Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Aditya Jain v. Logix Infra Developers Pvt.ltd
Complaint No. 120185298
- Decision date
- 2018-02-24
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश नामित प्राधिकारी / उपाध्यक्ष हापुड़-पिलखुवा विकास प्राधिकरण, हापुड़ शिकायत संख्या:-420485298 श्री आदित्य जैन बनाम Ao लॉजिक्स इन्फाडेवलपर्स प्राएलि0 यह शिकायत श्री आदित्य जैन पुत्र डा0 अतुल जैन निवासी-47, लेखराम रोड, दरियागंज, दिल्ली द्वारा विपक्षी मै? लॉजिक्स इन्फाडेवलपर्स प्राएलिए0, ए-4 व 5, Vace-t6, नोएडा, गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश के विरुद्ध भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के समक्ष प्रस्तुत की गयी जो उपरोक्त प्रमोटर द्वारा भूखण्ड संख्या एससी-04, daer-50, नोएडा में विकसित की जा रही नियो वर्ल्ड परियोजना के सम्बन्ध में है। शिकायत आई0डी0 Weat—20:85298 पर पंजीकृत कर विपक्षी प्रमोटर्स को नोटिस जारी की गई। सुनवाई के दौरान उभय पक्ष उपस्थित हुए तथा मौखिक अभिकथन के साथ-साथ लिखित अभिकथन भी प्रस्तुत किये गये।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनके व उनकी पत्नी श्रीमती कोमल जैन द्वारा उपरोक्त परियोजना में एक फ्लैट संख्या बी--504 बुक किया गया था। उक्त फ्लैट के कुल मूल्य रूपये 49,40,8:6.00 के विरूद्ध अब तक उनके द्वारा अंकन रूपये 27,56,632.00 की धनराशि विपक्षी के पक्ष में भुगतान की जा चुकी है। विपक्षी द्वारा किये गये विभिन्न समाचार पत्रों में दिये गये विज्ञापनों के अनुसार उक्त भूखण्ड का कब्जा 30 माह अर्थात जून, 2074 तक दिया जाना था परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है बल्कि रेरा की वेबसाइट पर किये गये पंजीकरण के अनुसार कब्जा देने का समय वर्ष-2020 निर्धारित किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया कि विपक्षी प्रमोटर द्वारा उक्त फ्लैट का एग्रीमेंट अभी तक उनके पक्ष में निष्पादित नहीं किया गया है तथा उन्हें केवल पेमेंट शैड्यूल की प्रति मात्र ही दी गयी है जबकि उनके द्वारा कुल देय धनराशि की 43.64 प्रतिशत धनराशि (बेसिक कॉस्ट का 55.53 प्रतिशत) का भुगतान किया जा चुका है। परियोजना का कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण न होने के कारण उनके द्वारा अवशेष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। वर्तमान में विपक्षी द्वारा dat EER कम्प्लीट किया गया है परन्तु अवशेष लगभग 47 प्रतिशत धनराशि के भुगतान हेतु उन पर दबाव बनाया जा रहा है जबकि विपक्षी द्वारा कब्जा 03 तीन वर्ष बाद दिये जाने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य के रूप में दिनांकरहित पेमेंट शैड्यूल की छायाप्रति व परियोजना के संबंध में विपक्षी प्रमोटर द्वारा विभिन्न समाचार vat में दिये गये विज्ञापन कीं कटिंग की प्रतियाँ प्रस्तुत की गयीं। शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्था की गयी कि विपक्षी प्रमोटर को बिल्डर-बायर एग्रीमेंट निष्पादित कराने, अवशेष देय धनराशि का तर्कसंगत पेमेंट प्लॉन निर्धारित करने, शीघ्रातिशीघ्र कब्जा दिलाने, कब्जे की अवधि तक t8 प्रतिशत ब्याज तथा मानसिक उत्पीडन के लिए क्षतिपूर्ति दिलाने की प्रार्थना की गयी।
