Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pankaj Malik v. Emm Vee Infrastructures (India) Private Limited
Complaint No. 11201823620
- Decision date
- 2019-07-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-04, श्री राजीव कुमार,अध्यक्ष शिकायत संख्या-44204823620 पंकज मलिक बनाम एम.वी.इंफास्ट्रक्चर्स इंडिया प्रा.लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि मय ब्याज एवं क्षतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Dwarka Heights यूनिट संख्या-4420 बुक कराया था तथा विपक्षी को समय-समय पर किश्तों के आधार पर अंकन 26,40,000,/- रूपये की धनराशि अदा की गयी, किन्तु विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा देने में असफल रहा। यूनिट सबवेंशन में कय की गयी थी। जिसके ई.एम.आई का भुगतान कब्जे की तिथि तक की जानी थी, किन्तु विपक्षी द्वारा ई.एम.आई. अदा नहीं की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में त्रिपक्षीय अनुबन्ध की छायाप्रति दाखिल की गयी।
पीठ द्वारा विपक्षी को दिनांक 40.44.2048 को नोटिस जारी किये गये, जिसमें उन्हें निर्देशित किया गया था कि निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर आवश्यक साक्ष्यों सहित अपना लिखित अभिकथन प्रस्तुत करें। दिनांक 02.0.2049 को पहली तिथि नियत की गयी जिसमें उभय पक्ष अनुपस्थित थे। द्वितीय तिथि दिनांक 07.03. 2049 को नियत की गयी जिसमें विपक्षी अनुपस्थित थे। तीसरी तिथि दिनांक 06.05. 20:9 को नियत की गयी। जिसमें विपक्षी अनुपस्थित थे और शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि वर्ष 2043 में wade स्कीम के तहत यूनिट बुक करायी गयी थी और वर्ष 20:6 4 कब्जा देना था। किन्तु न तो ई.एम.आई दे रहे है और न ही कब्जा दे रहा है। अतः जमा धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। os शिकायतकर्ता को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट बुक करायी थी। इस पर भी कोई विवाद नही है कि विपक्षी निर्धारित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। विपक्षी को समुचित अवसर दिये जाने के वाबजूद भी कोई प्रतिवाद पत्र दाखिल नहीं किया गया। यह भी विचारणीय है कि रेरा की वेबसाईट पर परियोजना शुरू होने की तिथि 04.04.203 दर्ज है, जो कि 6 वर्ष पुरानी है और पूर्णता की तिथि 34.03.2020 है, जो कि निकट भविष्य की तिथि नहीं है। Rr की तकनीकी टीम द्वारा wes निरीक्षण कराया गया। जिसके निष्कर्ष में यह पाया गया कि परियोजना में कोई मजदूर कार्य नहीं कर रहे है और विधिक कंसलटेन्ट द्वारा बताया गया कि फिनिशिंग मटेरियल 50 प्रतिशत है। परियोजना के बाहरी विकास कार्य अभी शुरू नहीं कराये गये है तथा उनके आंकलन के अनुरूप मार्च 2020 तक कब्जा दिया जा पाना कठिन है। यद्यपि बिल्डर के प्रतिनिधि द्वारा कहा गया कि वे मोबलाईज़ेशन बढ़ा कर मार्च 2020 तक कब्जा देने का पूरा प्रयास करेंगें। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील to 3(82/20i9 कोलकाता वेस्ट इंटरनेशनल सिटी प्रा.लि. बनाम देवाशीष wat में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" Tt would be manifestly unreasonable to construe the contract between the parties as requiring the buyer to wait indefinitaly for possession.by 20i6, nearly seven year has elapsed from the date of agreement. Even according to the developer, the completion certificate was received on 29 March 206. This was nearly seven years after the extended date for the handing over of possession prescribed by the agreement. A buyer can be expected to wait for possession for a reasonable period. A period of seven years is beyond what is reasonable. Hence, it would have been manifestly unfair to non-suit the buyer merely on the basis of the first prayet in the reliefs sought before the SCDRC. There was in any event a prayer for refund. " ऐसी दशा में जबकि परियोजना को शुरू हुए लगभग 6 वर्ष हो चुके हैं और आज भी विपक्षी निर्माण कार्य पूर्ण नही कर सका है और विपक्षी भी सुनवाई के तिथियों पर अनुपसर्थिति रहा है। अतः माननीय उच्चतम न्यायालय की उपरोक्त विधि व्यवस्था के प्रकाश में शिकायतकर्ता की धनराशि वापस किये जाने योग्य है। चूंकि विपक्षी द्वारा उक्त अवधि में शिकायतकर्ता की जमा धनराशि का उपभोग किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता उक्त धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है। ; 2 इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
Section 4(2)(4)(०0) enables the promoter to revise the date of completion of project and hand over possession. The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)()(c) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In othe words, by giving opertunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)(4)(c), he is not absolved of the liability under the agreement for sale.
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on-the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 ta के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को YU
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 28 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के wae 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें we 9 (ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home Joan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर ofiii) F निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज सहित धनवापसी किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक मुआवजा (2०7७०१॥६४४०॥) देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के क्षेत्राधिकार में है। अत: इस बिन्दु पर प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश पारित नही किया जा सकता है। शिकायतकर्ता का प्रार्थनापत्र तदनुसार Peake किया जाता है और विपक्षी को निम्नलिखित रूप से आदेशित किया जाता है कि :- आदेश:
4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की सहमति से उन्हे पूर्व में बुकिंग के समय तय दरों व समकक्ष क्षेत्रफल की, मूल इकाई के नजदीक, रेडी टू मूव यूनिट आगामी 60 दिन में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें और साथ ही विपक्षी अनुबंध के अनुसार अनुबंधित अवधि से दिनांक 30. 420i6 तक अनुबंध में विलम्ब के लिए दी गयी धनराशि के अनुसार से व दिनांक 45... 20I6 से कब्जा देने की तिथि तक MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। यदि ई.एम.आई के भुगतान का उत्तरदायित्व भी बिल्डर का था तो उसका लाभ भी समायोजन के समय शिकायतकर्ता को दिया जायेगा। ही 5 यदि विपक्षी अनुतोष to 4 देने में असफल रहता है, तो शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि 26,40,000,//- रूपये जमा करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक McLR+ प्रतिशत ब्याज सहित दिनांक 04.09.2049 से 45 दिन के अन्दर अदा करना सुनिश्चित करें। यदि इस यूनिट को कय करने के लिए बैंक से कोई ऋण लिया गया है, तो पहले बैंक की धनराशि वापस की जायेगी, उसके पश्चात अवशेष धनराशि शिकायतकर्ता को दी जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। -_ VT oe —_ 28-06: s g (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण