अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी है उसी दर से क्षतिपूर्ति देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी. अभिनिर्धारित किया गया है कि :- “For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. | have already indicated that the provisions of RERA are prospective in जहां तक ब्याज की अवधि का प्रश्न है, तो विपक्षी की ओर से कहा गया कि वह _़वम्बर 2049 तक कब्जा दे दिया जायेगा, इस सम्बंध में सिविल अपील सं0 6649-50 // 208 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
“The period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तदनुसार बिन्दु सं० 4 ema किया जाता है। - तदनुसार शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं। आदेश 4. विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अंदर देय स्टाम्प शुल्क जमा कराने के उपरान्त शिकायतकर्ता के पक्ष में रजिस्ट्री कराते हुए कब्जा देना सुनिश्चित करें| Nt
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह अनुबंधित अवधि 30.05.2045 से दिनाक 304.206 तक अवधि के लिए 5/- रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 45.20:6 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्ति की तिथि तक की विलंबित अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि,पर MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करना सुनिश्चित करें। यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायें। 6 3. यदि aed की ओर से कोई धनराशि बिल्डर को देय रहती है तो धारा 2 (za) (0) के प्राविधानों के अनुरूप बिल्डर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक्र ब्याज दर से ही ब्याज ले। 4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस ओदश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप जमा धनराशि एवं ब्याज गणना की जायेगी। इस आदेश का versa उ0प्र/भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक / / १ /2049 a 0.3८) — ह (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण