Chhattisgarh High Court
The Oriental Insurance Company Limited v. Guddi Kawasi
2026:CGHC:36380 · MAC/551/2023
- Decision date
- 2026-08-13
- Text availability
- Full text
- Judges
- Sanjay Kumar Jaiswal
Source: Indian High Court Judgments, AWS Open Data (CC BY 4.0) ↗
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
1 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} CGHC010098602023 2026:CGHC:36380 अप्रतिवेद्य छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर विविध अपील (प्रतिकर ) क्रमांक-551 /2023 द ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, होटल एक्समैन एवेन्यू, मेडिकल कॉलेज रोड, जगदलपुर, जिला बस्तर (छत्तीसगढ़), पिनकोड-494001 (दोषी वाहन पिकप क्रमांक-सी.जी.-18-के.-0286 का बीमा कंपनी) -----अपीलार्थी विरूद्घ 1. गुड्डी कवासी पिता-हड़माराम कवासी, आयु लगभग 20 वर्ष, निवासी-ग्राम काण्डकीपारा गुड़से, पुलिस थाना-कटेकल्याण, जिला-दंतेवाड़ा, (छत्तीसगढ़) । ---(दावाकर्ता) 2. यशवंत कुमार मरकाम पिता-स्वर्गीय सुखचंद मरकाम, आयु-लगभग 32 वर्ष, निवासी– ग्राम कोयनार, पोस्ट-नैमेड़, तहसील व जिला-बीजापुर (छत्तीसगढ़) । (दोषी वाहन पिकप क्रमांक-सी.जी.-18-के.-0286 का चालक) -----प्रत्यर्थीगण अपीलार्थी बीमा कंपनी द्वारा : श्री पंकज अग्रवाल एवं श्रीमती स्वाति अग्रवाल, अधिवक्तागण। दावाकर्ता/प्रत्यर्थी क्रं.-1 द्वारा : श्री विभोर गोवर्धन, अधिवक्ता । चालक/प्रत्यर्थी क्रमांक-2 द्वारा : श्री प्रवीण कुमार धुरंधर, अधिवक्ता । न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल !! निर्णय पीठ पर पारित !! 14/08/2026 Digitally signed by POMAN POMAN DEWANGAN DEWANGAN Date: 2026.08.17 17:14:34 +0530 2 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023}
1. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में द्वितीय अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, दंतेवाड़ा, जिला-दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ द्वारा दावा प्रकरण क्रमांक-113/2021, “गुड्डी कवासी विरुद्ध यशवंत कुमार मरकाम वगैरह” में पारित अधिनिर्णय दिनांक 18/01/2023 को चुनौती दी गई है । जिसे आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है । 2. प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि दावाकर्ता गुड्डी कवासी का भाई बामन कवासी (मृतक) दिनांक 29/11/2020 को अपने चचेरे भाई बंशीलाल कवासी के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था । दोपहर लगभग 03:30 बजे ग्राम आकलंका के पास बोलेरो पिकअप क्रमांक सी.जी.-18-के.-0286 (जिसे आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से सम्बोधित किया जा रहा है) के चालक यशवंत कुमार मरकाम उक्त वाहन को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया जिसकी ठोकर लगने के फलस्वरूप बामन कवासी को गंभीर चोटें आने से उसकी मृत्यु हो गई । दुर्घटना के समय मृतक की आयु 22 वर्ष थी । वह मजदूरी एवं वनोपज संग्रहण का कार्य करता था तथा उक्त कार्य से लगभग ₹10,000/- प्रतिमाह की आय अर्जित करता था ।
3. दावाकर्ता द्वारा मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की प्राप्ति हेतु दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया । उक्त दावा आवेदन पर उभयपक्ष को सुनवाई उपरांत अधिकरण द्वारा “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” पारित किया गया, जिसमें यह अवधारित किया गया कि दोषी वाहन के चालक यशवंत कुमार मरकाम, पंजीकृत स्वामी सुखचंद मरकाम (जिनकी दावा लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो गई) तथा अपीलार्थी बीमा कंपनी प्रतिकर के भुगतान हेतु संयुक्ततः एवं पृथक्ततः रूप से उत्तरदायी हैं, दावाकर्ता के पक्ष में कुल 3 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} ₹12,86,600/- का प्रतिकर, दावा आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तिथि से वास्तविक अदायगी तक 7% वार्षिक ब्याज सहित, अधिनिर्णीत किया गया । उक्त “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” को इस अपील में चुनौती दी गई है । 4. अपीलार्थी बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का प्रथम तर्क यह है कि “दोषी वाहन” की बीमा पॉलिसी, प्रदर्श डी-4, दिनांक 05/10/2020 से 04/10/2021 की अवधि के लिए प्रभावी थी तथा उक्त पॉलिसी सुखचंद मरकाम के नाम से जारी की गई थी । जबकि, बीमा पॉलिसी जारी होने की तिथि से पूर्व ही सुखचंद मरकाम की दिनांक 28/06/2020 को मृत्यु हो चुकी थी । इसके बावजूद उसके नाम से उक्त बीमा पॉलिसी प्राप्त की गई, जिससे यह स्पष्ट है कि बीमा फर्जी रूप से कराई गई थी । दुर्घटना दिनांक 29/11/ 2020 को घघटित हुई, अर्थात् पॉलिसी जारी होने के समय बीमाधारक सुखचंद मरकाम जीवित नहीं था । अतः उसके नाम से कराई गई बीमा संविदा प्रारंभ से ही शून्य एवं अप्रवर्तनीय थी । ऐसी स्थि ति में अपीलार्थी बीमा कंपनी पर दुर्घटना से उत्पन्न प्रतिकर की कोई देयता अधिरोपित नहीं की जा सकती ।
5. प्रत्यर्थीगण के विद्वान अधिवक्तागण ने अपील का विरोध करते हुए तर्क किया है कि अपीलार्थी बीमा कंपनी यह प्रमाणित करने में असफल रही है कि पंजीकृत स्वामी सुखचंद मरकाम की मृत्यु बीमा पॉलिसी जारी किए जाने की तिथि अथवा दुर्घटना दिनांक से पूर्व हो चुकी थी । ऐसी स्थि ति में, अपीलार्थी बीमा कंपनी को उसकी देयता से मुक्त नहीं किया जा सकता । अपीलार्थी बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अतः अपील निरस्त किया जाए । 4 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} 6. उक्त बिंदु पर अभिलेख के परिशीलन से यह स्थि ति परिलक्षित होती है कि सबूत का भार होने के बावजूद अपीलार्थी बीमा कंपनी की ओर से परीक्षित शाखा प्रबंधक कुमार गौरव (अना.सा. क्रमांक-2) ने अपने न्यायालयीन साक्ष्य में केवल इतना कथन किया है कि उनके अन्वेषक अमरेन्द्र कुमार दीक्षित द्वारा दी गई अन्वेषण प्रतिवेदन अभिलेख पर संलग्न है । किंतु उक्त अन्वेषक अमरेन्द्र कुमार दीक्षित का बीमा कंपनी की ओर से परीक्षण नहीं कराया गया है और न ही अन्वेषण प्रतिवेदन को विधिवत् प्रमाणित कराया गया है । इसके अतिरिक्त, मृतक सुखचंद मरकाम की मृत्यु दिनांक 28/06/2020 को हो जाने के संबंध में कोई मृत्यु प्रमाण-पत्र अथवा अन्य विश्वसनीय दस्तावेज भी अभिलेख पर प्रस्तुत कर प्रमाणित नहीं किया गया है ।
7. यह भी उल्लेखनीय है कि दावाकर्ता पक्ष के साक्षियों से प्रतिपरीक्षण के दौरान ऐसा कोई सुझाव तक नहीं दिया गया है कि दुर्घटना दिनांक 29/11/2020 से पूर्व ही "दोषी वाहन" के पंजीकृत स्वामी सुखचंद मरकाम की मृत्यु दिनांक-28/06/2020 को हो चुकी थी । इसी प्रकार, अपीलार्थी बीमा कंपनी की ओर से परमिट एवं फिटनेस के संबंध में परिवहन कार्यालय, दंतेवाड़ा के सहायक ग्रेड-2 पूरनलाल ठाकुर (अना.सा. क्रमांक-1) का परीक्षण कराया गया है । उक्त साक्षी ने "दोषी वाहन" के संबंध में प्राधिकार-पत्र प्रदर्श डी-1, पंजीयन संबंधी विवरण प्रदर्श डी-2 तथा फिटनेस संबंधी दस्तावेज प्रदर्श डी-3 के रूप में प्रस्तुत किए हैं । किंतु उक्त साक्षी ने भी अपने साक्ष्य में ऐसा कोई कथन नहीं किया है कि वाहन के पंजीकृत स्वामी सुखचंद मरकाम की मृत्यु दुर्घटना से पूर्व दिनांक 28/06/ 2020 को हो चुकी थी । इस प्रकार, अपीलार्थी बीमा कंपनी अपने इस तर्क को प्रमाणित करने में असफल रही है कि बीमा पॉलिसी जारी किए जाने के पूर्व ही सुखचंद मरकाम की मृत्यु हो चुकी थी अथवा उसके नाम से बीमा पॉलिसी फर्जी रूप से प्राप्त की गई थी । 5 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} केवल अन्वेषण प्रतिवेदन के अभिलेख में संलग्न होने मात्र से, बिना उसके अन्वेषक का परीक्षण कराए तथा प्रतिवेदन को विधिवत् प्रदर्शित कराए, उसमें उल्लिखि त तथ्यों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता । ऐसी स्थि ति में, वाहन के सुखचंद मरकाम के नाम से बीमित होने के संबंध में अधिकरण द्वारा अभिलिखि त निष्कर्ष में कोई त्रुटि परिलक्षित नहीं होती । फलतः इस बिंदु पर अपीलार्थी बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है ।
8. अपीलार्थी बीमा कंपनी का दूसरा तर्क यह है कि "दोषी वाहन" का वैध एवं प्रभावी फिटनेस प्रमाणपत्र दुर्घटना दिनांक को उपलब्ध नहीं था, जिसके परिणामस्वरूप बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघघन हुआ है । इस संबंध में अभिलेख के परिशीलन से यह स्पष्ट है कि अपीलार्थी बीमा कंपनी की ओर से परिवहन कार्यालय, दंतेवाड़ा के सहायक ग्रेड-2 पूरनलाल ठाकुर का परीक्षण कराया गया है । उक्त साक्षी ने "दोषी वाहन" के फिटनेस के संबंध में दस्तावेज प्रदर्श डी-3 के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसके अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र दिनांक 24/11/2017 से 23/11/2018 तक की अवधि के लिए प्रभावी था । इस प्रकार, उक्त फिटनेस प्रमाणपत्र दुर्घटना दिनांक 29/11/2020 को प्रभावी नहीं था । इसके अतिरिक्त, वाहन स्वामी की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि दुर्घटना दिनांक को "दोषी वाहन" के संबंध में कोई वैध एवं प्रभावी फिटनेस प्रमाणपत्र अस्ति त्व में था । 9. जहाँ तक, दुर्घटना दिनांक को "दोषी वाहन" के बाबत वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं होने का प्रश्न है? इस संबंध में इस न्यायालय की युगलपीठ तथा माननीय केरल उच्च न्यायालय द्वारा Pareed Pillai Vs. Oriental Insurance Company Ltd., AIR 2019 Kerala 6 के मामले में विधि स्पष्ट की जा चुकी है । 6 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023}