विपक्षी की ओर से दिनांक o202.20I8 को उनकी प्रतिनिधि सुश्री नेहा शर्मा द्वारा लिखित अभिकथन प्रस्तुत किया गया। लिखित अभिकथन में कहा गया है कि रेरा अधिनियम दिनांक or.05.20:7 से पूर्ण रूप से लागू हुआ है तथा यू0पी0 रेरा के विनियम दिनांक ot.08207 से लागू हुए हैं। अभिकथन में मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल रियलटर्स सबर्बन mofo बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य वादों में पारित आदेश दिनांक 06.:2.20I7 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि अधिनियम पश्चातवर्ती प्रभाव से लागू नहीं है बल्कि दिनांक 0t.05.20:7 के उपरान्त पंजीकृत होने वाली परियोजनाओं पर लागू है। अतः इस परियोजना पर उक्त अधिनियम प्रभावी नहीं है। इसके अतिरिक्त बंगलौर विकास प्राधिकरण बनाम सिंडीकेट बैंक, 200 सीटीजे 689 (एससी) (सीपी) में पारित मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि हस्तांतरण में विलम्ब होने पर वैकल्पिक भूखण्ड,/भवन का आवंटन किया जा सकता है तथा आवंटी ब्याज या क्षतिपूर्ति का हकदार नहीं है। अभिकथन में यह भी कहा गया कि अनेक परिस्थितियों यथा एन0जी0टी0 के प्रतिबन्धों, अधिग्रहण के संबंध में कृषकों द्वारा योजित वाद, धरना प्रदर्शन वित्तीय संसाधनों, श्रमिकों, पानी व ईट आदि की अनुपलब्ता, निर्माण सामग्री व मानव संसाधन vi में वृद्धि, आर्थिक मंदी आदि के कारण परियोजना पूर्ण a / < किये जाने में विलम्ब हुआ है जो प्रमोटर के नियंत्रण के बाहर है। आवंटी द्वारा उपरोक्त तथ्यों पर ध्यान न देते हुए प्रमोटर से अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए शिकायत की गयी है। यह भी कहा गया कि आवंटी को किसी
अन्य अधिकरण के समक्ष वाद,/शिकायत योजित करने से पूर्व आवंटी को आर्बिट्रेशन में जाना होगा। विपक्षी द्वारा मौखिक अभिकथन में यह भी कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट शैड्यूल के अनुसार देय धनराशि जमा नहीं करायी गयी है। अतः आवंटी की शिकायत पोषणीय न होने के कारण खारिज की जाये। उभय val द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों व अभिकथनों के आधार पर की गयी विवेचना के आधार पर प्रकरण के संबंध में मुख्य तथ्य निम्न प्रकार हैं- 4. भू-सम्पदा (विनियम और विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-3 के अनुसार अधिनियम के लागू होने की तिथि पर गतिमान परियोजनायें भी अधिनियम के प्राविधानों से आच्छादित हैं। यह परियोजना भी गतिमान परियोजना की श्रेणी में है, अतः विपक्षी का यह कथन सही नहीं है कि परियोजना अधिनियम से आच्छादित नहीं है। परियोजना के अधिनियम से आच्छादित होने के कारण इस प्राधिकरण को अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत इस प्रकरण के संबंध में निदेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है। विपक्षी प्रमोटर द्वारा Prat वर्ल्ड परियोजना में फ्लैट संख्या बी--50 के आवंटन हेतु श्री आदित्य जैन व श्रीमती कोमल जैन की बुकिंग स्वीकार की गयी है तथा बुकिंग के सापेक्ष प्रतिफल प्राप्त किया गया है।
: अधिनियम की धारा-430)) के अनुसार सम्प्रवर्तक, यथास्थिति, अपार्टमेंट, भूखण्ड या भवन की लागत के 0 प्रतिशत से अधिक राशि अग्रिम संदाय अथवा आवेदन फीस के रूप में किसी व्यक्ति से, उस व्यक्ति के साथ लिखित करार किये बिना, स्वीकार नहीं करेगा और उक्त विक॒य करार को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन रजिस्टर करेगा। विपक्षी प्रमोटर द्वारा आवंटीगण के पक्ष में कोई आवंटन पत्र जारी नहीं किया गया है तथा किसी प्रकार का कोई एग्रीमेंट या एमओयू भी निष्पादित नहीं किया गया है जबकि आवंटीगण से लगभग 44 प्रतिशत धनराशि प्राप्त की जा चुकी है। अतः प्रमोटर ET aTI-73(4 ) के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है। : विपक्षी द्वारा विभिन्न समाचार val में दिये गये विज्ञापनों के अनुसार परियोजना का कार्य परियोजना के लॉन्च होने से 30 माह की अवधि में पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत अभिकथन के अनुसार परियोजना दिसम्बर, 204 में लॉन्च की गयी है तथा कब्जा दिसम्बर, 2004 तक दिया जाना था। विपक्षी प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता