Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amit Kumar Rajgaria v. Logix Infrastructure Pvt.ltd
Complaint No. 1120173367
- Decision date
- 2019-04-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
४ उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई tis—04, श्री राजीव कुमार,अध्यक्ष श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत संख्या : 442073367 अमित कुमार राजगेरिया बनाम मैसर्स लॉजिक्स इन्फास्ट्रक्चर्स प्रा.लि. आदेश 27.03.209 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्ब अवधि का ब्याज तथा क्षत्िपूर्ति दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Blossom County 4 फ्लैट नं० एन-506 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर feral के आधार पर 85,84,375 /- रूपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा दिनांक 45.09.2004 तक दिया जाना था, किन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया, अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्ब अवधि का ब्याज तथा क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, आवंटन पत्र, जमा धनराशि का विवरण तथा रसीदों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए वाद योजित किया गया है। कुछ फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलंबित हुई है, जो कि पक्षकारों के मध्य अनुबन्ध में क्लॉज 6.2 में पूर्व से उल्लिखित था, जिससे शिकायतकर्ता अवगत था। टॉवर पूर्ण है और विपक्षी द्वारा ओ0सी0 के लिए दिनांक 05.0.208 को आवेदन किया जा चुका है तथा वह Scanned by CamScanner 2
प्राप्त होते ही कब्जा दे दिया जायेगा। शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध के _ज भुगतान नही किया गया है और उस पर धनराशि बकाया है। परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण है तथा शिकायतकर्ता द्वारा बकाया धनराशि जमा करने के उपरान्त कब्जा प्रदान करा दिया जायेगा। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में परियोजना का रेरा में पंजीयन का प्रमाण पत्र प्रति दाखिल की गयी है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विरचित किये गये :- 4. क्या प्रश्नगत वाद रेरा दी गयी तिथि के बाद ही पोषणीय है? 2. क्या शिकायतकर्ता द्वारा अन्य फोरम में वाद योजित करने के कारण प्रश्नगत बाद पोषणीय नही है? 3. क्या विकल्प देने की दशा में शिकायत्तकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नही हैं? 4. क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां at प्रभाव? 5. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? निस्तारण बिन्दु सं0 4 बिन्दु सं? । इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या प्रश्नगत वाद रेरा दी गयी तिथि के बाद ही पोषणीय है? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथन पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी का कहना है कि उसके द्वारा रेरा में अपनी परियोजना पंजीकरण के समय की पूर्णता की तिथि 34.0.2048 दी गयी है। इसके विपरीत शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के साथ एक अनुबन्ध निष्पादित किया गया है, जिसमें विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा अनुबन्ध निष्पादित होने & i8+6 माह (ग्रेस पीरियड) के साथ कुल 24 माह में कब्जा दिये जाने का कथन किया गया था। विपक्षी की ओर से अनुबन्ध की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से विदित है कि अनुबन्ध के प्रस्तर 6. में यूनिट का कब्जा अनुबन्ध के निष्पादन से 4846 माह की अनुग्रह अवधि सहित 24 माह में दिये जाने का उल्लेख है, उक्त ही py Scanned by CamScanner 3 अनुबन्ध दिनांक 5.06.20I0 को निष्पादित किया गया है, इस प्रकार कब्जे की विलंबतम तिथि 5.06.20:2 थी, किन्तु विपक्षी की ओर से रेरा में परियोजना के पंजीकरण के समय दी गयी पूर्णता की तिथि को मानने का कथन किया गया है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन wie. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to revise the date of completion of project and hand over possession. The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section 4(2)(I)(C) enables the promoter to give fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)(I)(C) he is not absolved of the liability under the agreement for sale." उपरोक्त से ere है कि विपक्षी द्वारा रेरा में परियोजना के पंजीकरण के समय दी गयी पूर्णता की तिथि विपक्षी को रेरा के दंडात्मक प्राविधानों से बचा सकता है, किन्तु इससे आवंटी एवं प्रमोटर के मध्य निष्पादित अनुबन्ध को समाप्त नही माना जा सकता। विपक्षी उक्त अनुबन्ध की अनदेखी नही कर सकता है। उपरोक्त विधि व्यवस्था के प्रकाश में विपक्षी की आवंटी को यूनिट देने की उत्तरदायिता अनुबन्ध के अनुसार ही होगी। अतः विपक्षी का यह तर्क बलहीन है कि रेरा में पूर्ण की दी गयी तिथि के उपरान्त ही शिकायतकर्ता किसी अनुतोष को प्राप्त करने का अधिकारी है। तदनुसार बिन्दु Ho 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं० 2 सं0 2 बिन्दु wo 2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा अन्य फोरम में वाद योजित करने के कारण प्रश्नगत वाद पोषणीय नही है? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा समान सम्पत्ति की बाबत एक अन्य वाद योजित किया गया है, जिस कारण यह वाद पोषणीय नही है, जिस पर शिकायतकर्ता की ओर से आपत्ति करते हुए कहा गया Y— 9, बा sr ent Scanned by CamScanner कि उसके द्वारा प्रश्नगत यूनिट की बबात किसी भी न्यायालय में कोई वाद ह नही किया गया है। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य दाखिल नही किया गया है, जिससे यह विदित हो कि शिकायतकर्ता द्वारा समान विषय वस्तु व समान वाद हेतुक पर अन्य कोई वाद किसी भी न्यायालय में योजित किया गया हो। तदनुसार वाद बिन्दु सं० 2 नकारात्मक रूप से निर्णीत किया जाता है। निस्तारण बिन्दु Ho 3 बिन्दु सं० 3 इस आशंय का विरचित किया गया है कि क्या विकल्प देने की दशा में शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नही है? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि जहां आवंटी को कोई अन्य विकल्प दिया जाये, वहां शिकायतकर्ता,/आवंटी किसी अन्य क्षतिपूर्ति को पाने का अधिकारी नही है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में बैंगलोर डेवलेपमेन्ट एथारिटी बनाम सिंडीकेट बैंक 2007 HAT. 689 (एस.सी.) प्रस्तुत किया गया है, जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" Where an alternative site is offered or delivered (at the agreed price) in view of its inability to deliver the earlier allotted plot/flat/house, or where the delay in delivering possession of the allotted plot/flat/house is for justifiable reasons, ordinarily the allottee will not be entitled to any interest or compensation. This is because the buyer has the benefit of appreciation in value. " उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि आवंटी को अन्य कोई विकल्प दिया जाता है, तो वह अन्य किसी ब्याज अथवा क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी नही है, यदि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कोई वैकल्पिक अनुतोष प्रदान किया गया होता, तो वह उपरोक्त विधि व्यवस्था का लाभ पाने का अधिकारी होता, किन्तु प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी की ओर से शिकायतकर्ता को कोई विकल्प नही दिया गया है, ऐसी दशा में तथ्यों एवं परिस्थितियों की भिन्नता के कारण उपरोक्त विधि व्यवस्था प्रश्नगत प्रकरण पर लागू नही होती है। तदनुसार बिन्दु सं० 3 Prana किया जाता है। \O » Scanned by CamScanner निस्तारण बिन्दु सं० 4 बिन्दु vo 4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक स्थगन आदेश, निर्णय व डिकी से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, जिसके सम्बंध में विपक्षी द्वारा अपने अनुबन्ध के WAR 6.2 में उल्लिखित किया गया था, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता किसी ब्याज को पाने का अधिकारी नहीं है, किन्तु विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही किसी फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नही किया गया है, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नही है। तदनुसार बिन्दु Ho 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु Ho 5 बिन्दु सं० 5 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नही दिया गया है, जिस कारण वह परियोजना के साथ नही रहना चाहता है और उसकी जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जाये, जिस पर विपक्षी की ओर से कहा गया कि परियोजना पूर्ण है और ओ.सी. के लिए दिनांक 05.0.208 को आवेदन किया जा चुका है, इस स्तर पर धन वापस किया जाना विपक्षी के लिए संभव नही है।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। यह तथ्य भी विचारणीय है कि रेरा की वेबसाईट पर vad परियोजना के शुरू होने की तिथि 42.03.200 है, अर्थात — 0, Scanned by CamScanner —! परियोजना को शुरू हुए लगभग 9 वर्ष से अधिक का समय हो चुका कि और रेरा की वेबसाईट पर ही प्रस्तावित पूर्णता की तिथि 34.40.20I8 दी गयी है, जो कि बीत चुकी है। विपक्षी की ओर से कहा गया है कि रेरा की दी गयी तिथि से पूर्व उसके द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है और परियोजना की ओ.सी. प्राप्त होने पर शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान करा दिया जायेगा। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील to 744/20:7 चित्रा शर्मा आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदि में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है :- " 40. The figures........ which have been made available presently, following the opening of the web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