10. इस न्यायालय की युगलपीठ ने Adesh Kumar & Another Vs. Smt. Satarupa Bai Yadav & Others (मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण क्रमांक 1289/2014 एवं अन्य संबद्ध प्रकरण, दिनांक 19.11.2020 को निर्णीत) के मामले में माननीय केरल उच्च न्यायालय द्वारा Pareed Pillai (उपर्युक्त) के मामले में प्रतिपादित सिद्धांत का हवाला देते हुए अभिनिर्धारित किया है कि "दोषी वाहन" के फिटनेस प्रमाण-पत्र का अभाव बीमा पॉलिसी की शर्त का मूलभूत उल्लंघघन है । यह मात्र तकनीकी उल्लंघघन नहीं है । 11. माननीय उच्चतम न्यायालय ने Amrit Paul Singh and another Vs. TATA AIG General Insurance Company Limited and others, (2018) 7 SCC 558 के मामले में बीमा पॉलिसी की शर्त के उल्लंघघन के संबंध में अभिनिर्धारित किया है कि बीमा कंपनी पहले अधिनिर्णीत प्रतिकर राशि का भुगतान करेगी और तत्पश्चात् उसकी वसूली बीमित से कर सकेगी । प्रस्तुत प्रकरण में भी दुर्घटना दिनांक को दोषी वाहन के पास वैध एवं प्रभावी फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं था, जो बीमा पॉलिसी की शर्त का स्पष्ट उल्लंघघन है । 12. अतः Amrit Paul Singh (उपर्युक्त) में प्रतिपादित सिद्धांत के आलोक में, अपीलार्थी/ बीमा कंपनी को निर्देशित किया जाता है कि वह इस न्यायालय द्वारा निर्धारित प्रतिकर राशि का प्रथमतः भुगतान करे और तत्पश्चात् संबंधित दावा अधिकरण के समक्ष निष्पादन कार्यवाही प्रस्तुत कर उक्त राशि की वसूली दोषी वाहन के स्वामी एवं चालक से विधि के अनुसार करे । 13. उपर्युक्त विवेचना एवं निष्कर्ष के आलोक में, बीमा कंपनी की अपील उपर्युक्त वर्णित सीमा तक आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है । 7 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} प्रति-आक्षेप
14. दावाकर्ता की ओर से उपस्थि त विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अधिकरण ने मृतक की मासिक आय ₹8,000/- निर्धारित कर त्रुटि की है, जबकि संबंधित समय में अकुशल श्रमिक को देय न्यूनतम मजदूरी भी उक्त राशि से अधिक थी । अतः, यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अधिकरण द्वारा निर्धारित प्रतिकर में समुचित वृद्धि किया जावे । 15. इसके विपरीत, बीमा कंपनी की ओर से उपस्थि त विद्वान अधिवक्ता ने दावाकर्ता की ओर से तर्क में विरोध करते हुए कहा है कि प्रकरण के तथ्य एवं परिस्थि तियों को दृष्टिगत रखते हुए अधिकरण द्वारा पारित प्रतिकर न्यायोचित एवं विधिसम्मत है तथा उसमें किसी प्रकार की वृद्धि किए जाने का कोई आधार नहीं है । 16. उभयपक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया गया । 17. यद्यपि दावाकर्ता द्वारा यह दावा किया गया है कि दुर्घटना के समय मृतक मजदूरी एवं वनोपज संग्रहण का कार्य करते हुए ₹10,000/- प्रतिमाह अर्जित करता था, तथापि उक्त आय के संबंध में दावे की पुष्टि करने हेतु कोई समुचित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है । दुर्घटना दिनांक 29.11.2020 को घघटित हुई थी और उक्त समय एक अकुशल श्रमिक को देय न्यूनतम मजदूरी ₹8,960/- थी । अतः, उपलब्ध साक्ष्य एवं प्रकरण की परिस्थि तियों को दृष्टिगत रखते हुए, मृतक की मासिक आय ₹8,960/- निर्धारित की जाती है, जिसके अनुसार उसकी वार्षिक आय ₹1,07,520/- निर्धारित होती है । 18. घघटना के दिनांक, मृतक की आयु (17 वर्ष जैसा अधिकरण ने निर्धारित किया है) तथा उस पर आश्रित व्यक्तियों की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए, यह न्यायालय पाती है कि अधिकरण 8 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023}
