Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Anshu v. U.P. Awas Evam Vikas Parishad
Complaint No. 10201822279
- Decision date
- 2019-05-17
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ | सुनवाई पीठ-04, उपस्थिति :- श्रीमती कल्पना मिश्रा (सदस्या) शिकायत संख्या : 40204822279 अंशु 4442 4B मेवाड़ इंस्टीट्यूट, GGT TAT | aaeatntnntnntnncntn areal बनाम यू0पी० आवास एवं विकास परिषद्, 404 महात्मा गांधी मार्ग, TOT eee प्रतिवादी आदेश शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध विलम्बित अवधि का ब्याज तथा अतिरिक्त ली गयी धनराशि को वापस दिलाए जाने हेतु शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने शिकायत में दर्ज कराया है कि शिकायतकर्ता ने विपक्षी की “ब्रह्मपुत्र gree गाजियाबाद में इकाई सं. 07/8-25/202 दिनांक 26.42.2043 में बुक कराया था, जिसका कूल मूल्य wo 7,94,00000 (ग्यारह लाख चौरानवे हजार रूपये मात्र) व रू. 74,32,95.00 (alee लाख बतीस हजार नौ सौ इक्यावन रूपये मात्र) दिनांक 27.40.2045 तक जमा कर दिया था। परियोजना की पंजीकरण पुस्तिका के आवश्यक विवरण के अन्तर्गत Te के अनुसार यूनिट का कब्जा 24 माह में दिनांक 26.2.205 को देना था, परन्तु विपक्षी नियत अवधि में कब्जा देने में असफल रहा। शिकायतकर्ता द्वारा यह अवगत कराया गया कि परियोजना का कार्य प्रगतिशील है परन्तु वहाँ रहने योग्य उचित संसाधन उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि विपक्षी द्वारा अतिरिक्त धनराशि रु0 2,47,488.00 (दो लाख सैंतालीस हजार चार सौ अट्ठासी रूपये मात्र) की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ता द्वारा अतिरिक्त धनराशि वापस कराने जाने हेतु प्रार्थना की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने शिकायत के सम्बन्ध में निम्नलिखित साक्ष्य दाखिल किये गये हैं:-
4. विपक्षी द्वारा जारी पंजीकरण पुस्तिका की प्रति। _ दिनांक 03.02.2048 को विपक्षी द्वारा जारी प्रदेशन पत्र की प्रति। 3. दिनांक 42.42.2047 को भौतिक कब्जा प्रमाण-पत्र की प्रति। Vee nN 4. मांग पत्र की प्रति। 5. धनराशि अदायगी की रसीदें। 6. सूचना पत्र। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के साक्ष्य की प्रति प्राप्त की गयी। जिसके उत्तर में विपक्षी ने निम्नलिखित साक्ष्य दाखिल किए हैं:-- 4. विपक्षी द्वारा जारी पंजीकरण पुस्तिका की प्रति। 2. दिनांक 03.02.2048 को विपक्षी द्वारा जारी प्रदेशन पत्र की प्रति। 3. दिनांक 42.42.2047 को भौतिक कब्जा प्रमाण-पत्र की प्रति। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र दिनांक 07.02.2049 में यह अवगत कराया गया कि प्रोजेक्ट किसानों के विवाद तथा भूमि के अतिकमण के कारण समय से पूरा नहीं हो पाया। इस सम्बन्ध में दस्तावेज तथा पत्र सरकारी कार्यालयों में भी भेजे गये हैं। विपक्षी द्वारा विलम्ब के सम्बन्ध में यह भी बताया गया कि जारी पंजीकरण पुस्तिका में निर्माण हेतु 24 माह दिये गये थे, न कि कब्जा देने हेतु। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र दिनांक 07.02.2049 के प्रस्तर-8 (ii) में अंकित किया है कि अन्य आवंटियों द्वारा कब्जा प्रदान कर लिया गया है एवं उनके द्वारा इकाई के सम्बन्ध में कोई आपत्ति नहीं की गयी है। अत: शिकायतकर्ता किसी भी प्रकार का ब्याज पाने का अधिकारी नहीं है।
विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के द्वितीय बिन्दु, अतिरिक्त धनराशि पर रु. 2,47,488.00 (दो लाख सैंतालीस हजार चार सौ अट्टासी रूपये मात्र) के सम्बन्ध यह अवगत कराया कि मांग पत्र दिनांक 03.02.2048 में फ्लैट के अनुमानित मूल्य का उल्लेख किया गया है तथा पंजीकरण पुस्तिका में उल्लेखित है कि फ्लैट के मूल्य में वृद्धि संभावित है। इस प्रकार अंतिम मूल्यांकन के आधार पर प्रदेशन-पत्र में फ्लैट के मूल्य का उल्लेख किया गया है। विधि के प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार जहाँ पर अनुमानित मूल्य के आधार पर मांग-पत्र निर्गत किया गया है तथा अंतिम मूल्यांकन करके फ्लैट के निर्माण मूल्य में अन्तर आता है वहां फ्लैट के मूल्य में वृद्धि नहीं माना जा सकता। अंतिम मूल्य के आधार पर आवास विकास परिषद को प्रदेशन-पत्र जारी करने का अधिकार है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र के प्रस्तर-3 में यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने इकाई की पूर्ण धनराशि जमा नहीं की है, अतः शिकायतकर्ता शेष धनराशि जमा करने के पश्चात रजिस्ट्री करवाएँ जिसके पश्चात उन्हें कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। पक्षकारों के तर्कों को सुना तथा अभिलेखों का अवलोकन किया। पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा रू. 