इस स्टेज पर रियल एस्टेट सेक्टर की वर्तमान वित्तीय स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए धनराशि वापस किये जाने से उन आवंटियों के हित प्रतिकूलतः प्रभावित होने संभावित है। जो कि यूनिट का कब्जा लेना चाहते हैं। साथ ही विपक्षी की ओर से प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि 6 माह तक कब्जा दे दिया जायेगा। यदि शिकायतकर्ता को विलम्ब के लिए धनराशि/ब्याज के साथ कब्जा मिल जाता है तो इससे सभी आवंटियों के हित साध्य हो सकेंगें। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित उक्त के अधीन शिकायतकर्तागण को धनवापसी किया जाना उचित प्रतीत नही होता है। यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध में शिकायतकर्ता को अनुबन्ध निष्पादित करने से ia+6 माह Gra पीरियड) में कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बायर एग्रीमेन्ट दिनांक i5.06.20I0 को निष्पादित किया गया है एवं अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी को 75.06.202 तक कब्जा देना था, किन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नही दिया गया है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- आए 48()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the Scanned by CamScanner
registration under the JP or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 RW के 7 के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को उक्त अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं। अनुबन्ध के अनुसार परियोजना के विलंब की अवधि में 5 रूपये प्रतिवर्ग ge प्रतिमाह की दर से क्षतिपूर्ति का प्राविधान है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है, किन्तु शिकायतकर्ता की ओर से यह भी आपत्ति की गयी है कि उक्त क्षतिपूर्ति अत्यंत कम है और रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी है उसी दर से क्षतिपूर्ति देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. / have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 64, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively. अतः onan निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नहीं, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 2.5.2046) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 4520I6 8 WF प्राविधानों के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी eT Scanned by CamScanner
है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नहीं है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.:020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर o(iii) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MciRH प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज सहित धनवापसी किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि देय है, तो विपक्षी भी MCLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है।
जहां तक ब्याज की अवधि का प्रश्न है, उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को 45.06.20i2 तक यूनिट का कब्जा देना था और शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा दिये जाने तक ब्याज दिलाये जाने की याचना की गयी है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — " the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not — ds Scanned by CamScanner 9 to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. मिलने के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक मुआवजा देने का प्रश्न है, तो यह एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर के क्षेत्राधिकार में है। अतः इस बिन्दु पर प्राधिकरण द्वारा कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। तदनुसार शिकायतकर्ता का Prana किया जाता है।
4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह, यदि कोई देय धनराशि बकाया है, तो उसे प्राप्त कर शिकायतकर्ता को कब्जा दें और देय era शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी दिनांक 75.06.20i2 से दिनांक 30.4.206 तक 5/— रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से व दिनांक 4.5.206 से at. / सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि के लिए शिकायतकर्त्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+I प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चितकरें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर निमयानुसार वापस की जायेगी। 3. इस आदेश का उल्लघंन BONO TAT (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। elynme EE. oo ae Kt ror (कल्पना मिश्रा) (राजीव कुमार) (सदस्य) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण. SOMO EAST विनियामक प्राधिकरण Scanned by CamS canner