द्वारा भावी संभावनाओं के मद में की गई वृद्धि, व्यक्तिगत एवं जीवन-निर्वाह व्यय के मद में की गई कटौती, लागू किया गया गुणक तथा परंपरागत मदों के अंतर्गत प्रदान की गई राशि न्यायोचित एवं विधि के अनुरूप है । 19. उपर्युक्त विवेचना तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा न्यायदृष्टांत National Insurance Company Limited v. Pranay Sethi, (2017) 16 SCC 680, न्यायदृष्टांत Sarla Verma v. Delhi Transport Corporation, (2009) 6 SCC 121 तथा न्यायदृष्टांत Magma General Insurance Co. Ltd. v. Nanu Ram @ Chuhru Ram & Ors., (2018) 18 SCC 130 के प्रकरणों में प्रतिपादित विधि के आलोक में, यह न्यायालय प्रतिकर राशि का पुनर्निर्धारण निम्नानुसार करती हैः-अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत इस न्यायालय द्वारा क्र. मद प्रतिकर अधिनिर्णीत प्रतिकर ₹96,000 ₹1,07,520 1 वार्षिक आय (₹8,000 × 12) (₹8,960 × 12) भावी संभावनाएँ (40%) ₹1,50,528 2 जोड़ने के पश्चात कुल - (₹1,07,520 + ₹43,008) वार्षिक आय व्यक्तिगत एवं जीविकोपार्जन ₹48,000 ₹75,264 3 व्यय (1/2) की कटौती के (₹96,000 − ₹48,000) (₹1,50,528 − ₹75,264) पश्चात वार्षिक आश्रितता गुणक (18) लागू करने के ₹8,64,000 ₹13,54,752 4 पश्चात आश्रितता की कुल (₹48,000 × 18) (₹75,264 × 18) हानि ₹3,45,600 5 भावी संभावनाएँ (40%) - (₹8,64,000 × 40%) 9 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत इस न्यायालय द्वारा क्र. मद प्रतिकर अधिनिर्णीत प्रतिकर 6 संपदा की हानि ₹16,500 ₹16,500 7 अंत्येष्टि व्यय ₹16,500 ₹16,500 8 साहचर्य की हानि ₹44,000 ₹44,000 कुल प्रतिकर ₹12,86,600 ₹14,31,752
20. इस प्रकार, अधिकरण द्वारा अधिनिर्णीत ₹12,86,600/- की तुलना में इस न्यायालय द्वारा कुल ₹14,31,752/- का प्रतिकर निर्धारित किया जाता है । फलतः, दावाकर्ता ₹1,45,152/- की अतिरिक्त प्रतिकर राशि प्राप्त करने का अधिकारी है । 21. परिणामस्वरूप, दावाकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रति-आक्षेप आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है । अधिकरण द्वारा प्रदत्त प्रतिकर के अतिरिक्त ₹1,45,152/- दावाकर्ता प्राप्त करने का अधिकारी है । उक्त अतिरिक्त प्रतिकर राशि पर दावा आवेदन के दिनांक से उसके वास्तविक भुगतान तक 6% (छः प्रतिशत) वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा तथा “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” को उपर्युक्त सीमा तक संशोधित किया जाता है । 22. रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस अपील में दावाकर्तागण के पक्ष में स्वीकृत अतिरिक्त प्रतिकर राशि के संबंध में उन्हें विधिवत् सूचित किया जाए । इस प्रयोजनार्थ, आवश्यक होने पर संबंधित क्षेत्र, जहाँ दावाकर्तागण निवास करते हैं, के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के समन्वय से पैरालीगल स्वयंसेवकों की सहायता प्राप्त की जा सकती है । 10 / 10 {MA(C) No. 551 of 2023} 23. निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो । सही/- (संजय कुमार जायसवाल) न्यायाधीश पोमन