के उक्त कथन का खंण्डन नहीं किया गया है बल्कि अपने अभिकथन में स्वयं स्वीकार किया गया है कि परियोजना विलम्बित है। प्रमोटर द्वारा निर्धारित अवधि में परियोजना पूर्ण नहीं की गयी है तथा कब्जा हस्तांतरित नहीं किया गया है। इस प्रकार विपक्षी प्रमोटर द्वारा अधिनियम के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है। भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-8 के अनुसार यदि सम्प्रवर्तक किसी अपार्टमेंट, भूखण्ड या भवन को पूरा करने में असफल रहता है या उसका कब्जा देने में असमर्थ रहता है तो वह आवंटी
की मांग पर यथास्थिति, उस अपार्टमेंट, भूखण्ड या भवन के संबंध में उसके द्वारा प्राप्त रकम को ऐसी दर पर ब्याज सहित, जो इस निमित्त विहित की जाये, इस अधिनियम के अधीन यथा-उपबंधित रीति में प्रतिकर लौटाने का दायी होगा। यदि आवंटी जमा धनराशि की वापसी नहीं चाहता है तो सम्प्रवर्तक द्वारा उसे कब्जा git जाने तक विलम्ब के प्रत्येक मास के लिए उस पर. जो विहित की जाये, ब्याज का संदाय किया जायेगा। यदि सम्प्रवर्तत इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों या विकय करार के अधीन उस पर अधिरोपित Peet अन्य बाध्यताओं का निवर्हन करने में असफल रहता है तो वह आवंटियों को प्रतिकर का इस अधिनियम के अधीन यथा-उपबन्धित रीति में संदाय करने के लिए उत्तरदायी होगा। उपरोक्त आधार पर प्रमोटर आवंटी को जमा धनराशि पर जमा के दिनांक से ब्याज तथा प्रतिपूर्ति के भुगतान हेतु दायी है। अतः अधिनियम की धारा-आ में दी गयी शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रमोटर को gRta() के अनुसार आवंटी के पक्ष में एग्रीमेंट Penta करने, परियोजना की प्रगति के अनुसार पेमेंट wit को रिशैड्यूल करने, IRH-8 के अनुसार कब्जा दिलाने एवं कब्जे में विलम्ब की अवधि के लिए आवंटी को ब्याज तथा प्रतिपूर्ति की धनराशि अदा करने के आदेश पारित किया जाना न्यायोचित है। Wa NN wo > a hoz) = आदेश
शिकायतकर्ता की प्रार्थना आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है तथा विपक्षी प्रमोटर मै0 लॉजिक्स इन्फाडेवलपर्स mofo को आदेशित किया जाता है कि वह आवंटीगण श्री आदित्य जैन व श्रीमती कोमल जैन को फ्लैट संख्या बी-4-504 के विरूद्ध 4. यथास्थिति बिल्डर-बायर एग्रीमेंट/एमओयू का तत्काल निष्पादन करे, 2. परियोजना की प्रगति के अनुसार पेमेंट प्लॉन को रिशैड्यूल करे तथा शीघ्रातिशीघ्र परियोजना पूर्ण कर कब्जा हस्तांतरित करे। कब्जा दिये जाने तक vad फ्लैट के विरूद्ध अब तक जमा की गयी धनराशि पर दिनांक 04.0.20i5 से कब्जे के दिनांक तक ॥8 प्रतिशत वार्षिक की दर से देय ब्याज की धनराशि का भुगतान किया जाये। इसके अतिरिक्त परियोजना पूर्ण न करने के कारण हुए मानसिक उत्पीडन व अन्य समस्याओं की प्रतिपूर्ति हेतु आवंटीगण को अंकन रूपये 4,00,00000 (चार लाख रूपये मात्र) का भुगतान भी इस आदेश के दिनांक से 45 दिन की अवधि में किया जाये | इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-206 की धारा-63 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा तथा देय धनराशि की वसूली धारा-40 की उपधारा-(।) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, शोध रकम की वसूली, स्थानीय विधि में विहित रीति में, भू-राजस्व के बकाया के तौर पर की जायेगी। विपक्षी प्रमोटर द्वारा इस आदेश का अनुपालन न किये जाने की दशा में शिकायतकर्ता/आवंटी को यह अधिकार होगा कि वह उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के माध्यम से उक्त आदेश का कार्यान्वयन कराने की कार्यवाही कर सकता है। यह आदेश आज दिनांक 24.02.208 को हस्ताक्षरित तथा उद्घोषित किया गया। दिनांक:- 24.02.208 De Gates; (गया प्रसाद) नामित प्राधिकारी / उपाध्यक्ष