44,32,954.00 (alee लाख बतीस हजार नौ सौ इक्यावन रूपये मात्र) जमा किये गये है, जिसकी wie शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध करायी गयी हैं, परंतु निर्धारित अवधि में विपक्षी की Ne 2
ओर से कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवाद पत्र के अनुसार विपक्षी द्वारा इकाई का कब्जा 24 माह जो कि दिनांक 26.42.2045 में दिया जाना था। विपक्षी द्वारा विलम्बित अवधि के सम्बन्ध में यह कहा गया है कि किसानों से विवाद के कारण परियोजना के कार्य में विलंब हुआ है। जहाँ तक अतिरिक्त धनराशि एवं जी.एस.टी. के सम्बन्ध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुपरटेक बनाम रजनी गोयल के प्रकरण में प्रतिपादित किया है कि अतिरिक्त धनराशि एवं जी. wd. का भुगतान करना शिकायतकर्ता का दायित्व है। अत: इस अतिरिक्त धनराशि को शिकायतकर्ता को वापस दिलाये जाने का कोई औचित्य नहीं है। विपक्षी शिकायतकर्ता से अतिरिक्त धनराशि लेने का अधिकारी है। जहाँ तक विपक्षी की परियोजना विलम्बित है इस संबंध में विपक्षी की पंजीकरण पुस्तिका के आवश्यक विवरण के अन्तर्गत प्रस्तर-4 के अनुसार यूनिट का कब्जा 24 माह में दिनांक 26.42.2045 को देना था, परन्तु अभी तक कब्जा प्राप्त नहीं कराया गया है जिससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना विलंबित है एवं विलम्ब की अवधि के लिए कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। इसलिए विलम्बित अवधि के सम्बन्ध में विपक्षी को लाभ दिया जाना उचित नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता को कब्जा देने में लगभग 3 वर्ष से अधिक का विलम्ब हुआ है। जिसमें विलम्ब के सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियम ऑफ इण्डिया की याचिका में याचीगण की ओर से यह तर्क लिया गया था कि :-
Section 4(2)()(0) enables the promoter to revise the date of completion of project and hand over possession. The provisions of RERA, however, do not rewrite the clause of completion or handing over possession in agreement for sale. Section4(2)(l)(c) enables the promoter to giver fresh time line independent of the time period stipulated in the agreements for sale entered into between him and the allottees so that he is not visited with penal consequences laid down under RERA. In other words, by giving opportunity to the promoter to prescribe fresh time line under Section 4(2)(l)(c), he is not absolved of liability under the agreement for sale. Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration Ge
under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month’s delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0फप्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रोमोटर व केता के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रोमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। शिकायतकर्ता का प्रार्थना-पत्र स्वीकार किये जाने योग्य है। तद्नुसार निम्न आदेश पारित किए जाते हैं कि:- 4. विपक्षी शिकायतकर्ता से विधिक शुल्क प्राप्त करने के पश्चात इकाई की रजिस्ट्री करवा के कब्जा प्रदान करें।
विपक्षी आदेश अपलोड की तिथि से 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान कराना सुनिश्चित करें एवं विलंबित अवधि के लिए मय ब्याज (/८४ +१) के हिसाब से दिनांक 26.42.2045 से वास्तविक प्राप्ति की तिथि तक शिकायतकर्ता को बकाया धनराशि में कब्जा प्राप्ति के समय समायोजित की जाए। 45 दिन की अवधि प्राधिकरण की वेबसाइड पर आदेश अपलोड होने के दिनांक से प्रारम्भ होगी। इस आदेश का उल्लंघन उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक- 7 /6 5/ 2049 "७५५० ०४४-- (कल्पना मिश्रा) सदस्या उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 4